NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 10 तरुण के स्वप्न provide clear, step-by-step answers to every exercise and in-text question from the chapter तरुण के स्वप्न of the NCERT textbook मल्हार. Prepared by subject experts as per the latest NCERT (CBSE) syllabus for 2026-27, these NCERT Solutions for Class 8 Hindi help you understand each concept, write exam-ready answers, and check your own solutions. You can read them online below or download the free Class 8 Hindi Chapter 10 question-answer PDF.
NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 10 तरुण के स्वप्न
- Class: Class 8
- Subject: Hindi
- Chapter: Chapter 10 – तरुण के स्वप्न
- Textbook: मल्हार (NCERT)
- Study material: NCERT Solutions – questions with answers, free PDF
These solutions answer all the exercise questions of Chapter 10 तरुण के स्वप्न — including the in-text questions, short-answer and long-answer questions, and activities — with complete explanations so you can follow the method, not just the final answer. Read the full solutions below.
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Questions Covered in This Chapter
These NCERT Solutions answer all 37 questions of this chapter. The questions solved are:
- (क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (1) “उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” इस कथन में रेखांकित शब्द ‘हम’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है? • सुभाषचंद्र बोस के लिए • देश के तरुण वर्ग के लिए • चित्तरंजन दास के लिए • भारतवासियों के लिए
- (2) स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न साकार होगा? • आर्थिक असमानता से • स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकारों से • श्रम और कर्म की मर्यादा से • जातिभेद से
- (3) “उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” ‘उत्तराधिकारी’ होने से क्या अभिप्राय है? • हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है • हमें भी उनकी तरह स्वप्न देखने का अधिकार है • उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है • उनके स्वप्नों पर चर्चा करने का दायित्व हमारा ही है
- (4) जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर प्राप्त होगा तब— • राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी • तरुणों का साहस बढ़ेगा • राष्ट्र स्वाधीन बनेगा • राष्ट्र स्वप्नदर्शी होगा
- (ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
- नीचे स्तंभ 1 में पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उन पंक्तियों से संबंधित भाव-विचार दिए गए हैं। स्तंभ 1 में दी गई पंक्तियों का स्तंभ 2 में दिए गए भाव-विचार से सही मिलान कीजिए। स्तंभ 1 — 1. “इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं और लिखते हैं, भाषण देते हैं, काम-काज करते हैं।” 2. “जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा, सर्वोपरि वह समाज और राष्ट्र भारतवासियों का अभाव मिटाएगा।” 3. “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं।” स्तंभ 2 — 1. समाज में सभी व्यक्तियों को सभी तरह की स्वतंत्रता हो और उस पर किसी तरह का बंधन या सामाजिक दबाव न हो। 2. हमारी समूची दिनचर्या और आचार-विचार इसी लक्ष्य (स्वप्न) की प्राप्ति पर केंद्रित हैं। 3. जिस देश की योजनाएँ हमारे अपने समाज को ध्यान में रखकर बनाई जाएँगी, उस देश में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं होगा।
- पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए। (क) “उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।”
- (ख) “वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा।”
- (ग) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो।”
- अब आप इस पाठ को पुन: पढ़िए और निम्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए— (क) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस प्रकार के राष्ट्र निर्माण का स्वप्न देखा था?
- (ख) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस लक्ष्य की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखा?
- (ग) “आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा” सुभाषचंद्र बोस ने ऐसा क्यों कहा होगा?
- (घ) नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों या ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी क्या-क्या कर सकती है?
- (क) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो”, सुभाषचंद्र बोस ने किन-किन दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी?
- (ख) “उस समाज में नारी मुक्त होकर समाज एवं राष्ट्र के पुरुषों की तरह समान अधिकार का उपभोग करे”, सुभाषचंद्र बोस को अपने भाषण में नारी के लिए समान अधिकारों की बात क्यों कहनी पड़ी?
- (ग) आपके विचार से हमारे समाज में और कौन-कौन से लोग हैं जिन्हें विशेष अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है?
- (घ) सुभाषचंद्र बोस देश के समस्त युवा वर्ग को संबोधित करते हुए कहते हैं— “हे मेरे तरुण भाइयो!” उनका संबोधन केवल ‘भाइयो’ शब्द तक ही क्यों सीमित रहा होगा?
- (ङ) “यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ— स्वीकार करो।” सुभाषचंद्र बोस के इस आह्वान पर श्रोताओं (युवा वर्ग) की क्या प्रतिक्रिया रही होगी?
- (क) आपने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के भाषण का एक अंश पढ़ा है, इसे ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक दिया गया है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि यह शीर्षक क्यों दिया गया होगा?
- (ख) यदि आपको भाषण के इस अंश को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।
- (ग) सुभाषचंद्र बोस ने अपने समय की स्थितियों या समस्याओं को अपने संबोधन में स्थान दिया है। यदि आपको अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले तो आप किन-किन विषयों को अपने उद्बोधन में सम्मिलित करेंगे और उसका क्या शीर्षक रखेंगे?
- (क) सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में संख्या, संगठन या भाव आदि का बोध कराने वाले शब्दों के साथ उनकी विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्दों का प्रयोग किया है। उनके भाषण से विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्द ढूँढ़कर दिए गए शब्द समूह को पूरा कीजिए— (शब्द समूह में दिए गए शब्द — सत्य, समाज, राष्ट्र, जीवन, शक्ति, आनंद; उदाहरण के रूप में ‘अखंड — सत्य’ भरा हुआ है।)
- (ख) सुभाषचंद्र बोस ने तो उपर्युक्त विशेषताओं के साथ इन शब्दों को रखा है। आप किन विशेषताओं के साथ इन उपर्युक्त शब्दों को रखना चाहेंगे और क्यों? लिखिए।
- (क) “और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र” इस वाक्यांश में रेखांकित शब्द ‘स्वाधीन’ का विपरीत अर्थ देने वाला शब्द है ‘पराधीन’। इसी प्रकार के कुछ विपरीतार्थक शब्द आगे दिए गए हैं, लेकिन वे आमने-सामने नहीं हैं। रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए— स्तंभ 1 — 1. स्वीकार 2. सार्थक 3. विषमता 4. क्षुद्र 5. संपन्न 6. अकर्मण्य 7. मरण स्तंभ 2 — कर्मण्य/कर्मठ, विपन्न, अस्वीकार, जीवन, निरर्थक, समानता, विशाल/वृहत/विराट/महान
- (ख) अब स्तंभ 1 और स्तंभ 2 के सभी शब्दों से दिए गए उदाहरण के अनुसार वाक्य बनाकर लिखिए, जैसे— “समाज की उन्नति अकर्मण्य नहीं अपितु कर्मण्य व्यक्तियों पर निर्भर है।”
- (क) आपने सुभाषचंद्र बोस के स्वप्न के बारे में जाना। आप अपने विद्यालय, राज्य और देश के बारे में कैसे स्वप्न देखते हैं? लिखिए।
- (ख) हमें बड़े संघर्षों के बाद स्वतंत्रता मिली है। अपनी इस स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम अपने स्तर पर क्या-क्या कर सकते हैं? लिखिए।
- (क) नीचे स्तंभ 1 में स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित कुछ तथ्य दिए गए हैं और स्तंभ 2 में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम दिए गए हैं। तथ्यों का स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए। इसके लिए आप अपने शिक्षकों, अभिभावकों और पुस्तकालय तथा इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं। स्तंभ 1 — 1. 8 अप्रैल, 1929 को ‘सेंट्रल असेंबली’ में बम फेंकने वाले क्रांतिकारी, ‘शहीद-ए-आज़म’ के नाम से जाने जाते हैं। 2. ‘स्वराज पार्टी’ के संस्थापकों में से एक, सुभाषचंद्र बोस के राजनीतिक गुरु कहे जाते हैं। 3. जेल में क्रांतिकारियों के साथ राजबंदियों के समान व्यवहार न होने के कारण क्रांतिकारियों ने 13 जुलाई 1929 से भूख हड़ताल शुरू कर दी। अनशन के तिरसठवें दिन जेल में इनका देहांत हो गया। 4. इनके जन्मदिवस पर ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ मनाया जाता है। 5. नर्मदा नदी के तट पर इनकी एक विशाल प्रतिमा स्थापित है। जिसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ कहा जाता है। 6. 1921 में असहयोग आंदोलन में गिरफ्तार होने पर न्यायाधीश ने इनसे पिता का नाम पूछा तो इन्होंने कहा— “मेरा नाम आजाद है, पिता का नाम स्वतंत्रता और पता कारावास है।” स्तंभ 2 — 1. सरदार वल्लभभाई पटेल 2. महात्मा गाँधी 3. चंद्रशेखर आजाद 4. चित्तरंजन दास 5. जतिन दास 6. भगत सिंह
- (ख) इनमें से एक स्वतंत्रता सेनानी का नाम ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ में भी आया है। उसे पहचान कर लिखिए।
- नेताजी सुभाषचंद्र बोस और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वाधीन संपन्न समाज की स्थापना के लिए अपने समय में अनेक प्रयास किए। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात इस दिशा में क्या-क्या उल्लेखनीय प्रयत्न किए गए हैं? अपनी सामाजिक अध्ययन की पाठ्यपुस्तक, अपने अनुभवों एवं पुस्तकालय की सहायता से लिखिए।
- (क) सुभाषचंद्र बोस ने स्त्रियों के लिए समान अधिकार की बात की है। अपने अनुभवों के आधार पर बताइए कि उन्हें कौन-कौन से विशेषाधिकार राज्य की ओर से दिए गए हैं?
- (ख) सुभाषचंद्र बोस ने ‘आजाद हिंद फौज’ का नेतृत्व किया था। उसमें एक टुकड़ी स्त्रियों की भी थी। उस टुकड़ी का नाम पता लगाकर लिखिए। उस टुकड़ी की भूमिका क्या थी? यह भी बताइए।
- आप किस स्वतंत्रता सेनानी के कार्यों व विचारों से प्रभावित हैं? कारण सहित लिखिए और अभिनय (रोल प्ले) करते हुए उनके विचारों को कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
- नीचे स्तंभ 1 में कुछ नारे दिए गए हैं। नारों के सामने लिखिए कि यह किसके द्वारा दिया गया? आप पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं। नारे — स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है। / करो या मरो / मैं आजाद हूँ, आजाद रहूँगा और आजाद ही मरूँगा / इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद / पूर्ण स्वराज
- आप सभी राज्यों के स्वतंत्रता सेनानियों के विषय में पढ़कर उनमें से 10 महिला एवं 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानियों के चित्रों का संग्रह करके एक संग्रहिका तैयार कीजिए। चित्रों के नीचे उनके विशेष योगदान के बारे में एक-दो वाक्य भी लिखिए। अपनी संग्रहिका तैयार करते समय ध्यान रखिए कि आप किसी भी राज्य से एक से अधिक व्यक्ति न चुनें।
- उपर्युक्त पत्र में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने गृह एवं कुटीर उद्योग की बात की है। यह पत्र देश की स्वतंत्रता से पहले लिखा गया था। अपने आस-पास के गृह एवं कुटीर उद्योगों के विषय में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए।
- नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी का प्रयोग करके आप सुभाषचंद्र बोस पर आधारित फिल्म देख सकते हैं। • ‘आजाद हिंद फौज’ के विषय में और अधिक जानकारी जुटाइए और अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
Chapter at a Glance
- पाठ की विधा गद्य है — यह एक भाषण/उद्बोधन का अंश है, किसी कहानी या निबंध का नहीं। इसलिए इसमें सीधा संबोधन है (‘हे मेरे तरुण भाइयो!’), लंबे-लंबे वाक्य हैं और अंत में एक आह्वान है।
- नेताजी अपना स्वप्न देशबंधु चित्तरंजन दास से जोड़ते हैं — ‘वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा।’ फिर कहते हैं, ‘उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।’
- उस आदर्श समाज की पाँच शर्तें पाठ में गिनाई गई हैं — व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो, जातिभेद का स्थान न हो, नारी को पुरुषों के समान अधिकार हों, अर्थ की विषमता न हो, और हर व्यक्ति को शिक्षा तथा उन्नति का समान सुअवसर मिले।
- इन शर्तों के साथ एक शर्त कर्म की है — ‘जिस समाज में श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा होगी और आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा, वह राष्ट्र किसी भी विजातीय प्रभाव से हर प्रकार से मुक्त रहेगा।’
- नेताजी की दृष्टि केवल भारत तक सीमित नहीं है — वह समाज और राष्ट्र विश्व-मानव के समक्ष आदर्श-समाज और आदर्श-राष्ट्र के रूप में ‘गण्य’ होगा, यानी दुनिया के सामने एक नमूना बनेगा।
- अंत नाटकीय है — ‘तुम्हें देने लायक मेरे पास कुछ भी नहीं है, है सिर्फ यही स्वप्न… यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ— स्वीकार करो।’ भाषण एक माँग पर नहीं, एक भेंट पर समाप्त होता है।
- पाठ के साथ ‘झरोखे से’ में नेताजी का एक पत्र भी दिया गया है, जो उन्होंने मांडले जेल से दक्षिण कलकत्ता सेवक-समिति के उप-मंत्री श्री अनिलचंद्र विश्वास को लिखा था — विषय है मिट्टी के खिलौने और सीप के बटन जैसे गृह एवं कुटीर उद्योग ।
How to Download NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 10 PDF
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NCERT Solutions for Class 8 Hindi – All Chapters
There are more chapters to study besides तरुण के स्वप्न in Hindi. Here are the NCERT Solutions for all chapters of Class 8 Hindi.
- Chapter 1 स्वदेश
- Chapter 2 दो गौरैया
- Chapter 3 एक आशीर्वाद
- Chapter 4 हरिद्वार
- Chapter 5 कबीर के दोहे
- Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी
- Chapter 7 मत बाँधो
- Chapter 8 नए मेहमान
- Chapter 9 आदमी का अनुपात
- Chapter 10 तरुण के स्वप्न
NCERT Solutions for Class 8 – All Subjects
Just like Chapter 10 of Hindi, you can get the exercise questions with answers for every other subject of Class 8. Here are the NCERT Solutions for all subjects of Class 8.
NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 10 – An Overview
The key highlights of this study material are as follows.
| Aspects | Details |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | Hindi |
| Chapter Number | Chapter 10 |
| Chapter Name | तरुण के स्वप्न |
| Book Name | मल्हार |
| Book By | NCERT (National Council of Educational Research and Training) |
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NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 10 तरुण के स्वप्न – FAQs
What are the NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 10 तरुण के स्वप्न?
They are the complete, step-by-step answers to all the exercise and in-text questions of Chapter 10 तरुण के स्वप्न from the NCERT Class 8 Hindi textbook मल्हार, written by experts as per the latest NCERT syllabus.
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