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Pranamyo Deshbhaktoऽyan Gopbandhurmahamnah (प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः) PDF – Chapter 4 of Deepakam
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| Chapter 4 PDF | Pranamyo Deshbhaktoऽyan Gopbandhurmahamnah (प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः) | View PDF |
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What Is in Pranamyo Deshbhaktoऽyan Gopbandhurmahamnah (प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः)? (Class 8 Sanskrit Chapter 4)
- पाठारम्भ — चित्रसंवादः (पृष्ठ 36–37) — जलप्लावपीड़ितों की सहायता के लिए शिक्षक और छात्र सभागार में चर्चा करते हैं। हिमानी बताती है कि ओडिशा-राज्य के केन्द्रापडा-जनपद में महानदी में भयङ्कर जलप्लाव (बाढ़) आया, जिससे बड़ी हानि हुई — घर नष्ट हुए, कुछ लोग चिकित्सालय में मृत्यु से जूझ रहे हैं, कुछ अनाहार से कष्ट सह रहे हैं, गृहपालित पशु भी नदी के प्रवाह में बह गए।
- आदर्श का परिचय — आचार्य कहते हैं कि ऐसे दुःखियों की सहायता हमारा कर्तव्य है — यथा उत्कलमणिः गोपबन्धुः, जो जलप्लावपीड़ितों की अकुण्ठ सेवा करके आज भी जनमानस में समादृत हैं। फिर वे चित्र दिखाकर कहते हैं — एषः अस्ति दीनबन्धुः गोपबन्धुः।
- भोजनसभा की घटना (पृष्ठ 38) — आचार्य हरिहरदास के भोज में गोपबन्धु हँसकर श्लोक कहते हैं — भोजनस्यातिदौर्लभ्यं जीवनाय सुखप्रदम्। उसी क्षण बाहर से तीन दिन के भूखे भिक्षुक का करुण क्रन्दन सुनाई देता है; गोपबन्धु अश्रुपूर्णनयन होकर, कुछ भी सोचे बिना, अपना परोसा हुआ भोजन हाथ में लेकर बाहर जाते हैं और भिक्षुक को खिला देते हैं।
- जीवनवृत्त (पृष्ठ 39) — गोपबन्धुदास सत्यवादि-वनविद्यालय के अध्यापक, प्रसिद्ध पञ्चमित्रों (पञ्चसखा) में अन्यतम और स्वतन्त्रतासङ्ग्रामी थे। जन्म — पुरी जनपद के साक्षीगोपाल के पास सुआण्डो-ग्राम में। वे छात्रों को निःशुल्क पढ़ाते थे, निरक्षरता दूर करने में सतत लगे रहते थे, कपास से वस्त्र बनाने के लिए स्वयं सूत कातते थे और महात्मा गान्धी की प्रेरणा से स्वतन्त्रता-आन्दोलन में भाग लेकर दो वर्ष कारावास भोगा।
- त्याग की पराकाष्ठा — कारागार में रहते हुए उन्होंने ‘बन्दीर आत्मकथा’, ‘कारा-कविता’, ‘धर्मपद’, ‘गो-माहात्म्य’, ‘नचिकेता-उपाख्यान’ आदि प्रेरणादायी पुस्तकें ओडिआ भाषा में लिखीं। वे सदा स्वदेश के ही वस्त्रों और वस्तुओं का उपयोग करते थे, और मरणासन्न अपने पुत्र को भी छोड़कर जलप्लावपीड़ित ‘भारतमाता के सहस्रों पुत्रों’ को देखने घर से बाहर निकल गए।
- पाठ का श्लोक और उपाधि (पृष्ठ 41) — उनका प्रसिद्ध वचन है — स्वदेशभूमौ मम लीयतां तनुः … ममास्थिमांसैः परिपूरितास्तु सा (मेरा शरीर देश की मिट्टी में मिल जाए; स्वराज्य के मार्ग के गड्ढे मेरी हड्डी-माँस से भर जाएँ)। वे सत्यवादि-वनविद्यालय, दरिद्रनारायणसेवा-सङ्घ, सत्यवादि-मुद्रणालय तथा ‘समाजः’ दैनिक-वार्तापत्र के प्रतिष्ठाता थे; उनके असीम त्याग को देखकर आचार्य प्रफुल्लचन्द्रराय ने उन्हें ‘उत्कलमणिः’ उपाधि से सम्मानित किया।
- व्याकरण-बिन्दु — ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ में पूर्वरूपसन्धिः दी है — पद के अन्त में ‘ए’ या ‘ओ’ हो और अगले पद का पहला वर्ण ‘अ’ हो, तो ‘अ’ के स्थान पर अवग्रह (ऽ) लग जाता है — देशभक्तो + अयम् = देशभक्तोऽयम्, सर्वे + अपि = सर्वेऽपि। अभ्यास में क्तवतु-प्रत्ययान्त पदों का स्त्रीलिङ्ग भी है — गतवान् → गतवती।
त्वरित पुनरावृत्ति – Pranamyo Deshbhaktoऽyan Gopbandhurmahamnah (प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः)
| शब्दः | अर्थः (संस्कृतम्) | हिन्दी | English |
|---|---|---|---|
| जलप्लावपीडितानाम् | नद्यां बहुजलप्रवाहेण धनजीवनक्षति-ग्रस्तानाम् | बाढ़ पीड़ितों का | Of flood victims |
| नष्टानि | क्षतिग्रस्तानि | नष्ट हुए | Destroyed |
| अनाहारेण | आहारेण विना | भोजन न करने से | By abstaining from food |
| नदीस्रोतसा | नदीजलप्रवाहेण | नदी के प्रवाह से | By river currents |
| अकुण्ठम् | कुण्ठं विना / साग्रहम् | आग्रहपूर्वक | Generously |
| समादृतः | आदरप्राप्तः | सम्मानित | Honoured |
| सुस्वादूनि व्यञ्जनानि | रुचिकराणि सूपशाकादीनि | स्वादिष्ट भोजन | Delicious food |
| दौर्लभ्यम् | कष्टेन लभ्यम् | कष्ट से प्राप्त किया गया | Difficulty in being obtained |
| निःशुल्कम् | धनं विना | निःशुल्क | Without any fees |
| करुणध्वनिः | विकलस्वरः | करुणा युक्त ध्वनि | Weeping words |
| अगुञ्जत् | गुञ्जनम् अकरोत् | गूँजा | Echoes |
| बुभुक्षितः | क्षुधातुरः | भूखा | Hungry |
| दयाविगलितहृदयः | करुणार्द्रहृदयः | दया पूर्ण हृदय वाला / दयालु | Compassionate heart |
| अश्रुपूर्णनयनः | अश्रुयुक्तं नेत्रं यस्य सः | आँसू से भरी हुई आँखों वाला | Eyes filled with tears |
Old NCERT vs New – Class 8 Sanskrit
This chapter is from Deepakam, the new NCERT Class 8 Sanskrit book (NCF-SE 2023, used from 2025-26). It replaced the old book “Ruchira”, so chapter numbers and names differ from older PDFs.
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Pranamyo Deshbhaktoऽyan Gopbandhurmahamnah (प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः) – Overview
| Class | Class 8 |
| Subject | Sanskrit |
| Book | Deepakam – new NCERT book |
| Chapter | 4 of 15 – Pranamyo Deshbhaktoऽyan Gopbandhurmahamnah (प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः) |
| Edition | NCERT Reprint 2026-27 |
| Session | 2026-27 |
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Class 8 Sanskrit Chapter 4 – FAQs
Where can I download Pranamyo Deshbhaktoऽyan Gopbandhurmahamnah (प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः) Class 8 PDF?
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What is Class 8 Sanskrit Chapter 4 about?
पाठारम्भ — चित्रसंवादः (पृष्ठ 36–37) — जलप्लावपीड़ितों की सहायता के लिए शिक्षक और छात्र सभागार में चर्चा करते हैं। हिमानी बताती है कि ओडिशा-राज्य के केन्द्रापडा-जनपद में महानदी में भयङ्कर जलप्लाव (बाढ़) आया, जिससे बड़ी हानि हुई — घर नष्ट हुए, कुछ लोग चिकित्सालय में मृत्यु से जूझ रहे हैं, कुछ अनाहार से कष्ट सह रहे हैं, गृहपालित पशु भी नदी के प्रवाह में बह गए।
Is Pranamyo Deshbhaktoऽyan Gopbandhurmahamnah (प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः) from the new NCERT Class 8 Sanskrit book?
Yes. It is chapter 4 of deepakam, the new NCERT Class 8 Sanskrit book for 2026-27.
Is this the latest NCERT edition for 2026-27?
Yes – the PDF is NCERT’s latest edition for the 2026-27 session.
Where are the NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 4?
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