NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 12 सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते – step-by-step answers to every exercise and in-text question of the chapter, as per the latest NCERT syllabus for 2027. Read them online or download the free question-answer PDF.
NCERT कक्षा 8 संस्कृत की पाठ्यपुस्तक दीपकम् के द्वादशः पाठः — सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते के प्रश्नों के उत्तर तथा पाठ की अध्ययन-सामग्री। यह शिक्षा (वेदाङ्ग) विषय का पद्यात्मक पाठ है, जिसमें पाँच श्लोकों के द्वारा बताया गया है कि वर्णों का उच्चारण न तो अस्पष्ट (अव्यक्त) हो और न ही आवश्यकता से अधिक ज़ोर लगाकर (पीडित) — जैसे बाघिन अपने बच्चों को दाँतों में इस प्रकार पकड़ती है कि वे न गिरें और न घायल हों। पाठ के आरम्भ में आचार्य कक्षा में इन्द्र और वृत्रासुर की कथा सुनाते हैं, जहाँ एक स्वर के बदल जाने से ‘इन्द्रशत्रुः’ का अर्थ ही उलट गया। नीचे पृष्ठ 137 से 145 तक का चित्र-संवाद तथा कथा, पाँचों श्लोकों का पदच्छेद–अन्वय–अर्थ–भाव, वयं शब्दार्थान् जानीमः की पूरी सारणी, अत्र इदम् अवधेयम् (षट् वेदाङ्गानि), अभ्यासात् जायते सिद्धिः के प्रश्न १–६ का प्रत्येक उपभाग, योग्यताविस्तरः (क तथा ख) और परियोजनाकार्यम् क्रमशः दिए गए हैं — पहले संस्कृत उत्तर, फिर कोष्ठक में हिन्दी अर्थ। चित्र-संवाद, श्लोकों, अवधेय-पेटिका तथा योग्यताविस्तर (ख) पर दिए गए प्रश्न पुस्तक में नहीं हैं — वे अतिरिक्त अभ्यास हैं।
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 12 सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते PDF
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| Chapter | Download | |
|---|---|---|
| Solutions PDF | सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते | View PDF |
पाठ का हिंदी अनुवाद
चित्र-संवादः और कथा — इन्द्र और वृत्रासुर (पृष्ठ 137)
(भाव: स्वर बदलने से ‘इन्द्रशत्रुः’ का अर्थ ‘इन्द्र का शत्रु (नाशक)’ न रहकर ‘इन्द्र जिसका शत्रु (नाशक) है’ हो गया।)
श्लोकाः और भावार्थः (पृष्ठ 138–140)
स्वजनः श्वजनो माभूत् सकलं शकलं सकृत् शकृत्॥ १ ॥
भीता पतनभेदाभ्यां तद्वद् वर्णान् प्रयोजयेत्॥ २ ॥
सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते॥ ३ ॥
धैर्यं लयसमर्थं च षडेते पाठका गुणाः॥ ४ ॥
अनर्थज्ञोऽल्पकण्ठश्च षडेते पाठकाधमाः॥ ५ ॥
अत्र इदम् अवधेयम् — वेदाङ्गानि (पृष्ठ 142)
शिक्षाग्रन्थेषु वर्णानाम् उच्चारणविधिः, स्वराः, विरामः च वर्णिताः सन्ति।
कल्पग्रन्थेषु यज्ञादीनां क्रियाविधेः वर्णनम् अस्ति।
व्याकरणग्रन्थेषु भाषायाः नियमाः सन्ति।
अस्मिन् शास्त्रे शब्दानां व्युत्पत्तिः वर्तते।
अस्मिन् शास्त्रे मात्रा-ताल-इत्यादिदृष्ट्या गायनसम्बद्धं वर्णनम् अस्ति।
अस्मिन् शास्त्रे सूर्य-चन्द्र-इत्यादीनां नक्षत्राणां गतेः एवं तेषां प्रभावस्य वर्णनम् अस्ति।
योग्यताविस्तरः (ख) — स्मरणीय श्लोक (पृष्ठ 145)
अत्याशक्त्याच्च मानाच्च षड्भिर्विद्या विनश्यति॥
(माण्डूक्य-शिक्षा)
कर्कशानां मृदुस्पर्शं किमभ्यासात् न साध्यते ?
(याज्ञवल्क्य-शिक्षा)
ते भवन्ति दुराधर्षाः ससिंहाः इव पर्वताः॥
(माण्डूक्य-शिक्षा)
अल्पाहारी गृहत्यागी विद्यार्थी पञ्चलक्षणः॥
(लोकप्रचलित-नीतिश्लोकः)
तथा गुरुगतां विद्यां शुश्रुषुरधिगच्छति॥
(याज्ञवल्यक्य-शिक्षा)
ज्योतिषामयनं चक्षुर्निरुक्तं श्रोत्रमुच्यते ॥
तस्मात् साङ्गमधीत्यैव ब्रह्मलोके महीयते ॥
(पाणिनीय-शिक्षा कारिका)
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 12 सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते – Questions and Answers
All questions of the chapter are answered below, in the order of the book – in-text questions, activities and the end-of-chapter exercises. Each answer is written the way you would write it in the exam.
चित्र-संवादः तथा कथा — पाठाधारिताः प्रश्नाः — पृष्ठ 137अतिरिक्त अभ्यास (ये प्रश्न पुस्तक में नहीं हैं) — पाठारम्भे कक्षायां आचार्यस्य, छात्राणां हिमान्याश्च संवादः तथा इन्द्र-वृत्रासुर-कथा
छात्राः — ‘नमस्ते आचार्य ! अद्य वयम् एकां कथां श्रोतुम् इच्छामः। कृपया कथां श्रावयति वा महोदय !’
आचार्यः — ‘नमस्ते छात्राः ! भवतां मनोरञ्जनार्थम् आदौ कथाश्रवणम्। अनन्तरं पाठनम्।’
उत्तरम् — स्वस्य बलं वर्धयितुम् इन्द्रं जेतुं च वृत्रासुरः यज्ञं कारितवान्। यज्ञे आहुतिमन्त्रः आसीत् — ‘इन्द्रशत्रुर्वर्धस्व’ इति।
उत्तरम् — ऋत्विजः मन्त्रे स्वरं परिवर्तितवन्तः। स्वरपरिवर्तनेन अर्थः परिवर्तितः। परिणामतः वृत्रासुरस्य स्थाने इन्द्रस्य बलं वर्धितम्। बलवान् इन्द्रः वज्रेण वृत्रासुरं मारितवान्।
हिमानी — ‘बहु सुन्दरी कथा महोदय ! तर्हि वयमपि पठनकाले भाषणकाले च स्पष्टं शुद्धं च उच्चारणं कुर्मः।’
आचार्यः — ‘त्वं यथार्थं भाषसे हिमानि ! शुद्धोच्चारणस्य सन्दर्भे एव अधुना एतं विषयं पठामः।’
कथायाः शिक्षा — स्वरस्य वर्णस्य वा परिवर्तनेन अर्थः परिवर्तते। अतः पठनकाले भाषणकाले च स्पष्टं शुद्धं च उच्चारणं करणीयम्।
पाठः — पञ्च श्लोकाः (पदच्छेदः · अन्वयः · अर्थः · भावः) — पृष्ठ 138–140अतिरिक्त अभ्यास (यह प्रश्न पुस्तक में नहीं है; प्रत्येक श्लोक का पदच्छेद, अन्वय और भावार्थ पुस्तक में छपा है) — पञ्च श्लोकाः
वयं शब्दार्थान् जानीमः — पृष्ठ 140–141शब्दार्थ-सारणी तथा ‘मातृभाषया अर्थं लिखत’ स्तम्भः
नीचे पुस्तक की दोनों पृष्ठों की सारणी ज्यों-की-त्यों दी गई है — पहले संस्कृत पर्याय, फिर हिन्दी और अंग्रेज़ी अर्थ।
| शब्दः | अर्थः (संस्कृतम्) | हिन्दी | English |
|---|---|---|---|
| ऋत्विजः | पुरोहिताः | पुरोहित | Priests |
| करतालम् | करताडनध्वनिः | ताली | Clap |
| अधीषे | पठसि | तुम पढ़ते हो | You read |
| श्वजनः | शुनकः / कुक्कुरः | कुत्ता | Dog |
| सकलम् | सम्पूर्णम् | पूरा | Entire |
| शकलम् | खण्डम् | टुकड़ा | Fragment |
| सकृत् | एकवारम् | एक बार | Once |
| शकृत् | मलम् | विष्ठा (मल) | Faeces |
| अव्यक्ताः | अस्पष्टाः (अल्पप्रयत्नयुक्ताः) | अस्पष्ट (आवश्यकता से कम प्रयत्न करना) | Unclear (Usage of less effort as supposed to be used) |
| पीडिताः | बाधिताः (अधिकप्रयत्नयुक्ताः) | पीड़ित (आवश्यकता से अधिक प्रयत्न से युक्त) | Afflicted (Usage of more effort as supposed to be used) |
| महीयते | पूज्यते / सम्मानं लभते | सम्मानित होता है | Honoured / respected |
| व्याघ्री | शार्दूला (स्त्रीव्याघ्रः) | बाघिन | Tigress |
| दंष्ट्राभ्याम् | दन्ताभ्याम् | दाँतों से | With the fangs |
| पीडयेत् | हिंसनं कुर्यात् | कष्ट दे | May cause pain |
| भीता | भयेन पूरिता | डरी हुई | Afraid |
| प्रयोजयेत् | उच्चारणं / प्रयोगं कुर्यात् | उच्चारण / प्रयोग कर सकता है | May pronounce / apply |
| माधुर्यम् | मधुरभावः | मिठास / माधुर्य | Sweetness |
| अक्षरव्यक्तिः | अक्षराणां स्फुटतया उच्चारणम् | अक्षर स्पष्टता | Clarity of letters |
| सुस्वरः | शोभनः स्वरः | मधुर स्वर | Pleasant voice |
| धैर्यम् | विश्वासः | आत्मविश्वास | Courage / Self-Confidence |
| पाठकाः | पठनसम्बन्धिनः | पढ़ने से सम्बन्धित | Related to Reading |
| शीघ्री | यः वेगेन पठति | तेज़ गति से पढ़ने वाला | Fast reader |
| शिरःकम्पी | यः शिरः चालयन् पठति | सिर हिलाकर पढ़ने वाला | One who nods head and reads |
| अनर्थज्ञः | यः अर्थं न जानाति | जो अर्थ नहीं जानता | Who does not understand meaning |
| अल्पकण्ठः | दुर्बलध्वनियुक्तः | धीमे स्वर वाला | Weak-voiced |
यह स्तम्भ अपनी मातृभाषा में भरना है — हिन्दी, मराठी, बांग्ला, तमिल, गुजराती… जो भी आपकी हो। ऊपर प्रश्न 10 की सारणी में हिन्दी अर्थ पहले ही दे दिए गए हैं, इसलिए हिन्दी-माध्यम के विद्यार्थी वही उतार लें।
नमूना उत्तर (मराठी में) —
| शब्दः | हिन्दी | मराठी (मातृभाषया) |
|---|---|---|
| श्वजनः | कुत्ता | कुत्रा |
| सकलम् | पूरा | संपूर्ण |
| शकलम् | टुकड़ा | तुकडा |
| व्याघ्री | बाघिन | वाघीण |
| भीता | डरी हुई | घाबरलेली |
| माधुर्यम् | मिठास | गोडवा |
| धैर्यम् | आत्मविश्वास | आत्मविश्वास |
| महीयते | सम्मानित होता है | सन्मानित होतो |
अत्र इदम् अवधेयम् — पृष्ठ 142अतिरिक्त अभ्यास (ये प्रश्न पुस्तक में नहीं हैं) — ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ पेटिका पर आधारित — ‘शिक्षा-कल्प-व्याकरण-निरुक्त-छन्दः-ज्योतिषम्’ इति षट् वेदाङ्गानि
उत्तरम् — ‘शिक्षा-कल्प-व्याकरण-निरुक्त-छन्दः-ज्योतिषम्’ इति षट् वेदाङ्गानि सन्ति। (शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द तथा ज्योतिष — ये छह वेदाङ्ग हैं।)
| वेदाङ्गम् | पुस्तक का वाक्य | हिन्दी में विषय |
|---|---|---|
| १. शिक्षा | शिक्षाग्रन्थेषु वर्णानाम् उच्चारणविधिः, स्वराः, विरामः च वर्णिताः सन्ति। | वर्णों के उच्चारण की विधि, स्वर और विराम (कहाँ रुकें) |
| २. कल्पः | कल्पग्रन्थेषु यज्ञादीनां क्रियाविधेः वर्णनम् अस्ति। | यज्ञ आदि की क्रिया-विधि |
| ३. व्याकरणम् | व्याकरणग्रन्थेषु भाषायाः नियमाः सन्ति। | भाषा के नियम |
| ४. निरुक्तम् | अस्मिन् शास्त्रे शब्दानां व्युत्पत्तिः वर्तते। | शब्दों की व्युत्पत्ति (शब्द कहाँ से बना) |
| ५. छन्दः | अस्मिन् शास्त्रे मात्रा-ताल-इत्यादिदृष्ट्या गायनसम्बद्धं वर्णनम् अस्ति। | मात्रा-ताल आदि की दृष्टि से गायन (छन्द-रचना) |
| ६. ज्योतिषम् | अस्मिन् शास्त्रे सूर्य-चन्द्र-इत्यादीनां नक्षत्राणां गतेः एवं तेषां प्रभावस्य वर्णनम् अस्ति। | सूर्य-चन्द्र आदि नक्षत्रों की गति और उनका प्रभाव |
उत्तरम् — शिक्षाग्रन्थेषु वर्णानाम् उच्चारणविधिः, स्वराः, विरामः च वर्णिताः सन्ति। (शिक्षा-ग्रन्थों में वर्णों के उच्चारण की विधि, स्वर तथा विराम का वर्णन है।)
अयं पाठः शिक्षा-वेदाङ्गस्य एव विषयः — अत्र वर्णानां शुद्धोच्चारणम् (श्लोकौ २–३), स्वरस्य महत्त्वम् (इन्द्र-वृत्रासुर-कथा), विरामः अर्थात् पदच्छेदः (श्लोकः ४) च वर्णिताः।
उत्तरम् — व्याकरणग्रन्थेषु भाषायाः नियमाः सन्ति। अतः व्याकरणेन विना शुद्धं भाषणं शुद्धं लेखनं च न सम्भवति।
अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पृष्ठ 142प्रश्नः १ : पाठे विद्यमानानां श्लोकानाम् उच्चारणं स्मरणं लेखनं च कुरुत
यह करने का प्रश्न है — तीन काम एक साथ : उच्चारण (बोलकर पढ़ना), स्मरण (कण्ठस्थ करना) और लेखन (लिखकर अभ्यास)। नीचे पाँचों श्लोक दिए गए हैं — इन्हें शुद्ध बोलिए, याद कीजिए और बिना देखे लिखिए।
स्वजनः श्वजनो माभूत् सकलं शकलं सकृत् शकृत्॥ १॥
२. व्याघ्री यथा हरेत् पुत्रान् दंष्ट्राभ्यां न च पीडयेत्।
भीता पतनभेदाभ्यां तद्वद् वर्णान् प्रयोजयेत्॥ २॥
३. एवं वर्णाः प्रयोक्तव्या नाव्यक्ता न च पीडिताः।
सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते॥ ३॥
४. माधुर्यमक्षरव्यक्तिः पदच्छेदस्तु सुस्वरः।
धैर्यं लयसमर्थं च षडेते पाठका गुणाः॥ ४॥
५. गीती शीघ्री शिरःकम्पी तथा लिखितपाठकः।
अनर्थज्ञोऽल्पकण्ठश्च षडेते पाठकाधमाः॥ ५॥
अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पृष्ठ 142प्रश्नः २ : अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तराणि लिखत
उत्तरम् — वर्णानाम् (वर्णों का)।
उत्तरम् — व्याकरणम् (व्याकरण)।
उत्तरम् — सम्यग्वर्णप्रयोगेण (वर्णों के ठीक-ठीक प्रयोग से)।
उत्तरम् — षट् (छह)।
उत्तरम् — पाठकानाम् (पढ़ने वालों का)।
अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पृष्ठ 143प्रश्नः ३ : अधोलिखितानां प्रश्नानाम् पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत
उत्तरम् — व्याघ्री दंष्ट्राभ्यां स्वपुत्रान् नयति।
(बाघिन अपने दो दाँतों से अपने बच्चों को ले जाती है।)
उत्तरम् — वर्णाः न अव्यक्ताः न च पीडिताः, अपितु स्पष्टतया स्वाभाविकरूपेण च प्रयोक्तव्याः।
(वर्णों का उच्चारण न अस्पष्ट हो और न ज़रूरत से अधिक ज़ोर लगाकर — वे स्पष्ट और स्वाभाविक रूप से बोले जाने चाहिए।)
उत्तरम् — माधुर्यम्, अक्षरव्यक्तिः, पदच्छेदः, सुस्वरः, धैर्यं लयसमर्थं च — एते षट् पाठकानां गुणाः भवन्ति।
उत्तरम् — गीती, शीघ्री, शिरःकम्पी, लिखितपाठकः, अनर्थज्ञः, अल्पकण्ठः च — एते षट् अधमाः पाठकाः भवन्ति।
उत्तरम् — ‘स्वजनः’ इत्यस्य अर्थः बन्धुः, ‘श्वजनः’ इत्यस्य अर्थः तु शुनकः (कुक्कुरः)।
(‘स्वजनः’ का अर्थ है अपना बन्धु, और ‘श्वजनः’ का अर्थ है कुत्ता।)
उत्तरम् — ‘सकलम्’ इत्यस्य अर्थः सम्पूर्णम्, ‘शकलम्’ इत्यस्य अर्थः तु खण्डम्।
(‘सकलम्’ का अर्थ है पूरा, और ‘शकलम्’ का अर्थ है टुकड़ा।)
अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पृष्ठ 143प्रश्नः ४ : अधोलिखितानि लक्षणानि पाठकस्य गुणाः वा दोषाः वा इति विभजत
| गुणाः | दोषाः |
|---|---|
| यथा — अक्षरव्यक्तिः | शीघ्री |
| माधुर्यम् | गीती |
| पदच्छेदः | शिरःकम्पी |
| सुस्वरः | लिखितपाठकः |
| धैर्यम् | अनर्थज्ञः |
| लयसमर्थम् | अल्पकण्ठः |
अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पृष्ठ 144प्रश्नः ५ : श्लोकानुसारं रिक्तस्थानानि उचितैः शब्दैः पूरयत
उत्तरम् — भीता पतनभेदाभ्यां तद्वद् वर्णान् प्रयोजयेत्।
(श्लोकः २ — बाघिन गिरने और घाव, दोनों से डरती है)
उत्तरम् — धैर्यं लयसमर्थं च षडेते पाठका गुणाः।
(श्लोकः ४ — पाठक के छह गुणों में से)
उत्तरम् — गीती शीघ्री शिरःकम्पी तथा लिखितपाठकः।
(श्लोकः ५ — पाठक के छह दोषों में से)
उत्तरम् — एवं वर्णाः प्रयोक्तव्या नाव्यक्ता न च पीडिताः।
(श्लोकः ३ — अव्यक्त और पीडित, दोनों निषिद्ध)
उत्तरम् — स्वजनः श्वजनो माभूत् सकलं शकलं सकृत् शकृत्।
(श्लोकः १ — स्वजनः (बन्धु) श्वजनः (कुत्ता) न बने)
अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पृष्ठ 144प्रश्नः ६ : अधोलिखितानि वाक्यानि सत्यम् वा असत्यम् वा इति लिखत (यथा — पदच्छेदः पाठकानां गुणः अस्ति। — सत्यम्)
उत्तरम् — सत्यम् — श्लोक ५ का पहला दोष ‘गीती’ है : यः गीतगानम् इव पठति (जो गाकर पढ़ता है)।
उत्तरम् — असत्यम्
शुद्ध वाक्य — अक्षरव्यक्तिः नाम अक्षराणाम् उच्चारणे स्पष्टता अस्ति।
उत्तरम् — असत्यम्
शुद्ध वाक्य — सकृत् नाम एकवारम् इति अर्थः अस्ति।
उत्तरम् — असत्यम्
शुद्ध वाक्य — अव्यक्ताः वर्णाः न प्रयोक्तव्याः भवन्ति।
उत्तरम् — सत्यम् — श्लोक २ : ‘व्याघ्री यथा हरेत् पुत्रान्… तद्वद् वर्णान् प्रयोजयेत्’।
योग्यताविस्तरः — पृष्ठ 144(क) अक्षर/मात्रापरिवर्तनेन अर्थपरिवर्तनं भवति — पढ़ने और समझने की सामग्री (पुस्तक में इस पर प्रश्न नहीं है)
पुस्तक के सातों युग्म नीचे हैं। हर युग्म में एक अक्षर या एक मात्रा ही बदली है, फिर भी अर्थ पूरा बदल गया है।
| शुद्ध शब्द | अर्थः | बदला हुआ शब्द | अर्थः | क्या बदला |
|---|---|---|---|---|
| मित्रम् | बन्धुः (दोस्त) | मित्रः | सूर्यः (सूर्य) | लिङ्ग — नपुंसक से पुंल्लिङ्ग |
| फलम् | आम्रादिफलम् (फल) | पलम् | मांसः (मांस) | फ् → प् (महाप्राण से अल्पप्राण) |
| पुरुषः | जनः (मनुष्य) | परुषः | कठोरः (कठोर) | ‘उ’ मात्रा → ‘अ’ |
| अवदानम् | योगदानम् (योगदान) | अवधानम् | एकाग्रता (ध्यान) | द् → ध् (अल्पप्राण से महाप्राण) |
| प्रतिपलम् | प्रतिक्षणम् (हर क्षण) | प्रतिफलम् | परिणामः (परिणाम) | प् → फ् |
| नदति | ध्वनिं करोति (गरजता है) | नुदति | प्रेरयति (प्रेरित करता है) | ‘अ’ → ‘उ’ मात्रा |
| ददाति | दानं करोति (देता है) | दधाति | धारणं करोति (धारण करता है) | द् → ध् |
योग्यताविस्तरः — पृष्ठ 145अतिरिक्त अभ्यास (पुस्तक का निर्देश केवल ‘स्मरत’ — याद कीजिए — है; पदच्छेद, अन्वय, अर्थ और भाव अभ्यास हेतु दिए गए हैं) — माण्डूक्य-शिक्षा, याज्ञवल्क्य-शिक्षा, नीतिश्लोकः तथा पाणिनीय-शिक्षा कारिका
भावः — आलस्य, मूर्खों की संगति, भय, रोग, अत्यधिक आसक्ति और अभिमान — ये छह विद्या के शत्रु हैं; इनसे बचकर ही विद्या टिकती है।
भावः — निरन्तर अभ्यास से कोमल जल भी कठोर चट्टान को घिस देता है; अभ्यास से सब कुछ सम्भव है।
भावः — सुयोग्य गुरु से पाई और नित्य अभ्यास से जीवित रखी विद्या वाले लोग सिंहों से भरे पर्वत की तरह अजेय होते हैं।
| लक्षणम् | शब्दशः अर्थ | विद्यार्थी के लिए इसका अर्थ |
|---|---|---|
| काकचेष्टः | कौए जैसी चेष्टा वाला | सदा सतर्क और चौकन्ना, हर अवसर पकड़ने वाला |
| बकध्यानः | बगुले जैसे ध्यान वाला | एकाग्रता — जब तक लक्ष्य न मिले, दृष्टि हटे नहीं |
| श्वाननिद्रः | कुत्ते जैसी नींद वाला | हल्की नींद — पुकारते ही जाग जाना, आलस्य नहीं |
| अल्पाहारी | थोड़ा खाने वाला | कम और सन्तुलित भोजन — भरा पेट पढ़ाई नहीं होने देता |
| गृहत्यागी | घर छोड़ने वाला | विद्या के लिए घर की सुख-सुविधा छोड़ने को तैयार |
भावः — अच्छे विद्यार्थी के पाँच लक्षण हैं — सतर्कता, एकाग्रता, हल्की नींद, थोड़ा भोजन और विद्या के लिए घर का सुख छोड़ने की तत्परता।
भावः — जैसे खोदने वाला भूमि से जल पा लेता है, वैसे ही सेवा और श्रद्धा से सुनने वाला शिष्य गुरु की विद्या पा लेता है।
| वेदाङ्गम् | वेद-पुरुष का अङ्ग | क्यों वही अङ्ग |
|---|---|---|
| छन्दः | पादौ (दोनों पैर) | छन्द पर ही वेद खड़ा और गतिमान है |
| कल्पः | हस्तौ (दोनों हाथ) | हाथ से काम होता है — कल्प यज्ञ की क्रिया बताता है |
| ज्योतिषम् | चक्षुः (आँख) | आँख से दूर देखते हैं — ज्योतिष काल और नक्षत्र देखता है |
| निरुक्तम् | श्रोत्रम् (कान) | कान से शब्द ग्रहण होता है — निरुक्त शब्द का मूल बताता है |
| शिक्षा | घ्राणम् (नाक) | नाक श्वास और स्वर का द्वार है — शिक्षा उच्चारण सिखाती है |
| व्याकरणम् | मुखम् (मुख) | मुख से बोला जाता है — व्याकरण शुद्ध रूप गढ़ता है |
भावः — वेद को एक पुरुष मानकर छहों वेदाङ्गों को उसके अङ्ग कहा गया है; इसलिए छहों अङ्गों सहित वेद पढ़कर ही मनुष्य ब्रह्मलोक में सम्मान पाता है।
परियोजनाकार्यम् — पृष्ठ 145प्रकल्प-कार्यम् : कक्षायां श्लोकोच्चारण-प्रतियोगिता तथा गुण-दोष-अवलोकनम्
यह करके सीखने का काम है — कक्षा में श्लोक-उच्चारण की प्रतियोगिता कराइए और पहले से बनाई गई एक सूची (मूल्यांकन-तालिका) के अनुसार सबका उच्चारण परखिए।
नमूना मूल्यांकन-सूची (निर्मित-सूची) —
| क्रमः | कसौटी (श्लोक ४ अनुसारम्) | अङ्काः | क्या देखें |
|---|---|---|---|
| १ | माधुर्यम् | 5 | स्वर में मिठास है या रूखापन |
| २ | अक्षरव्यक्तिः | 5 | ‘स’–‘श’, ‘द’–‘ध’, संयुक्ताक्षर साफ़ हैं? |
| ३ | पदच्छेदः | 5 | विराम अर्थ के अनुसार पड़ा या बीच शब्द में |
| ४ | सुस्वरः | 5 | अन्तिम पंक्ति के छात्र तक आवाज़ पहुँची? |
| ५ | धैर्यम् | 5 | बिना अटके, बिना घबराए |
| ६ | लयसमर्थम् | 5 | श्लोक की लय आदि से अन्त तक बनी रही? |
| — | दोषाः (गीती, शीघ्री, शिरःकम्पी, लिखितपाठकः, अनर्थज्ञः, अल्पकण्ठः) | –1 प्रति दोषः | जो दोष दिखे, उसका नाम लिखिए |
यह तालिका अपनी कक्षा की प्रतियोगिता देखकर भरनी है, इसलिए उत्तर हर कक्षा में अलग होगा। नीचे नमूना दिया गया है — देखिए कि हर पंक्ति में किसने क्या किया यह लिखा गया है, केवल शब्द नहीं।
| गुणाः | दोषाः |
|---|---|
| अक्षरव्यक्तिः — रमेशः ‘दंष्ट्राभ्याम्’ इत्यत्र संयुक्ताक्षरं स्पष्टम् उच्चारितवान्। | शीघ्री — मोहनः द्वितीयं श्लोकम् अतिवेगेन पठितवान्, पदानि मिलितानि। |
| पदच्छेदः — सीता ‘नाव्यक्ता · न च पीडिताः’ इत्यत्र उचितस्थाने विरामं कृतवती। | अल्पकण्ठः — गीता मन्दस्वरेण अपठत्, अन्तिमपङ्क्तौ न श्रुतम्। |
| सुस्वरः — अनीता उच्चस्वरेण मधुरं च अपठत्, सर्वैः श्रुतम्। | शिरःकम्पी — सुरेशः पठनकाले शिरः चालितवान्। |
| धैर्यम् — हिमानी विना सङ्कोचं पञ्च श्लोकान् स्मृत्वा अपठत्। | गीती — कश्चन छात्रः श्लोकं गीतम् इव अगायत्। |
| लयसमर्थम् — विनयः श्लोकस्य लयम् अन्तपर्यन्तम् अरक्षत्। | अनर्थज्ञः — एकः छात्रः श्लोकस्य अर्थम् अज्ञात्वा अपठत्, अतः अनुचितस्थाने विरामम् अकरोत्। |
Chapter 12 of 13 – Sanskrit
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NCERT Solutions Class 8 Sanskrit Chapter 12 सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते – Overview
| Class | Class 8 |
| Subject | Sanskrit |
| Chapter | 12 – सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते |
| Session | 2027 |
| Format | Full answers on this page + PDF |
NCERT Solutions Class 8 Sanskrit Chapter 12 – FAQs
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