Download Varnochcharan-shiksha १ (वर्णोच्चारण-शिक्षा १) – NCERT Class 8 Sanskrit Chapter 13 PDF from the new NCERT Class 8 Sanskrit book Deepakam (2026-27). Read the chapter online or download the free PDF. पाठ किस बात का है — पिछले पाठ (सम्यग्वर्णप्रयोगेण…) में देखा था कि शुद्ध उच्चारण क्यों ज़रूरी है। यह पाठ आगे बढ़कर पूछता है — शुद्ध उच्चारण होता कैसे है? पुस्तक का अपना वाक्य है — ‘अतः प्रत्येक-वर्णस्य शुद्धम् उच्चारणं कथं भवतीति अत्र ज्ञास्यामः।’…
Varnochcharan-shiksha १ (वर्णोच्चारण-शिक्षा १) PDF – Chapter 13 of Deepakam
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| Chapter 13 PDF | Varnochcharan-shiksha १ (वर्णोच्चारण-शिक्षा १) | View PDF |
| Full book | NCERT Class 8 Sanskrit – Deepakam | View Book |
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What Is in Varnochcharan-shiksha १ (वर्णोच्चारण-शिक्षा १)? (Class 8 Sanskrit Chapter 13)
- पाठ किस बात का है — पिछले पाठ (सम्यग्वर्णप्रयोगेण…) में देखा था कि शुद्ध उच्चारण क्यों ज़रूरी है। यह पाठ आगे बढ़कर पूछता है — शुद्ध उच्चारण होता कैसे है? पुस्तक का अपना वाक्य है — ‘अतः प्रत्येक-वर्णस्य शुद्धम् उच्चारणं कथं भवतीति अत्र ज्ञास्यामः।’ अर्थात् यह पाठ वर्णोच्चारण की प्रक्रिया का पाठ है, केवल नियम गिनाने का नहीं।
- उच्चारण में केवल मुँह काम नहीं करता — पुस्तक स्पष्ट कहती है — ‘वर्णानाम् उच्चारणे केवलम् आस्यस्य एव उपयोगः भवति इति – न।’ शरीर के चार अङ्ग मिलकर काम करते हैं : १. नाभि-प्रदेशः (मांसपेशी-बल-तन्त्रम्), २. उरः (वायु-बल-तन्त्रम्), ३. कण्ठ-बिलः (ध्वनि-तन्त्रम्), ४. आस्यम् (उच्चारण-तन्त्रम्)। आस्य के भीतर दो गुहाएँ हैं — मुखम् और नासिका।
- वायु का मार्ग — चार चरण — (१) नाभि-प्रदेश की मांसपेशियाँ उरः को दबाती हैं, (२) उरः फेफड़ों की वायु को ऊपर निकालता है, (३) वह वायु ऊपर चलती हुई कण्ठ-बिल तक पहुँचती है, (४) फिर ऊपर चलकर आस्य में प्रवेश करती है। वहाँ छह उच्चारण-स्थानों में से अपना स्थान पाकर वह वर्ण-रूप में प्रकट होती है। ध्यान रहे — वायु पहले आस्य नहीं, पहले कण्ठ-बिल पाती है (अभ्यास प्रश्न ३-क इसी पर है)।
- तीन तत्त्व, जिनमें से दो इस पाठ में — आस्य के भीतर वर्ण बनने के लिए तीन तत्त्व चाहिए — (क) स्थानम्, (ख) करणम्, (ग) आभ्यन्तर-प्रयत्नः। पुस्तक स्वयं कहती है — ‘अस्मिन् पाठे स्थानस्य, करणस्य च चर्चां कुर्मः। आभ्यन्तर-प्रयत्नस्य विषये अग्रिमायां कक्षायां ज्ञास्यामः।’ इसीलिए पाठ का नाम ‘वर्णोच्चारण-शिक्षा १’ है — यह पहला भाग है।
- स्थानम् और करणम् — दो परिभाषाएँ — स्थानम् = उच्चारण के समय वायु मुख या नासिका में जिस स्थल पर वर्ण-रूप में प्रकट होती है। करणम् = आस्य का जो भाग उस स्थान को छूता है या उसके समीप जाता है। पुस्तक का दृष्टान्त मुरली है — बाँसुरी के अङ्गुलिच्छिद्र = स्थानानि, और बजाती हुई अङ्गुलियाँ = करणानि।
- आस्य में छह स्थान — मुख में पाँच — कण्ठः, तालु, मूर्धा, दन्तः, ओष्ठः; और नासिका में एक — नासिका ही। यही छठा स्थान है। भीतर से बाहर की ओर क्रम है — कण्ठ → तालु → मूर्धा → दन्त → ओष्ठ (अभ्यास प्रश्न ४ इसी क्रम को उलटकर पूछता है)।
- छह करण — दो नियम — (क) तालु, मूर्धा, दन्तः — इन तीन स्थानों में करण है जिह्वा (तालव्य में जिह्वा-मध्यः, मूर्धन्य में जिह्वा-उपाग्रः, दन्त्य में जिह्वा-अग्रः)। (ख) कण्ठः, ओष्ठः, नासिका — इन तीन स्थानों में जिह्वा प्रायः निष्क्रिय रहती है, अतः स्व-स्थानम् एव करणम् — उसी स्थान का एक भाग दूसरे भाग को छूता है (कण्ठ में अग्रभाग↔पृष्ठभाग, ओष्ठ में अधरोष्ठ↔उत्तरोष्ठ, नासिका में नासिका-मूल का अधोभाग↔उपरिभाग)।
- पाणिनीय-शिक्षा — करण-प्रकरणम् — योग्यताविस्तर में पुस्तक वही नियम मूल सूत्रों में देती है — ‘तालव्य-मूर्धन्य-दन्त्यानां जिह्वा करणम्’, ‘जिह्वामध्येन – तालव्यानाम्’, ‘जिह्वोपाग्रेण – मूर्धन्यानाम्’, ‘जिह्वाग्रेण – दन्त्यानाम्’, ‘शेषाः – स्वस्थानकरणाः’। कक्षा ६ में ‘स्थान-प्रकरणम्’ पढ़ा जा चुका है; यहाँ ‘करण-प्रकरणम्’ है।
त्वरित पुनरावृत्ति – Varnochcharan-shiksha १ (वर्णोच्चारण-शिक्षा १)
| शब्दः | अर्थः (संस्कृतम्) | हिन्दी अर्थ | English |
|---|---|---|---|
| नितान्तम् | अत्यन्तम् | अतीव | Very / Highly |
| निर्दुष्टम् | दोष-रहितम् / शुद्धम् | दोष-रहित / शुद्ध | Impeccable |
| नोदयन्ति | अभिपीडयन्ति | दबाते हैं | Press |
| निःसारयति | बहिः प्रेषयति | बाहर निकालता है | Pushes out |
| सरन् | चरन् | बढ़ता हुआ | Move |
| प्रकटीभवति | उत्पद्यते | उत्पन्न होता है | Appears / Is produced |
| निदर्शने | उदाहरणे | उदाहरण में | Example |
| मुरली | वंशी | बाँसुरी | Flute |
| परिभाषा | शास्त्रीय-व्याख्यानम् | शास्त्रीय व्याख्या | Technical definition |
| — पाठ के अन्य शब्द — | |||
| सम्यक् | सुष्ठु / यथावत् | ठीक से, अच्छी तरह | Properly |
| पूर्वस्मिन् पाठे | गते पाठे | पिछले पाठ में | In the previous lesson |
| ज्ञास्यामः | ज्ञानं प्राप्स्यामः | जानेंगे | (We) shall know |
| भेद-उपभेदानाम् | प्रकाराणाम् उपप्रकाराणां च | भेदों और उपभेदों के | Of types and sub-types |
Old NCERT vs New – Class 8 Sanskrit
This chapter is from Deepakam, the new NCERT Class 8 Sanskrit book (NCF-SE 2023, used from 2025-26). It replaced the old book “Ruchira”, so chapter numbers and names differ from older PDFs.
Solutions and All Chapters
Answers to the exercises and the full chapter list of Deepakam:
Varnochcharan-shiksha १ (वर्णोच्चारण-शिक्षा १) – Overview
| Class | Class 8 |
| Subject | Sanskrit |
| Book | Deepakam – new NCERT book |
| Chapter | 13 of 15 – Varnochcharan-shiksha १ (वर्णोच्चारण-शिक्षा १) |
| Edition | NCERT Reprint 2026-27 |
| Session | 2026-27 |
| Free – read online or download |
Class 8 Sanskrit Chapter 13 – FAQs
Where can I download Varnochcharan-shiksha १ (वर्णोच्चारण-शिक्षा १) Class 8 PDF?
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What is Class 8 Sanskrit Chapter 13 about?
पाठ किस बात का है — पिछले पाठ (सम्यग्वर्णप्रयोगेण…) में देखा था कि शुद्ध उच्चारण क्यों ज़रूरी है। यह पाठ आगे बढ़कर पूछता है — शुद्ध उच्चारण होता कैसे है? पुस्तक का अपना वाक्य है — ‘अतः प्रत्येक-वर्णस्य शुद्धम् उच्चारणं कथं भवतीति अत्र ज्ञास्यामः।’ अर्थात् यह पाठ वर्णोच्चारण की प्रक्रिया का पाठ है, केवल नियम गिनाने का नहीं।
Is Varnochcharan-shiksha १ (वर्णोच्चारण-शिक्षा १) from the new NCERT Class 8 Sanskrit book?
Yes. It is chapter 13 of deepakam, the new NCERT Class 8 Sanskrit book for 2026-27.
Is this the latest NCERT edition for 2026-27?
Yes – the PDF is NCERT’s latest edition for the 2026-27 session.
Where are the NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 13?
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