Download Chand Ka Kurta (चाँद का कुरता) – NCERT Class 5 Hindi Chapter 3 PDF from the new NCERT Class 5 Hindi book Veena (2026-27). Read the chapter online or download the free PDF. चाँद का कुरता एक कविता है। इसे रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने लिखा है। ‘दिनकर’ उनका उपनाम है — यानी वह नाम जो कवि अपनी रचना के नीचे लिखते हैं। दिनकर जी बिहार के थे और उन्हें राष्ट्रकवि कहा जाता है। ‘रश्मिरथी’, ‘कुरुक्षेत्र’ और ‘उर्वशी’ उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ…
Chand Ka Kurta (चाँद का कुरता) PDF – Chapter 3 of Veena
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| Chapter 3 PDF | Chand Ka Kurta (चाँद का कुरता) | View PDF |
| Full book | NCERT Class 5 Hindi – Veena | View Book |
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What Is in Chand Ka Kurta (चाँद का कुरता)? (Class 5 Hindi Chapter 3)
- चाँद का कुरता एक कविता है। इसे रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने लिखा है। ‘दिनकर’ उनका उपनाम है — यानी वह नाम जो कवि अपनी रचना के नीचे लिखते हैं। दिनकर जी बिहार के थे और उन्हें राष्ट्रकवि कहा जाता है। ‘रश्मिरथी’, ‘कुरुक्षेत्र’ और ‘उर्वशी’ उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं। ‘उर्वशी’ पर उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था।
- कविता में दो पात्र हैं — एक चाँद और दूसरी चाँद की माँ। पूरी कविता इन दोनों की आपस की बातचीत है। चाँद को यहाँ एक छोटे बच्चे की तरह दिखाया गया है, जो ठंड में ठिठुरता है, माँ से ज़िद करता है और कपड़े माँगता है।
- कविता की शुरुआत चाँद की ज़िद से होती है — “हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला।” वह कहता है कि रात भर सन-सन हवा चलती है और वह ठंड से मर जाता है। ठिठुर-ठिठुरकर वह किसी तरह आसमान की अपनी यात्रा पूरी करता है। इसलिए माँ उसे ऊन का एक मोटा झिंगोला सिलवा दे। झिंगोला का अर्थ है — ढीला-ढाला लंबा कुरता।
- चाँद यह भी कह देता है कि अगर नया न सिलवा सको तो कोई भाड़े का, यानी किराए का कुरता ही ला दो। इस एक पंक्ति से पता चलता है कि उसे ठंड कितनी सता रही है — उसे नया-पुराना कुछ नहीं चाहिए, बस गरमी चाहिए।
- अब माँ का उत्तर आता है, और यहीं कविता की असली बात खुलती है। माँ पहले प्यार जताती है — “अरे सलोने! कुशल करें भगवान।” फिर वह असली समस्या बताती है — “एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ।” यानी चाँद कभी एक ही नाप का रहता ही नहीं।
- माँ बताती है कि चाँद कभी एक अंगुल-भर पतली रेखा जैसा हो जाता है, कभी एक फुट मोटा। किसी दिन बड़ा, किसी दिन छोटा। और एक दिन तो वह किसी को दिखाई ही नहीं देता। तो नाप किस दिन का लिया जाए, और ऐसा कुरता कैसे सिले जो हर रोज़ बदन में आ जाए?
- असल में कविता चाँद की कलाओं की बात कर रही है — यानी चाँद का रोज़ थोड़ा-थोड़ा घटना और बढ़ना। यही बात आप आसमान में देख सकते हैं: दूज को चाँद नाख़ून जैसी पतली रेखा दिखता है, फिर रोज़ बढ़ता जाता है, पूर्णिमा को पूरी थाली जैसा गोल हो जाता है, फिर रोज़ घटता जाता है और अमावस्या को बिलकुल गायब हो जाता है। कवि ने विज्ञान की इस बड़ी बात को कुरता सिलवाने की छोटी-सी कहानी में कह दिया है।
- भाषा बहुत आसान और घर जैसी है। वाक्य छोटे हैं, हर दो पंक्तियों में तुक मिलती है (बोला–झिंगोला, हूँ–हूँ, जाड़े का–भाड़े का, सलोने–टोने, मोटा–छोटा)। ‘सन-सन’ और ‘ठिठुर-ठिठुरकर’ जैसे शब्द ठंड को सुनाई और दिखाई दे जाने वाला बना देते हैं। इसी से कविता गाने जैसी लगती है और जल्दी याद हो जाती है।
त्वरित पुनरावृत्ति – Chand Ka Kurta (चाँद का कुरता)
| शब्द | अर्थ | पाठ की पंक्ति | अपने वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|---|
| हठ करना | ज़िद करना, अपनी बात पर अड़ जाना | “हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला।” | छोटा भाई साइकिल के लिए हठ कर बैठा। |
| झिंगोला | ढीला-ढाला लंबा कुरता या चोगा | “सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला।” | दादाजी ने सर्दी में ऊन का झिंगोला पहन लिया। |
| सिलवाना | किसी दर्ज़ी से कपड़ा सिलाना | “सिलवा दो माँ…” | माँ ने मेरे लिए नई कमीज़ सिलवाई। |
| सन-सन | तेज़ हवा चलने की आवाज़ | “सन-सन चलती हवा रात भर…” | रात भर सन-सन हवा चलती रही। |
| जाड़ा | सर्दी, ठंड का मौसम | “…जाड़े से मरता हूँ।” | जाड़े में सुबह की धूप बहुत भली लगती है। |
| ठिठुरना | ठंड से काँपना, सिकुड़ जाना | “ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।” | बिना स्वेटर के मैं ठंड में ठिठुर गया। |
| सफर | यात्रा | “आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का।” | गाँव तक का सफर दो घंटे का है। |
| भाड़े का | किराए का, कुछ दिन के लिए लिया हुआ | “न हो अगर तो ला दो कुरता ही कोई भाड़े का।” | शादी में उसने भाड़े का बैंड बुलवाया। |
| सलोने | सुंदर, प्यारा (प्यार से पुकारने का शब्द) | “बच्चे की सुन बात कहा माता ने, ‘अरे सलोने!’” | माँ ने बेटी को सलोनी कहकर गोद में उठा लिया। |
| कुशल | भला, ख़ैरियत, अच्छा हाल | “कुशल करें भगवान, लगें मत तुझको जादू-टोने।” | चिट्ठी में सबकी कुशल लिखी थी। |
| जादू-टोने | टोना-टोटका; किसी की बुरी नज़र | “…लगें मत तुझको जादू-टोने।” | दादी कहती हैं कि जादू-टोने पर विश्वास नहीं करना चाहिए। |
| नाप | माप, किसी चीज़ का आकार जो नापकर लिया जाए | “एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ।” | दर्ज़ी ने मेरी कमीज़ का नाप ले लिया। |
| अंगुल-भर | एक उँगली जितना, बहुत थोड़ा | “कभी एक अंगुल-भर चौड़ा…” | नन्हा पौधा ज़मीन से अंगुल-भर ऊपर निकल आया। |
| चौड़ा | जिसकी चौड़ाई अधिक हो | “कभी एक अंगुल-भर चौड़ा…” | यह सड़क पहले से अधिक चौड़ी हो गई है। |
Old NCERT vs New – Class 5 Hindi
This chapter is from Veena, the new NCERT Class 5 Hindi book (NCF-SE 2023, used from 2025-26). It replaced the old book “Rimjhim”, so chapter numbers and names differ from older PDFs.
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Answers to the exercises and the full chapter list of Veena:
Chand Ka Kurta (चाँद का कुरता) – Overview
| Class | Class 5 |
| Subject | Hindi |
| Book | Veena – new NCERT book |
| Chapter | 3 of 12 – Chand Ka Kurta (चाँद का कुरता) |
| Edition | NCERT Reprint 2026-27 |
| Session | 2026-27 |
| Free – read online or download |
Class 5 Hindi Chapter 3 – FAQs
Where can I download Chand Ka Kurta (चाँद का कुरता) Class 5 PDF?
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What is Class 5 Hindi Chapter 3 about?
चाँद का कुरता एक कविता है। इसे रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने लिखा है। ‘दिनकर’ उनका उपनाम है — यानी वह नाम जो कवि अपनी रचना के नीचे लिखते हैं। दिनकर जी बिहार के थे और उन्हें राष्ट्रकवि कहा जाता है। ‘रश्मिरथी’, ‘कुरुक्षेत्र’ और ‘उर्वशी’ उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं। ‘उर्वशी’ पर उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था।
Is Chand Ka Kurta (चाँद का कुरता) from the new NCERT Class 5 Hindi book?
Yes. It is chapter 3 of veena, the new NCERT Class 5 Hindi book for 2026-27.
Is this the latest NCERT edition for 2026-27?
Yes – the PDF is NCERT’s latest edition for the 2026-27 session.
Where are the NCERT Solutions for Class 5 Hindi Chapter 3?
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