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NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् (PDF) – 2027

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् – step-by-step answers to every exercise and in-text question of the chapter, as per the latest NCERT syllabus for 2027. Read them online or download the free question-answer PDF.

दीपकम् (कक्षा 8) का अष्टमः पाठः — पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्। यह पाठ भारत के पूर्वोत्तर (ऐशान्य) कोण के आठ राज्यों — अरुणाचलप्रदेशः, असमः, मणिपुरम्, मेघालयः, मिजोरमः, नागालैण्डम्, त्रिपुरा तथा सिक्किमः — का परिचय अध्यापिका और छात्रों के संवाद के रूप में देता है, और बीच में दो श्लोकों से ‘सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च’ नाम की व्याख्या करता है। नीचे पृष्ठ 85 से 96 तक के संवादगत प्रश्न, दोनों श्लोकों का पदच्छेदः → अन्वयः → अर्थः → भावः, ‘वयं शब्दार्थान् जानीमः’, ‘अत्र इदम् अवधेयम् (दश दिशः)’, अभ्यासात् जायते सिद्धिः के प्रश्न १–९ (हर उपभाग सहित, वर्गचित्र-जालम् तथा पट्टिका समेत), योग्यताविस्तरः और परियोजनाकार्यम् क्रमशः हल किए गए हैं — पहले संस्कृत उत्तर, फिर कोष्ठक में हिन्दी अर्थ।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् PDF

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पाठ का हिंदी अनुवाद

पाठ-परिचय — पूर्वोत्तर के आठ राज्य (पृष्ठ 85)
अरुणाचलप्रदेशः, असमः, मणिपुरं, मेघालयः, मिजोरमः, नागालैण्डं, त्रिपुरा एवञ्च सिक्किमः इत्येतानि अष्टराज्यानि देशस्य पूर्वोत्तरभागे स्थितानि।
अरुणाचलप्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैण्ड, त्रिपुरा और सिक्किम — ये आठ राज्य देश के पूर्वोत्तर भाग में स्थित हैं।
एतानि राज्यानि भारतस्य केवलं स्थानविशेषत्वेन न, अपितु सांस्कृतिक-ऐतिहासिक-विविधतायाः कारणेन विशेषमहत्त्वं वहन्ति।
ये राज्य भारत के लिए केवल अपने विशेष स्थान के कारण ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विविधता के कारण भी विशेष महत्त्व रखते हैं।
एषां प्रदेशानां प्राकृतिकं सौन्दर्यं, समुदायानां विविधता, भौगोलिक-पर्यावरणीयं वैचित्र्यं च देशस्य अन्येभ्यः भागेभ्यः पृथक् अस्ति।
इन प्रदेशों की प्राकृतिक सुन्दरता, यहाँ के समुदायों की विविधता और भौगोलिक तथा पर्यावरण-सम्बन्धी विचित्रता देश के अन्य भागों से अलग है।
पर्वतैः नदीभिः च सुशोभितानि एतानि राज्यानि पूर्वहिमालय-श्रेणिषु पत्काई-नागपर्वत-प्रदेशे च स्थितानि।
पर्वतों और नदियों से सुशोभित ये राज्य पूर्वी हिमालय की पर्वत-श्रेणियों में तथा पत्काई और नागा पर्वतों के प्रदेश में स्थित हैं।
एतेषु बराक-ब्रह्मपुत्रादि-नद्यः प्रवहन्ति एवञ्च पर्वतश्रेण्यः, पीठस्थलानि, निम्नपर्वताः, उपत्यकाः च अस्मिन् भू-भागे भू-वैविध्यं धारयन्ति।
इनमें बराक, ब्रह्मपुत्र आदि नदियाँ बहती हैं; और पर्वत-श्रेणियाँ, पठार, छोटी पहाड़ियाँ तथा घाटियाँ इस भू-भाग में भूमि की विविधता बनाए रखती हैं।
प्राकृतिक-सम्पदाभिः समृद्धः अयं प्रदेशः पूर्व-दक्षिणपूर्व-एशियायाः द्वारम् अस्ति।
प्राकृतिक सम्पदाओं से समृद्ध यह प्रदेश पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया का द्वार है।
तानि राज्यानि अष्टभ्रातृभगिन्यः इति नाम्ना प्रसिद्धानि सन्ति। तानि एव ‘अष्टभगिन्यः’ अथवा ‘सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च’ इति कथ्यन्ते।
वे राज्य ‘अष्टभ्रातृभगिन्यः’ (आठ भाई-बहन) नाम से प्रसिद्ध हैं। उन्हीं को ‘अष्टभगिन्यः’ (आठ बहनें) अथवा ‘सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च’ (सात बहनें और एक भाई) कहा जाता है।
अध्यापिका और छात्रों का संवाद (पृष्ठ 86–88)
अध्यापिका – सुप्रभातं छात्राः।
अध्यापिका – सुप्रभात, छात्रो!
छात्राः – सुप्रभातम् आचार्ये।
छात्र – सुप्रभात, आचार्या जी!
अध्यापिका – शुभाशयाः। अद्य किं पठनीयम् ?
अध्यापिका – शुभकामनाएँ। आज क्या पढ़ना है?
छात्राः – वयं सर्वे स्वदेशस्य राज्यानां विषये ज्ञातुमिच्छामः।
छात्र – हम सब अपने देश के राज्यों के विषय में जानना चाहते हैं।
अध्यापिका – शोभनम्। वदत, अस्माकं देशे कति राज्यानि सन्ति ?
अध्यापिका – बहुत अच्छा। बताओ, हमारे देश में कितने राज्य हैं?
स्वरा – महोदये ! मम भगिनी कथयति यत् अस्माकं देशे अष्टाविंशतिः राज्यानि सन्ति इति। एतद् अतिरिच्य अष्टकेन्द्रशासितप्रदेशाः अपि सन्ति।
स्वरा – महोदया! मेरी बहन कहती है कि हमारे देश में अट्ठाईस राज्य हैं। इसके अतिरिक्त आठ केन्द्रशासित प्रदेश भी हैं।
अध्यापिका – शोभनं स्वरे ! सम्यक् जानाति तव भगिनी। भवतु, अपि यूयं जानीथ यद् एतेषु राज्येषु अष्टराज्यानाम् एकः समवायोऽस्ति यः सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च इति नाम्ना प्रथितः अस्ति।
अध्यापिका – बहुत अच्छा, स्वरा! तुम्हारी बहन ठीक जानती है। अच्छा, क्या तुम जानते हो कि इन राज्यों में आठ राज्यों का एक समूह है, जो ‘सात बहनें और एक भाई’ नाम से प्रसिद्ध है?
सर्वे छात्राः – (परस्परं साश्चर्यं पश्यन्तः) सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च !
सभी छात्र – (एक-दूसरे को आश्चर्य से देखते हुए) सात बहनें और एक भाई!
श्रीशः – इमानि राज्यानि सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च इति किमर्थं कथ्यन्ते ?
श्रीश – ये राज्य ‘सात बहनें और एक भाई’ क्यों कहलाते हैं?
अध्यापिका – प्रयोगोऽयं प्रतीकात्मको वर्तते। कदाचित् सामाजिक-सांस्कृतिक-परिदृश्यानां साम्याद् भौगोलिकवैशिष्ट्यात् च इमानि उक्तोपाधिना प्रथितानि।
अध्यापिका – यह प्रयोग प्रतीकात्मक है। शायद सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्यों की समानता के कारण तथा भौगोलिक विशेषता के कारण ये (राज्य) इस नाम से प्रसिद्ध हुए हैं।
सर्वे छात्राः – अहो ! अत्यन्तं सुखकरी वार्ता। श्रावयतु तावद् यत् कानि तानि राज्यानि इति ?
सभी छात्र – अहा! यह तो बहुत सुखद बात है। तो (आप) सुनाइए कि वे राज्य कौन-कौन से हैं?
अध्यापिका –
अद्वयं मत्रयं चैव न-त्रि-युक्तं तथाद्वयम्।
सप्तराज्यसमूहोऽयं भगिनीसप्तकं मतम्॥
अध्यापिका – ‘अ’ से आरम्भ होने वाले दो, ‘म’ से आरम्भ होने वाले तीन और उसी प्रकार ‘न’ तथा ‘त्रि’ से युक्त दो — सात राज्यों का यह समूह ‘भगिनीसप्तक’ (सात बहनें) माना गया है। (भाव: अरुणाचलप्रदेश, असम; मणिपुर, मेघालय, मिजोरम; नागालैण्ड, त्रिपुरा।)
तेन युक्तो लघुः भ्राता सिक्किमः इति विश्रुतः।
पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्॥
उनके साथ जुड़ा हुआ छोटा भाई ‘सिक्किम’ नाम से प्रसिद्ध है। भारत के (इस) मनोहर ईशान (उत्तर-पूर्व) कोण को देखो।
इत्थं भ्रात्रा सिक्किमेन सह भगिनीसप्तके इमानि राज्यानि सन्ति – अरुणाचलप्रदेशः, असमः, मणिपुरम्, मिजोरमः, मेघालयः, नागालैण्डं, त्रिपुरा चेति।
इस प्रकार भाई सिक्किम के साथ ‘सात बहनों’ में ये राज्य हैं — अरुणाचलप्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नागालैण्ड और त्रिपुरा।
यद्यपि क्षेत्रपरिमाणैः इमानि लघूनि वर्तन्ते तथापि गुणगौरवदृष्ट्या बृहत्तराणि प्रतीयन्ते।
यद्यपि क्षेत्रफल के नाप से ये छोटे हैं, तथापि गुण और गौरव की दृष्टि से ये बहुत बड़े प्रतीत होते हैं।
सर्वे छात्राः – कथं मान्ये !
सभी छात्र – कैसे, आदरणीया?
अध्यापिका – भ्रात्रा सह इमाः सप्तभगिन्यः स्वीये प्राचीनेतिहासे प्रायः स्वाधीनाः एव दृष्टाः। न केनापि शासकेन इमाः स्वायत्तीकृताः।
अध्यापिका – भाई के साथ ये सात बहनें अपने प्राचीन इतिहास में प्रायः स्वतन्त्र ही देखी गई हैं। किसी भी शासक ने इन्हें अपने अधीन नहीं किया।
विविध-संस्कृतिविशिष्टायां भारतभूमौ एतासां भ्रातृ-भगिनीनां संस्कृतिः महत्त्वाधायिनी वर्तते।
अनेक संस्कृतियों से विशिष्ट भारतभूमि पर इन भाई-बहनों की संस्कृति (विशेष) महत्त्व रखती है।
स्वरा – अन्यत् किमपि वैशिष्ट्यमस्ति एतासाम् ?
स्वरा – क्या इनकी कोई और विशेषता भी है?
अध्यापिका – नूनम् अस्ति एव। पर्वत-वृक्ष-पुष्प-प्रभृतिभिः प्राकृतिकसम्पद्भिः सुसमृद्धानि सन्ति इमानि राज्यानि।
अध्यापिका – अवश्य है। ये राज्य पर्वत, वृक्ष, फूल आदि प्राकृतिक सम्पदाओं से भली-भाँति समृद्ध हैं।
भारतवृक्षे पुष्प-स्तबकसदृशानि विराजन्ते एतानि। अस्ति तावदेतेषां विषये किञ्चिद् वैशिष्ट्यमपि कथनीयम्।
भारत-रूपी वृक्ष पर ये फूलों के गुच्छों के समान शोभा पाते हैं। इनके विषय में कुछ विशेषता भी बताने योग्य है।
सावहितमनसा शृणुत। जनजातिबहुलप्रदेशोऽयम्। गारो-खासी-नागा-मिजो-लेप्चा-प्रभृतयः बहवः जनजातीयाः अत्र निवसन्ति।
ध्यानपूर्वक सुनो। यह जनजातियों की अधिकता वाला प्रदेश है। गारो, खासी, नागा, मिजो, लेप्चा आदि अनेक जनजातियों के लोग यहाँ रहते हैं।
शरीरेण ऊर्जस्विनः एतत्प्रादेशिकाः बहुभाषाभिः समन्विताः, पर्वपरम्पराभिः परिपूरिताः, स्वलीला-कलासु च निष्णाताः सन्ति।
इस प्रदेश के लोग शरीर से शक्तिशाली हैं, अनेक भाषाओं से युक्त हैं, उत्सवों की परम्पराओं से भरपूर हैं और अपनी लीला-कलाओं (मनोरंजन की कलाओं) में निपुण हैं।
मालती – महोदये ! तत्र तु वंशवृक्षाणां वनानि अपि प्राप्यन्ते ?
मालती – महोदया! वहाँ तो बाँस के वृक्षों के वन भी मिलते हैं न?
अध्यापिका – आम्। प्रदेशेऽस्मिन् हस्तशिल्पानां बाहुल्यं वर्तते। आवस्त्राभूषणेभ्यः गृहनिर्माणपर्यन्तं प्रायः वंशवृक्षनिर्मितानां वस्तूनाम् उपयोगः क्रियते।
अध्यापिका – हाँ। इस प्रदेश में हस्तशिल्पों की अधिकता है। वस्त्रों और आभूषणों से लेकर घर बनाने तक प्रायः बाँस से बनी वस्तुओं का उपयोग किया जाता है।
यतो हि अत्र वंशवृक्षाणां प्राचुर्यं विद्यते। साम्प्रतं वंशोद्योगोऽयम् अन्ताराष्ट्रियख्यातिम् अवाप्तोऽस्ति।
क्योंकि यहाँ बाँस के वृक्षों की बहुतायत है। आजकल यह बाँस-उद्योग अन्तरराष्ट्रीय प्रसिद्धि पा चुका है।
अभिनवः – भ्रातृ-भगिनीप्रदेशोऽयं बह्वाकर्षकः इति प्रतीयते।
अभिनव – भाई-बहनों का यह प्रदेश तो अत्यधिक आकर्षक प्रतीत होता है।
मृदुलः – मान्ये ! किं भ्रमणाय भ्रातृ-भगिनीप्रदेशोऽयं समीचीनः ?
मृदुल – आदरणीया! क्या भाई-बहनों का यह प्रदेश घूमने के लिए उपयुक्त है?
सर्वेछात्राः – (उच्चैः) महोदये ! आगामिनि अवकाशे वयं तत्रैव गन्तुमिच्छामः।
सभी छात्र – (ऊँचे स्वर में) महोदया! आने वाली छुट्टियों में हम वहीं जाना चाहते हैं।
स्वरा – आचार्ये ! भवती अपि अस्माभिः सार्द्धं चलतु किल।
स्वरा – आचार्या जी! आप भी हमारे साथ अवश्य चलिए।
अध्यापिका – रोचते मेऽयं विचारः। एतानि राज्यानि तु भ्रमणार्थं स्वर्गसदृशानि सन्ति। अतः अवश्यं चलामः।
अध्यापिका – मुझे यह विचार अच्छा लगा। ये राज्य तो घूमने के लिए स्वर्ग के समान हैं। अतः हम अवश्य चलेंगे।
अत्र इदम् अवधेयम् — दश दिशः (पृष्ठ 90)
पूर्वाग्नेयी दक्षिणा च नैर्ऋती पश्चिमा तथा।
वायवी चोत्तरैशानी ऊर्ध्वा चाधो दिशो दश॥
पूर्वा (पूर्व), आग्नेयी (दक्षिण-पूर्व), दक्षिणा (दक्षिण) और नैर्ऋती (दक्षिण-पश्चिम), तथा पश्चिमा (पश्चिम); वायवी (उत्तर-पश्चिम) और उत्तरा (उत्तर), ईशानी (उत्तर-पूर्व), ऊर्ध्वा (ऊपर) और अधः (नीचे) — ये दस दिशाएँ हैं।
योग्यताविस्तरः (पृष्ठ 94–95)
पत्काई इति भारतस्य पूर्वोत्तरभागे बर्मादेशेन सह सीमावर्तिक्षेत्रे स्थिता पर्वतशृङ्खला अस्ति।
पत्काई भारत के पूर्वोत्तर भाग में बर्मा (म्यांमार) देश के साथ लगे सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित एक पर्वत-श्रृंखला है।
बराकनदी भारतस्य मणिपुरं, नागालैण्डं, मिजोरमः, असमः चेति राज्येषु एवञ्च बङ्गलादेशे वहन्ती ९०० कि.मी. दीर्घा नदी अस्ति।
बराक नदी भारत के मणिपुर, नागालैण्ड, मिजोरम और असम राज्यों में तथा बांग्लादेश में बहने वाली ९०० कि.मी. लम्बी नदी है।
गारोपर्वतः, खासीपर्वतः, जयन्तियापर्वतः च उत्तरपूर्वीयपीठस्थले स्थिताः त्रयः पर्वतशृङ्खलाः सन्ति।
गारो पर्वत, खासी पर्वत और जयन्तिया पर्वत — ये उत्तर-पूर्वी पठार पर स्थित तीन पर्वत-श्रृंखलाएँ हैं।
मेघालयपीठस्थले कृष्णहीरकः (कोयला), लौह-अयस्कः, सिलिमेनाइटः, क्षारशिला, यूरेनियम इत्यादयः खनिजसम्पदः प्रचुरं विद्यन्ते।
मेघालय के पठार में कोयला (कृष्णहीरक), लौह-अयस्क, सिलिमेनाइट, चूना-पत्थर (क्षारशिला), यूरेनियम आदि खनिज सम्पदाएँ प्रचुर मात्रा में हैं।
सप्तभगिन्यन्तर्गतप्रदेशानाम् उल्लेखः महाभारतं, रामायणं, पुराणानि इति प्राचीनग्रन्थेषु अपि उपलभ्यते।
‘सात बहनों’ के अन्तर्गत आने वाले प्रदेशों का उल्लेख महाभारत, रामायण और पुराण — इन प्राचीन ग्रन्थों में भी मिलता है।
सप्तभगिन्यः इति प्रथितः राज्यसमूहः प्राकृतिकसौन्दर्येण अतिविशिष्टः।
‘सात बहनें’ नाम से प्रसिद्ध यह राज्य-समूह प्राकृतिक सुन्दरता के कारण अत्यन्त विशिष्ट है।
प्रत्येकं राज्यस्य अपि स्वकीयं महत्त्वम् अस्ति, भारते अरुणाचलप्रदेशे सूर्यस्य अरुणोदयः सर्वप्रथमं भवति, अतः अरुणाचलः।
प्रत्येक राज्य का भी अपना महत्त्व है। भारत में सूर्य का उदय (अरुणोदय) सबसे पहले अरुणाचलप्रदेश में होता है, इसलिए (इसका नाम) ‘अरुणाचल’ है।
अत्र तादृशः प्रदेशः अपि अस्ति यत्र आवर्षं हिमपातः भवति।
यहाँ ऐसा प्रदेश भी है जहाँ पूरे वर्ष बर्फ गिरती है।
असमराज्यं पूर्वं कामरूपमिति नाम्ना प्रसिद्धम्। अस्मिन् खनिजं इन्धनतैलं, इन्धनानिलः (CNG) च प्रचुरमात्रया दृश्यते।
असम राज्य पहले ‘कामरूप’ नाम से प्रसिद्ध था। इसमें खनिज ईंधन-तेल (पेट्रोलियम) और ईंधन-गैस (CNG) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
लोके बृहत्तमः रमणीयः नदीद्वीपः माजुली असमे ब्रह्मपुत्रनदे स्थितः अस्ति।
संसार का सबसे बड़ा और रमणीय नदी-द्वीप माजुली असम में ब्रह्मपुत्र नद में स्थित है।
मणिपुरस्य उल्लेखः तु महाभारतादिग्रन्थेषु अपि लभ्यते। अत्र सम्पूर्णे विश्वे एकमात्रं राष्ट्रियं प्लवमानम् उद्यानम् अस्ति। इदं लोकटक-सरोवरे प्लवते।
मणिपुर का उल्लेख तो महाभारत आदि ग्रन्थों में भी मिलता है। यहाँ पूरे विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान है। यह लोकटक झील में तैरता है।
मिजोरम्, सिक्किम, मेघालय, त्रिपुरा राज्यानामपि सन्ति वैशिष्ट्यानि।
मिजोरम, सिक्किम, मेघालय और त्रिपुरा राज्यों की भी (अपनी-अपनी) विशेषताएँ हैं।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् – Questions and Answers

All questions of the chapter are answered below, in the order of the book – in-text questions, activities and the end-of-chapter exercises. Each answer is written the way you would write it in the exam.

पाठगताः प्रश्नाः (कक्षा-संवादे) — पृष्ठ 86–88अध्यापिकायाः छात्राणां च संवादः

संवादः
प्र.1अध्यापिका – शुभाशयाः। अद्य किं पठनीयम् ?
उत्तर

वयं सर्वे स्वदेशस्य राज्यानां विषये ज्ञातुमिच्छामः। (हम सब अपने देश के राज्यों के विषय में जानना चाहते हैं।) — पाठ में छात्र यही उत्तर देते हैं।

प्र.2अध्यापिका – शोभनम्। वदत, अस्माकं देशे कति राज्यानि सन्ति ?
उत्तर

अस्माकं देशे अष्टाविंशतिः (२८) राज्यानि सन्ति। (हमारे देश में अट्ठाईस राज्य हैं।)

स्वरा उत्तरं ददाति — “महोदये ! मम भगिनी कथयति यत् अस्माकं देशे अष्टाविंशतिः राज्यानि सन्ति इति। एतद् अतिरिच्य अष्टकेन्द्रशासितप्रदेशाः अपि सन्ति।”

प्र.3अध्यापिका – भवतु, अपि यूयं जानीथ यद् एतेषु राज्येषु अष्टराज्यानाम् एकः समवायोऽस्ति यः सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च इति नाम्ना प्रथितः अस्ति ?
उत्तर

आम्, जानीमः। अष्टराज्यानाम् एकः समवायः ‘सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च’ इति नाम्ना प्रथितः अस्ति। (हाँ, हम जानते हैं। आठ राज्यों का एक समूह ‘सात बहनें और एक भाई’ नाम से प्रसिद्ध है।)

पाठे छात्राः साश्चर्यं परस्परं पश्यन्तः वदन्ति — “सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च !”

प्र.4श्रीशः – इमानि राज्यानि सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च इति किमर्थं कथ्यन्ते ?
उत्तर

सामाजिक-सांस्कृतिक-परिदृश्यानां साम्याद् भौगोलिकवैशिष्ट्यात् च इमानि राज्यानि ‘सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च’ इति उक्तोपाधिना प्रथितानि। (सामाजिक-सांस्कृतिक दृश्यों की समानता के कारण तथा भौगोलिक विशेषता के कारण ये राज्य इस नाम से प्रसिद्ध हैं।)

अध्यापिका स्पष्टं कथयति — “प्रयोगोऽयं प्रतीकात्मको वर्तते।” (यह प्रयोग प्रतीकात्मक है।) अर्थात् ‘भगिनी’ तथा ‘भ्राता’ इति शब्दौ वास्तविकं कौटुम्बिकं सम्बन्धं न सूचयतः, अपितु समानताया: प्रतीकम् स्तः।

प्र.5सर्वे छात्राः – अहो ! अत्यन्तं सुखकरी वार्ता। श्रावयतु तावद् यत् कानि तानि राज्यानि इति ?
उत्तर

तानि अष्ट राज्यानि सन्ति — अरुणाचलप्रदेशः, असमः, मणिपुरम्, मिजोरमः, मेघालयः, नागालैण्डम्, त्रिपुरा च (इति सप्त भगिन्यः), तैः सह लघुः भ्राता सिक्किमः। (वे आठ राज्य हैं — अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नागालैण्ड और त्रिपुरा; इनके साथ छोटा भाई सिक्किम।)

प्र.6स्वरा – अन्यत् किमपि वैशिष्ट्यमस्ति एतासाम् ?
उत्तर

आम्, नूनम् अस्ति एव। (हाँ, निश्चय ही है।) अध्यापिकायाः उत्तरे त्रीणि वैशिष्ट्यानि सन्ति —

  • स्वाधीनता — भ्रात्रा सह इमाः सप्तभगिन्यः स्वीये प्राचीनेतिहासे प्रायः स्वाधीनाः एव दृष्टाः; न केनापि शासकेन इमाः स्वायत्तीकृताः। (प्राचीन इतिहास में ये प्रायः स्वतन्त्र ही रहीं; किसी शासक ने इन्हें अपने अधीन नहीं किया।)
  • प्राकृतिक-सम्पत् — पर्वत-वृक्ष-पुष्प-प्रभृतिभिः प्राकृतिकसम्पद्भिः सुसमृद्धानि सन्ति इमानि राज्यानि; भारतवृक्षे पुष्प-स्तबकसदृशानि विराजन्ते एतानि।
  • जनजातिबहुलता तथा कला — गारो-खासी-नागा-मिजो-लेप्चा-प्रभृतयः बहवः जनजातीयाः अत्र निवसन्ति। एतत्प्रादेशिकाः शरीरेण ऊर्जस्विनः, बहुभाषाभिः समन्विताः, पर्वपरम्पराभिः परिपूरिताः, स्वलीला-कलासु च निष्णाताः सन्ति।
प्र.7मालती – महोदये ! तत्र तु वंशवृक्षाणां वनानि अपि प्राप्यन्ते ?
उत्तर

आम्। अत्र वंशवृक्षाणां प्राचुर्यं विद्यते, अतः प्रदेशेऽस्मिन् हस्तशिल्पानां बाहुल्यं वर्तते। (हाँ। यहाँ बाँस के वृक्षों की प्रचुरता है, इसलिए इस प्रदेश में हस्तशिल्पों की बहुलता है।)

पाठस्य वाक्यम् — “आवस्त्राभूषणेभ्यः गृहनिर्माणपर्यन्तं प्रायः वंशवृक्षनिर्मितानां वस्तूनाम् उपयोगः क्रियते।” (वस्त्र-आभूषण से लेकर घर बनाने तक प्रायः बाँस से बनी वस्तुओं का उपयोग किया जाता है।) साम्प्रतं वंशोद्योगोऽयम् अन्ताराष्ट्रियख्यातिम् अवाप्तोऽस्ति। (आजकल यह बाँस-उद्योग अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर चुका है।)

प्र.8मृदुलः – मान्ये ! किं भ्रमणाय भ्रातृ-भगिनीप्रदेशोऽयं समीचीनः ?
उत्तर

आम्, अतीव समीचीनः। एतानि राज्यानि तु भ्रमणार्थं स्वर्गसदृशानि सन्ति, अतः अवश्यं चलामः। (हाँ, बहुत उपयुक्त है। ये राज्य तो भ्रमण के लिए स्वर्ग के समान हैं, अतः हम अवश्य चलेंगे।)

श्लोक-व्याख्या (पदच्छेदः · अन्वयः · अर्थः · भावः) — पृष्ठ 86अतिरिक्त अभ्यास (पुस्तक में प्रश्न नहीं है) — अध्यापिकायाः मुखेन उक्तौ श्लोकौ

श्लोकौ
प्र.1अद्वयं मत्रयं चैव न-त्रि-युक्तं तथाद्वयम्।
सप्तराज्यसमूहोऽयं भगिनीसप्तकं मतम्॥ — अस्य श्लोकस्य पदच्छेदम्, अन्वयम्, अर्थं भावं च लिखत।
उत्तर
पदच्छेदः — अद्वयम् + मत्रयम् + च + एव + न-त्रि-युक्तम् + तथा + द्वयम्।
सप्त-राज्य-समूहः + अयम् + भगिनी-सप्तकम् + मतम्।
अन्वयः — अ-द्वयम्, म-त्रयं च एव, तथा न-त्रि-युक्तं द्वयम् — अयं सप्तराज्यसमूहः भगिनीसप्तकं मतम्।

अर्थः — ‘अ’ से आरम्भ होने वाले दो, ‘म’ से आरम्भ होने वाले तीन और उसी प्रकार ‘न’ तथा ‘त्रि’ से युक्त दो — यह सात राज्यों का समूह ‘भगिनीसप्तक’ (सात बहनें) माना गया है।

श्लोक का सङ्केतकितनेराज्यानि
अ-द्वयम्२अरुणाचलप्रदेशः, असमः
म-त्रयम्३मणिपुरम्, मेघालयः, मिजोरमः
न-त्रि-युक्तं द्वयम्२नागालैण्डम्, त्रिपुरा
योगः७भगिनीसप्तकम्

भावः — कवि ने सात राज्यों के नाम आद्याक्षर के आधार पर याद रखने का सरल उपाय दिया है — ‘अ’ के दो, ‘म’ के तीन, ‘न’-‘त्रि’ के दो; कुल सात। यही ‘सप्तभगिन्यः’ हैं।

प्र.2तेन युक्तो लघुः भ्राता सिक्किमः इति विश्रुतः।
पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्॥ — अस्य श्लोकस्य पदच्छेदम्, अन्वयम्, अर्थं भावं च लिखत।
उत्तर
पदच्छेदः — तेन + युक्तः + लघुः + भ्राता + सिक्किमः + इति + विश्रुतः।
पश्यत + कोणम् + ऐशान्यम् + भारतस्य + मनोहरम्।
अन्वयः — तेन युक्तः लघुः भ्राता सिक्किमः इति विश्रुतः। (यूयं) भारतस्य मनोहरम् ऐशान्यं कोणं पश्यत।

अर्थः — उस (सप्तराज्यसमूह) के साथ जुड़ा हुआ छोटा भाई ‘सिक्किम’ नाम से प्रसिद्ध है। (हे छात्रो!) भारत के मनोहर ईशान (उत्तर-पूर्व) कोण को देखो।

भावः — सात बहनों के साथ आठवाँ राज्य सिक्किम ‘लघु भ्राता’ के रूप में जुड़ता है — इसीलिए पूरा समूह ‘अष्टभगिन्यः’ अथवा ‘सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च’ कहलाता है। दूसरी पंक्ति में ‘पश्यत’ कहकर कवि इस सुन्दर पूर्वोत्तर भारत को देखने का आमन्त्रण देता है।

वयं शब्दार्थान् जानीमः — पृष्ठ 88–89शब्दार्थ-सारणी तथा ‘मातृभाषया अर्थं लिखत’ स्तम्भः

शब्दार्थाः
प्र.1वयं शब्दार्थान् जानीमः — शब्दार्थ-सारण्याः ‘मातृभाषया अर्थं लिखत’ इति स्तम्भं पूरयत।
उत्तर

पाठ की दोनों शब्दार्थ-सारणियाँ नीचे एक साथ दी गई हैं। ‘मातृभाषया अर्थं लिखत’ स्तम्भ में हिन्दी-भाषी छात्र ‘हिन्दी’ वाला अर्थ लिखेंगे; जिनकी मातृभाषा अन्य है, वे अपनी भाषा में वही अर्थ लिखें।

शब्दःअर्थः (संस्कृतम्)हिन्दीEnglish
स्वदेशस्यनिजराष्ट्रस्यअपने देश काOf our country
वैचित्र्यम्विशिष्टं स्वरूपम्विचित्रताUniqueness
प्रवहन्तिप्रकर्षेण वहन्तिबहती हैंFlows
भू-वैविध्यम्भूमेः विविधताभूमि की विविधताLand diversity
पीठस्थलानिखण्डस्थलानिपठारPlateau
जानीथअवगच्छथजानते हो(You all) Know
ऐशान्यम्पूर्वोत्तरदिशापूर्वोत्तर दिशाNorth-East corner
ज्ञातुम्वेदितुम्जानने के लिएTo know
भागेभ्यःखण्डेभ्यःभागों सेFrom parts
समवायःसमाहारःसमूहCombination
केन्द्रशासितप्रदेशाःप्रत्यक्षं केन्द्रशासनाधीनाः प्रदेशाःकेन्द्र द्वारा शासित प्रदेशUnion Territories
अतिरिच्यअतिरिक्तभावेनइसके अतिरिक्तBesides
प्रथितःप्रख्यातःप्रसिद्धFamous
प्रतीकात्मकःसाङ्केतिकःप्रतीकात्मकSymbolic
साम्याद्सादृश्याद्समानता के कारणBecause of similarity
उक्तोपाधिनाउक्तेन नाम्नादिए हुए नाम सेBy the given name
क्षेत्रपरिमाणैःक्षेत्रफलस्य परिमाणेनक्षेत्रफल के नाप सेBy extent of area
गुणगौरवदृष्ट्यागुणस्य गौरवस्य च दृष्ट्यागुण एवं गौरव की दृष्टि सेIn terms of virtues and glory
बृहत्तराणिविशालानिबहुत बड़ेVery significant
स्वाधीनाःस्वतन्त्राःस्वतन्त्रIndependent
स्वायत्तीकृताःअधीनीकृताःअपने अधीन किए गएCaptured / Autonomous
प्राकृतिकसंपद्भिःप्रकृतिजात-विभवैःप्राकृतिक संपदाओं सेWith rich natural resources
पुष्पस्तबकसदृशानिपुष्पपुञ्जसमानानिपुष्प-गुच्छ के समानLike flower bouquet
सावहितमनसासावधानमनसाध्यानपूर्वकWith attention
ऊर्जस्विनःऊर्जायुक्ताःशक्तिशालीEnergetic
पर्वपरम्पराभिःउत्सवपरम्पराभिःउत्सवों की परंपरा सेBy the festive traditions
परिपूरिताःपरिपूर्णाःभरपूरFull of
स्वलीलाकलाभिःनिजकेलि-कलाभिःअपनी लीलाओं सेBy own amusements and pastimes
निष्णाताःपारङ्गताःनिपुणExperts / Master
वंशवृक्षाणाम्वंशपादपानाम्बाँस के वृक्षों केOf bamboo trees
बह्वाकर्षकःअत्याकर्षकःअत्यधिक आकर्षकVery attractive

अत्र इदम् अवधेयम् — पृष्ठ 90अतिरिक्त अभ्यास (पुस्तक में प्रश्न नहीं है) — व्याकरण-पेटिका — दश दिशः

व्याकरणम्
प्र.1पूर्वाग्नेयी दक्षिणा च नैर्ऋती पश्चिमा तथा।
वायवी चोत्तरैशानी ऊर्ध्वा चाधो दिशो दश॥ — श्लोकस्य पदच्छेदम् अर्थं च लिखत। दश दिशः नामतः लिखत।
उत्तर

यह श्लोक दस दिशाओं के नाम एक ही पंक्ति में गिना देता है।

पदच्छेदः — पूर्वा + आग्नेयी + दक्षिणा + च + नैर्ऋती + पश्चिमा + तथा।
वायवी + च + उत्तरा + ऐशानी + ऊर्ध्वा + च + अधः + दिशः + दश।
अन्वयः — पूर्वा, आग्नेयी, दक्षिणा च, नैर्ऋती, पश्चिमा तथा, वायवी च, उत्तरा, ऐशानी, ऊर्ध्वा च अधः (इति) दश दिशः।

अर्थः — पूर्व, आग्नेय, दक्षिण, नैर्ऋत्य, पश्चिम, वायव्य, उत्तर, ईशान, ऊर्ध्व (ऊपर) तथा अधः (नीचे) — ये दस दिशाएँ हैं।

दिक् (संस्कृतम्)Englishदिक् (संस्कृतम्)English
पूर्वाEastआग्नेयीSouth-East
दक्षिणाSouthनैर्ऋतीSouth-West
पश्चिमाWestवायवीNorth-West
उत्तराNorthईशानीNorth-East
ऊर्ध्वाUp / HighअधःDown / Low
प्र.2पाठस्य शीर्षके ‘कोणम् ऐशान्यम्’ इत्यस्य कः अर्थः ? एतस्य पाठेन सह कः सम्बन्धः ?
उत्तर

‘ऐशान्यं कोणम्’ इत्यस्य अर्थः — ईशान-कोणः, अर्थात् उत्तर-पूर्व दिशा (North-East corner)। (‘ऐशान्य कोण’ का अर्थ है उत्तर-पूर्वी कोना।)

‘अत्र इदम् अवधेयम्’ इति पेटिकायाम् उक्तम् — ईशानी – North-East। शब्दार्थ-सारण्यां च — ऐशान्यम् = पूर्वोत्तरदिशा।

सम्बन्धः — पाठे वर्णितानि अष्ट राज्यानि “देशस्य पूर्वोत्तरभागे स्थितानि”, अर्थात् भारतस्य ऐशान्ये कोणे वर्तन्ते। अतः कविः वदति — “पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्” — भारत के इसी मनोहर उत्तर-पूर्वी कोने को देखो।

अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पृष्ठ 90प्रश्नः १ : अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखत

अभ्यासः
प्र.1 (क)अस्माकं देशे कति राज्यानि सन्ति ?
उत्तर

अष्टाविंशतिः। (अट्ठाईस।)

पाठे स्वरा वदति — “अस्माकं देशे अष्टाविंशतिः राज्यानि सन्ति।”

प्र.1 (ख)प्राचीनेतिहासे काः स्वाधीनाः आसन् ?
उत्तर

सप्तभगिन्यः। (सात बहनें अर्थात् पूर्वोत्तर के सात राज्य।)

पाठवाक्यम् — “भ्रात्रा सह इमाः सप्तभगिन्यः स्वीये प्राचीनेतिहासे प्रायः स्वाधीनाः एव दृष्टाः।”

प्र.1 (ग)केषां समवायः ‘सप्तभगिन्यः’ इति कथ्यते ?
उत्तर

अष्टराज्यानाम्। (आठ राज्यों का।)

पाठवाक्यम् — “एतेषु राज्येषु अष्टराज्यानाम् एकः समवायोऽस्ति यः सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च इति नाम्ना प्रथितः अस्ति।”

प्र.1 (घ)अस्माकं देशे कति केन्द्रशासितप्रदेशाः सन्ति ?
उत्तर

अष्ट। (आठ।)

पाठवाक्यम् — “एतद् अतिरिच्य अष्टकेन्द्रशासितप्रदेशाः अपि सन्ति।”

प्र.1 (ङ)सप्तभगिनी-प्रदेशे कः उद्योगः सर्वप्रमुखः ?
उत्तर

वंशोद्योगः। (बाँस का उद्योग।)

पाठवाक्यम् — “साम्प्रतं वंशोद्योगोऽयम् अन्ताराष्ट्रियख्यातिम् अवाप्तोऽस्ति।”

अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पृष्ठ 90–91प्रश्नः २ : अधोलिखितानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत

अभ्यासः
प्र.2 (क)भ्रातृसहित-भगिनीसप्तके कानि राज्यानि सन्ति ?
उत्तर

भ्रातृसहित-भगिनीसप्तके अरुणाचलप्रदेशः, असमः, मणिपुरम्, मिजोरमः, मेघालयः, नागालैण्डम्, त्रिपुरा सिक्किमः च इति अष्ट राज्यानि सन्ति।

(भाई सहित बहन-सप्तक में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नागालैण्ड, त्रिपुरा और सिक्किम — ये आठ राज्य हैं।)

पाठवाक्यम् — “इत्थं भ्रात्रा सिक्किमेन सह भगिनीसप्तके इमानि राज्यानि सन्ति — अरुणाचलप्रदेशः, असमः, मणिपुरम्, मिजोरमः, मेघालयः, नागालैण्डं, त्रिपुरा चेति।”

प्र.2 (ख)इमानि राज्यानि सप्तभगिन्यः इति किमर्थं कथ्यन्ते ?
उत्तर

सामाजिक-सांस्कृतिक-परिदृश्यानां साम्याद् भौगोलिकवैशिष्ट्यात् च इमानि राज्यानि ‘सप्तभगिन्यः’ इति कथ्यन्ते।

(सामाजिक तथा सांस्कृतिक दृश्यों की समानता के कारण एवं भौगोलिक विशेषता के कारण ये राज्य ‘सात बहनें’ कहे जाते हैं।)

अध्यापिका योजयति — “प्रयोगोऽयं प्रतीकात्मको वर्तते।” (यह प्रयोग प्रतीकात्मक है — वास्तविक भाई-बहन का सम्बन्ध नहीं।)

प्र.2 (ग)ऐशान्यकोणप्रदेशेषु के निवसन्ति ?
उत्तर

ऐशान्यकोणप्रदेशेषु गारो-खासी-नागा-मिजो-लेप्चा-प्रभृतयः बहवः जनजातीयाः निवसन्ति।

(उत्तर-पूर्वी कोण के प्रदेशों में गारो, खासी, नागा, मिजो, लेप्चा आदि अनेक जनजातीय लोग रहते हैं।)

पाठवाक्यम् — “जनजातिबहुलप्रदेशोऽयम्। गारो-खासी-नागा-मिजो-लेप्चा-प्रभृतयः बहवः जनजातीयाः अत्र निवसन्ति।”

प्र.2 (घ)पूर्वोत्तरप्रादेशिकाः केषु निष्णाताः सन्ति ?
उत्तर

पूर्वोत्तरप्रादेशिकाः स्वलीला-कलासु निष्णाताः सन्ति।

(पूर्वोत्तर के निवासी अपनी लीला-कलाओं में निपुण हैं।)

पाठवाक्यम् — “… पर्वपरम्पराभिः परिपूरिताः, स्वलीला-कलासु च निष्णाताः सन्ति।”

प्र.2 (ङ)वंशवृक्षवस्तूनाम् उपयोगः कुत्र क्रियते ?
उत्तर

आवस्त्राभूषणेभ्यः गृहनिर्माणपर्यन्तं प्रायः सर्वत्र वंशवृक्षनिर्मितानां वस्तूनाम् उपयोगः क्रियते।

(वस्त्र तथा आभूषण से लेकर घर बनाने तक प्रायः सर्वत्र बाँस से बनी वस्तुओं का उपयोग किया जाता है।)

पाठवाक्यम् — “प्रदेशेऽस्मिन् हस्तशिल्पानां बाहुल्यं वर्तते। आवस्त्राभूषणेभ्यः गृहनिर्माणपर्यन्तं प्रायः वंशवृक्षनिर्मितानां वस्तूनाम् उपयोगः क्रियते।”

अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पृष्ठ 91प्रश्नः ३ : अधोलिखितेषु पदेषु प्रकृति-प्रत्ययविभागं कुरुत (यथा — गन्तुम् = गम् + तुमुन्)

अभ्यासः
प्र.3 (क)ज्ञातुम् = …………… + ……………
उत्तर

ज्ञातुम् = ज्ञा + तुमुन्। (‘ज्ञा’ धातु + ‘तुमुन्’ प्रत्यय = जानने के लिए।)

प्र.3 (ख)विश्रुतः = …………… + ……………
उत्तर

विश्रुतः = वि + श्रु + क्त। (उपसर्ग ‘वि’ + ‘श्रु’ धातु + ‘क्त’ प्रत्यय = विख्यात, प्रसिद्ध।)

प्र.3 (ग)अतिरिच्य = …………… + ……………
उत्तर

अतिरिच्य = अति + रिच् + ल्यप्। (उपसर्ग ‘अति’ + ‘रिच्’ धातु + ‘ल्यप्’ प्रत्यय = इसके अतिरिक्त, इससे अधिक।)

प्र.3 (घ)पठनीयम् = …………… + ……………
उत्तर

पठनीयम् = पठ् + अनीयर्। (‘पठ्’ धातु + ‘अनीयर्’ प्रत्यय = पढ़े जाने योग्य।)

अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पृष्ठ 91प्रश्नः ४ : रेखाङ्कितम् पदम् आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

अभ्यासः
प्र.4 (क)वयं स्वदेशस्य राज्यानां विषये ज्ञातुमिच्छामः।
उत्तर

वयं कस्य राज्यानां विषये ज्ञातुमिच्छामः ?

(हम किसके राज्यों के विषय में जानना चाहते हैं ?)

प्र.4 (ख)सप्तभगिन्यः प्राचीनेतिहासे प्रायः स्वाधीनाः एव दृष्टाः।
उत्तर

काः प्राचीनेतिहासे प्रायः स्वाधीनाः एव दृष्टाः ?

(कौन प्राचीन इतिहास में प्रायः स्वतन्त्र ही देखी गईं ?)

प्र.4 (ग)प्रदेशेऽस्मिन् हस्तशिल्पानां बाहुल्यं वर्तते।
उत्तर

प्रदेशेऽस्मिन् केषां बाहुल्यं वर्तते ?

(इस प्रदेश में किनकी बहुलता है ?)

प्र.4 (घ)एतानि राज्यानि तु भ्रमणार्थं स्वर्गसदृशानि।
उत्तर

एतानि राज्यानि तु भ्रमणार्थं कीदृशानि (सन्ति) ?

(ये राज्य तो भ्रमण के लिए कैसे हैं ?)

अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पृष्ठ 91–92प्रश्नः ५ : यथानिर्देशम् उत्तरत

अभ्यासः
प्र.5 (क)‘महोदये ! मम भगिनी कथयति’। अत्र ‘मम’ इति सर्वनामपदं कस्यै प्रयुक्तम् ?
उत्तर

‘स्वरायै’ — अर्थात् स्वरा नाम्न्यै छात्रायै ‘मम’ इति सर्वनामपदं प्रयुक्तम्।

(यहाँ ‘मम’ सर्वनाम स्वरा नाम की छात्रा के लिए प्रयुक्त हुआ है।)

प्र.5 (ख)‘सामाजिक-सांस्कृतिकपरिदृश्यानां साम्याद् इमानि उक्तोपाधिना प्रथितानि’। अस्मिन् वाक्ये प्रथितानि इति क्रियापदस्य कर्तृपदं किम् ?
उत्तर

‘इमानि’ (इमानि राज्यानि) इति कर्तृपदम्।

(इस वाक्य में ‘प्रथितानि’ क्रिया का कर्ता ‘इमानि’ अर्थात् ‘ये राज्य’ है।)

प्र.5 (ग)‘एतेषां राज्यानां पुनः सङ्घटनं विहितम्’। अत्र ‘सङ्घटनम्’ इति कर्तृपदस्य क्रियापदं किम् ?
उत्तर

‘विहितम्’ इति क्रियापदम्।

(‘सङ्घटनम्’ कर्ता का क्रियापद ‘विहितम्’ है — अर्थात् ‘किया गया’।)

प्र.5 (घ)‘अत्र वंशवृक्षाणां प्राचुर्यं विद्यते’। अस्मात् वाक्यात् ‘अल्पता’ इति पदस्य विपरीतार्थकं पदं चित्वा लिखत ?
उत्तर

‘प्राचुर्यम्’।

(‘अल्पता’ का विपरीतार्थक पद ‘प्राचुर्यम्’ अर्थात् ‘बहुतायत / प्रचुरता’ है।)

पदम्अर्थः
अल्पताथोड़ापन, कमी
प्राचुर्यम्बहुतायत, प्रचुरता
प्र.5 (ङ)‘क्षेत्रपरिमाणैः इमानि लघूनि वर्तन्ते’। अस्मिन् वाक्ये ‘सन्ति’ इति क्रियापदस्य किं समानार्थकं पदं प्रयुक्तम् ?
उत्तर

‘वर्तन्ते’।

(‘सन्ति’ का समानार्थक पद ‘वर्तन्ते’ है — दोनों का अर्थ ‘हैं’ होता है।)

अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पृष्ठ 92प्रश्नः ६ : अधः शब्दजालं प्रदत्तम् अस्ति। अस्मिन् उपरितः अधः, वामतः दक्षिणं चेति आधारं कृत्वा सार्थक-शब्दान् रेखाङ्कयत (वर्गचित्र-जालम्)

अभ्यासः
प्र.6अधः शब्दजालं प्रदत्तम् अस्ति। अस्मिन् उपरितः अधः, वामतः दक्षिणं चेति आधारं कृत्वा सार्थक-शब्दान् रेखाङ्कयत —

वर्गचित्र-जालम्

१२३४५६७८
१जनजातिःमत्रिखासी
२चअरसिणिपुनागा
३भ्रातासक्किपुराज्यानि
४मिजोरमःरसंस्कृतिः
५पूर्वोत्तरम्देशस्य
६बसप्तभगिन्यःगारो
७प्राकृतिकःवंशवृक्षः
८भगिनिअरुणाचलः
९भ्रातामेघालयःधमि
१०नागालैण्डम्बहवःजोः
उत्तर

वर्गचित्र-जाले २३ सार्थकशब्दाः सन्ति — १९ वामतः दक्षिणम् (पङ्क्तिषु), ४ उपरितः अधः (स्तम्भेषु)। इन्हें रेखाङ्कित कीजिए —

वामतः दक्षिणम् (पङ्क्तिषु) —

पङ्क्तिःवर्गाःशब्दःअर्थः
११–४जनजातिःजनजाति (tribe)
१७–८खासीमेघालय की एक जनजाति
२७–८नागानागालैण्ड की एक जनजाति
३१–२भ्राताभाई (यहाँ सिक्किम)
३६–८राज्यानिराज्य (बहुवचन)
४१–४मिजोरमःमिजोरम राज्य
४६–८संस्कृतिःसंस्कृति
५१–५पूर्वोत्तरम्उत्तर-पूर्व
५६–८देशस्यदेश का
६२–६सप्तभगिन्यःसात बहनें
६७–८गारोमेघालय की एक जनजाति
७१–४प्राकृतिकःप्राकृतिक
७५–८वंशवृक्षःबाँस का वृक्ष
८१–३भगिनिबहन (‘भगिनी’ का सम्बोधन-रूप)
८४–८अरुणाचलःअरुणाचल
९१–२भ्राताभाई
९३–६मेघालयःमेघालय राज्य
१०१–४नागालैण्डम्नागालैण्ड राज्य
१०५–७बहवःबहुत-से

उपरितः अधः (स्तम्भेषु) —

स्तम्भःपङ्क्तयःशब्दःअर्थः
४२–४सिक्किमःसिक्किम राज्य
५१–५मणिपुरम्मणिपुर राज्य
६१–३त्रिपुरात्रिपुरा राज्य
८९–१०मिजोःमिजो जनजाति

अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पृष्ठ 93प्रश्नः ७ : पट्टिकातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत — [सिक्किमः, पूर्वोत्तरराज्यानि, अष्टाविंशतिः, स्वदेशस्य राज्यानाम्, अरुणाचलप्रदेशः, असमः, मणिपुरं, मिजोरमः, मेघालयः, नागालैण्डं, त्रिपुरा, जनजातिः, प्राचुर्यम्]

अभ्यासः
प्र.7 (क)छात्राः अद्य …………… विषये ज्ञातुमिच्छन्ति।
उत्तर

छात्राः अद्य स्वदेशस्य राज्यानाम् विषये ज्ञातुमिच्छन्ति।

(छात्र आज अपने देश के राज्यों के विषय में जानना चाहते हैं।)

प्र.7 (ख)अस्माकं देशे …………… राज्यानि तथा अष्ट केन्द्रशासितप्रदेशाः सन्ति।
उत्तर

अस्माकं देशे अष्टाविंशतिः राज्यानि तथा अष्ट केन्द्रशासितप्रदेशाः सन्ति।

(हमारे देश में अट्ठाईस राज्य तथा आठ केन्द्रशासित प्रदेश हैं।)

प्र.7 (ग)सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च इति …………… कथ्यन्ते।
उत्तर

सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च इति पूर्वोत्तरराज्यानि कथ्यन्ते।

(‘सात बहनें और एक भाई’ — इस नाम से पूर्वोत्तर के राज्य कहे जाते हैं।)

प्र.7 (घ)सप्तभगिन्यः इत्युक्तानि राज्यानि — ……………, ……………, ……………, ……………, ……………, ……………, ……………।
उत्तर

सप्तभगिन्यः इत्युक्तानि राज्यानि — अरुणाचलप्रदेशः, असमः, मणिपुरं, मिजोरमः, मेघालयः, नागालैण्डं, त्रिपुरा।

(‘सात बहनें’ कहे जाने वाले राज्य हैं — अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नागालैण्ड और त्रिपुरा।)

प्र.7 (ङ)प्रदेशेऽस्मिन् …………… बाहुल्यम् अस्ति।
उत्तर

प्रदेशेऽस्मिन् जनजातिः बाहुल्यम् अस्ति।

(इस प्रदेश में जनजाति की बहुलता है।)

पाठवाक्यम् — “जनजातिबहुलप्रदेशोऽयम्।” (यह जनजातिबहुल प्रदेश है।)

प्र.7 (छ)पूर्वोत्तरराज्येषु वंशवृक्षाणां …………… विद्यते।
उत्तर

पूर्वोत्तरराज्येषु वंशवृक्षाणां प्राचुर्यम् विद्यते।

(पूर्वोत्तर राज्यों में बाँस के वृक्षों की प्रचुरता है।)

पाठवाक्यम् — “यतो हि अत्र वंशवृक्षाणां प्राचुर्यं विद्यते।”

अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पृष्ठ 93प्रश्नः ८ : भिन्नप्रकृतिकं पदं चिनुत

अभ्यासः
प्र.8 (क)गच्छति, पठति, धावति, अहसत्, क्रीडति
उत्तर

भिन्नप्रकृतिकं पदम् — ‘अहसत्’।

(अलग पद है ‘अहसत्’।)

प्र.8 (ख)छात्रः, सेवकः, शिक्षकः, लेखिका, क्रीडकः
उत्तर

भिन्नप्रकृतिकं पदम् — ‘लेखिका’।

प्र.8 (ग)पत्रम्, मित्रम्, पुष्पम्, आम्रः, फलम्
उत्तर

भिन्नप्रकृतिकं पदम् — ‘आम्रः’।

प्र.8 (घ)व्याघ्रः, भल्लूकः, गजः, कपोतः, शाखा, वृषभः, सिंहः
उत्तर

भिन्नप्रकृतिकं पदम् — ‘शाखा’।

प्र.8 (ङ)पृथिवी, वसुन्धरा, धरित्री, यानम्, वसुधा
उत्तर

भिन्नप्रकृतिकं पदम् — ‘यानम्’।

अभ्यासात् जायते सिद्धिः — पृष्ठ 94प्रश्नः ९ : विशेष्य-विशेषणानाम् उचितं मेलनं कुरुत

अभ्यासः
प्र.9विशेष्य-विशेषणानाम् उचितं मेलनं कुरुत —
विशेषण-पदानिविशेष्य-पदानि
अयम्संस्कृतिः
संस्कृतिविशिष्टायाम्इतिहासे
महत्त्वाधायिनीप्रदेशः
प्राचीनेसमवायः
एकःभारतभूमौ
उत्तर

मेलनम् इदम् —

विशेषण-पदम्विशेष्य-पदम्लिङ्गम् · विभक्तिः · वचनम्पाठे प्रयोगः
अयम्प्रदेशःपुँल्लिङ्ग · प्रथमा · एकवचनजनजातिबहुलप्रदेशोऽयम्
संस्कृतिविशिष्टायाम्भारतभूमौस्त्रीलिङ्ग · सप्तमी · एकवचनविविध-संस्कृतिविशिष्टायां भारतभूमौ
महत्त्वाधायिनीसंस्कृतिःस्त्रीलिङ्ग · प्रथमा · एकवचनएतासां संस्कृतिः महत्त्वाधायिनी वर्तते
प्राचीनेइतिहासेपुँल्लिङ्ग · सप्तमी · एकवचनस्वीये प्राचीनेतिहासे
एकःसमवायःपुँल्लिङ्ग · प्रथमा · एकवचनअष्टराज्यानाम् एकः समवायोऽस्ति

योग्यताविस्तरः — पृष्ठ 94–95अतिरिक्त अभ्यास (पुस्तक में प्रश्न नहीं है) — अतिरिक्त-सूचनाः, अष्टराज्यानां सारणी तथा वैशिष्ट्य-वर्णनम्

योग्यताविस्तरः
प्र.1योग्यताविस्तरे प्रदत्तानि पञ्च तथ्यानि संस्कृतभाषया लिखत।
उत्तर

पुस्तक ने पाँच अतिरिक्त तथ्य दिए हैं —

  1. पत्काई इति भारतस्य पूर्वोत्तरभागे बर्मादेशेन सह सीमावर्तिक्षेत्रे स्थिता पर्वतशृङ्खला अस्ति। (पत्काई भारत के पूर्वोत्तर भाग में बर्मा के साथ लगते सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित एक पर्वतशृंखला है।)
  2. बराकनदी भारतस्य मणिपुरं, नागालैण्डं, मिजोरमः, असमः चेति राज्येषु एवञ्च बङ्गलादेशे वहन्ती ९०० कि.मी. दीर्घा नदी अस्ति। (बराक नदी मणिपुर, नागालैण्ड, मिजोरम, असम तथा बांग्लादेश में बहने वाली ९०० किलोमीटर लम्बी नदी है।)
  3. गारोपर्वतः, खासीपर्वतः, जयन्तियापर्वतः च उत्तरपूर्वीयपीठस्थले स्थिताः त्रयः पर्वतशृङ्खलाः सन्ति। (उत्तर-पूर्वी पठार पर स्थित ये तीन पर्वतशृंखलाएँ हैं।)
  4. मेघालयपीठस्थले कृष्णहीरकः (कोयला), लौह-अयस्कः, सिलिमेनाइटः, क्षारशिला, यूरेनियम् इत्यादयः खनिजसम्पदः प्रचुरं विद्यन्ते। (मेघालय के पठार पर कोयला, लौह-अयस्क, सिलिमेनाइट, क्षारशिला, यूरेनियम आदि खनिज-सम्पदाएँ प्रचुर मात्रा में हैं।)
  5. सप्तभगिन्यन्तर्गतप्रदेशानाम् उल्लेखः महाभारतं, रामायणं, पुराणानि इति प्राचीनग्रन्थेषु अपि उपलभ्यते। (सात बहनों के अन्तर्गत आने वाले प्रदेशों का उल्लेख महाभारत, रामायण तथा पुराणों जैसे प्राचीन ग्रन्थों में भी मिलता है।)
प्र.2योग्यताविस्तरे प्रदत्ताया: सारण्याः आधारेण अष्टानां राज्यानां राजधानीं राजभाषां च लिखत।
उत्तर

पुस्तक की सारणी के अनुसार —

क्र. सं.राज्यम्राजधानीराजभाषाअन्याः भाषाः (केचन)
१.अरुणाचल-प्रदेशःईटानगरम्आङ्ग्लभाषान्यीशी, दाफला, मिजी, गल्लोंगः, वंछो, तागिनः, हिल-मिरी, मोहपा, नाक्टी, आकः, तांग्सा, खम्ती इत्यादयः
२.असमःदिसपुरम्असमिया, बङ्गला, बोडो, आङ्ग्लभाषा चबङ्गला, डिमासा, मिशिंगः, कार्बी, रम्भा, तिनुआ, ताई-फाके, ताई-ऐतों, ताई-खम्ती
३.मणिपुरम्इम्फालःमणिपुरीतंगखुलः, हम्मरः, पैते, लुशाई, थादौ / कुकी
४.मेघालयःशिलांगःखासी, पुआरः, गारो, आङ्ग्लभाषा चअबेङ्गः रेन्घा वा, अलोंगः, अकरवे (अल्वे वा) मच्चि, दुअलः, उइबोक्, चिसकः, मेगामः, लिङ्गोजमः वा, रुगा, गाओ-गंचिंगः, पुआन् ख्यानीराम, भोई पुआइ, वारः
५.मिजोरमःआइजोलःमिज़ो, आङ्ग्लभाषा चअसो, छो, हलमः, ‘हिनारः’, लाई, लुसेई, मारा, मिउ-खुमी, पैते, थाडो-कुकी च
६.नागालैण्डम्कोहिमाआङ्ग्लभाषा‘नागामी’, असमिया, ‘बङ्गला’ च
७.त्रिपुराअगरतलाआङ्ग्लभाषा, बङ्गला च‘कक-बरकः’ ‘त्रिपुरी’ वा, हलम्, रङ्खालः, चकमा च
८.सिक्किमःगङ्गटोकःआङ्ग्लभाषानेपाली, भूतिया, लेप्चा, लिम्बू, नेवारी, राय, गुरुंग, मंगाई, शेर्पा, तामांगः, सुनवरः च
प्र.3योग्यताविस्तरे उक्तानां राज्यानां वैशिष्ट्यानि संक्षेपेण लिखत।
उत्तर

‘सप्तभगिन्यः’ इति प्रथितः राज्यसमूहः प्राकृतिकसौन्दर्येण अतिविशिष्टः। प्रत्येकं राज्यस्य अपि स्वकीयं महत्त्वम् अस्ति। (‘सात बहनें’ नाम से प्रसिद्ध यह राज्य-समूह प्राकृतिक सौन्दर्य से अत्यन्त विशिष्ट है; हर राज्य का अपना महत्त्व है।)

राज्यम्वैशिष्ट्यम् (पुस्तकानुसारम्)
अरुणाचलप्रदेशःभारते अस्मिन् एव प्रदेशे सूर्यस्य अरुणोदयः सर्वप्रथमं भवति, अतः ‘अरुणाचलः’। अत्र तादृशः प्रदेशः अपि अस्ति यत्र आवर्षं हिमपातः भवति।
असमःपूर्वं कामरूपम् इति नाम्ना प्रसिद्धम्। अत्र खनिजम् इन्धनतैलं तथा इन्धनानिलः (CNG) प्रचुरमात्रया दृश्यते। लोके बृहत्तमः रमणीयः नदीद्वीपः माजुली असमे ब्रह्मपुत्रनदे स्थितः अस्ति।
मणिपुरम्अस्य उल्लेखः महाभारतादिग्रन्थेषु अपि लभ्यते। अत्र सम्पूर्णे विश्वे एकमात्रं राष्ट्रियं प्लवमानम् उद्यानम् अस्ति, यत् लोकटक-सरोवरे प्लवते।
मिजोरम्, सिक्किम, मेघालय, त्रिपुराएतेषां राज्यानाम् अपि स्वकीयानि वैशिष्ट्यानि सन्ति (पुस्तके नामतः न विस्तारितानि — छात्राः स्वयम् अन्वेष्टुं शक्नुवन्ति)।

परियोजनाकार्यम् — पृष्ठ 96प्रकल्प-कार्य (Project work)

परियोजनाकार्यम्
प्र.1“पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्” इति पाठस्य सन्दर्भे भित्तिपत्रे उत्तरपूर्वराज्यानां पृथक् पृथक् मानचित्रं प्रदर्शयत। संस्कृतभाषया कस्यापि राज्यस्य पञ्चवाक्यैः विवरणं लिखत। (उदाहरणम् — नागालैण्डम् : होर्न्बिल्-महोत्सवः अत्र प्रसिद्धः।) [पुस्तक में उदाहरण के साथ नागालैण्ड का जिलेवार मानचित्र भी दिया है।]
उत्तर

नमूना उत्तर (मेघालयः) — भित्तिपत्रे आठों राज्यों के पृथक् मानचित्र चिपकाकर किसी एक राज्य का पञ्चवाक्य-विवरण —

  1. मेघालयः भारतस्य पूर्वोत्तरभागे स्थितम् एकं राज्यम् अस्ति।
  2. अस्य राजधानी शिलांगः अस्ति।
  3. अत्र खासी, पुआरः, गारो, आङ्ग्लभाषा च राजभाषाः सन्ति।
  4. गारोपर्वतः, खासीपर्वतः, जयन्तियापर्वतः च अस्मिन् उत्तरपूर्वीयपीठस्थले स्थिताः सन्ति।
  5. मेघालयपीठस्थले कृष्णहीरकः, लौह-अयस्कः, सिलिमेनाइटः, क्षारशिला, यूरेनियम् इत्यादयः खनिजसम्पदः प्रचुरं विद्यन्ते।

(हिन्दी सार — मेघालय भारत के पूर्वोत्तर भाग का एक राज्य है; राजधानी शिलांग; राजभाषाएँ खासी, पुआर, गारो और अंग्रेज़ी; यहाँ गारो, खासी और जयन्तिया पर्वत हैं; तथा यहाँ के पठार पर कोयला, लौह-अयस्क, सिलिमेनाइट, क्षारशिला और यूरेनियम जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।)

प्र.2पूर्वोत्तरराज्यानां पर्यटनस्थलानां नामानि लिखित्वा तेषां संक्षिप्तं वर्णनं कुरुत। (उदाहरणम् — राज्यम् : असमः, नाम : काजीरङ्गा राष्ट्रियम् अभयारण्यम्, वर्णनम् : अत्र एकशृङ्गगजाः दृश्यन्ते। एतत् यूनेस्को-विश्व-प्रत्नकीर्ति-स्थलम् अस्ति।)
उत्तर

नमूना उत्तर (राज्यम् / नाम / वर्णनम्) —

राज्यम्नामवर्णनम्
असमःमाजुलीअयं ब्रह्मपुत्रनदे स्थितः अस्ति। लोके बृहत्तमः रमणीयः नदीद्वीपः एषः एव।
(यह ब्रह्मपुत्र नद में स्थित है; संसार का सबसे बड़ा और रमणीय नदी-द्वीप यही है।)
मणिपुरम्लोकटक-सरोवरःअत्र सम्पूर्णे विश्वे एकमात्रं राष्ट्रियं प्लवमानम् उद्यानम् अस्ति। इदम् उद्यानं लोकटक-सरोवरे प्लवते।
(यहाँ सारे संसार का एकमात्र राष्ट्रीय तैरता हुआ उद्यान है, जो लोकटक झील पर तैरता है।)
नागालैण्डम्कोहिमाइयं नागालैण्डस्य राजधानी अस्ति। अस्याः समीपे किसामा-ग्रामे प्रतिवर्षं होर्न्बिल्-महोत्सवः भवति, यत्र जनजातीनां नृत्यं, गीतं, वेशभूषा च प्रदर्श्यन्ते।
(यह नागालैण्ड की राजधानी है; इसके पास किसामा गाँव में हर वर्ष हॉर्नबिल महोत्सव होता है, जिसमें जनजातियों के नृत्य, गीत और वेशभूषा दिखाए जाते हैं।)
मेघालयःशिलांगःअयं मेघालयस्य राजधानी अस्ति। पर्वतैः वृक्षैः पुष्पैः च सुशोभितम् इदं स्थलं पर्यटकानां प्रियम् अस्ति।
(यह मेघालय की राजधानी है; पर्वतों, वृक्षों और पुष्पों से सुशोभित यह स्थान पर्यटकों को प्रिय है।)
प्र.3विद्यालये ‘उत्तरपूर्वसंस्कृतिदिवसः’ (एकः विशेषः दिवसः) आयोजनीयः। छात्राः विविधराज्यानां परिधानं नृत्यं भोजनं वेशभूषां च प्रस्तुवन्तु। सम्पूर्णः कार्यक्रमः संस्कृत-संवाद-माध्यमेन एव करणीयः।
उत्तर

नमूना उत्तर — मञ्चसञ्चालनस्य संस्कृत-संवादः (अष्ट समूहाः, प्रत्येकः एकस्य राज्यस्य परिधानं, नृत्यं, भोजनं, वेशभूषां च संस्कृतेन प्रस्तौति) —

वक्तासंस्कृत-वाक्यम्हिन्दी अर्थ
सञ्चालकःसुप्रभातम्। अद्य अस्माकं विद्यालये ‘उत्तरपूर्वसंस्कृतिदिवसः’ आयोज्यते।सुप्रभात। आज हमारे विद्यालय में ‘उत्तर-पूर्व संस्कृति दिवस’ आयोजित हो रहा है।
सञ्चालकःप्रथमः समूहः अरुणाचलप्रदेशस्य परिचयं दास्यति। आगच्छन्तु छात्राः।पहला समूह अरुणाचल प्रदेश का परिचय देगा। छात्र आइए।
छात्रःनमो नमः। अरुणाचलप्रदेशस्य राजधानी ईटानगरम् अस्ति। अत्र भारते सर्वप्रथमं सूर्यस्य अरुणोदयः भवति।नमस्कार। अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर है। यहाँ भारत में सबसे पहले सूर्योदय होता है।
सञ्चालकःसाधु ! इदानीं मणिपुरस्य समूहः नृत्यं प्रस्तौति।बहुत अच्छा ! अब मणिपुर का समूह नृत्य प्रस्तुत करता है।
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Chapter 8 of 13 – Sanskrit

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