NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 1 स्वदेश provide clear, step-by-step answers to every exercise and in-text question from the chapter स्वदेश of the NCERT textbook मल्हार. Prepared by subject experts as per the latest NCERT (CBSE) syllabus for 2026-27, these NCERT Solutions for Class 8 Hindi help you understand each concept, write exam-ready answers, and check your own solutions. You can read them online below or download the free Class 8 Hindi Chapter 1 question-answer PDF.
NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 1 स्वदेश
- Class: Class 8
- Subject: Hindi
- Chapter: Chapter 1 – स्वदेश
- Textbook: मल्हार (NCERT)
- Study material: NCERT Solutions – questions with answers, free PDF
These solutions answer all the exercise questions of Chapter 1 स्वदेश — including the in-text questions, short-answer and long-answer questions, and activities — with complete explanations so you can follow the method, not just the final answer. Read the full solutions below.
NCERT Solutions Class 8 Hindi Chapter 1 स्वदेश View Download































NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 1 PDF Download
You can read the NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 1 online above, or download the complete question-answer PDF to study स्वदेश offline at any time.
NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 1 PDF Download Link – Click Here to Download Solutions PDF
Questions Covered in This Chapter
These NCERT Solutions answer all 37 questions of this chapter. The questions solved are:
- (क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। 1. “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है— • सामाजिकता से • संवेदनहीनता से • कठोरता से • नैतिकता से
- 2. निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है? • देश की प्रगति • देश के प्रति प्रेम • देश की सुरक्षा • देश की स्वतंत्रता
- 3. “हम हैं जिसके राजा-रानी” — इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है? • देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए • देश की शासन व्यवस्था के लिए • देश के समस्त नागरिकों के लिए • देश के सभी प्राणियों के लिए
- 4. कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है? • जिसमें साहस की कमी है • जिसमें स्नेह का भाव नहीं है • जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है • जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है
- (ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
- कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए। स्तंभ 1 — 1. जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं। 2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं। 3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी। 4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। स्तंभ 2 — 1. जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है। 2. जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। 3. जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। 4. जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है।
- कविता से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए। (क) “निश्चित है निस्संशय निश्चित, है जान एक दिन जाने को। है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को॥”
- (ख) “सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”
- (ग) “जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं। वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”
- कविता को पुन: ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए। (क) “हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?
- (ख) ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति ‘संसार-संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?
- (ग) “उस पर है नहीं पसीजा जो/क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से आप क्या समझते हैं? बताइए।
- (घ) कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं? बताइए।
- (ङ) यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।
- अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और लिखिए। (क) “जिसने कि खजाने खोले हैं” अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?
- (ख) “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” पंक्ति में ‘उगे-बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?
- (ग) “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?
- (घ) कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे? (संकेत— पत्थर— जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी।…)
- (ङ) देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?
- “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े, पाया जिसमें दाना-पानी। हैं माता-पिता बंधु जिसमें, हम हैं जिसके राजा-रानी॥” इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए। ‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी’ इन शब्दों की अंतिम ध्वनि एक-सी है। इस विशेषता को ‘तुक मिलाना’ कहते हैं। अब नीचे दिए गए प्रश्नों पर पाँच-पाँच के समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए। (क) शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?
- (ख) कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?
- देश-प्रेम से जुड़े अपने विचारों को आधार बनाते हुए कविता को आगे बढ़ाइए— “वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।” ______
- (क) शब्द से जुड़े शब्द — नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए। फिर मित्रों से मिलाकर अपनी सूची बढ़ाइए —
- (ख) विराम चिह्नों को समझें — “जो चल न सका संसार-संग” “बहती जिसमें रस-धार नहीं” “पाया जिसमें दाना-पानी” “हैं माता-पिता बंधु जिसमें” “हम हैं जिसके राजा-रानी” “जिससे न जाति-उद्धार हुआ” — कविता में आई हुई उपर्युक्त पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। इनमें कुछ शब्दों के बीच एक चिह्न (-) लगा है। इसे योजक चिह्न कहते हैं। योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कविता में संदर्भ के अनुसार योजक चिह्नों के स्थान पर का, की, के और में से कौन-से शब्द जोड़ेंगे जिससे अर्थ स्पष्ट हो सके। लिखिए। (संकेत— ‘जो चल न सका संसार के संग’)
- (ग) शब्द-मित्र — “है जान एक दिन जाने को” “है काल-दीप जलता हरदम” उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आया है जिसके कारण कविता में लयात्मकता आ गई है। यदि ‘है’ का प्रयोग पंक्ति के अंत में किया जाए तो यह गद्य जैसी लगने लगेगी, जैसे— ‘जान एक दिन जाने को है।’ ‘काल-दीप हरदम जलता है।’ • अब आप कविता में से ऐसी पंक्तियों को चुनिए जिनमें ‘है’ शब्द का प्रयोग पहले हुआ है। चुनी हुई पंक्तियों में शब्दों के स्थान बदलकर पुनः लिखिए।
- • अब नीचे दी गई पंक्तियों में ‘है, हैं’ शब्द का प्रयोग पहले करके पंक्तियों को पुनः लिखिए और देखिए कि इससे पंक्तियों के सौंदर्य में क्या परिवर्तन आया है। अपने साथियों से चर्चा कीजिए। “जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी॥”
- (घ) समानार्थी शब्द — कविता से चुनकर कुछ शब्द निम्न तालिका में दिए गए हैं। दिए गए शब्दों से इनके समानार्थी शब्द ढूँढ़कर तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए। (तालिका के शब्द — भू, दीप, हृदय, तलवार, दुनिया, पत्थर; दिए गए शब्द — दिल, पाहन, प्रदीप, धरा, जग, असि, पृथ्वी, संसार, कृपाण, जी, दीपक, पाषाण)
- “वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।” इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। कई बार कवि कविता की किसी पंक्ति को ही कविता का शीर्षक बनाते हैं। यदि आपको भी इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
- (क) नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। उन चित्रों पर सही (✓) का चिह्न लगाइए जिन्हें आप ‘स्वदेश प्रेम’ की श्रेणी में रखना चाहेंगे?
- (ख) अब आप अपने उत्तर के पक्ष में तर्क भी दीजिए।
- “सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।” देश की सीमा पर सैनिक सुरक्षा प्रहरी की भाँति खड़े रहते हैं। वे बुरी भावना से अतिक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आदि से करते हैं। आप बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे? • विद्यार्थी • अध्यापक • कृषक • चिकित्सक • वैज्ञानिक • श्रमिक • पत्रकार
- (क) कक्षा में सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी भाषा में देश-प्रेम से संबंधित कविताओं और गीतों का संकलन करें।
- (ख) किसी एक गीत की कक्षा में संगीतात्मक प्रस्तुति भी करें।
- राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा झंडा) देश का सम्मान है। किसी एक दिन सोने से पहले अपने पूरे दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से तिरंगा झंडा उदास हुआ होगा और किन कार्यों से तिरंगे झंडे को प्रसन्नता हुई होगी।
- आपने देश-प्रेम से संबंधित ‘स्वदेश’ कविता पढ़ी। अब आप स्वदेशी कपड़े ‘खादी’ से संबंधित सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘खादी गीत’ का एक अंश पढ़िए। — “खादी के धागे-धागे में / अपनेपन का अभिमान भरा, / माता का इसमें मान भरा, / अन्यायी का अपमान भरा; // खादी के रेशे-रेशे में / अपने भाई का प्यार भरा, / माँ-बहनों का सत्कार भरा, / बच्चों का मधुर दुलार भरा; // खादी की रजत चंद्रिका जब, / आकर तन पर मुसकाती है, / तब नवजीवन की नई ज्योति / अंतस्तल में जग जाती है;”
- आपने ‘स्वदेश’ कविता और ‘खादी गीत’ का उपर्युक्त अंश पढ़ा। स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त हुआ है? साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए। साथ ही ‘खादी गीत’ पूरी कविता को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
- नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग कर आप देश-प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित रचनाएँ पढ़ सकते हैं— • सारे जहाँ से अच्छा • दीवानों की हस्ती • झाँसी की रानी
Chapter at a Glance
- स्वदेश एक कविता है, गद्य पाठ नहीं। इसके रचयिता गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ (1883–1972) हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में हुआ। उन्होंने ब्रजभाषा में कविता लिखना आरंभ किया और बाद में खड़ी बोली के श्रेष्ठ कवियों में अपना स्थान बनाया।
- सरकारी नौकरी के कारण उन्हें ‘सनेही’ के अतिरिक्त दूसरा उपनाम ‘त्रिशूल’ रखना पड़ा — यह बात उन्होंने स्वयं कही है। त्रिशूल तरंग , राष्ट्रीय मंत्र और कृषक क्रंदन उनकी उल्लेखनीय रचनाएँ हैं। राष्ट्र-प्रेम के साथ-साथ उन्होंने किसान, मजदूर और सामाजिक कुरीतियों पर भी लिखा।
- कविता की टेक (ध्रुवपंक्ति) है — “वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।” यही पंक्ति कविता के आरंभ, बीच और अंत में लौटती है और हर बार भाव को गहरा करती जाती है।
- कवि पहले शर्तें गिनाता है — जो जीवित जोश न जगा सका, जो संसार-संग न चल सका, जिसने साहस छोड़ दिया, जिससे जाति का उद्धार न हुआ, जो भावों से भरा नहीं — ऐसे हृदय को वह हृदय मानने से इनकार कर देता है।
- फिर वह देश की देन गिनाता है — जिसकी मिट्टी में हम उगे-बढ़े, जिसने दाना-पानी दिया, जिसमें माता-पिता और बंधु हैं, जिसने खजाने खोले और लासानी (बेमिसाल) नव रत्न दिए, जिसकी ज्ञान-संपदा पर दुनिया दीवानी है। इतना पाकर भी जो न पसीजे, वह ‘भू का भार’ है।
- अंत में कवि मृत्यु का भय हटाता है — जाना तो निश्चित है, काल-दीप हरदम जलता है और परवानों को जलना ही है; इसलिए डरो मत। और वह हथियार न होने का बहाना भी छीन लेता है — “सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।”
- भाषा की दृष्टि से यह पाठ तुक , योजक चिह्न (-) , पदक्रम बदलने से बनी लयात्मकता (‘है’ का पंक्ति के आरंभ में प्रयोग) और समानार्थी शब्दों का अभ्यास कराता है।
How to Download NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 1 PDF
Follow these simple steps to get the स्वदेश questions-and-answers PDF from मल्हार.
- Search NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 1 aglasem and open this page.
- Read the exercise questions with answers for स्वदेश shown above.
- Click the Download PDF link to save the स्वदेश solutions to your device.
NCERT Solutions for Class 8 Hindi – All Chapters
There are more chapters to study besides स्वदेश in Hindi. Here are the NCERT Solutions for all chapters of Class 8 Hindi.
- Chapter 1 स्वदेश
- Chapter 2 दो गौरैया
- Chapter 3 एक आशीर्वाद
- Chapter 4 हरिद्वार
- Chapter 5 कबीर के दोहे
- Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी
- Chapter 7 मत बाँधो
- Chapter 8 नए मेहमान
- Chapter 9 आदमी का अनुपात
- Chapter 10 तरुण के स्वप्न
NCERT Solutions for Class 8 – All Subjects
Just like Chapter 1 of Hindi, you can get the exercise questions with answers for every other subject of Class 8. Here are the NCERT Solutions for all subjects of Class 8.
NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 1 – An Overview
The key highlights of this study material are as follows.
| Aspects | Details |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | Hindi |
| Chapter Number | Chapter 1 |
| Chapter Name | स्वदेश |
| Book Name | मल्हार |
| Book By | NCERT (National Council of Educational Research and Training) |
| Educational Resource Here | NCERT Solutions of Class 8 Hindi Chapter 1 for all exercises |
| More Questions Answers of This Subject | NCERT Solutions for Class 8 Hindi |
| Download Book Chapter | NCERT Book Class 8 Hindi |
| All Questions Answers For This Class | NCERT Solutions for Class 8 |
| Complete Solutions | NCERT Solutions |
NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 1 स्वदेश – FAQs
What are the NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 1 स्वदेश?
They are the complete, step-by-step answers to all the exercise and in-text questions of Chapter 1 स्वदेश from the NCERT Class 8 Hindi textbook मल्हार, written by experts as per the latest NCERT syllabus.
How can I download the Class 8 Hindi Chapter 1 solutions PDF for free?
Open this page on aglasem, read the स्वदेश questions with answers, and click the “Download Solutions PDF” link. The Class 8 Hindi Chapter 1 NCERT Solutions PDF is completely free to download.
Are these NCERT Solutions as per the latest 2026-27 syllabus?
Yes. The NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 1 are based on the latest NCERT textbook मल्हार and the current 2026-27 CBSE syllabus, so the questions and answers match what you study in class.
Where can I get NCERT Solutions for the other chapters of Class 8 Hindi?
You can find the answers to every chapter on the NCERT Solutions for Class 8 Hindi page, and solutions for every subject on the NCERT Solutions for Class 8 page.
How do NCERT Solutions help in exam preparation?
They show the correct method to solve each question, help you write answers the way they are expected in exams, let you check and correct your own work, and save revision time — which together improve your marks in Class 8 Hindi.
If you have any queries on NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 1 स्वदेश, then please ask in the comments below.
