Download Nyay Ki Kursi (न्याय की कुर्सी) – NCERT Class 5 Hindi Chapter 2 PDF from the new NCERT Class 5 Hindi book Veena (2026-27). Read the chapter online or download the free PDF. न्याय की कुर्सी एक कहानी है। इसे लीलावती भागवत ने लिखा है। यह उनकी पुस्तक स्वर्ग की सैर तथा अन्य कहानियाँ से ली गई है, जो राष्ट्रीय पुस्तक न्यास से छपी है।
Nyay Ki Kursi (न्याय की कुर्सी) PDF – Chapter 2 of Veena
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| Chapter 2 PDF | Nyay Ki Kursi (न्याय की कुर्सी) | View PDF |
| Full book | NCERT Class 5 Hindi – Veena | View Book |
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What Is in Nyay Ki Kursi (न्याय की कुर्सी)? (Class 5 Hindi Chapter 2)
- न्याय की कुर्सी एक कहानी है। इसे लीलावती भागवत ने लिखा है। यह उनकी पुस्तक स्वर्ग की सैर तथा अन्य कहानियाँ से ली गई है, जो राष्ट्रीय पुस्तक न्यास से छपी है।
- कहानी उज्जैन नगरी के बाहर के एक मैदान से शुरू होती है। वहाँ यहाँ-वहाँ टीले — यानी मिट्टी के छोटे-छोटे ढेर — थे। एक लड़का खेलते-खेलते एक टीले पर चढ़ा और ठोकर खाकर गिर पड़ा। ठोकर एक बड़े चिकने पत्थर से लगी थी।
- लड़के ने उसी पत्थर को अपना सिंहासन बना लिया। उसने कहा — “यह सिंहासन है मेरा। मैं राजा हूँ और तुम सब मेरे दरबारी।” बाकी लड़के फरियाद (शिकायत) लेकर आते, गवाह बुलाए जाते, बयान लिए जाते और टीले पर बैठा लड़का फैसला सुनाता। यह खेल उन्हें इतना अच्छा लगा कि वे रोज़ खेलने लगे।
- फैसले इतने ठीक होते थे कि नगर में चर्चा फैल गई। एक दिन दो किसान ज़मीन के झगड़े में राजा के दरबार जाने के बजाय उसी लड़के के पास गए। उसका फैसला सुनकर वे दंग रह गए। इसके बाद सारे लोग वहीं आने लगे और राजा के दरबार में कोई न जाता।
- राजा को क्रोध आया और वह खुद देखने पहुँचा। वह स्तंभित — यानी हैरान होकर जड़-सा — रह गया। तभी पता चला कि उस दिन टीले पर रोज़ वाला लड़का नहीं, कोई नया लड़का बैठा है। राजा ने सोचा कि चमत्कार लड़के में नहीं, कुर्सी में है।
- खुदाई हुई तो निकला एक सुंदर सिंहासन, जिसके चारों पायों पर चार देवदूतों की मूर्तियाँ बनी थीं। पंडितों ने बताया कि यह सदियों पुराना, राजा विक्रमादित्य का सिंहासन है, जो अपने न्याय और विवेक के लिए प्रसिद्ध थे।
- अब कहानी का असली मोड़ आता है। राजा जब-जब सिंहासन पर बैठने चला, एक मूर्ति ने उसे रोककर एक प्रश्न पूछा — क्या तुमने कभी चोरी नहीं की? क्या कभी झूठ नहीं बोला? क्या कभी किसी को चोट नहीं पहुँचाई? राजा हर बार पीछे हट गया और हर बार तीन दिन उपवास और प्रायश्चित किया। एक-एक करके तीन मूर्तियाँ उड़ गईं।
- चौथी मूर्ति ने शर्त रखी — जो लड़के इस पर बैठते थे, उनके मन में कलुष (मैल) नहीं था। राजा ने सोचा कि वह धनवान, बलवान और बुद्धिमान है, इसलिए ज़रूर योग्य है। यही अहंकार था। जैसे ही वह बढ़ा, चौथी मूर्ति सिंहासन समेत आकाश में उड़ गई।
त्वरित पुनरावृत्ति – Nyay Ki Kursi (न्याय की कुर्सी)
| शब्द | अर्थ | पाठ की पंक्ति | अपने वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|---|
| टीला | मिट्टी या पत्थर का छोटा ऊँचा ढेर | “यहाँ-वहाँ टीले थे।” | हम दौड़कर टीले पर चढ़ गए। |
| शिला | बड़ा चपटा पत्थर | “अपने मित्रों को बुलाकर वह शिला दिखाई।” | नदी किनारे एक चौड़ी शिला पर हम बैठ गए। |
| फरियाद | शिकायत, न्याय पाने के लिए लगाई गई गुहार | “तुम अपनी-अपनी फरियाद लेकर आओ।” | खोए बच्चे की फरियाद पुलिस ने तुरंत सुनी। |
| दरबारी | राजा के दरबार में रहने वाले लोग | “मैं राजा हूँ और तुम सब मेरे दरबारी।” | नाटक में मेरे दो साथी दरबारी बने। |
| गवाही | जिसने कुछ देखा या सुना हो, उसका कहा हुआ सच | “उनकी गवाही ली जाती।” | दुर्घटना की गवाही दुकानदार ने दी। |
| बयान | अपनी बात कहकर बताना | “दोनों किसानों के बयान सुने।” | दोनों पक्षों के बयान सुने बिना फैसला ठीक नहीं होता। |
| न्याय-बुद्धि | सही-गलत परखकर ठीक फैसला करने की समझ | “लोग लड़के की न्याय-बुद्धि की चर्चा करने लगे” | शिक्षिका की न्याय-बुद्धि पर सब बच्चों को भरोसा है। |
| दैवी शक्ति | देवताओं से मिली हुई अनोखी शक्ति | “अवश्य ही उस लड़के में कोई दैवी शक्ति है।” | कहानियों में परियों के पास दैवी शक्ति होती है। |
| मजाल | हिम्मत, साहस (यहाँ ताने के रूप में) | “उस छोकरे की यह मजाल…” | किसकी मजाल जो कतार तोड़कर आगे बढ़ जाए! |
| लाव-लश्कर | साथ चलने वाले सिपाही और सेवक, पूरा दल | “राजा अपने लाव-लश्कर के साथ उस मैदान में पहुँचा” | बारात अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ पहुँची। |
| स्तंभित | हैरान होकर जड़-सा रह जाना | “वह स्तंभित रह गया।” | जादू का खेल देखकर हम स्तंभित रह गए। |
| लोहा मानना | किसी की श्रेष्ठता स्वीकार करना (मुहावरा) | “बड़े-बड़ों को लोहा मानना पड़ेगा।” | उसकी दौड़ का लोहा पूरा गाँव मानता है। |
| चमत्कार | ऐसी अनोखी बात जो समझ में न आए | “पत्थर की इस कुर्सी में ही कोई चमत्कार है।” | बीज से पेड़ बन जाना किसी चमत्कार से कम नहीं। |
| देवदूत | देवताओं का संदेश लाने वाला, पंखों वाला दिव्य रूप | “चार देवदूतों की मूर्तियाँ बनी हुई थीं।” | चित्र में देवदूत के पंख सुनहरे बने थे। |
Old NCERT vs New – Class 5 Hindi
This chapter is from Veena, the new NCERT Class 5 Hindi book (NCF-SE 2023, used from 2025-26). It replaced the old book “Rimjhim”, so chapter numbers and names differ from older PDFs.
Solutions and All Chapters
Answers to the exercises and the full chapter list of Veena:
Nyay Ki Kursi (न्याय की कुर्सी) – Overview
| Class | Class 5 |
| Subject | Hindi |
| Book | Veena – new NCERT book |
| Chapter | 2 of 12 – Nyay Ki Kursi (न्याय की कुर्सी) |
| Edition | NCERT Reprint 2026-27 |
| Session | 2026-27 |
| Free – read online or download |
Class 5 Hindi Chapter 2 – FAQs
Where can I download Nyay Ki Kursi (न्याय की कुर्सी) Class 5 PDF?
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What is Class 5 Hindi Chapter 2 about?
न्याय की कुर्सी एक कहानी है। इसे लीलावती भागवत ने लिखा है। यह उनकी पुस्तक स्वर्ग की सैर तथा अन्य कहानियाँ से ली गई है, जो राष्ट्रीय पुस्तक न्यास से छपी है।
Is Nyay Ki Kursi (न्याय की कुर्सी) from the new NCERT Class 5 Hindi book?
Yes. It is chapter 2 of veena, the new NCERT Class 5 Hindi book for 2026-27.
Is this the latest NCERT edition for 2026-27?
Yes – the PDF is NCERT’s latest edition for the 2026-27 session.
Where are the NCERT Solutions for Class 5 Hindi Chapter 2?
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