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Haridvar (हरिद्वार) Class 8 PDF – NCERT Hindi Malhar Chapter 4 (2026-27)

Download Haridvar (हरिद्वार) – NCERT Class 8 Hindi Chapter 4 PDF from the new NCERT Class 8 Hindi book Malhar (2026-27). Read the chapter online or download the free PDF. हरिद्वार कोई कहानी या निबंध नहीं, एक पत्र है। भारतेंदु हरिश्चंद्र ने इसे कविवचन सुधा पत्रिका के संपादक के नाम लिखा और उसी में यह 14 अक्टूबर 1871 ई. को छपा। पत्र का आरंभ संबोधन से होता है — “श्रीमान कविवचन सुधा संपादक महामहिम मित्रवरेषु!” — और अंत…

Haridvar (हरिद्वार) PDF – Chapter 4 of Malhar

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NCERT Book Class 8 Hindi (Malhar) Chapter 4 हरिद्वार Open PDF
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What Is in Haridvar (हरिद्वार)? (Class 8 Hindi Chapter 4)

  • हरिद्वार कोई कहानी या निबंध नहीं, एक पत्र है। भारतेंदु हरिश्चंद्र ने इसे कविवचन सुधा पत्रिका के संपादक के नाम लिखा और उसी में यह 14 अक्टूबर 1871 ई. को छपा। पत्र का आरंभ संबोधन से होता है — “श्रीमान कविवचन सुधा संपादक महामहिम मित्रवरेषु!” — और अंत हस्ताक्षर से — “आपका मित्र / यात्री / — भारतेंदु हरिश्चंद्र”। इसलिए यह एक साथ पत्र भी है और यात्रा-वृत्तांत भी।
  • लेखक हरिद्वार को पहले आँख से दिखाते हैं — तीन ओर हरे पर्वत, पर्वतों पर फैली वल्ली (लताएँ), एक पैर पर खड़े तपस्वी-से बड़े वृक्ष, रंग-बिरंगे निडर पक्षी, बरसात के बाद की हरियाली, दो धाराओं में बँटी गंगा, नील धारा, चण्डिका देवी की मूर्ति वाला चुटीला पर्वत और हरि की पैड़ी का पक्का घाट।
  • फिर वे हरिद्वार को मन से दिखाते हैं। यहाँ “केवल गंगा जी ही देवता हैं, दूसरा देवता नहीं”; पंडे “एक पैसे को लाख करके मान लेते हैं”; “इच्छा क्रोध की खानि जो मनुष्य हैं सो वहाँ रहते ही नहीं”; और “झगड़े-लड़ाई का कहीं नाम भी नहीं था।” इस क्षेत्र के पाँच मुख्य तीर्थ वे गिनाते हैं — हरिद्वार, कुशावर्त्त, नीलधारा, विल्वपर्वत और कनखल।
  • पत्र का सबसे यादगार अनुभव सादगी का है — गंगा तट पर पत्थर पर ही रसोई करके, जल के छींटों के बीच किया गया भोजन, जिसका सुख “सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।” यहीं से पाठ का मूल भाव निकलता है — सुख वस्तु में नहीं, संतोष में है।
  • लेखक की सबसे बड़ी खूबी उनकी तुलनात्मक, चित्र खींचने वाली भाषा है — लताएँ सज्जनों के शुभ मनोरथों की भाँति फैली हैं, वृक्ष साधुओं की भाँति घाम-ओस-वर्षा सहते हैं, गंगाजल मानो “चीनी के पने को बरफ में जमाया” हो, हरियाली मानो यात्रियों के विश्राम के लिए बिछा हरा गलीचा हो, और गंगा की धारा राजा भगीरथ की उज्ज्वल कीर्ति की लता-सी दिखती है।
  • भाषा लगभग 150 वर्ष पुरानी है, इसलिए इसमें पुरानी वर्तनी और पुराने शब्द मिलते हैं — शिखर के लिए शिषर, यात्रियों के लिए जात्रियों, मनोरथ के लिए मनोर्थ, ठंडे के लिए ठंढे। पाठ के अंत में ‘झरोखे से’ में भारतेंदु के एक और पत्र का अंश हरिद्वार के मार्ग में दिया गया है, जिसमें बया पक्षी के घोंसलों की शिल्पविद्या का वर्णन है।

त्वरित पुनरावृत्ति – Haridvar (हरिद्वार)

शब्दअर्थपाठ की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
वल्लीलता, बेल“अनेक प्रकार की वल्ली हरी-भरी सज्जनों के शुभ मनोरथों की भाँति फैलकर लहलहा रही है”बरसात में दीवार पर वल्ली फैलकर हरी चादर-सी बिछ गई।
मनोरथमन की इच्छा, कामना“सज्जनों के शुभ मनोरथों की भाँति”परिश्रम करने वालों का मनोरथ देर से ही सही, पूरा होता है।
घामतेज धूप“साधुओं की भाँति घाम, ओस और वर्षा अपने ऊपर सहते हैं”दोपहर के घाम में खेत का काम बहुत कठिन हो जाता है।
अर्थीजिसे कोई प्रयोजन हो; माँगने वाला, याचक“इनके जन्म भी धन्य हैं जिनसे अर्थी विमुख जाते ही नहीं”सच्चा दानी किसी अर्थी को खाली हाथ नहीं लौटाता।
बधिकशिकारी, प्राणियों को मारने वाला“नगर के दुष्ट बधिकों से निडर होकर कल्लोल करते हैं”बधिकों के डर से पक्षी घने जंगल में चले गए।
कल्लोलआनंद से उछलना-कूदना, क्रीड़ा करना“अनेक प्रकार के जल-जंतु कल्लोल करते हुए”बच्चे पानी में कल्लोल करते रहे और शाम हो गई।
मिष्टमीठा“जल यहाँ का अत्यंत शीतल है और मिष्ट भी वैसा ही है”कुएँ का जल ठंडा और मिष्ट था।
पाटनदी की चौड़ाई“श्री गंगा जी का पाट भी बहुत छोटा है पर वेग बड़ा है”पहाड़ में नदी का पाट छोटा होता है, मैदान में चौड़ा।
बखेड़ाझगड़ा, झंझट, फालतू का बवाल“हरिद्वार में यह बखेड़ा कुछ नहीं है”छोटी-सी बात पर इतना बखेड़ा खड़ा करना ठीक नहीं।
निदानअंत में, आखिरकार“निदान इस उत्तम क्षेत्र में जितना समय बीता, बड़े आनंद से बीता”निदान सबने मिलकर वही रास्ता चुना जो सबसे सरल था।
पारायणकिसी ग्रंथ का आरंभ से अंत तक पूरा पाठ“दिन में श्री भागवत का पारायण भी किया”दादी ने सात दिन में रामायण का पारायण पूरा किया।
मौनावलंबनचुप हो जाना, मौन धारण कर लेना“वृत्तांत विदित करके मौनावलंबन करता हूँ”अपनी बात कहकर वक्ता ने मौनावलंबन कर लिया।
स्थानदानजगह देना; यहाँ — पत्रिका में छापना“निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा”संपादक ने मेरी कविता को अपनी पत्रिका में स्थानदान दिया।
विलक्षणअनोखा, असाधारण“पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं”उसकी याददाश्त सचमुच विलक्षण है।

Old NCERT vs New – Class 8 Hindi

This chapter is from Malhar, the new NCERT Class 8 Hindi book (NCF-SE 2023, used from 2025-26). It replaced the old book “Vasant”, so chapter numbers and names differ from older PDFs.

Solutions and All Chapters

Answers to the exercises and the full chapter list of Malhar:

Haridvar (हरिद्वार) – Overview

ClassClass 8
SubjectHindi
BookMalhar – new NCERT book
Chapter4 of 10 – Haridvar (हरिद्वार)
EditionNCERT Reprint 2026-27
Session2026-27
PDFFree – read online or download

Class 8 Hindi Chapter 4 – FAQs

Where can I download Haridvar (हरिद्वार) Class 8 PDF?

From the download table on this page – the chapter PDF is free, and the full book is linked too.

What is Class 8 Hindi Chapter 4 about?

हरिद्वार कोई कहानी या निबंध नहीं, एक पत्र है। भारतेंदु हरिश्चंद्र ने इसे कविवचन सुधा पत्रिका के संपादक के नाम लिखा और उसी में यह 14 अक्टूबर 1871 ई. को छपा। पत्र का आरंभ संबोधन से होता है — “श्रीमान कविवचन सुधा संपादक महामहिम मित्रवरेषु!” — और अंत हस्ताक्षर से — “आपका मित्र / यात्री / — भारतेंदु हरिश्चंद्र”। इसलिए यह एक साथ पत्र भी है और यात्रा-वृत्तांत भी।

Is Haridvar (हरिद्वार) from the new NCERT Class 8 Hindi book?

Yes. It is chapter 4 of malhar, the new NCERT Class 8 Hindi book for 2026-27.

Is this the latest NCERT edition for 2026-27?

Yes – the PDF is NCERT’s latest edition for the 2026-27 session.

Where are the NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 4?

Open the NCERT Solutions link above for answers to the exercise questions.

Official website: ncert.nic.inNational Council of Educational Research and Training publishes date sheets, admit cards and results here
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