NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 11 Chetak Ki Veerta – step-by-step answers to every exercise and in-text question of the chapter, as per the latest NCERT syllabus for 2027. Read them online or download the free question-answer PDF.
मल्हार (कक्षा 6) का पाठ 11 चेतक की वीरता एक कविता है, जिसके रचयिता श्यामनारायण पाण्डेय (1907–1991) हैं। यह उनकी प्रसिद्ध काव्यकृति ‘हल्दीघाटी’ का एक अंश है। कविता में महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की फुर्ती, निर्भीकता और स्वामिभक्ति का वीर रस से भरा चित्र है। नीचे पृष्ठ 124 से 127 तक के सभी प्रश्नों के उत्तर हैं। हर उत्तर में पहले वह दिया है जो कॉपी में लिखना है; कारण और अतिरिक्त बातें ‘विस्तार से समझिए’ में हैं।
NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 11 Chetak Ki Veerta PDF
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NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 11 Chetak Ki Veerta – Questions and Answers
All questions of the chapter are answered below, in the order of the book – in-text questions, activities and the end-of-chapter exercises. Each answer is written the way you would write it in the exam.
मेरी समझ से — पृष्ठ 124पाठ से
(1) चेतक शत्रुओं की सेना पर किस प्रकार टूट पड़ता था?
• चेतक बादल की तरह शत्रु की सेना पर वज्रपात बनकर टूट पड़ता था।
• चेतक शत्रु की सेना को चारों ओर से घेरकर उस पर टूट पड़ता था।
• चेतक हाथियों के दल के समान बादल के रूप में शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।
• चेतक नदी के उफान के समान शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।
★ चेतक बादल की तरह शत्रु की सेना पर वज्रपात बनकर टूट पड़ता था।
कारण: कविता में लिखा है — “विकराल बज्र-मय बादल-सा
अरि की सेना पर घहर गया।” अर्थात चेतक वज्र (बिजली) से भरे बादल की तरह शत्रु-सेना पर टूट पड़ा।
• चेतक
• महाराणा प्रताप
• कवि
• शत्रु
★ महाराणा प्रताप
कारण: ‘सवार’ का अर्थ है घोड़े की पीठ पर बैठने वाला। चेतक पर महाराणा प्रताप सवार थे; अगली ही पंक्ति में उनका नाम आ जाता है — “राणा की पुतली फिरी नहीं।”
“(1) मैंने ‘बादल की तरह वज्रपात बनकर’ वाला उत्तर चुना, क्योंकि कविता में है — ‘विकराल बज्र-मय बादल-सा / अरि की सेना पर घहर गया।’ नदी की उपमा ‘लहर गया’ के साथ आई है, टूट पड़ने के साथ नहीं, और हाथियों की बात कविता में है ही नहीं। (2) मैंने ‘महाराणा प्रताप’ चुना, क्योंकि चेतक तो घोड़ा है जो सवार को लेकर उड़ता है, और अगली पंक्ति में ‘राणा’ नाम आता है।”
पंक्तियों पर चर्चा — पृष्ठ 124पाठ से
(क) “निर्भीक गया वह ढालों में, सरपट दौड़ा करवालों में।”
अर्थ: चेतक बिना डरे शत्रु-सैनिकों की ढालों के बीच घुस गया और उनकी करवालों (तलवारों) के बीच सरपट, यानी पूरी तेज़ी से, दौड़ता रहा। जहाँ हथियार चल रहे थे, वहाँ भी वह निडर होकर आगे बढ़ता रहा। इन पंक्तियों से चेतक का साहस और उसकी गति दोनों दिखते हैं।
अर्थ: चेतक के हमले से शत्रु-सैनिक इतने घबरा गए कि उनके हाथों से भाले गिर गए और तीर रखने के तरकश (निषंग) भी गिर पड़े। घोड़े की टापों (हय-टापों) से उनके अंग घायल हो गए। यानी चेतक अकेले ही शत्रु-सेना में खलबली मचा देता था।
मिलकर करें मिलान — पृष्ठ 124 और 125पाठ से
| पंक्तियाँ | भावार्थ |
|---|---|
| 1. राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा को पाला था। | 1. शत्रु की सेना पर भयानक बज्रमय बादल बनकर टूट पड़ता और शत्रुओं का नाश करता। |
| 2. वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर, या आसमान पर घोड़ा था। | 2. हवा से भी तेज दौड़ने वाला चेतक ऐसे दौड़ लगा रहा था मानो हवा और चेतक में प्रतियोगिता हो रही हो। |
| 3. जो तनिक हवा से बाग हिली लेकर सवार उड़ जाता था। | 3. शत्रुओं के सिर के ऊपर से होता हुआ एक छोर से दूसरे छोर पर ऐसे दौड़ता जैसे आसमान में दौड़ रहा हो। |
| 4. राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतक मुड़ जाता था। | 4. चेतक की फुर्ती ऐसी कि लगाम के थोड़ा-सा हिलते ही सरपट हवा में उड़ने लगता था। |
| 5. विकराल बज्र-मय बादल-सा अरि की सेना पर घहर गया। | 5. वह राणा की पूरी निगाह मुड़ने से पहले ही उस ओर मुड़ जाता अर्थात वह उनका भाव समझ जाता था। |
सही मिलान:
| पंक्ति | भावार्थ |
|---|---|
| 1. राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा को पाला था। | 2 — हवा और चेतक में मानो प्रतियोगिता हो रही हो। |
| 2. वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर, या आसमान पर घोड़ा था। | 3 — शत्रुओं के सिर के ऊपर से ऐसे दौड़ता जैसे आसमान में। |
| 3. जो तनिक हवा से बाग हिली लेकर सवार उड़ जाता था। | 4 — लगाम थोड़ा-सा हिलते ही हवा में उड़ने लगता था। |
| 4. राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतक मुड़ जाता था। | 5 — राणा की निगाह मुड़ने से पहले ही मुड़ जाता, उनका भाव समझ जाता। |
| 5. विकराल बज्र-मय बादल-सा अरि की सेना पर घहर गया। | 1 — शत्रु-सेना पर भयानक बज्रमय बादल बनकर टूट पड़ता। |
संक्षेप में: 1 → 2, 2 → 3, 3 → 4, 4 → 5, 5 → 1
शीर्षक — पृष्ठ 125पाठ से
मैं इस कविता का शीर्षक ‘आसमान पर घोड़ा’ रखना चाहूँगा। पूरी कविता में चेतक इतना तेज़ दौड़ता है कि ज़मीन का घोड़ा लगता ही नहीं — वह हवा से मुक़ाबला करता है और शत्रुओं के सिरों के ऊपर से निकल जाता है। यह शीर्षक कविता की अपनी पंक्ति “या आसमान पर घोड़ा था” से लिया गया है और पढ़ने वाले के मन में जिज्ञासा जगाता है।
कविता की रचना — पृष्ठ 125 और 126पाठ से
“पड़ गया हवा को पाला था।”
“राणा प्रताप का कोड़ा था।”
“या आसमान पर घोड़ा था।”
रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ये शब्द बोलने-लिखने में थोड़े मिलते-जुलते हैं। इस तरह की तुकांत शैली प्रायः कविता में आती है। कभी-कभी कविता अतुकांत भी होती है। इस कविता में आए तुकांत शब्दों की सूची बनाइए।
इस कविता के तुकांत शब्द —
| छंद | तुकांत शब्द | मिलती हुई ध्वनि |
|---|---|---|
| 1 | निराला – पाला | -आला |
| 2 | कोड़ा – घोड़ा | -ओड़ा |
| 3 | उड़ (जाता था) – मुड़ (जाता था) | -उड़ … जाता था |
| 4 | चालों – भालों – ढालों – करवालों | -आलों (चारों पंक्तियाँ एक साथ) |
| 5 | यहाँ – वहाँ – जहाँ – कहाँ | -अहाँ (चारों पंक्तियाँ एक साथ) |
| 6 | लहर – ठहर – घहर | -अहर |
| 7 | निषंग – अंग – दंग – रंग | -अंग (चारों पंक्तियाँ एक साथ) |
शब्द के भीतर शब्द — पृष्ठ 126पाठ से
‘आसमान’ शब्द के भीतर कौन-कौन से शब्द छिपे हैं—
आस, समान, मान, सम, आन, नस आदि।
अब इसी प्रकार कविता में से कोई पाँच शब्द चुनकर उनके भीतर के शब्द खोजिए।
कविता के पाँच शब्द और उनके भीतर छिपे शब्द —
| कविता का शब्द | कविता की पंक्ति | भीतर छिपे शब्द |
|---|---|---|
| चौकड़ी | “रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर” | चौक, कड़ी |
| मस्तक | “वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर” | मस्त, तक, मत, कस, सत |
| बादल | “विकराल बज्र-मय बादल-सा” | बाद, दल, बल, बाल |
| सरपट | “सरपट दौड़ा करवालों में।” | सर, पट, पर, रस |
| करवाल | “सरपट दौड़ा करवालों में।” | कर, करवा, कल, रव, वार |
आपकी बात — पृष्ठ 126पाठ से आगे
लेकर सवार उड़ जाता था।”
(क) ‘हवा से लगाम हिली और घोड़ा भाग चला’ कविता को प्रभावशाली बनाने में इस तरह के प्रयोग काम आते हैं। कविता में आए ऐसे प्रयोग खोजकर परस्पर बातचीत करें।
कवि ने चेतक की फुर्ती को बढ़ा-चढ़ाकर कहा है। ऐसे प्रयोग —
- “पड़ गया हवा को पाला था” — चेतक का मुक़ाबला हवा से हो गया।
- “या आसमान पर घोड़ा था” — वह ज़मीन पर नहीं, आसमान पर दौड़ता लगता था।
- “राणा की पुतली फिरी नहीं” — आँख घूमने से पहले ही वह मुड़ जाता था।
- “है यहीं रहा, अब यहाँ नहीं” — पल भर में वह कहीं और पहुँच जाता था।
इस पर आपस में बात कीजिए।
“मैं मानता हूँ कि युद्ध किसी समस्या का अच्छा हल नहीं है। युद्ध में आम लोग, बच्चे, खेत और घर — सब नष्ट होते हैं; इस कविता में भी सैनिकों के अंग ‘हय-टापों से खन गए’। जो धन हथियारों में लगता है, वह स्कूलों और अस्पतालों में लग सकता है। हाँ, अपनी रक्षा करना ग़लत नहीं, पर झगड़े पहले बातचीत और समझौते से सुलझाने चाहिए; लड़ाई केवल अंतिम उपाय हो।”
समानार्थी शब्द — पृष्ठ 126 और 127पाठ से आगे
यहाँ पर दिए गए शब्दों से उस शब्द पर घेरा बनाइए जो समानार्थी न हों—
| 1. | हवा | अनल | पवन | बयार |
| 2. | रण | तुरंग | युद्ध | समर |
| 3. | आसमान | आकाश | गगन | नभचर |
| 4. | नद | नाद | सरिता | तटिनी |
| 5. | करवाल | तलवार | असि | ढाल |
इन शब्दों पर घेरा बनेगा —
- अनल (आग) — बाक़ी तीन का अर्थ ‘हवा’ है।
- तुरंग (घोड़ा) — बाक़ी तीन का अर्थ ‘युद्ध’ है।
- नभचर (पक्षी) — बाक़ी तीन का अर्थ ‘आकाश’ है।
- नाद (आवाज़) — बाक़ी तीन का अर्थ ‘नदी’ है।
- ढाल (बचाव का साधन) — बाक़ी तीन का अर्थ ‘तलवार’ है।
आज की पहेली — पृष्ठ 127पाठ से आगे
तीन अक्षर का मेरा नाम, उल्टा सीधा एक समान।
दिन में जगता, रात में सोता, यही मेरी पहचान।।
उत्तर — नयन (आँख)।
कारण: ‘नयन’ में तीन अक्षर हैं (न-य-न); उल्टा पढ़ने पर भी ‘नयन’ ही बनता है; और आँखें दिन में खुली रहती हैं, रात को सोते समय बंद हो जाती हैं।
बाँध गले में लंबी डोर, पकड़ रहा अंबर का छोर।
उत्तर — पतंग।
कारण: पतंग बिना पंखों के आकाश में उड़ती है, उसमें लंबी डोर बँधी रहती है और वह ऊँचे आकाश (अंबर) तक चली जाती है।
बोलो, बोलो— मैं हूँ कौन?
उत्तर — अँधेरा।
कारण: अँधेरा रात में होता है, दिन में नहीं; और दीये की लौ ऊपर उजाला करती है, पर उसके ठीक नीचे अँधेरा रहता है (कहावत — ‘दीपक तले अँधेरा’)।
सबके मुँह में आया पानी मेरे भाई।
उत्तर — गुलाब जामुन।
कारण: इसके नाम में एक फूल (गुलाब) और एक फल (जामुन) समाए हैं, और पूरा नाम एक मिठाई का है, जिसे देखकर सबके मुँह में पानी आ जाता है।
शहर है पर घर नहीं, समंदर है पर पानी नहीं।
उत्तर — नक्शा (मानचित्र)।
कारण: नक्शे में सड़क, जंगल, शहर और समुद्र रेखाओं, रंगों और चिह्नों से दिखाए जाते हैं; उनमें असली गाड़ी, पेड़, घर या पानी नहीं होता।
खोजबीन के लिए — पृष्ठ 127पाठ से आगे
“महाराणा प्रताप (1540–1597) मेवाड़ (राजस्थान) के वीर राजपूत राजा थे। वे सन 1572 में मेवाड़ की गद्दी पर बैठे। उन्होंने मुग़ल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की। सन 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध हुआ, जिसमें उनके घोड़े चेतक ने घायल होकर भी उन्हें सुरक्षित निकाला। युद्ध के बाद उन्होंने वर्षों जंगलों में कठिन जीवन बिताया, पर हार नहीं मानी। वे साहस और स्वाभिमान के प्रतीक माने जाते हैं।”
पशु-पक्षियों पर आधारित पाँच रचनाएँ —
- गिल्लू — महादेवी वर्मा (गिलहरी)
- नीलकंठ — महादेवी वर्मा (मोर)
- दो बैलों की कथा — प्रेमचंद (बैल हीरा और मोती)
- पंचतंत्र की कहानियाँ — विष्णु शर्मा (अनेक पशु-पक्षी)
- चींटी (कविता) — सुमित्रानंदन पंत (चींटी)
इन्हें खोजकर हर रचना का नाम, रचनाकार, छोटा परिचय और एक चित्र कार्ड पर लगाइए और कक्षा की दीवार-पत्रिका पर सजाइए।
Chapter 11 of 13 – Hindi
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NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 11 Chetak Ki Veerta – Overview
| Class | Class 6 |
| Subject | Hindi |
| Chapter | 11 – Chetak Ki Veerta |
| Session | 2027 |
| Format | Full answers on this page + PDF |
NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 11 – FAQs
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