NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 5 Nahin Hona Bimar provide clear, step-by-step answers to every exercise and in-text question from the chapter Nahin Hona Bimar of the NCERT textbook Malhar. Prepared by subject experts as per the latest NCERT (CBSE) syllabus for 2026-27, these NCERT Solutions for Class 7 Hindi help you understand each concept, write exam-ready answers, and check your own solutions. You can read them online below or download the free Class 7 Hindi Chapter 5 question-answer PDF.
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 5 Nahin Hona Bimar
- Class: Class 7
- Subject: Hindi
- Chapter: Chapter 5 – Nahin Hona Bimar
- Textbook: Malhar (NCERT)
- Study material: NCERT Solutions – questions with answers, free PDF
These solutions answer all the exercise questions of Chapter 5 Nahin Hona Bimar — including the in-text questions, short-answer and long-answer questions, and activities — with complete explanations so you can follow the method, not just the final answer. Read the full solutions below.
NCERT Solutions Class 7 Hindi Chapter 5 नहीं होना बीमार View Download













































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Questions Covered in This Chapter
These NCERT Solutions answer all 68 questions of this chapter. The questions solved are:
- नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। — (1) बच्चे के विद्यालय न जाने का मुख्य कारण क्या था? • उसका विद्यालय जाने का मन नहीं था। • उसका साबूदाने की खीर खाने का मन था। • उसने गृहकार्य नहीं किया था। • उसे बुखार हो गया था।
- (2) कहानी के अंत में बच्चे ने कहा, “इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।” बच्चे ने यह निर्णय लिया क्योंकि— • घर में रहने के बजाय विद्यालय जाना अधिक रोचक है। • बीमारी का बहाना बनाने से साबूदाने की खीर नहीं मिलती। • झूठ बोलने से झूठ के खुलने का डर हमेशा बना रहता है। • इस बहाने के कारण उसे दिनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा।
- (3) “लेटे-लेटे पीठ दुखने लगी” इस बात से बच्चे के बारे में क्या पता चलता है? • उसे बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई थी। • उसे अपनी बीमारी की कोई चिंता नहीं रह गई थी। • वह बिस्तर पर आराम करने का आनंद ले रहा था। • बीमारी के कारण उसकी पीठ में दर्द हो रहा था।
- (4) “क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!” बच्चे के मन में यह बात आई क्योंकि— • बीमार व्यक्ति को बहुत आराम करने को मिलता है। • बीमार व्यक्ति को अच्छे खाने का आनंद मिलता है। • बीमार व्यक्ति को विद्यालय नहीं जाना पड़ता है। • बीमार व्यक्ति अस्पताल में शांति से लेटा रहता है।
- (ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?
- पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने परिजनों और शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं। शब्द — 1. साबूदाना 2. वार्ड 3. नर्स 4. रजाई 5. थर्मामीटर 6. काढ़ा 7. ड्राइक्लीनर 8. ताजमहल 9. अरहर। अर्थ — 1. किसी विशिष्ट कार्य के लिए घेरकर बनाया हुआ स्थान। 2. एक प्रकार का जाड़े का ओढ़ना जिसका कपड़ा दोहरा होता है और जिसमें रुई भरी होती है। 3. शरीर का तापमान (जैसे बुखार) नापने का एक छोटा यंत्र। 4. कई तरह की जड़ी-बूटियों और औषधियों को उबालकर उनके रस से बना पेय होता है। इसे सर्दी-जुकाम, खाँसी-बुखार और पाचन से जुड़ी समस्याओं में लाभदायक माना जाता है। 5. रेशमी, ऊनी, मलमल जैसे नाजुक कपड़ों को पानी, साबुन और डिटर्जेंट के बिना मशीनों से साफ करने वाला व्यक्ति। 6. उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में स्थित 17वीं सदी में निर्मित एक विश्व-प्रसिद्ध स्मारक जो सफेद संगमरमर से बना है। 7. एक दाल जिसे तुअर भी कहते हैं। 8. सागू नामक वृक्ष के तने का गूदा, सागूदाना, यह पहले आटे के रूप में होता है और फिर कूटकर दानों के रूप में सुखा लिया जाता है। 9. वह व्यक्ति जो रोगियों, घायलों या वृद्धों आदि की देखभाल करे।
- पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए— (क) “मैंने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिलकुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं।”
- (ख) “देखो! उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा कि तू क्या खाएगा? पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता। कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता। लेकिन नहीं! भूखे रहो!! इससे सारे विकार निकल जाएँगे। विकार निकल जाएँ बस। चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ।”
- पाठ को एक बार फिर ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए— (क) अस्पताल में बच्चे को कौन-कौन सी चीजें अच्छी लगीं और क्यों?
- (ख) कहानी के अंत में बच्चे को महसूस हुआ कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। क्या आपको लगता है कि उसका निर्णय सही था? क्यों?
- (ग) जब बच्चा बीमार पड़ने का बहाना बनाकर बिस्तर पर लेटा रहा तो उसके मन में कौन-कौन से भाव आ रहे थे? (संकेत— मन में उत्पन्न होने वाले विकार या विचार को भाव कहते हैं, उदाहरण के लिए — क्रोध, दुख, भय, करुणा, प्रेम आदि।)
- (घ) कहानी में बच्चे ने सोचा था कि “ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो।” आपको क्या लगता है, असल में बीमार हो जाने और इस बच्चे की सोच में कौन-कौन सी समानताएँ और अंतर होंगे? (संकेत — आप अपने अनुभवों के आधार पर इस प्रश्न पर विचार कर सकते हैं कि कहानी वाले बच्चे की कल्पना वास्तविकता से कितनी अलग है।)
- (ङ) नानीजी और नानाजी ने बच्चे को बीमारी की दवा दी और उसे आराम करने को कहा। बच्चे को खाना नहीं दिया गया। क्या आपको लगता है कि उन्होंने सही किया? आपको ऐसा क्यों लगता है?
- (क) कहानी के अंत में बच्चा नानाजी और नानीजी को सब कुछ सच-सच बताने का निर्णय कर लेता तो कहानी में आगे क्या होता? (संकेत — उसका दिन कैसे बदल जाता? उसकी सोच और अनुभव कैसे होते?)
- (ख) कहानी में बच्चे की नानीजी के स्थान पर आप हैं। आप सारे नाटक को समझ गए हैं लेकिन चाहते हैं कि बच्चा सारी बात आपको स्वयं बता दे। अब आप क्या करेंगे? (संकेत — इस सवाल में आपको नानीजी की जगह लेकर सोचना है और एक मनोरंजक योजना बनानी है जिससे बच्चा आपको स्वयं सारी बातें बता दे।)
- (ग) कहानी में बच्चे के स्थान पर आप हैं और घर में अकेले हैं। अब आप ऊबने से बचने के लिए क्या-क्या करेंगे?
- (घ) कहानी के अंत में बच्चे को लगा कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। कल्पना कीजिए, अगर वह स्कूल जाता तो उसका दिन कैसा होता? अगले दिन जब वह स्कूल गया होगा तो उसने क्या-क्या किया होगा?
- (ङ) कहानी में नानाजी और नानीजी ने बच्चे की बीमारी ठीक करने के लिए उसे दवाई दी और खाने के लिए कुछ नहीं दिया। अगर आप नानीजी या नानाजी की जगह होते तो क्या-क्या करते?
- “अस्पताल का माहौल मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे। न ट्रैफिक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी…। सिर्फ लोगों के धीरे-धीरे बातचीत करने की धीमी-धीमी गुनगुन। बाकी एकदम शांति।” इन पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों में ऐसा लग रहा है मानो हमारी आँखों के सामने अस्पताल का चित्र-सा बन गया हो। लेखन में इसे ‘चित्रात्मक भाषा’ कहते हैं। … (क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस पाठ की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
- (ख) कहानी में से निम्नलिखित के लिए उदाहरण खोजकर लिखिए— विशेष बिंदु: बच्चे द्वारा पिछली बातों को याद किया जाना / हास्य यानी हँसी-मजाक का उपयोग किया जाना / बच्चे द्वारा सोचने के तरीके में बदलाव आना / कहानी में किसी का किसी बात से अनजान होना / बच्चे द्वारा स्वयं से बातें किया जाना
- कहानी को एक बार पुन: पढ़कर पता लगाइए— (क) बच्चे के सामने क्या समस्या थी? उसने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
- (ख) नानीजी-नानाजी के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
- नीचे दिए गए स्थानों में ‘बीमार’ से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए— (पुस्तक में बीच के गोले में ‘बीमार’ लिखा है और उससे जुड़े सात गोलों में से एक में ‘काढ़ा’ पहले से दिया गया है।)
- कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि— (क) कहानी में सर्दी के मौसम की घटनाएँ बताई गई हैं।
- (ख) बच्चे को बहाना बनाने के परिणाम का आभास हो गया।
- (ग) बच्चे को खाना-पीना बहुत प्रिय है।
- (घ) बच्चे को स्कूल जाना अच्छा लगता है।
- (क) आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम ‘नहीं होना बीमार’ है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि इस कहानी का यह नाम उपयुक्त है या नहीं। अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
- (ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।
- “बुखार आ गया।” मैंने कराहते हुए कहा।
- “आपको पता नहीं चल रहा। थर्मामीटर लगाकर देखिए।” मैंने कहा।
- “मेरे सिर में दर्द हो रहा है। पेट भी दुख रहा है और मुझे बुखार भी है।”
- नानाजी आए। बोले, “अब कैसा है सिरदर्द?”
- फिर नानाजी बोले, “आज इसे कुछ खाने को मत देना। आराम करने दो। शाम को देखेंगे।”
- (क) इस कहानी में अनेक रोचक घटनाएँ हैं जिन्हें पढ़कर चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। इस कहानी में किन बातों को पढ़कर आपके चेहरे पर भी मुस्कान आ गई थी? उन्हें रेखांकित कीजिए। (इन्हें रेखांकित करने के लिए आप किसी अन्य रंग का उपयोग कर सकते हैं।)
- (ख) इस कहानी में किन वाक्यों को पढ़कर आपके मुँह में पानी आ गया था? उन्हें रेखांकित कीजिए।
- 1. ऐसा लगा मानो हमें देखकर सुधाकर काका खुश हो गए।
- 2. खिड़कियाँ बहुत बड़ी थीं और उनके बाहर हरे पेड़ हवा से हिल रहे थे।
- 3. वहाँ केवल लोगों के फुसफुसाने की आवाजें आ रही थीं।
- 4. फुसफुसाने की आवाजों के सिवा वहाँ कोई आवाज नहीं थी।
- 5. बीमार लोगों के बहुत मजे होते हैं।
- 6. मैं झूठमूठ बीमार पड़ जाता हूँ।
- “देखें!” नानाजी ने रजाई हटाकर मेरा माथा छुआ। पेट देखा और नब्ज देखने लगे। इस बीच नानीजी भी आ गईं। “क्या हुआ?”, नानीजी ने पूछा। — पिछले पृष्ठ पर दिए गए वाक्यों को ध्यान से देखिए। इन वाक्यों में आपको कुछ शब्दों से पहले या बाद में कुछ चिह्न दिखाई दे रहे हैं। इन्हें विराम चिह्न कहते हैं। अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए विराम चिह्न को कहानी में ढूँढ़िए। ध्यानपूर्वक देखकर समझिए कि इनका प्रयोग वाक्यों में कहाँ-कहाँ किया जाता है। आपने जो पता किया, उसे नीचे लिखिए— पूर्ण विराम ( । ), अल्प विराम ( , ), प्रश्नवाचक चिह्न ( ? ), विस्मयादिबोधक चिह्न ( ! ), उद्धरण चिह्न ( “ ” )
- “मुझे बड़ी तेज इच्छा हुई कि इसी समय बाहर निकलकर दिन की रोशनी में अपनी गली की चहल-पहल देखूँ” — आपने कहानी में बच्चे के घर के साथ वाली गली के बारे में बहुत-सी बातें पढ़ी हैं। उन बातों और अपनी कल्पना के आधार पर उस गली का एक चित्र बनाइए।
- (क) बच्चे ने अस्पताल के वातावरण का विस्तार से सुंदर वर्णन किया है। इसी प्रकार आप अपनी कक्षा का वर्णन कीजिए।
- (ख) कहानी में बच्चे को घर में अकेले दिन भर लेटे रहना पड़ा था। क्या आप कभी कहीं अकेले रहे हैं? उस समय आपको कैसा लग रहा था? आपने क्या-क्या किया था?
- (ग) कहानी में आम खाने वाले मुन्नू को देखकर बच्चे को ईर्ष्या हुई थी। क्या आपको कभी किसी से या किसी को आपसे ईर्ष्या हुई है? आपने तब क्या किया था ताकि यह भावना दूर हो जाए?
- (घ) कहानी में नानाजी-नानीजी बच्चे का पूरा ध्यान रखने का प्रयास करते हैं। आपके घर और विद्यालय में आपका ध्यान कौन-कौन रखते हैं? कैसे?
- (ङ) आप अपने परिजनों और मित्रों का ध्यान कैसे रखते हैं? क्या-क्या करते हैं या क्या-क्या नहीं करते हैं ताकि उन्हें कम-से-कम परेशानी हो?
- (क) कहानी में बच्चे ने बीमारी का बहाना बनाया ताकि उसे स्कूल न जाना पड़े। क्या आपने कभी किसी कारण से बहाना बनाया है? यदि हाँ, तो उसके बारे में बताइए। उस समय आपके मन में कौन-कौन से भाव आ-जा रहे थे? आप कैसा अनुभव कर रहे थे?
- (ख) आमतौर पर बनाए जाने वाले बहानों की एक सूची बनाइए।
- (ग) बहाने क्यों बनाने पड़ते हैं? बहाने न बनाने पड़ें, इसके लिए हम क्या-क्या कर सकते हैं?
- “मैं रजाई में पड़ा-पड़ा घर में चल रही गतिविधियों का अनुमान लगाता रहा।” कहानी में बच्चे ने अनेक प्रकार के अनुमान लगाए हैं। क्या आपने कभी किसी अनदेखे व्यक्ति/वस्तु/पशु-पक्षी/स्थान आदि के विषय में अनुमान लगाए हैं? किसके बारे में? क्या? कब? विस्तार से बताइए। (संकेत — जैसे पेड़ से आने वाली आवाज सुनकर किसी प्राणी का अनुमान लगाना; कहीं दूर रहने वाले किसी संबंधी/रिश्तेदार के विषय में सुनकर उसके संबंध में अनुमान लगाना।)
- “बहुत ढूँढ़ा गया पर थर्मामीटर मिला ही नहीं। शायद कोई माँगकर ले गया था।” कहानी में बच्चे के घर पर थर्मामीटर (तापमापी) खोजने पर वह मिल नहीं पाता। आमतौर पर हमारे घरों में कोई न कोई ऐसी वस्तु होती है जिसे खोजने पर भी वह नहीं मिलती, जिसे कोई माँगकर ले जाता है या हम जिसे किसी से माँगकर ले आते हैं। अपने घर को ध्यान में रखते हुए ऐसी वस्तुओं की सूची बनाइए — जो खोजने पर भी नहीं मिलती हैं / जो कोई माँगकर ले जाते हैं / जो आप किसी से माँगकर लाते हैं
- (क) कहानी में सुधाकर काका को बीमार होने पर साबूदाने की खीर दी गई थी। आपके घर में किसी के बीमार होने पर उसे क्या-क्या खिलाया जाता है?
- (ख) कहानी में बच्चे को बहुत-सी चीजें खाने का मन है। आपका क्या-क्या खाने का बहुत मन करता है?
- (ग) कहानी में बच्चा सोचता है कि साबूदाने की खीर सिर्फ बीमारी या उपवास में क्यों मिलती है। आपके घर में ऐसा क्या-क्या है, जो केवल विशेष अवसरों या त्योहारों पर ही बनता है?
- (घ) कहानी में बच्चा सोचता है कि अगर वह स्कूल जाता तो उसे ठेले पर नमक-मिर्च वाले अमरूद खाने को मिलते। आप अपने विद्यालय में क्या-क्या खाते-पीते हैं? विद्यालय में आपका रुचिकर भोजन क्या है?
- (ङ) इस कहानी में भोजन से जुड़ी बच्चे की कई रोचक बातें बताई गई हैं। आपके बचपन की भोजन से जुड़ी कोई विशेष याद क्या है, जिसे आप अब भी याद करते हैं?
- (च) कहानी में बच्चा भोजन की सुंगध से रजाई फेंककर रसोई में झाँकने लगा। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि घर में किसी विशेष खाने की सुंगध से आप भी रसोई में जाकर तुरंत देखना चाहते हैं कि क्या पक रहा है? आपको किस-किस खाने की सुंगध सबसे अधिक पसंद है?
- 1. रोटी जैसा होता है ये, पर आलू से भरा-भरा / घी-तेल साथी हैं इसके, दही-चटनी से हरा-भरा
- 2. दाल-चावल का मेल है यह तो, भारत भर में तुम इसे पाओ, / दक्षिण में ये खूब है बनता, चटनी-सांभर संग-संग खाओ, / गोल-तिकोना इसका आकार, गरम-गरम तुम इसे बनाओ, / कौन-सा व्यंजन होता है यह, बोलो बोलो नाम बताओ।
- 3. नाश्ते का यह बड़ा है खास, महाराष्ट्र में इसका वास, / मिर्च-मसाले से भरपूर, संग बटाटा भी मशहूर, / चटपटी चटनी लगी किसे? बूझो नाम तो खाएँ इसे!
- 4. बेसन से बने चौकोर या गोल, गुजरात में बड़ा है बोल। / खाने में नर्म, पानी भरे, धनिया मिर्ची संग सजे।
- 5. गोल-गोल पानी से भरके, चटनी सोंठ संग इसे खाओ / उत्तर-दक्षिण पूरब-पश्चिम, गली-मुहल्लों में भी पाओ। / खट्टी-मीठी, तीखी हाय, खाना तो इसे हर कोई चाहे!
- 6. हरे साग संग मुझको पाओ, / मक्खन के संग मुझको खाओ। / आटा मेरा हल्का पीला, / स्वाद मेरा है बड़ा रंगीला।
- 7. आग में पकती हूँ, सोंधा-सा स्वाद, / साथ में खाओ चूरमा, बन जाए फिर बात, / गरम दाल से मुझको प्यार, राजस्थान का मैं उपहार।
- 8. गोल-गोल और श्वेत रंग का / रस से भरा हुआ हूँ खूब / मीठी दुनिया का महाराजा / चाशनी मीठी डूब-डूब।
Chapter at a Glance
- कहानी के लेखक स्वयं प्रकाश (1947–2019) हैं; यह पाठ कक्षा 7 की हिंदी पाठ्यपुस्तक मल्हार का पाँचवाँ पाठ है और पृष्ठ 57 से 72 तक फैला है।
- बच्चा नानीजी के साथ अस्पताल जाता है, वहाँ की सफाई, शांति, हरे पेड़ और सुधाकर काका को मिली साबूदाने की खीर देखकर सोचता है — “क्या ठाठ हैं बीमारों के भी।”
- गृहकार्य न करने और स्कूल न जाने के मन के कारण वह अगली बार बीमारी का बहाना बना लेता है — सिरदर्द, पेटदर्द और बुखार का झूठ बोलकर रजाई में पड़ा रहता है।
- नानाजी उसे कड़वी पुड़िया और काढ़े जैसी चाय पिला देते हैं और खाना बंद करा देते हैं — “तबियत ढीली हो तो सबसे अच्छा उपाय है भूखे रहना।”
- दिनभर वह ऊब, भूख, अकेलेपन और मुन्नू के आम चूसने पर ईर्ष्या से जूझता है; अंत में तय करता है कि अब कभी बीमारी का बहाना नहीं बनाएगा।
- कहानी की खूबियाँ — चित्रात्मक भाषा, बच्चे की कल्पना, हास्य, स्वयं से बातें करना और अंत में सोच का बदलना।
How to Download NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 5 PDF
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NCERT Solutions for Class 7 Hindi – All Chapters
There are more chapters to study besides Nahin Hona Bimar in Hindi. Here are the NCERT Solutions for all chapters of Class 7 Hindi.
- Chapter 1 Maa Kah Ek Kahani
- Chapter 2 Teen Buddhiman
- Chapter 3 Phool Aur Kanta
- Chapter 4 Paani Re Paani
- Chapter 5 Nahin Hona Bimar
- Chapter 6 Giridhar Kavirai Ki Kundaliya
- Chapter 7 Varsha Bahar
- Chapter 8 Birju Maharaj Se Sakshatkar
- Chapter 9 Chidiya
- Chapter 10 Meera Ke Pad
NCERT Solutions for Class 7 – All Subjects
Just like Chapter 5 of Hindi, you can get the exercise questions with answers for every other subject of Class 7. Here are the NCERT Solutions for all subjects of Class 7.
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 5 – An Overview
The key highlights of this study material are as follows.
| Aspects | Details |
|---|---|
| Class | Class 7 |
| Subject | Hindi |
| Chapter Number | Chapter 5 |
| Chapter Name | Nahin Hona Bimar |
| Book Name | Malhar |
| Book By | NCERT (National Council of Educational Research and Training) |
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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 5 Nahin Hona Bimar – FAQs
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Where can I get NCERT Solutions for the other chapters of Class 7 Hindi?
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