NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 10 Meera Ke Pad provide clear, step-by-step answers to every exercise and in-text question from the chapter Meera Ke Pad of the NCERT textbook Malhar. Prepared by subject experts as per the latest NCERT (CBSE) syllabus for 2026-27, these NCERT Solutions for Class 7 Hindi help you understand each concept, write exam-ready answers, and check your own solutions. You can read them online below or download the free Class 7 Hindi Chapter 10 question-answer PDF.
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 10 Meera Ke Pad
- Class: Class 7
- Subject: Hindi
- Chapter: Chapter 10 – Meera Ke Pad
- Textbook: Malhar (NCERT)
- Study material: NCERT Solutions – questions with answers, free PDF
These solutions answer all the exercise questions of Chapter 10 Meera Ke Pad — including the in-text questions, short-answer and long-answer questions, and activities — with complete explanations so you can follow the method, not just the final answer. Read the full solutions below.
NCERT Solutions Class 7 Hindi Chapter 10 मीरा के पद View Download







































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Questions Covered in This Chapter
These NCERT Solutions answer all 48 questions of this chapter. The questions solved are:
- (क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (1) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” पद में मीरा किनसे विनती कर रही हैं? • संतों से • भक्तों से • वैजंती से • श्रीकृष्ण से
- (2) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” पद का मुख्य विषय क्या है? • प्रेम और भक्ति • प्रकृति की सुंदरता • युद्ध और शांति • ज्ञान और शिक्षा
- (3) “बरसे बदरिया सावन की” पद में कौन-सी ऋतु का वर्णन किया गया है? • सर्दी • गरमी • वर्षा • वसंत
- (4) “बरसे बदरिया सावन की” पद को पढ़कर ऐसा लगता है, जैसे मीरा— • प्रसन्न हैं। • दुखी हैं। • उदास हैं। • चिंतित हैं।
- (ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
- पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं। शब्द — 1. नंदलाल 2. वैजंती माल 3. सावन 4. गिरधर | अर्थ/संदर्भ — 1. पर्वत को धारण करने वाले, श्रीकृष्ण 2. श्रावण का महीना, आषाढ़ के बाद का और भाद्रपद के पहले का महीना 3. वैजयंती पौधे के बीजों से बनने वाली माला 4. नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण
- पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए। (क) “नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की॥”
- (ख) “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल॥”
- पाठ को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए— (क) पहले पद में श्रीकृष्ण के बारे में क्या-क्या बताया गया है?
- (ख) दूसरे पद में सावन के बारे में क्या-क्या बताया गया है?
- “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई” / “मीरा के प्रभु गिरधरनागर” — इन दोनों पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों में मीरा ने अपने नाम का उल्लेख किया है। मीरा के समय के अनेक कवि अपनी रचना के अंत में अपने नाम को सम्मिलित कर दिया करते थे। आज भी कुछ कवि अपना नाम कविता में जोड़ देते हैं। आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। (जैसे— कविता में छोटी-छोटी पंक्तियाँ हैं। श्रीकृष्ण के लिए अलग-अलग नामों का प्रयोग किया गया है आदि।) (क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए।
- (ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
- अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए— (क) मान लीजिए कि बादलों ने मीरा को श्रीकृष्ण के आने का संदेश सुनाया है। आपको क्या लगता है कि उन्होंने क्या कहा होगा? कैसे कहा होगा?
- (ख) यदि आपको मीरा से बातचीत करने का अवसर मिल जाए तो आप उनसे क्या-क्या कहेंगे और क्या-क्या पूछेंगे?
- (क) “मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल।” इस पंक्ति में ‘साँवरि’ शब्द आया है। इसके स्थान पर अधिकतर ‘साँवली’ शब्द का प्रयोग किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं, जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस तरह से लिखिए। • नैनन • सोभित • भक्त वछल • बदरिया • मेरो मनवा • आवन • दिश • मेहा
- नीचे दिए गए स्थानों में श्रीकृष्ण से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए— (केंद्र में ‘श्रीकृष्ण’ और एक स्थान पर ‘मुरली’ पहले से दिया गया है।)
- नीचे स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलती-जुलती पंक्तियों को रेखा खींचकर मिलाइए— स्तंभ 1 — 1. अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल 2. क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल 3. मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल 4. सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की 5. उमड़ घुमड़ चहूँ दिश से आया, दामिन दमकै झर लावन की | स्तंभ 2 — 1. चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर बरस रहे हैं, बिजली चमक रही है, वर्षा की झड़ी लग गई है। 2. होंठों पर सुरीली धुनों से भरी हुई बाँसुरी और सीने पर वैजयंती माला सजी हुई है। 3. सावन के महीने में मेरे मन में बहुत-सी उमंगें उठ रही हैं, क्योंकि मैंने श्रीकृष्ण के आने की चर्चा सुनी है। 4. हे मीरा के प्रभु! तुम संतों को सुख देने वाले हो और अपने भक्तों से स्नेह करने वाले हो। 5. कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हुई हैं और पैरों में बँधे हुए नूपुर मीठी आवाज में बोल रहे हैं।
- “बरसे बदरिया सावन की।” इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। क्या आपको कोई विशेष बात दिखाई दी? इस पंक्ति में ‘बरसे’ और ‘बदरिया’ दोनों शब्द साथ-साथ आए हैं और दोनों ‘ब’ वर्ण से शुरू हो रहे हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो इस पंक्ति में ‘ब’ वर्ण की आवृत्ति हो रही है। इस कारण यह पंक्ति और भी अधिक सुंदर बन गई है। पाठ में से इस प्रकार के अन्य उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
- पाठ के किसी एक पद को एक अनुच्छेद के रूप में लिखिए। उदाहरण के लिए— ‘सावन के बादल बरस रहे हैं..’ या ‘सावन की बदरिया बरसती है…’ आदि।
- “बसो मेरे नैनन में नंदलाल।” नैनों या आँखों में बस जाना एक मुहावरा है, जब हमें कोई व्यक्ति या वस्तु इतनी अधिक प्रिय लगने लगती है कि उसका ध्यान हर समय मन में बना रहने लगता है तब हम इस मुहावरे का प्रयोग करते हैं, जैसे — उसकी छवि मेरी आँखों में बस गई है। ऐसा ही एक अन्य मुहावरा है— आँखों में घर करना। नीचे आँखों से जुड़े कुछ और मुहावरे दिए गए हैं। अपने परिजनों, साथियों, शिक्षकों, पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता से इनके अर्थ समझिए और इनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए। 1. आँखों का तारा
- 2. आँखों पर पर्दा पड़ना
- 3. आँखों के आगे अँधेरा छाना
- 4. आँख दिखाना
- 5. आँख का काँटा
- 6. आँखें फेरना
- 7. आँख भर आना
- 8. आँखें चुराना
- 9. आँखों से उतारना
- 10. आँखों में खटकना
- पाठ के किसी एक पद को चुनकर अपने समूह के साथ मिलकर अलग-अलग तरीके से कक्षा के सामने प्रस्तुत कीजिए, उदाहरण के लिए— • गायन करना। • भाव-नृत्य प्रस्तुति करना। • कविता पाठ करना आदि।
- (क) “बरसे बदरिया सावन की” 1. इस पद में सावन का सुंदर चित्रण किया गया है। जब आपके गाँव या नगर में सावन आता है तो मौसम में क्या परिवर्तन आते हैं? वर्णन कीजिए।
- 2. सावन की ऋतु में किस-किस प्रकार की ध्वनियाँ सुनाई देती हैं? इन ध्वनियों को सुनकर आपके मन में कौन-कौन सी भावनाएँ उठती हैं? आप कैसा अनुभव करते हैं? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए। (उदाहरण के लिए — बिजली के कड़कने या बूँदों के टपकने की ध्वनियाँ।)
- 3. वर्षा ऋतु में आपको कौन-कौन सी गतिविधियाँ करने या खेल खेलने में आनंद आता है?
- 4. सावन के महीने में हमारे देश में अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। आपके घर, परिसर या गाँव में सावन में कौन-कौन से त्योहार मनाए जाते हैं? किसी एक के विषय में अपने अनुभव बताइए।
- (ख) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” — इस पद में मीरा श्रीकृष्ण को ‘संतों को सुख देने वाला’ और ‘भक्तों का पालन करने वाला’ कहती हैं। 1. क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जो सदैव आपकी सहायता करता है और आपको आनंदित करता है? विस्तार से बताइए।
- 2. कवयित्री ने पाठ में ‘नूपुर’ और ‘क्षुद्र घंटिका’ जैसे उदाहरणों का प्रयोग किया है। किसी का वर्णन करने के लिए हम केवल बड़ी-बड़ी ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी छोटी-छोटी बातें भी बता सकते हैं। आप भी अपने आस-पास के किसी व्यक्ति या वस्तु का वर्णन करते हुए उससे जुड़ी छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दीजिए और उन्हें लिखिए।
- “मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल।” (क) इस पंक्ति में कवयित्री ने श्रीकृष्ण की मोहनी मूरत, साँवरी सूरत और विशाल नैनों की बात की है। आपको श्रीकृष्ण की कौन-कौन सी बातों ने सबसे अधिक आकर्षित किया?
- (ख) किसी व्यक्ति या वस्तु का कौन-सा गुण आपको सबसे अधिक आकर्षित करता है? क्यों? अपने जीवन से जुड़े किसी व्यक्ति या वस्तु के उदाहरण से बताइए।
- (ग) हम सबकी कुछ विशेषताएँ बाह्य तो कुछ आंतरिक होती हैं। बाह्य विशेषताएँ तो हमें दिखाई दे जाती हैं, लेकिन आंतरिक विशेषताएँ व्यक्ति के व्यवहार से पता चलती हैं। आप अपनी दोनों प्रकार की विशेषताओं के दो-दो उदाहरण दीजिए।
- “अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल॥ क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल॥” इन पंक्तियों में तीन ऐसी वस्तुओं के नाम आए हैं, जिनसे मधुर ध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं। उन वस्तुओं के नाम पहचानिए और उनके नीचे रेखा खींचिए।
- आगे मधुर ध्वनियाँ उत्पन्न करने वाले कुछ वाद्ययंत्रों के विषय में पहेलियाँ दी गई हैं। इन्हें पहचानकर सही चित्रों के साथ रेखा खींचकर मिलाइए— (1) हवा से बोलती है, सुर में गीत सुनाती है, होठों से छू जाए, तो मन को लुभाती है। (2) दो साथियों का जोड़ा, हाथों से है बजता, ताल मिलाए ताल से, हर संगत में सजता। (3) शाहों में शामिल होती, फूँकों से संगीत सुनाती, सुख के सारे काम सजाती, दुख में भी ये साथ निभाती। (4) तारों में छिपा संगीत, माँ सरस्वती का गहना, छेड़े जब अँगुलियाँ, बहे रागों का झरना। (5) दो हाथों से बजती है ये, ताल से थिरकें पैर, हर उत्सव की है ये साथी, लटक गले ये करती सैर। (6) नागिन-सी लहराती है जो, बड़ी खास आवाज है जिसकी, तीन, चीन, रंगीन, हीन से मिली-जुली पहचान है इसकी। (7) सौ तारों का जादू, डंडियों से जो गाए, कश्मीर की वादियों जैसा मधुर संगीत लाए। (8) छोटा-सा यंत्र है, हाथों से बजता जाए, घर-मंदिर का साथी, झंकार से मन बहलाए।
- नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए— यह मीरा का काँगड़ा शैली में बना चित्र है। इस चित्र के आधार पर मीरा के संबंध में एक अनुच्छेद लिखिए।
- अपने परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से सावन में गाए जाने वाले गीतों को ढूँढ़िए और किसी एक गीत को अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। आप सावन से जुड़ा कोई भी लोकगीत, खेलगीत, कविता आदि लिख सकते हैं। कक्षा के सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए।
- आपने पढ़ा कि मीरा श्रीकृष्ण की आराधना करती थीं। आपने कक्षा 6 की पुस्तक मल्हार में पढ़ा था कि सूरदास भी श्रीकृष्ण के भक्त थे। अपने समूह के साथ मिलकर सूरदास की कुछ रचनाएँ ढूँढ़कर कक्षा में सुनाइए। इसके लिए आप पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।
- पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इनकी अंतिम ध्वनि से मिलती-जुलती ध्वनि वाले शब्द वर्ग में से खोजिए और लिखिए— शब्द — 1. मूरति (समान ध्वनि वाला शब्द — सूरति) 2. सावन 3. उमड़ 4. नागर 5. नंदलाल। वर्ग — आ | घु | म | ड़ / व | अ | सू | गो / न | ग | र | पा / सो | भि | ति | ल
- नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप कवयित्री मीरा के बारे में और जान-समझ सकते हैं — • मीरा • मीरा के भजन • मीराबाई • मीरा के भजन— एम एस सुब्बु लक्ष्मी • मीरा फिल्म 1945 भाग एक • मेरे तो गिरधर गोपाल
- पढ़ने के लिए — ‘स्वामिभक्त सुमुख’ (चित्रकथा, पृष्ठ 139–142)। पुराने समय में, महिंसक राज्य में जब सकुल नामक राजा का शासन था, चित्रकूट पर्वत पर एक गुफा में हंसों का बहुत बड़ा झुंड निवास करता था। एक दिन कुछ हंस आहार की तलाश में निकल पड़े… इस कथा को पढ़िए और समझिए।
- पढ़ने के लिए — ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ (पृष्ठ 143)। “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा॥ सदा शक्ति बरसाने वाला, प्रेम सुधा सरसाने वाला। वीरों को हरसाने वाला, मातृभूमि का तन मन सारा॥ … आओ प्यारे वीरो आओ, देश धर्म पर बलि बलि जाओ। एक साथ सब मिल कर गाओ, प्यारा भारत देश हमारा॥” —श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’
Chapter at a Glance
- पाठ में मीरा के दो पद हैं। पहला — “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” — श्रीकृष्ण से प्रार्थना है कि वे मीरा की आँखों में ही बस जाएँ। दूसरा — “बरसे बदरिया सावन की” — सावन की झड़ी और उसके साथ जागी उमंग का गीत है।
- पहले पद में श्रीकृष्ण का सिर से पाँव तक का चित्र खिंचता है — मोहनी मूरत, साँवली सूरत, विशाल नैन, होंठों पर अमृत बरसाती मुरली, छाती पर वैजयंती माला, कमर पर क्षुद्र घंटिका और पैरों में मधुर बोलते नूपुर। अंत में मीरा उन्हें ‘संतन सुखदाई’ और ‘भक्त वछल’ कहती हैं।
- दूसरे पद में वर्षा और भक्ति एक हो जाती हैं। बादल चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर आते हैं, दामिनी (बिजली) दमकती है, नन्हीं-नन्हीं बूँदें गिरती हैं और शीतल पवन बहती है — और इसी झड़ी में मीरा को ‘हरि आवन की भनक’ सुनाई देती है। इसलिए पद का भाव प्रसन्नता और उमंग है, विरह नहीं।
- दोनों पदों में मीरा ने अंतिम पंक्ति में अपना नाम जोड़ा है — “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई”, “मीरा के प्रभु गिरधरनागर”। यह भक्ति-काल की कविता की एक बड़ी पहचान है, जिसे छाप या भणिता कहते हैं।
- भाषा ब्रज-राजस्थानी मिश्रित है — नैनन, मूरति, साँवरि, सोभित, बदरिया, मनवा, आवन, दिश, मेहा जैसे रूप आज की खड़ी बोली से अलग हैं। सौंदर्य अनुप्रास से आता है — “ ब रसे ब दरिया”, “ म ोहनि म ूरति”, “ स ाँवरि स ूरति”, “ न न्हीं न न्हीं”, “ द ामिन द म कै”।
- पाठ के बाद पढ़ने के लिए दो रचनाएँ दी गई हैं — चित्रकथा ‘स्वामिभक्त सुमुख’ (हंस-मंत्री सुमुख की स्वामिभक्ति की जातक-कथा) और श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ का झंडा-गीत ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ ।
How to Download NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 10 PDF
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NCERT Solutions for Class 7 Hindi – All Chapters
There are more chapters to study besides Meera Ke Pad in Hindi. Here are the NCERT Solutions for all chapters of Class 7 Hindi.
- Chapter 1 Maa Kah Ek Kahani
- Chapter 2 Teen Buddhiman
- Chapter 3 Phool Aur Kanta
- Chapter 4 Paani Re Paani
- Chapter 5 Nahin Hona Bimar
- Chapter 6 Giridhar Kavirai Ki Kundaliya
- Chapter 7 Varsha Bahar
- Chapter 8 Birju Maharaj Se Sakshatkar
- Chapter 9 Chidiya
- Chapter 10 Meera Ke Pad
NCERT Solutions for Class 7 – All Subjects
Just like Chapter 10 of Hindi, you can get the exercise questions with answers for every other subject of Class 7. Here are the NCERT Solutions for all subjects of Class 7.
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 10 – An Overview
The key highlights of this study material are as follows.
| Aspects | Details |
|---|---|
| Class | Class 7 |
| Subject | Hindi |
| Chapter Number | Chapter 10 |
| Chapter Name | Meera Ke Pad |
| Book Name | Malhar |
| Book By | NCERT (National Council of Educational Research and Training) |
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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 10 Meera Ke Pad – FAQs
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