NCERT Solutions for Class 5 Hindi Chapter 3 चाँद का कुरता provide clear, step-by-step answers to every exercise and in-text question from the chapter चाँद का कुरता of the NCERT textbook वीणा. Prepared by subject experts as per the latest NCERT (CBSE) syllabus for 2026-27, these NCERT Solutions for Class 5 Hindi help you understand each concept, write exam-ready answers, and check your own solutions. You can read them online below or download the free Class 5 Hindi Chapter 3 question-answer PDF.
NCERT Solutions for Class 5 Hindi Chapter 3 चाँद का कुरता
- Class: Class 5
- Subject: Hindi
- Chapter: Chapter 3 – चाँद का कुरता
- Textbook: वीणा (NCERT)
- Study material: NCERT Solutions – questions with answers, free PDF
These solutions answer all the exercise questions of Chapter 3 चाँद का कुरता — including the in-text questions, short-answer and long-answer questions, and activities — with complete explanations so you can follow the method, not just the final answer. Read the full solutions below.
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Questions Covered in This Chapter
These NCERT Solutions answer all 46 questions of this chapter. The questions solved are:
- “हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला, / ‘सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला। / सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ, / ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ। / आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का, / न हो अगर तो ला दो कुरता ही कोई भाड़े का।’” — इन पंक्तियों का सरल अर्थ और भाव लिखिए।
- “बच्चे की सुन बात कहा माता ने, ‘अरे सलोने! / कुशल करें भगवान, लगें मत तुझको जादू-टोने। / जाड़े की तो बात ठीक है, पर मैं तो डरती हूँ, / एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ।’” — इन पंक्तियों का सरल अर्थ और भाव लिखिए।
- “कभी एक अंगुल-भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा, / बड़ा किसी दिन हो जाता है और किसी दिन छोटा। / घटता-बढ़ता रोज किसी दिन ऐसा भी करता है, / नहीं किसी की भी आँखों को दिखलाई पड़ता है। / अब तू ही तो बता, नाप तेरी किस रोज लिवाएँ, / सी दें एक झिंगोला जो हर रोज बदन में आए?” — इन पंक्तियों का सरल अर्थ और भाव लिखिए।
- आकाश आपको कब-कब बहुत सुंदर दिखाई देता है और क्यों?
- चाँद को ठंड लगती है इसलिए वह झिंगोला माँग रहा है। सूरज क्या कहकर अपनी माँ से कपड़े माँगेगा?
- आपने आकाश में क्या-क्या परिवर्तन होते देखे हैं?
- जब आप अपने अभिभावक के साथ नए कपड़े खरीदने जाते हैं तब किन-किन बातों का ध्यान रखते हैं?
- चाँद की माँ उसे झिंगोला क्यों नहीं दे पा रही है? (क) चाँद के पास पहले से ही बहुत से झिंगोले हैं। (ख) चाँद के शरीर का आकार घटता-बढ़ता रहता है। (ग) चाँद अपने वस्त्र सँभालकर नहीं रखता है। (घ) चाँद की माँ अभी कोई नया वस्त्र नहीं सिलवाना चाहती है।
- कविता में चाँद के बदलते आकार का वर्णन करने के लिए किन शब्दों का प्रयोग किया गया है? (क) एक अंगुल-भर चौड़ा (ख) एक फुट मोटा (ग) किसी दिन बड़ा (घ) किसी दिन छोटा
- कविता में ठंड के मौसम का वर्णन करने के लिए किन-किन शब्दों का प्रयोग किया गया है? (क) ऊन का मोटा झिंगोला (ख) सन-सन चलती हवा (ग) ठिठुर-ठिठुरकर यात्रा (घ) भाड़े का कुरता
- कविता की किन पंक्तियों से पता चलता है कि चाँद किसी एक दिन बिलकुल दिखाई नहीं देता है?
- सर्दी से बचने के लिए चाँद, माँ से ऊन के झिंगोले के अतिरिक्त और कौन-से कपड़े माँग सकता है?
- जाड़े के मौसम में चाँद को क्या कठिनाई होती है?
- चाँद किस यात्रा को पूरा करने की बात कर रहा है?
- जब आप ठंडी रात में सोते समय अपने पैरों से कंबल या रजाई उतार फेंकते हैं।
- जब आप ठंड में आइसक्रीम खाने का हठ करते हैं।
- जब आप दूध पीने, हरी सब्ज़ियाँ और फल आदि खाने से कतराते हैं।
- जब आप देर तक सोते हैं।
- जब कोई आपके घर आपकी शिकायत करने आता है।
- जब आपके अच्छे कामों के लिए आपकी प्रशंसा होती है अथवा पुरस्कार मिलता है।
- आप अपनी माँ से चाँद का दुखड़ा कैसे बताएँगे?
- गरमी और वर्षा से बचने के लिए चाँद अपनी माँ से क्या कहेगा? वह किस प्रकार के कपड़ों एवं वस्तुओं की माँग कर सकता है?
- चाँद ने माँ से कुरता किराए पर लाने के लिए क्यों कहा होगा?
- यदि माँ ने चाँद का कुरता सिलवा दिया होता तो क्या होता?
- “सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ।” कविता की इस पंक्ति में ‘भर’ शब्द का प्रयोग किया गया है। अब आप ‘भर’ की सहायता से पाँच वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए, जैसे – पानी गिलास भर है, उसने दिन भर पढ़ाई की आदि।
- नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यान से पढ़िए — (क) “ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।” (ख) “ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।” अपनी बात पर बल देने के लिए हम इस प्रकार के कुछ शब्दों का प्रयोग दो बार करते हैं, जैसे – जल्दी चलो, जल्दी-जल्दी चलो आदि। अब आप ऐसे ही पाँच वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
- नीचे दी गई कविता की पंक्तियों में संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया पहचानकर उन्हें दिए गए स्थानों में लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए — (पंक्तियाँ) हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला। / आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का। / सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला। / ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।
- मान लीजिए कि चाँद, झिंगोले के लिए माँ, कपड़े के दुकानदार और दर्ज़ी से संवाद करता है। बातचीत के कुछ अंश नीचे दिए गए हैं। आप इन्हें आगे बढ़ाइए। आप संवाद अपनी मातृभाषा में भी लिख सकते हैं। — चाँद और माँ का संवाद (चाँद: माँ, मुझे बहुत ठंड लगती है। मेरे लिए एक मोटा झिंगोला सिलवा दो! / माँ: तुझे सच में ठंड सताती होगी लेकिन एक समस्या है। / चाँद: समस्या? कैसी समस्या, माँ? / माँ: तेरा आकार तो प्रतिदिन बदलता रहता है। कभी छोटा, कभी बड़ा, कभी एकदम गायब! मैं कैसे नाप लूँ? / चाँद: (सोचकर) अरे हाँ! लेकिन फिर भी कोई उपाय तो होगा?) — आगे के संवाद लिखिए।
- चाँद और कपड़े का दुकानदार (चाँद: दुकानदार जी, मुझे एक गरम कपड़ा चाहिए जिससे मेरी सर्दी दूर हो जाए। / दुकानदार: अवश्य, कितने मीटर चाहिए? / चाँद: यही तो समस्या है! मैं कभी छोटा होता हूँ, कभी बड़ा। आप ही बताइए… कितने मीटर लूँ? / दुकानदार: (हँसकर) अरे छोटू चाँद! जब आपका नाप ही तय नहीं तो कपड़ा कैसे दूँ? पहले नाप तो तय करके आओ!) — आगे के संवाद लिखिए।
- चाँद और दर्ज़ी का संवाद (चाँद: दर्ज़ी जी, मेरे लिए एक कुरता सिल दीजिए। / दर्ज़ी: बिलकुल! लेकिन पहले नाप तो दो। / चाँद: यही तो समस्या है! कभी मैं छोटा, कभी बड़ा हो जाता हूँ। / दर्ज़ी: (हँसते हुए) तो फिर ऐसा करो, प्रतिदिन मेरे पास आओ और मैं प्रत्येक दिन तुम्हारे नाप का नया कुरता सिल दूँगा! / चाँद: (प्रसन्न होते हुए) फिर तो मुझे प्रतिदिन नए कपड़े मिलेंगे! लेकिन माँ मानेंगी नहीं!) — आगे के संवाद लिखिए।
- अब आप इन संवादों पर कक्षा में शिक्षक की सहायता से अभिनय कीजिए।
- क्या चाँद की तरह आप भी अपनी माँ से किसी वस्तु के लिए हठ करते हैं? आप अपनी माँ को इसके लिए कैसे मनाते हैं?
- आपकी माँ आपको किसी काम के लिए कैसे मनाती हैं?
- गरमी, सर्दी या वर्षा से बचने के लिए आपकी माँ आपको क्या कहती अथवा क्या-क्या करती हैं?
- कविता में चाँद अपनी माँ से बातें कर रहा है। मान लीजिए कि चाँद बोल नहीं सकता। अब वह अपनी माँ को अपनी बात कैसे बताएगा?
- मान लीजिए कि चाँद का एक मित्र है जो देख नहीं सकता। चाँद उसे अपने बदलते हुए आकार के बारे में कैसे समझाएगा?
- चाँद के लिए कुरता सिलना एक कठिन कार्य है। इसलिए चाँद की माँ ने उसका कुरता सिलवाने के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। इसे पढ़िए और इसका प्रचार-प्रसार कर चाँद की माँ की सहायता कीजिए।
- अब एक रोचक विज्ञापन तैयार कीजिए जिसमें आप अपने लिए कोई वस्तु मँगवा रहे हों।
- आइए, चाँद के लिए एक कुरता बनाएँ। सामग्री: रंगीन कागज, गोंद, कैंची, ग्लिटर, कपड़े के छोटे टुकड़े। बनाने की विधि — • चाँद के लिए कुरते का एक बड़ा चित्र बनाइए। • अब अलग-अलग रंगीन कागज या कपड़े के टुकड़ों से चाँद के लिए सुंदर कुरता तैयार कीजिए। • ग्लिटर या सितारों की आकृति बनाकर उसे सजाइए। • अब तैयार कुरते को कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।
- पुस्तकालय में चाँद, सूरज, तारे, आकाश आदि पर बहुत-सी रोचक, मनोरंजक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें अवश्य उपलब्ध होंगी। उन पुस्तकों को ढूँढ़कर पढ़िए और उनके बारे में कक्षा में भी चर्चा कीजिए।
- अपने शिक्षक, पुस्तकालय प्रभारी और मित्रों की सहायता से चाँद तथा सूरज की बदलती स्थितियों की और भी जानकारी प्राप्त कीजिए। यह भी पता लगाइए कि चंद्र ग्रहण एवं सूर्य ग्रहण कब-कब और क्यों होते हैं। आप अपने माता-पिता या अभिभावक से भी इनके बारे में बात कर सकते हैं।
- तन है मेरा हरा-भरा, / रस से रहता सदा भरा। / भीतर से हूँ मैं लाल, / प्यास बुझाकर पूछूँ हाला।
- हम दोनों हैं पक्के मित्र, / करते रहते काम विचित्र। / पाँच-पाँच सेवक हैं साथ, / लेकिन करते कभी न बात।
- ‘जागो प्यारे’ कविता का सरल अर्थ लिखिए। इसमें कठिन शब्दों के अर्थ भी बताइए।
- ‘जागो प्यारे’ कविता का भाव क्या है? इसमें माँ अपने बेटे को जगाने के लिए क्या-क्या दिखाती है?
- ‘चाँद का कुरता’ और ‘जागो प्यारे’ — इन दोनों कविताओं में क्या-क्या समानताएँ और क्या-क्या अंतर हैं?
Chapter at a Glance
- चाँद का कुरता एक कविता है। इसे रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने लिखा है। ‘दिनकर’ उनका उपनाम है — यानी वह नाम जो कवि अपनी रचना के नीचे लिखते हैं। दिनकर जी बिहार के थे और उन्हें राष्ट्रकवि कहा जाता है। ‘रश्मिरथी’, ‘कुरुक्षेत्र’ और ‘उर्वशी’ उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं। ‘उर्वशी’ पर उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था।
- कविता में दो पात्र हैं — एक चाँद और दूसरी चाँद की माँ। पूरी कविता इन दोनों की आपस की बातचीत है। चाँद को यहाँ एक छोटे बच्चे की तरह दिखाया गया है, जो ठंड में ठिठुरता है, माँ से ज़िद करता है और कपड़े माँगता है।
- कविता की शुरुआत चाँद की ज़िद से होती है — “हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला।” वह कहता है कि रात भर सन-सन हवा चलती है और वह ठंड से मर जाता है। ठिठुर-ठिठुरकर वह किसी तरह आसमान की अपनी यात्रा पूरी करता है। इसलिए माँ उसे ऊन का एक मोटा झिंगोला सिलवा दे। झिंगोला का अर्थ है — ढीला-ढाला लंबा कुरता।
- चाँद यह भी कह देता है कि अगर नया न सिलवा सको तो कोई भाड़े का, यानी किराए का कुरता ही ला दो। इस एक पंक्ति से पता चलता है कि उसे ठंड कितनी सता रही है — उसे नया-पुराना कुछ नहीं चाहिए, बस गरमी चाहिए।
- अब माँ का उत्तर आता है, और यहीं कविता की असली बात खुलती है। माँ पहले प्यार जताती है — “अरे सलोने! कुशल करें भगवान।” फिर वह असली समस्या बताती है — “एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ।” यानी चाँद कभी एक ही नाप का रहता ही नहीं।
- माँ बताती है कि चाँद कभी एक अंगुल-भर पतली रेखा जैसा हो जाता है, कभी एक फुट मोटा। किसी दिन बड़ा, किसी दिन छोटा। और एक दिन तो वह किसी को दिखाई ही नहीं देता। तो नाप किस दिन का लिया जाए, और ऐसा कुरता कैसे सिले जो हर रोज़ बदन में आ जाए?
- असल में कविता चाँद की कलाओं की बात कर रही है — यानी चाँद का रोज़ थोड़ा-थोड़ा घटना और बढ़ना। यही बात आप आसमान में देख सकते हैं: दूज को चाँद नाख़ून जैसी पतली रेखा दिखता है, फिर रोज़ बढ़ता जाता है, पूर्णिमा को पूरी थाली जैसा गोल हो जाता है, फिर रोज़ घटता जाता है और अमावस्या को बिलकुल गायब हो जाता है। कवि ने विज्ञान की इस बड़ी बात को कुरता सिलवाने की छोटी-सी कहानी में कह दिया है।
- भाषा बहुत आसान और घर जैसी है। वाक्य छोटे हैं, हर दो पंक्तियों में तुक मिलती है (बोला–झिंगोला, हूँ–हूँ, जाड़े का–भाड़े का, सलोने–टोने, मोटा–छोटा)। ‘सन-सन’ और ‘ठिठुर-ठिठुरकर’ जैसे शब्द ठंड को सुनाई और दिखाई दे जाने वाला बना देते हैं। इसी से कविता गाने जैसी लगती है और जल्दी याद हो जाती है।
- अभ्यास में चर्चा के प्रश्न, चाँद का चित्र बनाकर सही विकल्प चुनने वाले बहुविकल्पी प्रश्न (जिनमें एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं), सोच-विचार और कल्पना के प्रश्न, ‘भर’ तथा दोहराए जाने वाले शब्दों का व्याकरण, संज्ञा-सर्वनाम-विशेषण-क्रिया की तालिका, अधूरे संवाद पूरे करने का काम, विज्ञापन पढ़ना और बनाना, कागज़ का कुरता बनाने की कलाकारी, पुस्तकालय का काम और दो पहेलियाँ दी गई हैं।
- पाठ के बाद पृष्ठ 32 पर बिना क्रमांक की एक और कविता छपी है — जागो प्यारे, जिसे अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ ने लिखा है। इसमें एक माँ अपने बेटे को सुबह जगा रही है और उसे बताती है कि बाहर कमल खिल गए हैं, भौंरे झूल रहे हैं, चिड़ियाँ चहक रही हैं और सूरज उग आया है — ऐसा सुंदर समय सोकर मत गँवाओ। ‘चाँद का कुरता’ में रात का आकाश है, ‘जागो प्यारे’ में सुबह का — और दोनों में माँ और बच्चे का प्यार है।
How to Download NCERT Solutions for Class 5 Hindi Chapter 3 PDF
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NCERT Solutions for Class 5 Hindi – All Chapters
There are more chapters to study besides चाँद का कुरता in Hindi. Here are the NCERT Solutions for all chapters of Class 5 Hindi.
- Chapter 1 किरन
- Chapter 2 न्याय की कुर्सी
- Chapter 3 चाँद का कुरता
- Chapter 4 साङ्केन
- Chapter 5 सुंदरिया
- Chapter 6 चतुर चित्रकार
- Chapter 7 मेरा बचपन
- Chapter 8 काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा
- Chapter 9 न्याय
- Chapter 10 तीन मछलियाँ
- Chapter 11 हमारे ये कलामंदिर
- Chapter 12 गंगा की कहानी
NCERT Solutions for Class 5 – All Subjects
Just like Chapter 3 of Hindi, you can get the exercise questions with answers for every other subject of Class 5. Here are the NCERT Solutions for all subjects of Class 5.
NCERT Solutions for Class 5 Hindi Chapter 3 – An Overview
The key highlights of this study material are as follows.
| Aspects | Details |
|---|---|
| Class | Class 5 |
| Subject | Hindi |
| Chapter Number | Chapter 3 |
| Chapter Name | चाँद का कुरता |
| Book Name | वीणा |
| Book By | NCERT (National Council of Educational Research and Training) |
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NCERT Solutions for Class 5 Hindi Chapter 3 चाँद का कुरता – FAQs
What are the NCERT Solutions for Class 5 Hindi Chapter 3 चाँद का कुरता?
They are the complete, step-by-step answers to all the exercise and in-text questions of Chapter 3 चाँद का कुरता from the NCERT Class 5 Hindi textbook वीणा, written by experts as per the latest NCERT syllabus.
How can I download the Class 5 Hindi Chapter 3 solutions PDF for free?
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Yes. The NCERT Solutions for Class 5 Hindi Chapter 3 are based on the latest NCERT textbook वीणा and the current 2026-27 CBSE syllabus, so the questions and answers match what you study in class.
Where can I get NCERT Solutions for the other chapters of Class 5 Hindi?
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