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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 10 Meera Ke Pad (PDF) – 2027

NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 10 Meera Ke Pad – step-by-step answers to every exercise and in-text question of the chapter, as per the latest NCERT syllabus for 2027. Read them online or download the free question-answer PDF.

मल्हार (कक्षा 7) के पाठ 10 मीरा के पद में कृष्ण-भक्त कवयित्री मीरा के दो पद हैं — पहला “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” श्रीकृष्ण के रूप का और दूसरा “बरसे बदरिया सावन की” सावन की झड़ी का चित्र खींचता है। यहाँ पृष्ठ 128 से 143 तक की हर गतिविधि का हल है। हर प्रश्न में पहले वह उत्तर है जो कॉपी में लिखना है; कारण, संकेत और अतिरिक्त जानकारी ‘विस्तार से समझिए’ में है।

NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 10 Meera Ke Pad PDF

All the answers are on this page below. The PDF also explains every answer – why it is right and how to check it – so download it for revision.

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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 10 Meera Ke Pad – Questions and Answers

All questions of the chapter are answered below, in the order of the book – in-text questions, activities and the end-of-chapter exercises. Each answer is written the way you would write it in the exam.

मेरी समझ से — पृष्ठ 129 और 130पाठ से

पाठ से
प्र.1(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” पद में मीरा किनसे विनती कर रही हैं?
• संतों से
• भक्तों से
• वैजंती से
• श्रीकृष्ण से
उत्तर

★ श्रीकृष्ण से

कारण: ‘नंदलाल’ (नंद के लाल) श्रीकृष्ण का ही नाम है। मीरा उन्हीं से विनती करती हैं — “बसो मेरे नैनन में नंदलाल”, यानी हे नंदलाल! आप मेरी आँखों में बस जाइए।

प्र.2(2) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” पद का मुख्य विषय क्या है?
• प्रेम और भक्ति
• प्रकृति की सुंदरता
• युद्ध और शांति
• ज्ञान और शिक्षा
उत्तर

★ प्रेम और भक्ति

कारण: मीरा अपने आराध्य श्रीकृष्ण से अपनी आँखों में बस जाने की विनती करती हैं, प्रेम से उनके रूप का वर्णन करती हैं और उन्हें ‘संतन सुखदाई’ तथा ‘भक्त वछल’ कहती हैं। यह भक्ति-भाव है।

प्र.3(3) “बरसे बदरिया सावन की” पद में कौन-सी ऋतु का वर्णन किया गया है?
• सर्दी
• गरमी
• वर्षा
• वसंत
उत्तर

★ वर्षा

कारण: पद में सावन, बरसती बदरिया, दमकती दामिनी (बिजली), नन्हीं-नन्हीं बूँदें और शीतल पवन का वर्णन है — ये सब वर्षा ऋतु की पहचान हैं।

प्र.4(4) “बरसे बदरिया सावन की” पद को पढ़कर ऐसा लगता है, जैसे मीरा—
• प्रसन्न हैं।
• दुखी हैं।
• उदास हैं।
• चिंतित हैं।
उत्तर

★ प्रसन्न हैं।

कारण: “सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की” — प्रभु के आने की भनक से मीरा का मन उमंग से भर गया है, और अंत में “आनंद मंगल” के गीत गाए जा रहे हैं।

प्र.5(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

मैंने (1) में ‘श्रीकृष्ण से’ चुना, क्योंकि ‘नंदलाल’ उन्हीं का नाम है। (2) में ‘प्रेम और भक्ति’, क्योंकि मीरा उन्हें ‘भक्त वछल’ कहकर प्रार्थना करती हैं। (3) में ‘वर्षा’, क्योंकि पद में सावन और बरसती बदरिया है। (4) में ‘प्रसन्न हैं’, क्योंकि “उमग्यो मेरो मनवा” और “आनंद मंगल गावन की” प्रसन्नता के शब्द हैं।

मिलकर करें मिलान — पृष्ठ 130पाठ से

पाठ सेमिलान
प्र.1पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
शब्दअर्थ/संदर्भ
1. नंदलाल1. पर्वत को धारण करने वाले, श्रीकृष्ण
2. वैजंती माल2. श्रावण का महीना, आषाढ़ के बाद का और भाद्रपद के पहले का महीना
3. सावन3. वैजयंती पौधे के बीजों से बनने वाली माला
4. गिरधर4. नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण
उत्तर

सही मिलान: 1 → 4, 2 → 3, 3 → 2, 4 → 1

शब्दमिलानअर्थ/संदर्भपद की पंक्ति
1. नंदलाल→ 4नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण“बसो मेरे नैनन में नंदलाल”
2. वैजंती माल→ 3वैजयंती पौधे के बीजों से बनने वाली माला“उर वैजंती माल”
3. सावन→ 2श्रावण का महीना, आषाढ़ के बाद का और भाद्रपद के पहले का महीना“बरसे बदरिया सावन की”
4. गिरधर→ 1पर्वत को धारण करने वाले, श्रीकृष्ण“मीरा के प्रभु गिरधरनागर”

पंक्तियों पर चर्चा — पृष्ठ 130पाठ से

पाठ सेकाव्य-सौंदर्य
प्र.1पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की॥”
उत्तर

अर्थ: नन्हीं-नन्हीं बूँदों के रूप में मेह (वर्षा) बरस रहा है और उसके साथ ठंडी, सुहावनी हवा बह रही है।

भाव: यह डराने वाली मूसलाधार बारिश नहीं, कोमल और सुखद फुहार है। यह ठंडक मीरा को बाहर भी मिल रही है और मन के भीतर भी, क्योंकि उन्हें प्रभु के आने की भनक मिल चुकी है।

प्र.2(ख) “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल॥”
उत्तर

अर्थ: मीरा के प्रभु (श्रीकृष्ण) संतों को सुख देने वाले हैं और भक्तों से वत्सल भाव यानी माता-पिता जैसा स्नेह रखने वाले गोपाल हैं।

भाव: पहले मीरा ने प्रभु का सुंदर रूप बताया था; इस अंतिम पंक्ति में वे उनका दयालु स्वभाव बताती हैं — वे संतों को सुख देते हैं और भक्तों से स्नेह करते हैं।

सोच-विचार के लिए — पृष्ठ 131पाठ से

पाठ से
प्र.1पाठ को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—
(क) पहले पद में श्रीकृष्ण के बारे में क्या-क्या बताया गया है?
उत्तर

उत्तर: पहले पद में बताया गया है कि श्रीकृष्ण नंदलाल हैं। उनकी मूरत मन मोहने वाली, सूरत साँवली और आँखें बड़ी-बड़ी हैं। उनके होंठों पर अमृत-सी मधुर मुरली सजी है और छाती पर वैजयंती माला है। कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ शोभा देती हैं और पैरों के नूपुर मीठी ध्वनि करते हैं। वे संतों को सुख देने वाले और भक्तों से स्नेह करने वाले गोपाल हैं।

प्र.2(ख) दूसरे पद में सावन के बारे में क्या-क्या बताया गया है?
उत्तर

उत्तर: दूसरे पद के अनुसार सावन मन को भाने वाला महीना है। इसमें बदरिया बरसती है और मन उमंग से भर जाता है। बादल चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर आते हैं, बिजली चमकती है और वर्षा की झड़ी लग जाती है। नन्हीं-नन्हीं बूँदें बरसती हैं और ठंडी, सुहावनी हवा बहती है। ऐसे में मीरा को प्रभु के आने की भनक मिलती है और आनंद-मंगल के गीत गाए जाते हैं।

कविता की रचना — पृष्ठ 131पाठ से

पाठ सेकाव्य-सौंदर्य
प्र.1“मीरा के प्रभु संतन सुखदाई”
“मीरा के प्रभु गिरधरनागर”
इन दोनों पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों में मीरा ने अपने नाम का उल्लेख किया है। मीरा के समय के अनेक कवि अपनी रचना के अंत में अपने नाम को सम्मिलित कर दिया करते थे। आज भी कुछ कवि अपना नाम कविता में जोड़ देते हैं।
आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। (जैसे— कविता में छोटी-छोटी पंक्तियाँ हैं। श्रीकृष्ण के लिए अलग-अलग नामों का प्रयोग किया गया है आदि।)
(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए।
उत्तर

पाठ की विशेषताएँ —

  1. पद के अंत में कवयित्री का नाम — “मीरा के प्रभु…”।
  2. छोटी-छोटी पंक्तियाँ; दोनों पद पाँच-पाँच पंक्तियों के हैं।
  3. श्रीकृष्ण के लिए अनेक नाम — नंदलाल, गोपाल, हरि, गिरधरनागर, प्रभु।
  4. हर पंक्ति के अंत में एक-सी तुक — नंदलाल, विशाल, माल, रसाल, गोपाल।
  5. गाने योग्य लय और बार-बार दोहराई जाने वाली टेक।
  6. ब्रज-राजस्थानी मिली-जुली भाषा — नैनन, मनवा, बदरिया।
  7. अनुप्रास — “बरसे बदरिया”, “मोहनि मूरति”।
  8. रूप-वर्णन ऊपर से नीचे — मुख, नैन, अधर, उर, कमर, पैर।
प्र.2(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर

नमूना प्रस्तुति: “हमारे समूह को इस पाठ की सबसे बड़ी विशेषता यह लगी कि मीरा ने अपना नाम कविता के भीतर ही रख दिया है — ‘मीरा के प्रभु’। दूसरी विशेषता यह कि दोनों पदों में हर पंक्ति का अंत एक-सी तुक पर होता है, इसीलिए ये पद गाने में इतने मीठे लगते हैं।”

अनुमान और कल्पना से — पृष्ठ 131पाठ से

पाठ सेकल्पना
प्र.1अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) मान लीजिए कि बादलों ने मीरा को श्रीकृष्ण के आने का संदेश सुनाया है। आपको क्या लगता है कि उन्होंने क्या कहा होगा? कैसे कहा होगा?
उत्तर

बादलों ने गरजकर कहा होगा — “मीरा! चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर हम तुम्हें एक खबर देने आए हैं। तुम्हारे गिरधर नागर आ रहे हैं!” यह बात उन्होंने शब्दों से नहीं, संकेतों से कही होगी — गड़गड़ाहट से पुकारा, बिजली चमकाकर राह जगमगाई और नन्हीं बूँदों व शीतल पवन से मीरा को छुआ। इसीलिए मीरा कहती हैं — “भनक सुनी हरि आवन की”।

प्र.2(ख) यदि आपको मीरा से बातचीत करने का अवसर मिल जाए तो आप उनसे क्या-क्या कहेंगे और क्या-क्या पूछेंगे?
उत्तर

मैं कहूँगा/कहूँगी: “आपके पद आज पाँच सौ वर्ष बाद भी गाए जाते हैं। आपने महल छोड़कर जो रास्ता चुना, उसके लिए बहुत साहस चाहिए था।”

मैं पूछूँगा/पूछूँगी: (1) राजकुमारी होते हुए भी आपने संतों का जीवन क्यों चुना? (2) सावन के बादलों में आपको श्रीकृष्ण के आने की भनक कैसे सुनाई दी? (3) आप श्रीकृष्ण को ‘गिरधर नागर’ ही अधिक क्यों कहती हैं?

शब्दों के रूप — पृष्ठ 131 और 132पाठ से

पाठ सेशब्दों की बात
प्र.1(क) “मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल।”
इस पंक्ति में ‘साँवरि’ शब्द आया है। इसके स्थान पर अधिकतर ‘साँवली’ शब्द का प्रयोग किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं, जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस तरह से लिखिए।
• नैनन ________   • मेरो मनवा ________
• सोभित ________   • आवन ________
• भक्त वछल ________   • दिश ________
• बदरिया ________   • मेहा ________
उत्तर

उत्तर: नैनन — नयनों में/नैनों में; सोभित — शोभित; भक्त वछल — भक्तवत्सल; बदरिया — बदली/बादल; मेरो मनवा — मेरा मन; आवन — आना/आगमन; दिश — दिशा; मेहा — मेह/वर्षा।

शब्द से जुड़े शब्द — पृष्ठ 132पाठ से

पाठ सेशब्दों की बात
प्र.1नीचे दिए गए स्थानों में श्रीकृष्ण से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए—
मुरलीश्रीकृष्ण
(पुस्तक पृष्ठ 132 का शब्द-जाल: बीच में ‘श्रीकृष्ण’, सात खाने, जिनमें से एक में ‘मुरली’ पहले से भरा है।)
उत्तर

उत्तर: नंदलाल, वैजंती माल, क्षुद्र घंटिका, नूपुर, गोपाल, गिरधरनागर (मुरली पहले से दिया है)। इनके स्थान पर ‘हरि’ भी लिखा जा सकता है।

नंदलालमुरलीवैजंती मालक्षुद्र घंटिकानूपुरगोपालगिरधरनागरश्रीकृष्ण

पंक्ति से पंक्ति — पृष्ठ 132पाठ से

पाठ सेमिलान
प्र.1नीचे स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलती-जुलती पंक्तियों को रेखा खींचकर मिलाइए—
स्तंभ 1स्तंभ 2
1. अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल1. चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर बरस रहे हैं, बिजली चमक रही है, वर्षा की झड़ी लग गई है।
2. क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल2. होंठों पर सुरीली धुनों से भरी हुई बाँसुरी और सीने पर वैजयंती माला सजी हुई है।
3. मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल3. सावन के महीने में मेरे मन में बहुत-सी उमंगें उठ रही हैं, क्योंकि मैंने श्रीकृष्ण के आने की चर्चा सुनी है।
4. सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की4. हे मीरा के प्रभु! तुम संतों को सुख देने वाले हो और अपने भक्तों से स्नेह करने वाले हो।
5. उमड़ घुमड़ चहूँ दिश से आया, दामिन दमकै झर लावन की5. कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हुई हैं और पैरों में बँधे हुए नूपुर मीठी आवाज में बोल रहे हैं।
उत्तर

सही मिलान: 1 → 2, 2 → 5, 3 → 4, 4 → 3, 5 → 1

स्तंभ 1 (पद की पंक्ति)मिलानस्तंभ 2 (अर्थ)पहचान का सूत्र
1. अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल→ 2होंठों पर सुरीली धुनों से भरी हुई बाँसुरी और सीने पर वैजयंती माला सजी हुई है।अधर = होंठ, मुरली = बाँसुरी, उर = सीना
2. क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल→ 5कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हुई हैं और पैरों में बँधे हुए नूपुर मीठी आवाज में बोल रहे हैं।क्षुद्र = छोटी, कटितट = कमर, नूपुर = पायल
3. मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल→ 4हे मीरा के प्रभु! तुम संतों को सुख देने वाले हो और अपने भक्तों से स्नेह करने वाले हो।संतन सुखदाई, भक्त वछल — दोनों शब्द ज्यों के त्यों
4. सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की→ 3सावन के महीने में मेरे मन में बहुत-सी उमंगें उठ रही हैं, क्योंकि मैंने श्रीकृष्ण के आने की चर्चा सुनी है।उमग्यो = उमंग, भनक = आहट/चर्चा
5. उमड़ घुमड़ चहूँ दिश से आया, दामिन दमकै झर लावन की→ 1चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर बरस रहे हैं, बिजली चमक रही है, वर्षा की झड़ी लग गई है।चहूँ दिश = चारों दिशा, दामिन = बिजली, झर = झड़ी

कविता का सौंदर्य — पृष्ठ 133पाठ से

पाठ सेकाव्य-सौंदर्य
प्र.1“बरसे बदरिया सावन की।”
इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। क्या आपको कोई विशेष बात दिखाई दी?
इस पंक्ति में ‘बरसे’ और ‘बदरिया’ दोनों शब्द साथ-साथ आए हैं और दोनों ‘ब’ वर्ण से शुरू हो रहे हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो इस पंक्ति में ‘ब’ वर्ण की आवृत्ति हो रही है। इस कारण यह पंक्ति और भी अधिक सुंदर बन गई है। पाठ में से इस प्रकार के अन्य उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर

उत्तर: पाठ में एक ही वर्ण की आवृत्ति के अन्य उदाहरण ये हैं। (इसे अनुप्रास कहते हैं।)

पंक्तिजो शब्द साथ आएदोहराया गया वर्ण
“बसो मेरे नैनन में नंदलाल”नैनन, नंदलालन
“मोहनि मूरति साँवरि सूरति”मोहनि, मूरतिम
“मोहनि मूरति साँवरि सूरति”साँवरि, सूरतिस
“अधर सुधा रस मुरली राजति”रस, मुरली, राजतिर
“क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित”घंटिका, कटितटक
“मीरा के प्रभु संतन सुखदाई”संतन, सुखदाईस
“सावन की, सावन की मन भावन की”सावन, सावनस
“सावन में उमग्यो मेरो मनवा”मेरो, मनवाम
“उमड़ घुमड़ चहूँ दिश से आया”उमड़, घुमड़म, ड़
“दामिन दम कै झर लावन की”दामिन, दमद
“नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे”नन्हीं, नन्हींन
“आनंद मंगल गावन की”मंगल, गावनग

रूप बदलकर — पृष्ठ 133पाठ से

पाठ सेलेखन
प्र.1पाठ के किसी एक पद को एक अनुच्छेद के रूप में लिखिए। उदाहरण के लिए— ‘सावन के बादल बरस रहे हैं..’ या ‘सावन की बदरिया बरसती है…’ आदि।
उत्तर

नमूना उत्तर (“बरसे बदरिया सावन की” का अनुच्छेद):

सावन की बदरिया बरस रही है। सावन का यह महीना सबके मन को भाता है। मेरा मन उमंग से भर उठा है, क्योंकि मैंने अपने प्रभु के आने की आहट सुन ली है। चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर आए हैं, बिजली चमक रही है और वर्षा की झड़ी लग गई है। नन्हीं-नन्हीं बूँदें बरस रही हैं और ठंडी, सुहावनी हवा बह रही है। मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु गिरधर नागर हैं, इसलिए चारों ओर आनंद-मंगल के गीत गाए जा रहे हैं।

मुहावरे — पृष्ठ 133पाठ से

पाठ सेभाषा की बात
प्र.1“बसो मेरे नैनन में नंदलाल।”
नैनों या आँखों में बस जाना एक मुहावरा है, जब हमें कोई व्यक्ति या वस्तु इतनी अधिक प्रिय लगने लगती है कि उसका ध्यान हर समय मन में बना रहने लगता है तब हम इस मुहावरे का प्रयोग करते हैं, जैसे — उसकी छवि मेरी आँखों में बस गई है। ऐसा ही एक अन्य मुहावरा है— आँखों में घर करना।
नीचे आँखों से जुड़े कुछ और मुहावरे दिए गए हैं। अपने परिजनों, साथियों, शिक्षकों, पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता से इनके अर्थ समझिए और इनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
1. आँखों का तारा
उत्तर

अर्थ: बहुत अधिक प्रिय, सबसे अधिक दुलारा।

वाक्य प्रयोग: छोटी बहन घर में सबसे छोटी है, इसीलिए वह दादी की आँखों का तारा है।
प्र.22. आँखों पर पर्दा पड़ना
उत्तर

अर्थ: सामने का सच दिखाई न देना; लोभ, मोह या क्रोध के कारण सही-ग़लत का ध्यान न रहना।

वाक्य प्रयोग: लालच में उसकी आँखों पर ऐसा पर्दा पड़ा कि वह अपने ही मित्र को धोखा दे बैठा।
प्र.33. आँखों के आगे अँधेरा छाना
उत्तर

अर्थ: अचानक कुछ न सूझना; बुरी खबर या बड़े दुख से घबरा जाना, चक्कर आ जाना।

वाक्य प्रयोग: दुर्घटना का समाचार सुनते ही माँ की आँखों के आगे अँधेरा छा गया।
प्र.44. आँख दिखाना
उत्तर

अर्थ: क्रोध से घूरना, डाँटना या डराना-धमकाना।

वाक्य प्रयोग: मुझे आँख मत दिखाओ, मैं वही कह रहा हूँ जो सच है।
प्र.55. आँख का काँटा
उत्तर

अर्थ: जो बिलकुल न सुहाए; जिसे देखकर चुभन हो, ऐसा व्यक्ति।

वाक्य प्रयोग: ईमानदार अफ़सर धीरे-धीरे भ्रष्ट लोगों की आँख का काँटा बन गया।
प्र.66. आँखें फेरना
उत्तर

अर्थ: पहले जैसा स्नेह छोड़ देना, बेरुख़ी दिखाना, पहचानने से मुँह मोड़ लेना।

वाक्य प्रयोग: अपना काम निकल जाने के बाद उसने हमसे आँखें फेर लीं।
प्र.77. आँख भर आना
उत्तर

अर्थ: आँखों में आँसू आ जाना, भावुक हो जाना।

वाक्य प्रयोग: विदाई-समारोह में शिक्षिका का भाषण सुनकर सबकी आँखें भर आईं।
प्र.88. आँखें चुराना
उत्तर

अर्थ: सामना करने से बचना; लज्जा या अपराध-बोध के कारण नज़र न मिलाना।

वाक्य प्रयोग: काँच टूटने की बात पकड़ी जाने पर वह सबसे आँखें चुराने लगा।
प्र.99. आँखों से उतारना
उत्तर

अर्थ: मन से उतार देना; जो पहले प्रिय था उसका आदर-प्रेम समाप्त कर देना।

वाक्य प्रयोग: एक ही झूठ ने उसे सबकी आँखों से उतार दिया।
प्र.1010. आँखों में खटकना
उत्तर

अर्थ: बुरा लगना, अखरना; किसी की उन्नति या उपस्थिति सहन न होना।

वाक्य प्रयोग: उसकी तरक्की कुछ लोगों की आँखों में खटकने लगी।

सबकी प्रस्तुति — पृष्ठ 134पाठ से

पाठ सेगतिविधि
प्र.1पाठ के किसी एक पद को चुनकर अपने समूह के साथ मिलकर अलग-अलग तरीके से कक्षा के सामने प्रस्तुत कीजिए, उदाहरण के लिए—
• गायन करना।
• भाव-नृत्य प्रस्तुति करना।
• कविता पाठ करना आदि।
उत्तर

नमूना योजना: “हमारा समूह ‘बरसे बदरिया सावन की’ गाएगा। दो साथी ताली से ताल देंगे, एक साथी टेक (“बरसे बदरिया सावन की”) गाएगा, तीन साथी बारी-बारी से अगली पंक्तियाँ गाएँगे और अंतिम पंक्ति ‘आनंद मंगल गावन की’ हम सब मिलकर दो बार गाएँगे।”

आपकी बात — पृष्ठ 134पाठ से आगे

पाठ से आगे
प्र.1(क) “बरसे बदरिया सावन की”
1. इस पद में सावन का सुंदर चित्रण किया गया है। जब आपके गाँव या नगर में सावन आता है तो मौसम में क्या परिवर्तन आते हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर

“हमारे गाँव में सावन आते ही आकाश काले बादलों से घिर जाता है और दोपहर में भी साँझ जैसा लगता है। गरमी की तपन टूट जाती है और हवा ठंडी हो जाती है। पहली बारिश पर गीली मिट्टी की सोंधी महक फैल जाती है। खेत हरे हो जाते हैं और किसान धान की रोपाई में जुट जाते हैं। रात में मेंढकों की टर्र-टर्र गूँजती है और पगडंडियाँ कीचड़ से भर जाती हैं।”

प्र.22. सावन की ऋतु में किस-किस प्रकार की ध्वनियाँ सुनाई देती हैं? इन ध्वनियों को सुनकर आपके मन में कौन-कौन सी भावनाएँ उठती हैं? आप कैसा अनुभव करते हैं? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए। (उदाहरण के लिए — बिजली के कड़कने या बूँदों के टपकने की ध्वनियाँ।)
उत्तर

सावन में बादलों की गड़गड़ाहट, बिजली की कड़क, छत पर बूँदों की टप-टप, हवा की सरसराहट, मेंढकों की टर्र-टर्र और मोर की पुकार सुनाई देती है। बिजली कड़कने पर मैं चौंक जाता हूँ, पर बूँदों की टप-टप सुनकर मन शांत हो जाता है। मोर की पुकार और सावन के गीत सुनकर मन उमंग से भर जाता है।

प्र.33. वर्षा ऋतु में आपको कौन-कौन सी गतिविधियाँ करने या खेल खेलने में आनंद आता है?
उत्तर

वर्षा ऋतु में मुझे कागज़ की नाव बनाकर बहते पानी में छोड़ने, बारिश में भीगने और झूला झूलने में बहुत आनंद आता है। हम साथी अपनी-अपनी नाव एक साथ छोड़ते हैं और देखते हैं कि किसकी नाव सबसे आगे जाती है। बारिश थमने पर इंद्रधनुष के रंग गिनना भी मुझे अच्छा लगता है।

प्र.44. सावन के महीने में हमारे देश में अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। आपके घर, परिसर या गाँव में सावन में कौन-कौन से त्योहार मनाए जाते हैं? किसी एक के विषय में अपने अनुभव बताइए।
उत्तर

उत्तर: सावन में हरियाली तीज, नाग पंचमी और रक्षाबंधन जैसे त्योहार मनाए जाते हैं; कई जगह सावन के सोमवार का व्रत और कांवड़-यात्रा भी होती है।

नमूना अनुभव (रक्षाबंधन): “रक्षाबंधन पर माँ खीर बनाती हैं। दीदी मेरे माथे पर तिलक लगाकर मेरी कलाई पर राखी बाँधती हैं और मैं उन्हें अपनी बचत से उपहार देता हूँ। पिछले वर्ष मैंने उन्हें रंग-पेटी दी थी। इस दिन हमारी सारी लड़ाइयाँ अपने आप ख़त्म हो जाती हैं।”

प्र.5(ख) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल”
इस पद में मीरा श्रीकृष्ण को ‘संतों को सुख देने वाला’ और ‘भक्तों का पालन करने वाला’ कहती हैं।
1. क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जो सदैव आपकी सहायता करता है और आपको आनंदित करता है? विस्तार से बताइए।
उत्तर

“मेरे जीवन में ऐसी व्यक्ति मेरी नानी हैं। जब मैं उदास होता हूँ, वे बिना पूछे समझ जाती हैं और कोई कहानी सुनाकर मेरा मन हल्का कर देती हैं। पिछले वर्ष गणित में मेरे अंक कम आए तो उन्होंने डाँटा नहीं, बस कहा — ‘एक परीक्षा से कोई बच्चा तय नहीं होता।’ फिर वे रोज़ शाम मेरे साथ पहाड़े दोहराने लगीं और अगली परीक्षा में मेरे अंक अच्छे आए।”

प्र.62. कवयित्री ने पाठ में ‘नूपुर’ और ‘क्षुद्र घंटिका’ जैसे उदाहरणों का प्रयोग किया है। किसी का वर्णन करने के लिए हम केवल बड़ी-बड़ी ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी छोटी-छोटी बातें भी बता सकते हैं। आप भी अपने आस-पास के किसी व्यक्ति या वस्तु का वर्णन करते हुए उससे जुड़ी छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दीजिए और उन्हें लिखिए।
उत्तर

नमूना उत्तर (दादा जी): “दादा जी की छड़ी की नोक पर पीतल की एक छोटी-सी टोपी लगी है — घर में सबसे पहले उसी की ठक-ठक सुनाई देती है। उनके चश्मे की एक डंडी टूटकर धागे से बँधी है, पर वे नया चश्मा नहीं लेते। उनकी जेब में हमेशा दो इलायची रहती हैं — एक अपने लिए, एक मेरे लिए।”

विशेषताएँ — पृष्ठ 135पाठ से आगे

पाठ से आगे
प्र.1“मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल।”
(क) इस पंक्ति में कवयित्री ने श्रीकृष्ण की मोहनी मूरत, साँवरी सूरत और विशाल नैनों की बात की है। आपको श्रीकृष्ण की कौन-कौन सी बातों ने सबसे अधिक आकर्षित किया?
उत्तर

“मुझे श्रीकृष्ण की दो बातों ने सबसे अधिक आकर्षित किया। पहली — उनकी मुरली, जिसकी मधुर धुन से वे सबका मन जीत लेते हैं। दूसरी — उनका ‘भक्त वछल’ होना, यानी भक्तों से स्नेह करना। मुझे अच्छा लगता है कि वे बड़े होकर भी छोटे-से भक्त को नहीं भूलते। उनकी साँवली सूरत और विशाल नैन भी मन मोह लेते हैं।”

प्र.2(ख) किसी व्यक्ति या वस्तु का कौन-सा गुण आपको सबसे अधिक आकर्षित करता है? क्यों? अपने जीवन से जुड़े किसी व्यक्ति या वस्तु के उदाहरण से बताइए।
उत्तर

“मुझे किसी व्यक्ति का सबसे अच्छा गुण यह लगता है कि वह दूसरों की बात ध्यान से सुने। मेरी मित्र सलमा में यह गुण है। एक बार मैं खेल में हारकर निराश था। बाक़ी साथी सलाह देने लगे, पर सलमा ने बस पूछा — ‘बता, हुआ क्या था?’ और चुपचाप सुनती रही। बात कहते-कहते मेरा मन हल्का हो गया। तभी से मुझे लगता है कि ध्यान से सुनना भी बड़ी सहायता है।”

प्र.3(ग) हम सबकी कुछ विशेषताएँ बाह्य तो कुछ आंतरिक होती हैं। बाह्य विशेषताएँ तो हमें दिखाई दे जाती हैं, लेकिन आंतरिक विशेषताएँ व्यक्ति के व्यवहार से पता चलती हैं। आप अपनी दोनों प्रकार की विशेषताओं के दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर

मेरी बाह्य विशेषताएँ: (1) मेरे बाल घुँघराले हैं। (2) मैं कक्षा में सबसे लंबा हूँ, इसलिए प्रार्थना-सभा में सबसे पीछे खड़ा होता हूँ।

मेरी आंतरिक विशेषताएँ: (1) धैर्य — कोई सवाल एक बार में हल न हो तो मैं उसे छोड़ता नहीं, बार-बार करके देखता हूँ। (2) सहायता का भाव — जिस साथी की कॉपी छूट जाती है, उसे मैं अपनी कॉपी से साथ लिखवा लेता हूँ।

मधुर ध्वनियाँ — पृष्ठ 135 और 136पाठ से आगे

पाठ से आगेपहेली
प्र.1“अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल॥
क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल॥”
इन पंक्तियों में तीन ऐसी वस्तुओं के नाम आए हैं, जिनसे मधुर ध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं। उन वस्तुओं के नाम पहचानिए और उनके नीचे रेखा खींचिए।
उत्तर

उत्तर: तीन वस्तुएँ — मुरली, क्षुद्र घंटिका और नूपुर। पंक्तियों में इन्हीं के नीचे रेखा खींचिए।

प्र.2आगे मधुर ध्वनियाँ उत्पन्न करने वाले कुछ वाद्ययंत्रों के विषय में पहेलियाँ दी गई हैं। इन्हें पहचानकर सही चित्रों के साथ रेखा खींचकर मिलाइए—
पहेलीचित्र (पुस्तक में ऊपर से नीचे; यहाँ शब्दों में)
1. हवा से बोलती है, सुर में गीत सुनाती है,
होठों से छू जाए, तो मन को लुभाती है।
(क) लकड़ी का लंबा ढोल — दोनों सिरों पर चमड़ा मढ़ा, डोरियाँ कसी हुई
2. दो साथियों का जोड़ा, हाथों से है बजता,
ताल मिलाए ताल से, हर संगत में सजता।
(ख) छेदों वाली बाँस की पतली, सीधी नली
3. शाहों में शामिल होती, फूँकों से संगीत सुनाती,
सुख के सारे काम सजाती, दुख में भी ये साथ निभाती।
(ग) लकड़ी के चपटे बक्से पर कसे बहुत-से तार
4. तारों में छिपा संगीत, माँ सरस्वती का गहना,
छेड़े जब अँगुलियाँ, बहे रागों का झरना।
(घ) चमड़ा मढ़े दो छोटे ड्रमों की जोड़ी — एक लकड़ी का, एक धातु का
5. दो हाथों से बजती है ये, ताल से थिरकें पैर,
हर उत्सव की है ये साथी, लटक गले ये करती सैर।
(ङ) लंबी डंडी पर कसे तार, नीचे बड़ा गोल तूँबा और ऊपर छोटा तूँबा
6. नागिन-सी लहराती है जो, बड़ी खास आवाज है जिसकी,
तीन, चीन, रंगीन, हीन से मिली-जुली पहचान है इसकी।
(च) छेदों वाली नली, जिसका आगे का मुँह फैला हुआ (चौड़ा) है
7. सौ तारों का जादू, डंडियों से जो गाए,
कश्मीर की वादियों जैसा मधुर संगीत लाए।
(छ) डोरी से जुड़ी धातु की दो छोटी कटोरियाँ
8. छोटा-सा यंत्र है, हाथों से बजता जाए,
घर-मंदिर का साथी, झंकार से मन बहलाए।
(ज) लौकी जैसे गोल तूँबे से जुड़ी, छेदों वाली नलियाँ
उत्तर

उत्तर:

पहेलीउत्तरचित्र
1बाँसुरी(ख)
2तबला(घ)
3शहनाई(च)
4वीणा(ङ)
5ढोलक(क)
6बीन(ज)
7संतूर(ग)
8मजीरा(छ)

चित्र करते हैं बातें — पृष्ठ 137पाठ से आगे

पाठ से आगेलेखन
प्र.1नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए— यह मीरा का काँगड़ा शैली में बना चित्र है। इस चित्र के आधार पर मीरा के संबंध में एक अनुच्छेद लिखिए।
पुस्तक (पृष्ठ 137) का चित्र (यहाँ शब्दों में वर्णित; रंगीन चित्र पाठ्यपुस्तक में देखिए) — गहरी नीली पृष्ठभूमि पर बैठी एक स्त्री, जो पीठ की ओर से दिखती है और जिसका चेहरा एक ओर मुड़ा हुआ है; पलकें नीचे झुकी हैं। वह सिर से पाँव तक गहरे केसरिया-नारंगी वस्त्र में लिपटी है और उसके लंबे, खुले काले बाल पीठ पर नीचे तक फैले हैं। उसके कंधे से दो तूँबों वाला एक तार-वाद्य टिका है — एक तूँबा कंधे के ऊपर, दूसरा नीचे गोद के पास — जिसकी डंडी उसके चेहरे के पास से गुज़रती है और जिसे वह हाथ से थामे है। कान में एक गोल आभूषण है। चित्र के नीचे सफ़ेद जालीदार मुँडेर बनी है।
उत्तर

“काँगड़ा शैली के इस चित्र में मीरा केसरिया वस्त्र पहने बैठी हैं और दो तूँबों वाली वीणा थामे हैं। उनके लंबे काले बाल खुले हैं और पलकें झुकी हुई हैं, जैसे वे अपने गिरधर के ध्यान में डूबी हों। होंठों पर हल्की मुस्कान है। शरीर पर कोई भारी गहना नहीं, केवल कान का आभूषण है — यह उनकी सादगी दिखाता है। चित्र देखकर वही मीरा याद आती हैं जिन्होंने राजकुमारी होकर भी महल छोड़कर भजन और सत्संग का जीवन चुना।”

सावन से जुड़े गीत — पृष्ठ 137पाठ से आगे

पाठ से आगेपरियोजना
प्र.1अपने परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से सावन में गाए जाने वाले गीतों को ढूँढ़िए और किसी एक गीत को अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। आप सावन से जुड़ा कोई भी लोकगीत, खेलगीत, कविता आदि लिख सकते हैं। कक्षा के सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए।
उत्तर

नमूना प्रविष्टि (लेखन-पुस्तिका के लिए):
गीत: “कैसे खेलन जइबू सावन में कजरिया, बदरिया घिर आइल ननदी…”
प्रकार: कजरी (लोकगीत)  |  बोली: भोजपुरी
कहाँ का: पूर्वी उत्तर प्रदेश (बनारस, मिर्ज़ापुर)
कब गाया जाता है: सावन में, झूले पड़ने पर स्त्रियाँ समूह में गाती हैं।

सब समूहों के ऐसे गीतों को जोड़कर ‘सावन के गीत — कक्षा 7’ नाम की पुस्तिका बनाइए और उसे कक्षा-पुस्तकालय में रखिए।

खोजबीन — पृष्ठ 137पाठ से आगे

पाठ से आगेखोज
प्र.1आपने पढ़ा कि मीरा श्रीकृष्ण की आराधना करती थीं। आपने कक्षा 6 की पुस्तक मल्हार में पढ़ा था कि सूरदास भी श्रीकृष्ण के भक्त थे। अपने समूह के साथ मिलकर सूरदास की कुछ रचनाएँ ढूँढ़कर कक्षा में सुनाइए। इसके लिए आप पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर

उत्तर: सूरदास के कुछ प्रसिद्ध पद, जिन्हें कक्षा में सुनाया जा सकता है —

  • “मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो” — बाल-कृष्ण का भोलापन
  • “मैया कबहिं बढ़ैगी चोटी” — बालक कृष्ण की चोटी बढ़ने की उत्सुकता
  • “चरन कमल बंदौ हरि राई” — प्रभु के चरणों की वंदना

समूह का हर साथी एक पद गाकर या पढ़कर सुनाए और उसका अर्थ दो-तीन वाक्यों में बताए।

आज की पहेली — पृष्ठ 138पाठ से आगे

पाठ से आगेपहेली
प्र.1पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इनकी अंतिम ध्वनि से मिलती-जुलती ध्वनि वाले शब्द वर्ग में से खोजिए और लिखिए—
शब्दसमान ध्वनि वाले शब्द
1. मूरतिसूरति
2. सावन________
3. उमड़________
4. नागर________
5. नंदलाल________
आघुमड़
वअसूगो
नगरपा
सोभितिल
उत्तर

उत्तर: 2. सावन — आवन   3. उमड़ — घुमड़   4. नागर — नगर   5. नंदलाल — गोपाल

शब्दसमान ध्वनि वाला शब्दवर्ग में कहाँ से मिला
1. मूरतिसूरतितीसरे स्तंभ में ऊपर से नीचे — सू + र + ति (यह उदाहरण पहले से दिया हुआ है)
2. सावनआवनपहले स्तंभ में ऊपर से नीचे — आ + व + न
3. उमड़घुमड़पहली पंक्ति में बाएँ से दाएँ — घु + म + ड़
4. नागरनगरतीसरी पंक्ति में बाएँ से दाएँ — न + ग + र
5. नंदलालगोपालचौथे स्तंभ में ऊपर से नीचे — गो + पा + ल

खोजबीन के लिए — पृष्ठ 138पाठ से आगे

पाठ से आगेपरियोजना
प्र.1नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप कवयित्री मीरा के बारे में और जान-समझ सकते हैं —
• मीरा
• मीरा के भजन
• मीराबाई
• मीरा के भजन— एम एस सुब्बु लक्ष्मी
• मीरा फिल्म 1945 भाग एक
• मेरे तो गिरधर गोपाल
उत्तर

उत्तर: इन खोज-शब्दों से मीरा का जीवन-परिचय (राजस्थान के मेड़ता क्षेत्र में जन्म, बचपन से कृष्ण-भक्ति, महल छोड़कर तीर्थ-यात्राएँ), उनके भजन, एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी की आवाज़ में गाए उनके भजन, 1945 की फ़िल्म ‘मीरा’ और उनका प्रसिद्ध पद “मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई” मिलेगा। जो मिले, उससे अपनी पुस्तिका में मीरा पर एक पृष्ठ बनाइए।

पढ़ने के लिए — पृष्ठ 139 से 143पाठ से आगे

पढ़ने के लिएअतिरिक्त पठन
प्र.1पढ़ने के लिए — ‘स्वामिभक्त सुमुख’ (चित्रकथा, पृष्ठ 139–142)। पुराने समय में, महिंसक राज्य में जब सकुल नामक राजा का शासन था, चित्रकूट पर्वत पर एक गुफा में हंसों का बहुत बड़ा झुंड निवास करता था। एक दिन कुछ हंस आहार की तलाश में निकल पड़े… इस कथा को पढ़िए और समझिए।
उत्तर

कथा का सार: हंसों के राजा मरालदेव मानुसिय सरोवर पर आखेटक के जाल में फँस गए। साथी भरपेट चुग लें, इसलिए वे चुप रहे। संकट का संकेत सुनकर सब हंस उड़ गए, पर मंत्री सुमुख लौट आया और राजा के बदले स्वयं को पकड़ने की विनती करने लगा। उसकी स्वामिभक्ति से आखेटक का हृदय बदल गया और उसने राजा को मुक्त कर दिया। हंसों ने राजा सकुल से आखेटक को पुरस्कार दिलवाया।

सीख: सच्ची निष्ठा कठोर हृदय को भी बदल देती है।

प्र.2पढ़ने के लिए — ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ (पृष्ठ 143)

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा।
झंडा ऊँचा रहे हमारा॥
सदा शक्ति बरसाने वाला, प्रेम सुधा सरसाने वाला।
वीरों को हरसाने वाला, मातृभूमि का तन मन सारा॥
स्वतंत्रता के भीषण रण में, लख कर जोश बढ़े क्षण-क्षण में।
काँपें शत्रु देख कर मन में, मिट जावे भय संकट सारा॥
इस झंडे के नीचे निर्भय, ले स्वराज्य यह अविचल निश्चय।
बोलो भारत-माता की जय, स्वतंत्रता है ध्येय हमारा॥
आओ प्यारे वीरो आओ, देश धर्म पर बलि बलि जाओ।
एक साथ सब मिल कर गाओ, प्यारा भारत देश हमारा॥
इसकी शान न जाने पाये, चाहे जान भले ही जाये।
विश्व विजय करके दिखलाये, तब होवे प्रण पूर्ण हमारा॥
(हर पद के बाद टेक: झंडा ऊँचा रहे हमारा। विजयी विश्व तिरंगा प्यारा॥)
—श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’
उत्तर

यह प्रसिद्ध झंडा गीत है, जिसे स्वतंत्रता-आंदोलन के समय श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ ने रचा। इसकी टेक “झंडा ऊँचा रहे हमारा, विजयी विश्व तिरंगा प्यारा” हर पद के बाद दोहराई जाती है।

भाव: तिरंगा शक्ति और प्रेम देता है, वीरों में जोश भरता है और शत्रु के मन में डर। गीत हमें इसकी शान के लिए सब कुछ न्योछावर करने और स्वतंत्रता का प्रण पूरा करने की प्रेरणा देता है।

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