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NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 3 एक आशीर्वाद (PDF) – 2027

NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 3 एक आशीर्वाद – step-by-step answers to every exercise and in-text question of the chapter, as per the latest NCERT syllabus for 2027. Read them online or download the free question-answer PDF.

मल्हार (कक्षा 8) के पाठ 3 एक आशीर्वाद (कवि — दुष्यंत कुमार) मुक्त छंद में लिखी एक छोटी कविता है, जिसमें एक बड़ा किसी छोटे को आशीर्वाद देता है कि उसके सपने बड़े हों — और यह भी कि वे सपने भावना की गोद से उतरकर पृथ्वी पर चलना सीखें। यहाँ पृष्ठ 36 से 44 तक की हर गतिविधि का हल है। हर प्रश्न में पहले वह उत्तर है जो कॉपी में लिखना है; कारण, संकेत और अतिरिक्त जानकारी ‘विस्तार से समझिए’ में है।

NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 3 एक आशीर्वाद PDF

All the answers are on this page below. The PDF also explains every answer – why it is right and how to check it – so download it for revision.

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NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 3 एक आशीर्वाद – Questions and Answers

All questions of the chapter are answered below, in the order of the book – in-text questions, activities and the end-of-chapter exercises. Each answer is written the way you would write it in the exam.

मेरी समझ से — पृष्ठ 37 और 38पाठ से

पाठ से
प्र.1(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. कविता में किसे संबोधित किया गया है?
• युवा वर्ग को
• नागरिकों को
• बच्चों को
• श्रमिकों को
उत्तर

★ युवा वर्ग को   ★ बच्चों को

कारण: कविता ऐसे व्यक्ति को आशीर्वाद देती है जिसका जीवन अभी शुरू हो रहा है — “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों।” ‘गोद से उतरकर’, ‘चलना सीखें’, ‘रूठना-मचलना’ जैसे शब्द बच्चों के हैं और ‘अपने पाँवों पर खड़े हों’ का आशीर्वाद युवाओं को दिया जाता है। कविता में नागरिकों या श्रमिकों की कोई बात नहीं है।

प्र.22. “तेरे स्वप्न बड़े हों” पंक्ति में ‘स्वप्न’ से क्या आशय है?
• कल्पना की उड़ान भरना
• आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखना
• बहुत-सी उपलब्धियाँ पाना
• बड़े लक्ष्य निर्धारित करना
उत्तर

★ आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखना   ★ बड़े लक्ष्य निर्धारित करना

कारण: यहाँ ‘स्वप्न’ नींद का सपना नहीं, जागते हुए मन में ठाना गया लक्ष्य है। कवि चाहता है कि सपने केवल कल्पना न रहें, “पृथ्वी पर चलना सीखें”, और “चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों” के लिए ज़िद करें — यानी लक्ष्य ऊँचे हों और हर नई चीज़ सीखने की चाह हो।

प्र.33. “उँगली जलाएँ” पंक्ति में उँगली जलाने का भाव है—
• चुनौतियों को स्वीकार करना
• प्रकाश का प्रसार करना
• अग्नि के ताप का अनुभव करना
• कष्टों से नहीं घबराना
उत्तर

★ चुनौतियों को स्वीकार करना   ★ कष्टों से नहीं घबराना

कारण: दीये की लौ छूने पर उँगली जलती है। यहाँ इसका भाव है — ज्ञान और लक्ष्य (दीये की रोशनी) को पाने के लिए जोखिम उठाना और रास्ते में आने वाले कष्ट सह लेना। ‘प्रकाश का प्रसार’ और ‘अग्नि का ताप’ पंक्ति का भाव नहीं हैं।

प्र.44. “अपने पाँवों पर खड़े हों” पंक्ति से क्या आशय है?
• अपने पैरों पर खड़े होना
• सफलता प्राप्त करना
• कठिनाइयों का सामना करना
• आत्मनिर्भर होना
उत्तर

★ आत्मनिर्भर होना

कारण: ‘अपने पाँवों (पैरों) पर खड़ा होना’ एक मुहावरा है, जिसका अर्थ है — किसी के सहारे के बिना अपना जीवन और काम स्वयं सँभालना, यानी आत्मनिर्भर होना। ‘अपने पैरों पर खड़े होना’ तो पंक्ति का शब्दशः अर्थ है, आशय नहीं।

प्र.5(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

“मैंने पहले प्रश्न में ‘युवा वर्ग को’ चुना, क्योंकि ‘अपने पाँवों पर खड़े हों’ का आशीर्वाद प्रायः युवाओं को दिया जाता है। मेरी साथी ने ‘बच्चों को’ चुना, क्योंकि ‘गोद’, ‘चलना सीखें’ और ‘रूठना-मचलना’ बचपन के शब्द हैं। चर्चा के बाद हमने माना कि दोनों उत्तर सही हैं, क्योंकि कवि ने किसी एक उम्र का नाम नहीं लिया। चौथे प्रश्न में हम सबने ‘आत्मनिर्भर होना’ चुना, क्योंकि यही मुहावरे का अर्थ है।”

मिलकर करें मिलान — पृष्ठ 38पाठ से

पाठ से
प्र.6कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव अथवा संदर्भों से मिलाइए।
क्रमस्तंभ 1स्तंभ 2
1.भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें1. विविध ज्ञान के प्रति आकृष्ट होना और उसे पाने की ललक होना
2.हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ2. सपनों को आनंद और मुस्कुराहटों में बदलें। कठिन परिस्थितियों में भी मनोबल बनाए रखें।
3.चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखें3. भावनाओं में न बहकर वास्तविकता का सामना करना
4.…हँसें/मुसकराएँ/गाएँ4. असंभव से लगने वाले लक्ष्यों के लिए हठ और प्रयास करना
उत्तर

1 → 3,  2 → 1,  3 → 4,  4 → 2

1. भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें — भावनाओं में न बहकर वास्तविकता का सामना करना।
2. हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ — विविध ज्ञान के प्रति आकृष्ट होना और उसे पाने की ललक होना।
3. चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखें — असंभव से लगने वाले लक्ष्यों के लिए हठ और प्रयास करना।
4. …हँसें/मुसकराएँ/गाएँ — सपनों को आनंद और मुस्कुराहटों में बदलें; कठिन परिस्थितियों में भी मनोबल बनाए रखें।

पंक्तियों पर चर्चा — पृष्ठ 38 और 39पाठ से

पाठ से
प्र.7पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए—
(क) “जा,
तेरे स्वप्न बड़े हों”
उत्तर

भावार्थ: जा — और मेरी शुभकामना यह है कि तेरे सपने छोटे न रहें, बड़े हों। कवि किसी को धन, सुख या सुरक्षा का आशीर्वाद नहीं दे रहा; वह बड़े सपने का आशीर्वाद दे रहा है, क्योंकि आगे जो कुछ भी होगा वह सपने के आकार से ही तय होगा।

प्र.8(ख) “जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें”
उत्तर

भावार्थ: सपने भावना की गोद में ही न पड़े रहें, बल्कि जल्दी से नीचे उतरकर ज़मीन पर चलना सीख जाएँ — अर्थात् सपना केवल महसूस करने की चीज़ न रहकर जल्द से जल्द करने की चीज़ बन जाए।

जैसे बच्चा गोद से उतरकर धीरे-धीरे चलना सीखता है, वैसे ही सपने को भी कल्पना से निकलकर योजना और परिश्रम के रास्ते पर चलना चाहिए — और यह काम टालना नहीं चाहिए।

प्र.9(ग) “चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए
रूठना-मचलना सीखें”
उत्तर

भावार्थ: जो सच्चाइयाँ चाँद-तारों की तरह दूर और अप्राप्य लगती हैं, सपने उनके लिए भी बच्चे की तरह ज़िद करना सीख जाएँ — यानी असंभव दिखने वाले लक्ष्य को भी माँगें और उसके लिए अड़ जाएँ।

बच्चा चाँद माँगने पर भी हार नहीं मानता; कवि चाहता है कि हम भी ऊँचे लक्ष्य के लिए ऐसा ही हठ और लगातार प्रयास करें। (‘चाँद-तारों-सी’ में उपमा है।)

अनुमान और कल्पना से — पृष्ठ 39पाठ से

पाठ से
प्र.10अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) कविता में सपनों के बड़े होने की बात की गई है। आपके अनुसार बड़े सपने कौन-कौन से हो सकते हैं और क्यों?
उत्तर

मेरे अनुसार बड़े सपने हैं — (1) वैज्ञानिक बनकर किसी बीमारी या पानी की समस्या का हल खोजना, (2) अपने गाँव या मोहल्ले के हर बच्चे को पढ़ता हुआ देखना, (3) देश के लिए खेलना या किसी कला में ऊँचाई तक पहुँचना, (4) नदियों, तालाबों और पेड़ों को बचाना।

ये सपने बड़े हैं, क्योंकि इन्हें पूरा करने में वर्षों का परिश्रम लगता है और इनका लाभ केवल सपना देखने वाले को नहीं, बहुत-से लोगों को मिलता है।

प्र.11(ख) “हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ/उँगली जलाएँ” पंक्ति में सपनों और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ललक की बात की गई है। ललक के साथ और क्या-क्या होना आवश्यक है और क्यों? (संकेत— योजना, प्रयास आदि)
उत्तर

उत्तर: ललक के साथ योजना, निरंतर प्रयास, धैर्य, अनुशासन, सही मार्गदर्शन और असफलता सहने का साहस आवश्यक है।

कारण: ललक केवल इच्छा जगाती है। योजना बताती है कि लक्ष्य तक ‘कैसे’ पहुँचना है; रोज़ का प्रयास और अनुशासन आगे बढ़ाते हैं; धैर्य और साहस असफलता आने पर रुकने नहीं देते। कविता में भी ‘ललचाएँ’ के बाद ‘उँगली जलाएँ’ आता है — इच्छा के बाद परिश्रम और कष्ट सहना।

प्र.12(ग) कल्पना कीजिए कि आपका सपना ही आपका मित्र है। आपको उससे बातचीत करनी हो तो क्या बात करेंगे?
उत्तर

नमूना उत्तर (संवाद):
मैं: सपने, तुम मेरे साथ तब से हो जब मैंने पहली बार दूरबीन से चाँद देखा था।
सपना: पर तुम मुझे केवल रात में याद करते हो, दिन में भूल जाते हो।
मैं: सच है। तुम्हें ‘भावना की गोद’ से उतारना मुझे कठिन लगता है।
सपना: तो मुझे रोज़ थोड़ा-सा चलाओ — एक अध्याय, एक प्रयोग, एक अभ्यास।
मैं: वादा करता हूँ, रोज़ तुमसे मिलूँगा — और उस मिलने में बात ही नहीं, काम भी होगा।

प्र.13(घ) यदि आप किसी को आशीर्वाद देना चाहते हों तो आप किसे और क्या आशीर्वाद देंगे और क्यों?
उत्तर

मैं अपनी छोटी बहन को यह आशीर्वाद दूँगी — “जा, तेरे प्रश्न कभी कम न हों।” मैं यह इसलिए दूँगी क्योंकि वह हर बात पर ‘ऐसा क्यों होता है?’ पूछती रहती है और लोग उसे चुप करा देते हैं। जिसके प्रश्न मर जाते हैं, उसका सीखना भी रुक जाता है। धन, अंक या पद तो बदलते रहते हैं, पर जिज्ञासा जीवन भर काम आती है — और उसी से नए सपने जन्म लेते हैं।

कविता की रचना — पृष्ठ 39पाठ से

पाठ से
प्र.14इस कविता में सपने को मनुष्य की तरह हँसते, मुसकराते, गाते हुए बताया गया है। ध्यान से देखें तो इस कविता में इस प्रकार की अन्य विशेषताएँ भी दिखाई देंगी। उन्हें लिखिए और कक्षा में उन पर चर्चा कीजिए।
उत्तर

उत्तर: कविता की अन्य विशेषताएँ —

  • मानवीकरण: सपने चलना सीखते हैं, रूठते-मचलते हैं, ललचाते हैं, उँगली जलाते हैं और अपने पाँवों पर खड़े होते हैं।
  • उपमा: “चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयाँ”।
  • प्रतीक: ‘दीये की रोशनी’ ज्ञान और अवसर का प्रतीक है।
  • आवृत्ति: “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों” आरंभ और अंत — दोनों में आता है।
  • शब्द-युग्म: रूठना-मचलना, चाँद-तारे।
  • मुक्त छंद और छोटी पंक्तियाँ: ‘हँसें’, ‘मुसकराएँ’, ‘गाएँ’ एक-एक शब्द की पंक्तियाँ हैं; तुक का बंधन नहीं है।
  • संबोधन शैली: “जा”, “तेरे” — अपनापन भरा स्वर।

सृजन — पृष्ठ 39पाठ से

सृजन
प्र.15इस कविता के आरंभ में एक ही संज्ञा शब्द है ‘स्वप्न’। इस शब्द को केंद्र में रखते हुए अनेक क्रिया शब्दों का ताना-बाना बुना गया है, जैसे— चलना, रूठना, मचलना, सीखना, हँसना, मुस्कुराना, गाना, ललचाना और इस प्रकार कविता पूरी हो जाती है। आप भी किसी एक संज्ञा शब्द के साथ विभिन्न क्रिया शब्दों का प्रयोग करते हुए अपनी कविता बनाकर कक्षा में सुनाइए।
उदाहरण के लिए—
बादल को
घिरते देखा है,
गरजते देखा है,
बरसते देखा है,
____________ ।
उत्तर

पुस्तक का उदाहरण पूरा कीजिए:

बादल को
घिरते देखा है,
गरजते देखा है,
बरसते देखा है,
और बरसकर खाली हो जाने पर भी मुसकराते देखा है।

नमूना उत्तर — संज्ञा: बीज

बीज को
मिट्टी में दबते देखा है,
अँधेरे में फूलते देखा है,
चुपचाप जड़ें भेजते देखा है,
पत्थर हटाकर उगते देखा है,
और पेड़ बनकर उसी मिट्टी को थामते देखा है।

कविता का शीर्षक — पृष्ठ 40पाठ से

पाठ से
प्र.16इस कविता का शीर्षक ‘एक आशीर्वाद’ है जो कविता में कहीं भी प्रयुक्त नहीं हुआ है। यदि इस कविता की ही किसी पंक्ति या शब्द को कविता का शीर्षक बनाना हो तो आप कौन-सी पंक्ति या शब्द चुनेंगे और क्यों?
उत्तर

मेरा चुनाव — “तेरे स्वप्न बड़े हों”।

कारण: यही पंक्ति कविता के आरंभ और अंत — दोनों जगह आती है, इसलिए यह पूरी कविता का सार है। इसमें कविता के तीनों अंश आ जाते हैं — ‘तेरे’ से संबोधन, ‘स्वप्न’ से विषय और ‘बड़े हों’ से आशीर्वाद का भाव। शीर्षक का काम यही है कि वह कविता को एक साथ पकड़ ले।

भाषा की बात — पृष्ठ 40पाठ से

पाठ से
प्र.17(क) नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वप्न’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए—
स्वप्न
उत्तर

सपना, ख़्वाब, कल्पना, अभिलाषा, आकांक्षा, लक्ष्य, उम्मीद (आशा), स्वप्नदर्शी, स्वप्निल। (ये शब्द-जाल के नौ खानों में लिखिए। अरमान, इच्छा, चाह, संकल्प, स्वप्नलोक आदि भी लिखे जा सकते हैं; ‘यथार्थ’ नहीं, क्योंकि वह स्वप्न का विलोम है।)

सपनाख़्वाबकल्पनाअभिलाषाआकांक्षालक्ष्यउम्मीद (आशा)स्वप्नदर्शीस्वप्निलस्वप्न
प्र.18(ख) कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं और उनके सामने कुछ अन्य शब्द भी दिए गए हैं। उन शब्दों पर घेरा बनाइए जो समान अर्थ न देते हों—
शब्दअन्य शब्द
पृथ्वीधरावसुधाअवनिसुता
चाँदमधुकरशशिनिशाकरमयंक
तारेनक्षत्रसोमतारकउडुगण
रोशनीप्रकाशलालिमाउजालाआलोक
स्वप्नसपनाइच्छायथार्थकल्पना
दीयादीनज्योतिदीपकप्रदीप
(पहली पंक्ति में ‘सुता’ पर घेरा पुस्तक में उदाहरण के रूप में बना है।)
उत्तर

घेरा इन शब्दों पर बनाइए:

पृथ्वी — सुता (बेटी; पुस्तक का उदाहरण)
चाँद — मधुकर (भौंरा)
तारे — सोम (चंद्रमा)
रोशनी — लालिमा (लाल आभा, लाली)
स्वप्न — यथार्थ (वास्तविकता — स्वप्न का उलटा)
दीया — दीन (ग़रीब, असहाय)

आना-जाना — पृष्ठ 40पाठ से

गतिविधि
प्र.19‘आना’ और ‘जाना’ दो महत्वपूर्ण क्रियाएँ हैं। कक्षा में दो समूह बनाइए। एक समूह का नाम ‘आना’ और दूसरे समूह का नाम ‘जाना’ होगा। अब अपने-अपने समूह में इन दोनों क्रियाओं का प्रयोग करते हुए सार्थक वाक्य बनाइए और उन्हें चार्ट पेपर पर चिपकाकर अपनी कक्षा में लगाइए।
उत्तर

नमूना उत्तर — चार्ट के लिए वाक्य:

समूह ‘आना’समूह ‘जाना’
दादी कल गाँव से आ रही हैं।हम रविवार को नानी के घर जाएँगे।
मुझे तैरना अच्छी तरह आता है।बिजली चली गई, इसलिए पंखा बंद हो गया।
परीक्षा का परिणाम कल आ जाएगा।यह दाग़ धोने पर भी नहीं गया।
उसकी बात सुनकर मुझे हँसी आ गई।मेरा सारा दिन तैयारी में चला गया।
इस बार गेहूँ की अच्छी फ़सल आई है।कवि कहता है — “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों।”
धीरे-धीरे उसे हिंदी लिखनी आने लगी।वह अपने सपने के पीछे बहुत दूर तक गया।

डायरी (हँसें-मुसकराएँ-गाएँ) — पृष्ठ 41पाठ से

गतिविधि
प्र.20हँसें-मुसकराएँ-गाएँ
अपने किसी एक दिन की समस्त गतिविधियों पर ध्यान दीजिए और अपनी डायरी में लिखिए कि आप दिनभर में कब-कब हँसे, कब-कब मुसकराए, कब-कब गाए, कब-कब रूठे, कब-कब मचले?
उत्तर

नमूना उत्तर (डायरी का एक पृष्ठ):

12 जुलाई, मंगलवार
हँसा — दोपहर में, जब आमिर ने छतरी उलटी पकड़ ली और उसमें पानी भर गया।
मुसकराया — जब बस्ते में माँ का रखा मेरी पसंद का आम मिला।
गाया — शाम को छत पर, बारिश रुकने के बाद।
रूठा — जब भैया मेरी साइकिल बिना पूछे ले गए।
मचला — रात को, विज्ञान मेले के लिए दिल्ली जाने की ज़िद करके।
आज का विचार: दिन बड़ी बातों से नहीं, छोटी-छोटी खुशियों से अच्छा बनता है।

आपकी बात — पृष्ठ 41पाठ से आगे

पाठ से आगे
प्र.21(क) कविता के माध्यम से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें पूरा करने का आशीर्वाद दिया गया है। दिन-प्रतिदिन के जीवन में आपको अपने माता-पिता, अध्यापक एवं परिजनों से किस तरह के आशीर्वाद मिलते हैं? अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

माँ रोज़ सुबह स्कूल जाते समय कहती हैं — “ध्यान से जाना, मन लगाकर पढ़ना।” परीक्षा के दिन पिताजी कहते हैं — “डरना मत, जितना आता है उतना अच्छा लिख देना।” त्योहार पर दादी सिर पर हाथ रखकर कहती हैं — “ख़ूब पढ़ो, ख़ूब आगे बढ़ो।” प्रश्न ग़लत होने पर अध्यापिका कहती हैं — “कोई बात नहीं, फिर से करो, तुमसे हो जाएगा।” ये आशीर्वाद मुझे हिम्मत और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

प्र.22(ख) आप भी अपने से छोटों के प्रति किसी न किसी प्रकार से शुभेच्छा प्रकट करते हैं, उन्हें लिखिए।
उत्तर

छोटी बहन परीक्षा देने जाती है तो मैं कहता हूँ — “आराम से लिखना, तुम्हें सब आता है।” पड़ोस का बच्चा साइकिल सीखते हुए गिरता है तो कहता हूँ — “गिरकर ही आएगी, फिर चलाओ।” मैं व्यवहार से भी शुभेच्छा प्रकट करता हूँ — छोटी बहन को गणित का तरीक़ा समझा देता हूँ, अपनी पुरानी पुस्तकें छोटी कक्षा के बच्चों को दे देता हूँ और खेल में छोटे बच्चों को भी टीम में ले लेता हूँ।

सपनों की बातें — पृष्ठ 41पाठ से आगे

पाठ से आगे
प्र.23(क) आप क्या करना चाहते हैं और क्या पाना चाहते हैं? उन्हें एक परची पर लिखें। परची पर अपना नाम लिखना आवश्यक नहीं है। अपने अध्यापक द्वारा लाए गए डिब्बे में अपनी-अपनी परची को डाल दें। अध्यापक एक-एक करके इन परचियों पर लिखे सपनों को पढ़कर सुनाएँ। सभी विद्यार्थी अपने-अपने सुझाव दें कि उन सपनों को पूरा करने के लिए—
• किस तरह के प्रयत्न करने होंगे?
• किस तरह से योजना बनानी होगी?
• किससे और किस प्रकार का सहयोग लिया जा सकता है?
• लक्ष्य-प्राप्ति में संभावित चुनौतियाँ कौन-कौन सी हो सकती हैं?
उत्तर

परची: “मैं पशु-चिकित्सक बनना चाहता/चाहती हूँ।”

प्रयत्न: विज्ञान, विशेषकर जीव विज्ञान, में अच्छी पकड़; पशुओं और पशुपालकों को ध्यान से देखना-समझना।
योजना: कक्षा 8–10 में विज्ञान और गणित मज़बूत करना, 11–12 में जीव विज्ञान लेना, फिर प्रवेश परीक्षा की तैयारी; हर सप्ताह का एक छोटा लक्ष्य।
सहयोग: विज्ञान के अध्यापक, पास के पशु-चिकित्सक, पुस्तकालय और परिवार से; छात्रवृत्ति की जानकारी विद्यालय से।
चुनौतियाँ: पढ़ाई का ख़र्च, प्रवेश परीक्षा की कड़ी प्रतियोगिता और बीच में मन का डगमगाना।

हमारे सपने — पृष्ठ 42पाठ से आगे

पाठ से आगे
प्र.24आपके माता-पिता या अभिभावक आपकी आवश्यकताओं और इच्छाओं को जानते-समझते हैं। वे उन्हें पूरा करने के लिए यथासंभव प्रयत्न करते हैं। अपने माता-पिता या अभिभावक से उनके द्वारा देखे गए सपने और इच्छाओं के बारे में पूछिए कि वे क्या-क्या करना चाहते थे या चाहते हैं? नीचे दी गई तालिका में उन सपनों को लिखिए। आप इस तालिका को और बढ़ा सकते हैं।
घर के सदस्यों के सपने
माता 
पिता 
दादा 
दादी 
नाना 
नानी 
बहन 
भाई 
उत्तर

पूछने के लिए तीन प्रश्न: (1) बचपन में आप क्या बनना चाहते थे? (2) वह सपना पूरा हुआ या नहीं — और क्यों? (3) अब आपका कोई सपना है?

नमूना उत्तर — घर के सदस्यों के सपने

सदस्यसपने और इच्छाएँ
मातावे अध्यापिका बनना चाहती थीं। बारहवीं के बाद पढ़ाई छूट गई। अब उनका सपना है कि मैं और मेरी बहन दोनों उच्च शिक्षा तक पहुँचें। वे सिलाई सीखकर घर पर छोटा काम शुरू करना चाहती हैं।
पितावे सेना में जाना चाहते थे, पर दो बार चयन नहीं हुआ। अब वे खेत में ड्रिप सिंचाई लगवाना चाहते हैं ताकि पानी बचे और फ़सल अच्छी हो।
दादावे गाँव में एक पुस्तकालय खुलवाना चाहते हैं, क्योंकि उनके समय में पढ़ने के लिए किताबें ही नहीं मिलती थीं।
दादीवे लोकगीत बहुत अच्छे गाती हैं। उनका सपना है कि गाँव की लड़कियाँ ये गीत सीखें ताकि वे खो न जाएँ।
नानावे चाहते थे कि आम की एक नई क़िस्म तैयार करें। आज भी वे बाग़ में तरह-तरह की कलम लगाते रहते हैं।
नानीवे लिखना-पढ़ना सीखना चाहती हैं। अब वे प्रौढ़ शिक्षा कक्षा में जाकर अपना नाम लिखना सीख चुकी हैं।
बहनवह ज़िले की कबड्डी टीम में खेलना चाहती है और रोज़ सुबह अभ्यास करती है।
भाईवह मोबाइल के छोटे-छोटे ऐप बनाना सीखना चाहता है और कहता है कि एक दिन गाँव के लिए मंडी-भाव बताने वाला ऐप बनाएगा।

सबके सपने — पृष्ठ 42पाठ से आगे

पाठ से आगे
प्र.25प्रतिदिन की आवश्यकताओं को पूरा करने में बहुत-से लोग सहयोग देते हैं, जैसे— शाक विक्रेता, स्वच्छताकर्मी, रिक्शाचालक, सुरक्षाकर्मी आदि। इनमें से किसी एक से साक्षात्कार कीजिए और उनके सपनों के विषय में जानिए। साक्षात्कार के समय कौन-कौन से प्रश्न हो सकते हैं? उनकी एक सूची भी बनाइए।
उत्तर

साक्षात्कार के प्रश्नों की सूची

वर्गप्रश्न
परिचयआपका नाम क्या है? आप यह काम कब से कर रहे हैं? आप मूल रूप से कहाँ के हैं?
काम के बारे मेंआपका दिन कितने बजे शुरू होता है? इस काम में आपको सबसे अच्छा क्या लगता है? सबसे कठिन क्या लगता है?
सपनों के बारे मेंबचपन में आप क्या बनना चाहते थे? वह सपना पूरा हुआ या रह गया? आज आपका सबसे बड़ा सपना क्या है? अपने बच्चों के लिए आप क्या सपना देखते हैं?
सहयोग और चुनौतीअपने सपने को पूरा करने में आपको किससे सहायता मिली? कौन-सी कठिनाई सबसे बड़ी रही?
हमारे लिएहम विद्यार्थियों को आप क्या सलाह देना चाहेंगे? आपके काम को आसान बनाने के लिए हम क्या कर सकते हैं?

नमूना उत्तर (साक्षात्कार का सार): मैंने सब्ज़ी बेचने वाली शांति देवी से बात की। वे बचपन में पढ़ना चाहती थीं, पर तीसरी कक्षा के बाद विद्यालय छूट गया। अब उनका सपना है कि उनकी बेटी नर्स बने। उनकी सबसे बड़ी कठिनाई है — बरसात में सब्ज़ी ख़राब हो जाना। उनकी सलाह थी — “पढ़ाई एक दिन भी मत छोड़ना।”

झरोखे से — पृष्ठ 42 और 43पाठ से आगे

पाठ से आगे
प्र.26आपने पढ़ा कि ‘एक आशीर्वाद’ कविता में सपनों के बड़े होने की बात की गई है। अब आप पढ़िए सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का एक प्रेरक उद्‌बोधन जिसमें वे न केवल सपने देखने की बात करते हैं, बल्कि सपनों को पूरा करने की योजना और प्रक्रिया के विषय में भी बताते हैं—

सपनों की उड़ान

सपने वह नहीं होते जो आप नींद में देखते हैं, सपने वह होते हैं जो आपको सोने नहीं देते। अपने सपने पूरे करने के लिए आपको जागते रहना होता है, पूरी तरह आँखें खोलकर जागते रहना होता है।

आज जितनी संभावनाएँ हैं, उतनी अब तक के समूचे इतिहास में पहले कभी नहीं थीं। इक्कीसवीं सदी ऐसे अनुभव पैदा कर रही है जिन्हें मानव के विकास की पिछली बीस शताब्दियों में असंभव समझा जाता था। ऐसे माहौल में जब प्रौद्योगिकी और नित नई खोजों के बल पर मानव सभ्यता तरक्की करती जा रही है, इंसान में छिपी संभावनाओं का भी तेजी से विस्तार होता जा रहा है। लेकिन इन अवसरों का अनुभव करने के लिए हमारे पास जो समय है वह उतना का उतना ही है और आज के युवा इसी दुविधा में हैं। युवा चाहते हैं कि उनके सामने जितने किस्म के अनुभव उपलब्ध हैं, वह सबका फायदा उठा सकें, जो कि उन्हें मिलना भी चाहिए लेकिन जैसे-जैसे दुनिया का दायरा बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे हमें खुद को कुछ खास विषयों के संकरे दायरे में सीमित कर लेना पड़ रहा है। मुझे नहीं लगता कि ऐसा करना सही है। मेरा सपना है कि संसार के हर युवा को संसार के वह सारे अनुभव मिल सकें जिसकी उन्हें चाह हो। लेकिन इसे कैसे संभव बनाया जा सकता है?

इसे संभव बनाने के दो तरीके हैं। एक तो यह कि हम कुछ ऐसा करें कि हमारे पास जो समय उपलब्ध है उसे हम बढ़ा सकें। दूसरा यह कि हमारे पास जो समय है हम उतने ही समय में जितना काम कर सकते हैं, जितना कुछ हासिल कर सकते हैं उसकी मात्रा बढ़ा दें। इन दोनों जीवन-लक्ष्यों को कैसे प्राप्त किया जाए, यह समझ लेने से दूसरी हर चीज तक पहुँचने के दरवाजे खुद-ब-खुद खुल जाएँगे। यही वह लंबी छलांग है जिसका मानवता को अब तक इंतजार था और जो हमें विकास क्रम के अगले चरण तक पहुँचा सकती है।

— डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

उत्तर

उद्‌बोधन का सार: डॉ. कलाम कहते हैं — “सपने वह नहीं होते जो आप नींद में देखते हैं, सपने वह होते हैं जो आपको सोने नहीं देते।” आज अवसर और संभावनाएँ बहुत बढ़ गई हैं, पर समय उतना ही है; इसलिए युवाओं को ख़ुद को कुछ खास विषयों तक सीमित करना पड़ता है। इसके दो उपाय हैं — (1) उपलब्ध समय को बढ़ाना, (2) उतने ही समय में काम की मात्रा बढ़ाना। यही मानवता की ‘लंबी छलांग’ होगी।

साझी समझ — पृष्ठ 44पाठ से आगे

पाठ से आगे
प्र.27आपने ‘एक आशीर्वाद’ कविता पढ़ी और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उपर्युक्त उद्‌बोधन भी पढ़ा। अब आप इन दोनों पर कक्षा में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर

नमूना उत्तर — चर्चा के मुख्य बिंदु:

  • दोनों रचनाएँ सपनों के बारे में हैं। कविता बड़े सपनों का आशीर्वाद देती है; डॉ. कलाम सपनों को पूरा करने की योजना और प्रक्रिया बताते हैं।
  • कविता कहती है कि सपने “भावना की गोद से उतरकर” पृथ्वी पर चलें; कलाम कहते हैं कि सपने वे हैं “जो आपको सोने नहीं देते”। दोनों का अर्थ है — सपने के लिए जागकर काम करना।
  • ‘एक आशीर्वाद’ मुक्त छंद की कविता है; ‘सपनों की उड़ान’ गद्य में लिखा उद्‌बोधन है।
  • निष्कर्ष: दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं — बड़ा सपना और उसे पूरा करने की ठोस योजना।

खोजबीन के लिए — पृष्ठ 44पाठ से आगे

खोजबीन
प्र.28कला, विज्ञान, राजनीति, खेलकूद, मनोरंजन आदि क्षेत्रों में ख्याति प्राप्त करने वाले व्यक्तियों ने अपने-अपने सपनों को पूरा करने की संघर्ष यात्रा के बारे में लिखा है। उन्होंने अपने सपनों को साकार करने के लिए किस तरह से योजना बनाई, क्या-क्या संघर्ष किए? पुस्तकालय अथवा इंटरनेट की सहायता से ऐसे व्यक्तियों के बारे में पढ़िए।
उत्तर

नमूना उत्तर — डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम: उनका बचपन रामेश्वरम में बीता। परिवार की सहायता के लिए वे बचपन में अख़बार बाँटते थे। वे वायुसेना में पायलट बनना चाहते थे, पर चयन नहीं हुआ। निराश हुए बिना वे रक्षा अनुसंधान और फिर इसरो में वैज्ञानिक बने। उनके निर्देशन में एस.एल.वी.-3 रॉकेट ने 1980 में ‘रोहिणी’ उपग्रह को कक्षा में पहुँचाया। बाद में वे भारत के राष्ट्रपति बने। यह संघर्ष-यात्रा उनकी आत्मकथा अग्नि की उड़ान में है।

Chapter 3 of 10 – Hindi

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