NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 10 Meera Ke Pad – step-by-step answers to every exercise and in-text question of the chapter, as per the latest NCERT syllabus for 2027. Read them online or download the free question-answer PDF.
मल्हार (कक्षा 7) के पाठ 10 मीरा के पद में कृष्ण-भक्त कवयित्री मीरा के दो पद हैं — पहला “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” श्रीकृष्ण के रूप का और दूसरा “बरसे बदरिया सावन की” सावन की झड़ी का चित्र खींचता है। यहाँ पृष्ठ 128 से 143 तक की हर गतिविधि का हल है। हर प्रश्न में पहले वह उत्तर है जो कॉपी में लिखना है; कारण, संकेत और अतिरिक्त जानकारी ‘विस्तार से समझिए’ में है।
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 10 Meera Ke Pad PDF
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|---|---|---|
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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 10 Meera Ke Pad – Questions and Answers
All questions of the chapter are answered below, in the order of the book – in-text questions, activities and the end-of-chapter exercises. Each answer is written the way you would write it in the exam.
मेरी समझ से — पृष्ठ 129 और 130पाठ से
(1) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” पद में मीरा किनसे विनती कर रही हैं?
• संतों से
• भक्तों से
• वैजंती से
• श्रीकृष्ण से
★ श्रीकृष्ण से
कारण: ‘नंदलाल’ (नंद के लाल) श्रीकृष्ण का ही नाम है। मीरा उन्हीं से विनती करती हैं — “बसो मेरे नैनन में नंदलाल”, यानी हे नंदलाल! आप मेरी आँखों में बस जाइए।
• प्रेम और भक्ति
• प्रकृति की सुंदरता
• युद्ध और शांति
• ज्ञान और शिक्षा
★ प्रेम और भक्ति
कारण: मीरा अपने आराध्य श्रीकृष्ण से अपनी आँखों में बस जाने की विनती करती हैं, प्रेम से उनके रूप का वर्णन करती हैं और उन्हें ‘संतन सुखदाई’ तथा ‘भक्त वछल’ कहती हैं। यह भक्ति-भाव है।
• सर्दी
• गरमी
• वर्षा
• वसंत
★ वर्षा
कारण: पद में सावन, बरसती बदरिया, दमकती दामिनी (बिजली), नन्हीं-नन्हीं बूँदें और शीतल पवन का वर्णन है — ये सब वर्षा ऋतु की पहचान हैं।
• प्रसन्न हैं।
• दुखी हैं।
• उदास हैं।
• चिंतित हैं।
★ प्रसन्न हैं।
कारण: “सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की” — प्रभु के आने की भनक से मीरा का मन उमंग से भर गया है, और अंत में “आनंद मंगल” के गीत गाए जा रहे हैं।
मैंने (1) में ‘श्रीकृष्ण से’ चुना, क्योंकि ‘नंदलाल’ उन्हीं का नाम है। (2) में ‘प्रेम और भक्ति’, क्योंकि मीरा उन्हें ‘भक्त वछल’ कहकर प्रार्थना करती हैं। (3) में ‘वर्षा’, क्योंकि पद में सावन और बरसती बदरिया है। (4) में ‘प्रसन्न हैं’, क्योंकि “उमग्यो मेरो मनवा” और “आनंद मंगल गावन की” प्रसन्नता के शब्द हैं।
मिलकर करें मिलान — पृष्ठ 130पाठ से
| शब्द | अर्थ/संदर्भ |
|---|---|
| 1. नंदलाल | 1. पर्वत को धारण करने वाले, श्रीकृष्ण |
| 2. वैजंती माल | 2. श्रावण का महीना, आषाढ़ के बाद का और भाद्रपद के पहले का महीना |
| 3. सावन | 3. वैजयंती पौधे के बीजों से बनने वाली माला |
| 4. गिरधर | 4. नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण |
सही मिलान: 1 → 4, 2 → 3, 3 → 2, 4 → 1
| शब्द | मिलान | अर्थ/संदर्भ | पद की पंक्ति |
|---|---|---|---|
| 1. नंदलाल | → 4 | नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण | “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” |
| 2. वैजंती माल | → 3 | वैजयंती पौधे के बीजों से बनने वाली माला | “उर वैजंती माल” |
| 3. सावन | → 2 | श्रावण का महीना, आषाढ़ के बाद का और भाद्रपद के पहले का महीना | “बरसे बदरिया सावन की” |
| 4. गिरधर | → 1 | पर्वत को धारण करने वाले, श्रीकृष्ण | “मीरा के प्रभु गिरधरनागर” |
पंक्तियों पर चर्चा — पृष्ठ 130पाठ से
(क) “नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की॥”
अर्थ: नन्हीं-नन्हीं बूँदों के रूप में मेह (वर्षा) बरस रहा है और उसके साथ ठंडी, सुहावनी हवा बह रही है।
भाव: यह डराने वाली मूसलाधार बारिश नहीं, कोमल और सुखद फुहार है। यह ठंडक मीरा को बाहर भी मिल रही है और मन के भीतर भी, क्योंकि उन्हें प्रभु के आने की भनक मिल चुकी है।
अर्थ: मीरा के प्रभु (श्रीकृष्ण) संतों को सुख देने वाले हैं और भक्तों से वत्सल भाव यानी माता-पिता जैसा स्नेह रखने वाले गोपाल हैं।
भाव: पहले मीरा ने प्रभु का सुंदर रूप बताया था; इस अंतिम पंक्ति में वे उनका दयालु स्वभाव बताती हैं — वे संतों को सुख देते हैं और भक्तों से स्नेह करते हैं।
सोच-विचार के लिए — पृष्ठ 131पाठ से
(क) पहले पद में श्रीकृष्ण के बारे में क्या-क्या बताया गया है?
उत्तर: पहले पद में बताया गया है कि श्रीकृष्ण नंदलाल हैं। उनकी मूरत मन मोहने वाली, सूरत साँवली और आँखें बड़ी-बड़ी हैं। उनके होंठों पर अमृत-सी मधुर मुरली सजी है और छाती पर वैजयंती माला है। कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ शोभा देती हैं और पैरों के नूपुर मीठी ध्वनि करते हैं। वे संतों को सुख देने वाले और भक्तों से स्नेह करने वाले गोपाल हैं।
उत्तर: दूसरे पद के अनुसार सावन मन को भाने वाला महीना है। इसमें बदरिया बरसती है और मन उमंग से भर जाता है। बादल चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर आते हैं, बिजली चमकती है और वर्षा की झड़ी लग जाती है। नन्हीं-नन्हीं बूँदें बरसती हैं और ठंडी, सुहावनी हवा बहती है। ऐसे में मीरा को प्रभु के आने की भनक मिलती है और आनंद-मंगल के गीत गाए जाते हैं।
कविता की रचना — पृष्ठ 131पाठ से
“मीरा के प्रभु गिरधरनागर”
इन दोनों पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों में मीरा ने अपने नाम का उल्लेख किया है। मीरा के समय के अनेक कवि अपनी रचना के अंत में अपने नाम को सम्मिलित कर दिया करते थे। आज भी कुछ कवि अपना नाम कविता में जोड़ देते हैं।
आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। (जैसे— कविता में छोटी-छोटी पंक्तियाँ हैं। श्रीकृष्ण के लिए अलग-अलग नामों का प्रयोग किया गया है आदि।)
(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए।
पाठ की विशेषताएँ —
- पद के अंत में कवयित्री का नाम — “मीरा के प्रभु…”।
- छोटी-छोटी पंक्तियाँ; दोनों पद पाँच-पाँच पंक्तियों के हैं।
- श्रीकृष्ण के लिए अनेक नाम — नंदलाल, गोपाल, हरि, गिरधरनागर, प्रभु।
- हर पंक्ति के अंत में एक-सी तुक — नंदलाल, विशाल, माल, रसाल, गोपाल।
- गाने योग्य लय और बार-बार दोहराई जाने वाली टेक।
- ब्रज-राजस्थानी मिली-जुली भाषा — नैनन, मनवा, बदरिया।
- अनुप्रास — “बरसे बदरिया”, “मोहनि मूरति”।
- रूप-वर्णन ऊपर से नीचे — मुख, नैन, अधर, उर, कमर, पैर।
नमूना प्रस्तुति: “हमारे समूह को इस पाठ की सबसे बड़ी विशेषता यह लगी कि मीरा ने अपना नाम कविता के भीतर ही रख दिया है — ‘मीरा के प्रभु’। दूसरी विशेषता यह कि दोनों पदों में हर पंक्ति का अंत एक-सी तुक पर होता है, इसीलिए ये पद गाने में इतने मीठे लगते हैं।”
अनुमान और कल्पना से — पृष्ठ 131पाठ से
(क) मान लीजिए कि बादलों ने मीरा को श्रीकृष्ण के आने का संदेश सुनाया है। आपको क्या लगता है कि उन्होंने क्या कहा होगा? कैसे कहा होगा?
बादलों ने गरजकर कहा होगा — “मीरा! चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर हम तुम्हें एक खबर देने आए हैं। तुम्हारे गिरधर नागर आ रहे हैं!” यह बात उन्होंने शब्दों से नहीं, संकेतों से कही होगी — गड़गड़ाहट से पुकारा, बिजली चमकाकर राह जगमगाई और नन्हीं बूँदों व शीतल पवन से मीरा को छुआ। इसीलिए मीरा कहती हैं — “भनक सुनी हरि आवन की”।
मैं कहूँगा/कहूँगी: “आपके पद आज पाँच सौ वर्ष बाद भी गाए जाते हैं। आपने महल छोड़कर जो रास्ता चुना, उसके लिए बहुत साहस चाहिए था।”
मैं पूछूँगा/पूछूँगी: (1) राजकुमारी होते हुए भी आपने संतों का जीवन क्यों चुना? (2) सावन के बादलों में आपको श्रीकृष्ण के आने की भनक कैसे सुनाई दी? (3) आप श्रीकृष्ण को ‘गिरधर नागर’ ही अधिक क्यों कहती हैं?
शब्दों के रूप — पृष्ठ 131 और 132पाठ से
इस पंक्ति में ‘साँवरि’ शब्द आया है। इसके स्थान पर अधिकतर ‘साँवली’ शब्द का प्रयोग किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं, जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस तरह से लिखिए।
• नैनन ________ • मेरो मनवा ________
• सोभित ________ • आवन ________
• भक्त वछल ________ • दिश ________
• बदरिया ________ • मेहा ________
उत्तर: नैनन — नयनों में/नैनों में; सोभित — शोभित; भक्त वछल — भक्तवत्सल; बदरिया — बदली/बादल; मेरो मनवा — मेरा मन; आवन — आना/आगमन; दिश — दिशा; मेहा — मेह/वर्षा।
शब्द से जुड़े शब्द — पृष्ठ 132पाठ से
उत्तर: नंदलाल, वैजंती माल, क्षुद्र घंटिका, नूपुर, गोपाल, गिरधरनागर (मुरली पहले से दिया है)। इनके स्थान पर ‘हरि’ भी लिखा जा सकता है।
पंक्ति से पंक्ति — पृष्ठ 132पाठ से
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल | 1. चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर बरस रहे हैं, बिजली चमक रही है, वर्षा की झड़ी लग गई है। |
| 2. क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल | 2. होंठों पर सुरीली धुनों से भरी हुई बाँसुरी और सीने पर वैजयंती माला सजी हुई है। |
| 3. मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल | 3. सावन के महीने में मेरे मन में बहुत-सी उमंगें उठ रही हैं, क्योंकि मैंने श्रीकृष्ण के आने की चर्चा सुनी है। |
| 4. सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की | 4. हे मीरा के प्रभु! तुम संतों को सुख देने वाले हो और अपने भक्तों से स्नेह करने वाले हो। |
| 5. उमड़ घुमड़ चहूँ दिश से आया, दामिन दमकै झर लावन की | 5. कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हुई हैं और पैरों में बँधे हुए नूपुर मीठी आवाज में बोल रहे हैं। |
सही मिलान: 1 → 2, 2 → 5, 3 → 4, 4 → 3, 5 → 1
| स्तंभ 1 (पद की पंक्ति) | मिलान | स्तंभ 2 (अर्थ) | पहचान का सूत्र |
|---|---|---|---|
| 1. अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल | → 2 | होंठों पर सुरीली धुनों से भरी हुई बाँसुरी और सीने पर वैजयंती माला सजी हुई है। | अधर = होंठ, मुरली = बाँसुरी, उर = सीना |
| 2. क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल | → 5 | कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हुई हैं और पैरों में बँधे हुए नूपुर मीठी आवाज में बोल रहे हैं। | क्षुद्र = छोटी, कटितट = कमर, नूपुर = पायल |
| 3. मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल | → 4 | हे मीरा के प्रभु! तुम संतों को सुख देने वाले हो और अपने भक्तों से स्नेह करने वाले हो। | संतन सुखदाई, भक्त वछल — दोनों शब्द ज्यों के त्यों |
| 4. सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की | → 3 | सावन के महीने में मेरे मन में बहुत-सी उमंगें उठ रही हैं, क्योंकि मैंने श्रीकृष्ण के आने की चर्चा सुनी है। | उमग्यो = उमंग, भनक = आहट/चर्चा |
| 5. उमड़ घुमड़ चहूँ दिश से आया, दामिन दमकै झर लावन की | → 1 | चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर बरस रहे हैं, बिजली चमक रही है, वर्षा की झड़ी लग गई है। | चहूँ दिश = चारों दिशा, दामिन = बिजली, झर = झड़ी |
कविता का सौंदर्य — पृष्ठ 133पाठ से
इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। क्या आपको कोई विशेष बात दिखाई दी?
इस पंक्ति में ‘बरसे’ और ‘बदरिया’ दोनों शब्द साथ-साथ आए हैं और दोनों ‘ब’ वर्ण से शुरू हो रहे हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो इस पंक्ति में ‘ब’ वर्ण की आवृत्ति हो रही है। इस कारण यह पंक्ति और भी अधिक सुंदर बन गई है। पाठ में से इस प्रकार के अन्य उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर: पाठ में एक ही वर्ण की आवृत्ति के अन्य उदाहरण ये हैं। (इसे अनुप्रास कहते हैं।)
| पंक्ति | जो शब्द साथ आए | दोहराया गया वर्ण |
|---|---|---|
| “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” | नैनन, नंदलाल | न |
| “मोहनि मूरति साँवरि सूरति” | मोहनि, मूरति | म |
| “मोहनि मूरति साँवरि सूरति” | साँवरि, सूरति | स |
| “अधर सुधा रस मुरली राजति” | रस, मुरली, राजति | र |
| “क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित” | घंटिका, कटितट | क |
| “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई” | संतन, सुखदाई | स |
| “सावन की, सावन की मन भावन की” | सावन, सावन | स |
| “सावन में उमग्यो मेरो मनवा” | मेरो, मनवा | म |
| “उमड़ घुमड़ चहूँ दिश से आया” | उमड़, घुमड़ | म, ड़ |
| “दामिन दम कै झर लावन की” | दामिन, दम | द |
| “नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे” | नन्हीं, नन्हीं | न |
| “आनंद मंगल गावन की” | मंगल, गावन | ग |
रूप बदलकर — पृष्ठ 133पाठ से
नमूना उत्तर (“बरसे बदरिया सावन की” का अनुच्छेद):
सावन की बदरिया बरस रही है। सावन का यह महीना सबके मन को भाता है। मेरा मन उमंग से भर उठा है, क्योंकि मैंने अपने प्रभु के आने की आहट सुन ली है। चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर आए हैं, बिजली चमक रही है और वर्षा की झड़ी लग गई है। नन्हीं-नन्हीं बूँदें बरस रही हैं और ठंडी, सुहावनी हवा बह रही है। मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु गिरधर नागर हैं, इसलिए चारों ओर आनंद-मंगल के गीत गाए जा रहे हैं।
मुहावरे — पृष्ठ 133पाठ से
नैनों या आँखों में बस जाना एक मुहावरा है, जब हमें कोई व्यक्ति या वस्तु इतनी अधिक प्रिय लगने लगती है कि उसका ध्यान हर समय मन में बना रहने लगता है तब हम इस मुहावरे का प्रयोग करते हैं, जैसे — उसकी छवि मेरी आँखों में बस गई है। ऐसा ही एक अन्य मुहावरा है— आँखों में घर करना।
नीचे आँखों से जुड़े कुछ और मुहावरे दिए गए हैं। अपने परिजनों, साथियों, शिक्षकों, पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता से इनके अर्थ समझिए और इनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
1. आँखों का तारा
अर्थ: बहुत अधिक प्रिय, सबसे अधिक दुलारा।
अर्थ: सामने का सच दिखाई न देना; लोभ, मोह या क्रोध के कारण सही-ग़लत का ध्यान न रहना।
अर्थ: अचानक कुछ न सूझना; बुरी खबर या बड़े दुख से घबरा जाना, चक्कर आ जाना।
अर्थ: क्रोध से घूरना, डाँटना या डराना-धमकाना।
अर्थ: जो बिलकुल न सुहाए; जिसे देखकर चुभन हो, ऐसा व्यक्ति।
अर्थ: पहले जैसा स्नेह छोड़ देना, बेरुख़ी दिखाना, पहचानने से मुँह मोड़ लेना।
अर्थ: आँखों में आँसू आ जाना, भावुक हो जाना।
अर्थ: सामना करने से बचना; लज्जा या अपराध-बोध के कारण नज़र न मिलाना।
अर्थ: मन से उतार देना; जो पहले प्रिय था उसका आदर-प्रेम समाप्त कर देना।
अर्थ: बुरा लगना, अखरना; किसी की उन्नति या उपस्थिति सहन न होना।
सबकी प्रस्तुति — पृष्ठ 134पाठ से
• गायन करना।
• भाव-नृत्य प्रस्तुति करना।
• कविता पाठ करना आदि।
नमूना योजना: “हमारा समूह ‘बरसे बदरिया सावन की’ गाएगा। दो साथी ताली से ताल देंगे, एक साथी टेक (“बरसे बदरिया सावन की”) गाएगा, तीन साथी बारी-बारी से अगली पंक्तियाँ गाएँगे और अंतिम पंक्ति ‘आनंद मंगल गावन की’ हम सब मिलकर दो बार गाएँगे।”
आपकी बात — पृष्ठ 134पाठ से आगे
1. इस पद में सावन का सुंदर चित्रण किया गया है। जब आपके गाँव या नगर में सावन आता है तो मौसम में क्या परिवर्तन आते हैं? वर्णन कीजिए।
“हमारे गाँव में सावन आते ही आकाश काले बादलों से घिर जाता है और दोपहर में भी साँझ जैसा लगता है। गरमी की तपन टूट जाती है और हवा ठंडी हो जाती है। पहली बारिश पर गीली मिट्टी की सोंधी महक फैल जाती है। खेत हरे हो जाते हैं और किसान धान की रोपाई में जुट जाते हैं। रात में मेंढकों की टर्र-टर्र गूँजती है और पगडंडियाँ कीचड़ से भर जाती हैं।”
सावन में बादलों की गड़गड़ाहट, बिजली की कड़क, छत पर बूँदों की टप-टप, हवा की सरसराहट, मेंढकों की टर्र-टर्र और मोर की पुकार सुनाई देती है। बिजली कड़कने पर मैं चौंक जाता हूँ, पर बूँदों की टप-टप सुनकर मन शांत हो जाता है। मोर की पुकार और सावन के गीत सुनकर मन उमंग से भर जाता है।
वर्षा ऋतु में मुझे कागज़ की नाव बनाकर बहते पानी में छोड़ने, बारिश में भीगने और झूला झूलने में बहुत आनंद आता है। हम साथी अपनी-अपनी नाव एक साथ छोड़ते हैं और देखते हैं कि किसकी नाव सबसे आगे जाती है। बारिश थमने पर इंद्रधनुष के रंग गिनना भी मुझे अच्छा लगता है।
उत्तर: सावन में हरियाली तीज, नाग पंचमी और रक्षाबंधन जैसे त्योहार मनाए जाते हैं; कई जगह सावन के सोमवार का व्रत और कांवड़-यात्रा भी होती है।
नमूना अनुभव (रक्षाबंधन): “रक्षाबंधन पर माँ खीर बनाती हैं। दीदी मेरे माथे पर तिलक लगाकर मेरी कलाई पर राखी बाँधती हैं और मैं उन्हें अपनी बचत से उपहार देता हूँ। पिछले वर्ष मैंने उन्हें रंग-पेटी दी थी। इस दिन हमारी सारी लड़ाइयाँ अपने आप ख़त्म हो जाती हैं।”
इस पद में मीरा श्रीकृष्ण को ‘संतों को सुख देने वाला’ और ‘भक्तों का पालन करने वाला’ कहती हैं।
1. क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जो सदैव आपकी सहायता करता है और आपको आनंदित करता है? विस्तार से बताइए।
“मेरे जीवन में ऐसी व्यक्ति मेरी नानी हैं। जब मैं उदास होता हूँ, वे बिना पूछे समझ जाती हैं और कोई कहानी सुनाकर मेरा मन हल्का कर देती हैं। पिछले वर्ष गणित में मेरे अंक कम आए तो उन्होंने डाँटा नहीं, बस कहा — ‘एक परीक्षा से कोई बच्चा तय नहीं होता।’ फिर वे रोज़ शाम मेरे साथ पहाड़े दोहराने लगीं और अगली परीक्षा में मेरे अंक अच्छे आए।”
नमूना उत्तर (दादा जी): “दादा जी की छड़ी की नोक पर पीतल की एक छोटी-सी टोपी लगी है — घर में सबसे पहले उसी की ठक-ठक सुनाई देती है। उनके चश्मे की एक डंडी टूटकर धागे से बँधी है, पर वे नया चश्मा नहीं लेते। उनकी जेब में हमेशा दो इलायची रहती हैं — एक अपने लिए, एक मेरे लिए।”
विशेषताएँ — पृष्ठ 135पाठ से आगे
(क) इस पंक्ति में कवयित्री ने श्रीकृष्ण की मोहनी मूरत, साँवरी सूरत और विशाल नैनों की बात की है। आपको श्रीकृष्ण की कौन-कौन सी बातों ने सबसे अधिक आकर्षित किया?
“मुझे श्रीकृष्ण की दो बातों ने सबसे अधिक आकर्षित किया। पहली — उनकी मुरली, जिसकी मधुर धुन से वे सबका मन जीत लेते हैं। दूसरी — उनका ‘भक्त वछल’ होना, यानी भक्तों से स्नेह करना। मुझे अच्छा लगता है कि वे बड़े होकर भी छोटे-से भक्त को नहीं भूलते। उनकी साँवली सूरत और विशाल नैन भी मन मोह लेते हैं।”
“मुझे किसी व्यक्ति का सबसे अच्छा गुण यह लगता है कि वह दूसरों की बात ध्यान से सुने। मेरी मित्र सलमा में यह गुण है। एक बार मैं खेल में हारकर निराश था। बाक़ी साथी सलाह देने लगे, पर सलमा ने बस पूछा — ‘बता, हुआ क्या था?’ और चुपचाप सुनती रही। बात कहते-कहते मेरा मन हल्का हो गया। तभी से मुझे लगता है कि ध्यान से सुनना भी बड़ी सहायता है।”
मेरी बाह्य विशेषताएँ: (1) मेरे बाल घुँघराले हैं। (2) मैं कक्षा में सबसे लंबा हूँ, इसलिए प्रार्थना-सभा में सबसे पीछे खड़ा होता हूँ।
मेरी आंतरिक विशेषताएँ: (1) धैर्य — कोई सवाल एक बार में हल न हो तो मैं उसे छोड़ता नहीं, बार-बार करके देखता हूँ। (2) सहायता का भाव — जिस साथी की कॉपी छूट जाती है, उसे मैं अपनी कॉपी से साथ लिखवा लेता हूँ।
मधुर ध्वनियाँ — पृष्ठ 135 और 136पाठ से आगे
क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल॥”
इन पंक्तियों में तीन ऐसी वस्तुओं के नाम आए हैं, जिनसे मधुर ध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं। उन वस्तुओं के नाम पहचानिए और उनके नीचे रेखा खींचिए।
उत्तर: तीन वस्तुएँ — मुरली, क्षुद्र घंटिका और नूपुर। पंक्तियों में इन्हीं के नीचे रेखा खींचिए।
| पहेली | चित्र (पुस्तक में ऊपर से नीचे; यहाँ शब्दों में) |
|---|---|
| 1. हवा से बोलती है, सुर में गीत सुनाती है, होठों से छू जाए, तो मन को लुभाती है। | (क) लकड़ी का लंबा ढोल — दोनों सिरों पर चमड़ा मढ़ा, डोरियाँ कसी हुई |
| 2. दो साथियों का जोड़ा, हाथों से है बजता, ताल मिलाए ताल से, हर संगत में सजता। | (ख) छेदों वाली बाँस की पतली, सीधी नली |
| 3. शाहों में शामिल होती, फूँकों से संगीत सुनाती, सुख के सारे काम सजाती, दुख में भी ये साथ निभाती। | (ग) लकड़ी के चपटे बक्से पर कसे बहुत-से तार |
| 4. तारों में छिपा संगीत, माँ सरस्वती का गहना, छेड़े जब अँगुलियाँ, बहे रागों का झरना। | (घ) चमड़ा मढ़े दो छोटे ड्रमों की जोड़ी — एक लकड़ी का, एक धातु का |
| 5. दो हाथों से बजती है ये, ताल से थिरकें पैर, हर उत्सव की है ये साथी, लटक गले ये करती सैर। | (ङ) लंबी डंडी पर कसे तार, नीचे बड़ा गोल तूँबा और ऊपर छोटा तूँबा |
| 6. नागिन-सी लहराती है जो, बड़ी खास आवाज है जिसकी, तीन, चीन, रंगीन, हीन से मिली-जुली पहचान है इसकी। | (च) छेदों वाली नली, जिसका आगे का मुँह फैला हुआ (चौड़ा) है |
| 7. सौ तारों का जादू, डंडियों से जो गाए, कश्मीर की वादियों जैसा मधुर संगीत लाए। | (छ) डोरी से जुड़ी धातु की दो छोटी कटोरियाँ |
| 8. छोटा-सा यंत्र है, हाथों से बजता जाए, घर-मंदिर का साथी, झंकार से मन बहलाए। | (ज) लौकी जैसे गोल तूँबे से जुड़ी, छेदों वाली नलियाँ |
उत्तर:
| पहेली | उत्तर | चित्र |
|---|---|---|
| 1 | बाँसुरी | (ख) |
| 2 | तबला | (घ) |
| 3 | शहनाई | (च) |
| 4 | वीणा | (ङ) |
| 5 | ढोलक | (क) |
| 6 | बीन | (ज) |
| 7 | संतूर | (ग) |
| 8 | मजीरा | (छ) |
चित्र करते हैं बातें — पृष्ठ 137पाठ से आगे
“काँगड़ा शैली के इस चित्र में मीरा केसरिया वस्त्र पहने बैठी हैं और दो तूँबों वाली वीणा थामे हैं। उनके लंबे काले बाल खुले हैं और पलकें झुकी हुई हैं, जैसे वे अपने गिरधर के ध्यान में डूबी हों। होंठों पर हल्की मुस्कान है। शरीर पर कोई भारी गहना नहीं, केवल कान का आभूषण है — यह उनकी सादगी दिखाता है। चित्र देखकर वही मीरा याद आती हैं जिन्होंने राजकुमारी होकर भी महल छोड़कर भजन और सत्संग का जीवन चुना।”
सावन से जुड़े गीत — पृष्ठ 137पाठ से आगे
नमूना प्रविष्टि (लेखन-पुस्तिका के लिए):
गीत: “कैसे खेलन जइबू सावन में कजरिया, बदरिया घिर आइल ननदी…”
प्रकार: कजरी (लोकगीत) | बोली: भोजपुरी
कहाँ का: पूर्वी उत्तर प्रदेश (बनारस, मिर्ज़ापुर)
कब गाया जाता है: सावन में, झूले पड़ने पर स्त्रियाँ समूह में गाती हैं।
सब समूहों के ऐसे गीतों को जोड़कर ‘सावन के गीत — कक्षा 7’ नाम की पुस्तिका बनाइए और उसे कक्षा-पुस्तकालय में रखिए।
खोजबीन — पृष्ठ 137पाठ से आगे
उत्तर: सूरदास के कुछ प्रसिद्ध पद, जिन्हें कक्षा में सुनाया जा सकता है —
- “मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो” — बाल-कृष्ण का भोलापन
- “मैया कबहिं बढ़ैगी चोटी” — बालक कृष्ण की चोटी बढ़ने की उत्सुकता
- “चरन कमल बंदौ हरि राई” — प्रभु के चरणों की वंदना
समूह का हर साथी एक पद गाकर या पढ़कर सुनाए और उसका अर्थ दो-तीन वाक्यों में बताए।
आज की पहेली — पृष्ठ 138पाठ से आगे
| शब्द | समान ध्वनि वाले शब्द |
|---|---|
| 1. मूरति | सूरति |
| 2. सावन | ________ |
| 3. उमड़ | ________ |
| 4. नागर | ________ |
| 5. नंदलाल | ________ |
| आ | घु | म | ड़ |
| व | अ | सू | गो |
| न | ग | र | पा |
| सो | भि | ति | ल |
उत्तर: 2. सावन — आवन 3. उमड़ — घुमड़ 4. नागर — नगर 5. नंदलाल — गोपाल
| शब्द | समान ध्वनि वाला शब्द | वर्ग में कहाँ से मिला |
|---|---|---|
| 1. मूरति | सूरति | तीसरे स्तंभ में ऊपर से नीचे — सू + र + ति (यह उदाहरण पहले से दिया हुआ है) |
| 2. सावन | आवन | पहले स्तंभ में ऊपर से नीचे — आ + व + न |
| 3. उमड़ | घुमड़ | पहली पंक्ति में बाएँ से दाएँ — घु + म + ड़ |
| 4. नागर | नगर | तीसरी पंक्ति में बाएँ से दाएँ — न + ग + र |
| 5. नंदलाल | गोपाल | चौथे स्तंभ में ऊपर से नीचे — गो + पा + ल |
खोजबीन के लिए — पृष्ठ 138पाठ से आगे
• मीरा
• मीरा के भजन
• मीराबाई
• मीरा के भजन— एम एस सुब्बु लक्ष्मी
• मीरा फिल्म 1945 भाग एक
• मेरे तो गिरधर गोपाल
उत्तर: इन खोज-शब्दों से मीरा का जीवन-परिचय (राजस्थान के मेड़ता क्षेत्र में जन्म, बचपन से कृष्ण-भक्ति, महल छोड़कर तीर्थ-यात्राएँ), उनके भजन, एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी की आवाज़ में गाए उनके भजन, 1945 की फ़िल्म ‘मीरा’ और उनका प्रसिद्ध पद “मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई” मिलेगा। जो मिले, उससे अपनी पुस्तिका में मीरा पर एक पृष्ठ बनाइए।
पढ़ने के लिए — पृष्ठ 139 से 143पाठ से आगे
कथा का सार: हंसों के राजा मरालदेव मानुसिय सरोवर पर आखेटक के जाल में फँस गए। साथी भरपेट चुग लें, इसलिए वे चुप रहे। संकट का संकेत सुनकर सब हंस उड़ गए, पर मंत्री सुमुख लौट आया और राजा के बदले स्वयं को पकड़ने की विनती करने लगा। उसकी स्वामिभक्ति से आखेटक का हृदय बदल गया और उसने राजा को मुक्त कर दिया। हंसों ने राजा सकुल से आखेटक को पुरस्कार दिलवाया।
सीख: सच्ची निष्ठा कठोर हृदय को भी बदल देती है।
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा।
झंडा ऊँचा रहे हमारा॥
सदा शक्ति बरसाने वाला, प्रेम सुधा सरसाने वाला।
वीरों को हरसाने वाला, मातृभूमि का तन मन सारा॥
स्वतंत्रता के भीषण रण में, लख कर जोश बढ़े क्षण-क्षण में।
काँपें शत्रु देख कर मन में, मिट जावे भय संकट सारा॥
इस झंडे के नीचे निर्भय, ले स्वराज्य यह अविचल निश्चय।
बोलो भारत-माता की जय, स्वतंत्रता है ध्येय हमारा॥
आओ प्यारे वीरो आओ, देश धर्म पर बलि बलि जाओ।
एक साथ सब मिल कर गाओ, प्यारा भारत देश हमारा॥
इसकी शान न जाने पाये, चाहे जान भले ही जाये।
विश्व विजय करके दिखलाये, तब होवे प्रण पूर्ण हमारा॥
(हर पद के बाद टेक: झंडा ऊँचा रहे हमारा। विजयी विश्व तिरंगा प्यारा॥)
—श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’
यह प्रसिद्ध झंडा गीत है, जिसे स्वतंत्रता-आंदोलन के समय श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ ने रचा। इसकी टेक “झंडा ऊँचा रहे हमारा, विजयी विश्व तिरंगा प्यारा” हर पद के बाद दोहराई जाती है।
भाव: तिरंगा शक्ति और प्रेम देता है, वीरों में जोश भरता है और शत्रु के मन में डर। गीत हमें इसकी शान के लिए सब कुछ न्योछावर करने और स्वतंत्रता का प्रण पूरा करने की प्रेरणा देता है।
Chapter 10 of 10 – Hindi
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NCERT Solutions Class 7 Hindi Chapter 10 Meera Ke Pad – Overview
| Class | Class 7 |
| Subject | Hindi |
| Chapter | 10 – Meera Ke Pad |
| Session | 2027 |
| Format | Full answers on this page + PDF |
NCERT Solutions Class 7 Hindi Chapter 10 – FAQs
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