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NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 4 Haar Ki Jeet (PDF) – 2027

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 4 Haar Ki Jeet – step-by-step answers to every exercise and in-text question of the chapter, as per the latest NCERT syllabus for 2027. Read them online or download the free question-answer PDF.

मल्हार (कक्षा 6) का पाठ 4 हार की जीत हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार सुदर्शन (वास्तविक नाम — बदरीनाथ भट्ट, 1896–1983) की कहानी है, जिसमें बाबा भारती, उनका घोड़ा सुलतान और डाकू खड़्गसिंह हैं। यहाँ पृष्ठ 39 से 44 तक की हर गतिविधि का हल है। हर प्रश्न में पहले वह उत्तर है जो कॉपी में लिखना है; कारण, कहानी के प्रमाण और अतिरिक्त बातें ‘विस्तार से समझिए’ में हैं।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 4 Haar Ki Jeet PDF

All the answers are on this page below. The PDF also explains every answer – why it is right and how to check it – so download it for revision.

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NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 4 Haar Ki Jeet – Questions and Answers

All questions of the chapter are answered below, in the order of the book – in-text questions, activities and the end-of-chapter exercises. Each answer is written the way you would write it in the exam.

मेरी समझ से — पृष्ठ 39पाठ से

पाठ से
प्र.1आइए, अब हम ‘हार की जीत’ कहानी को थोड़ा और निकटता से समझ लेते हैं।
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—
(1) सुलतान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ?
• बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया।
• बाबा भारती ने गरीबों की सहायता करना बंद कर दिया।
• बाबा भारती ने द्वार बंद करना छोड़ दिया।
• बाबा भारती असावधान हो गए।
उत्तर

बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया। ★

कारण: कहानी में लिखा है — “किसी समय वहाँ बाबा भारती स्वयं लाठी लेकर पहरा देते थे, परंतु आज उन्हें किसी चोरी, किसी डाके का भय न था।”

प्र.2(2) “बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।” इस कथन के समर्थन में लेखक ने कौन-सा तर्क दिया है?
• बाबा भारती ने डाकू को घमंड से घोड़ा दिखाया।
• बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे।
• बाबा भारती को घोड़े से अत्यधिक लगाव और मोह था।
• बाबा भारती हर पल घोड़े की रखवाली करते रहते थे।
उत्तर

बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे। ★

कारण: लेखक ने ठीक अगले वाक्य में यही तर्क दिया है — “बाबा भारती भी मनुष्य ही थे। अपनी चीज़ की प्रशंसा दूसरे के मुख से सुनने के लिए उनका हृदय भी अधीर हो गया।”

प्र.3(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

(1) मैंने ‘बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया’ चुना, क्योंकि कहानी में लिखा है — “आज उन्हें किसी चोरी, किसी डाके का भय न था।” ‘असावधान हो गए’ इसलिए नहीं चुना, क्योंकि वह घोड़ा छिनने से पहले की बात है।

(2) मैंने ‘प्रशंसा सुनने के लिए व्याकुल थे’ चुना, क्योंकि ‘बाबा भारती भी मनुष्य ही थे’ के ठीक बाद लेखक ने यही कारण लिखा है।

शीर्षक — पृष्ठ 40पाठ से

पाठ से
प्र.1(क) आपने अभी जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम सुदर्शन ने ‘हार की जीत’ रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी को यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।
उत्तर

उत्तर: सुदर्शन ने यह नाम इसलिए दिया, क्योंकि कहानी में बाबा भारती की हार ही अंत में जीत बन जाती है। घोड़ा छिन जाना उनकी हार थी। पर उन्होंने घोड़ा वापस नहीं माँगा, केवल यह प्रार्थना की कि घटना किसी से न कही जाए, ताकि लोग गरीबों पर विश्वास करना न छोड़ें। इसी बात ने डाकू खड़्गसिंह का मन बदल दिया और वह पछताकर घोड़ा लौटा गया। इस तरह बाबा भारती हारकर भी जीत गए।

प्र.2(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।
उत्तर

मैं इस कहानी को ‘विश्वास की जीत’ नाम दूँगा/दूँगी, क्योंकि बाबा भारती को घोड़े से अधिक इस बात की चिंता थी कि लोग गरीबों पर विश्वास करना न छोड़ दें। अंत में यही विश्वास जीतता है — डाकू का मन बदल जाता है और वह घोड़ा लौटा देता है।

अन्य उपयुक्त नाम: ‘पश्चाताप के आँसू’, ‘दो आँसू’, ‘सच्ची जीत’।

प्र.3(ग) बाबा भारती ने डाकू खड़्गसिंह से कौन-सा वचन लिया?
उत्तर

बाबा भारती ने खड़्गसिंह से यह वचन लिया कि वह इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करे — किसी को न बताए कि उसने अपाहिज बनकर घोड़ा छीना था।

कारण उन्होंने स्वयं बताया — “लोगों को यदि इस घटना का पता चला तो वे किसी गरीब पर विश्वास न करेंगे। दुनिया से विश्वास उठ जाएगा।”

पंक्तियों पर चर्चा — पृष्ठ 40पाठ से

पाठ से
प्र.1कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार लिखिए—
“भगवत-भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।”
उत्तर

अर्थ: बाबा भारती अपना समय भगवान के भजन में लगाते थे। भजन के बाद जो भी समय बचता, वह सारा घोड़े सुलतान की सेवा में लग जाता था। ‘अर्पण’ शब्द बताता है कि वे घोड़े को पूजा जैसे भाव से समय देते थे। जिस साधु ने रुपया, माल, ज़मीन सब छोड़ दिया था, वह इस घोड़े के प्रेम और मोह में बँध गया था।

प्र.2“बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड़्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से।”
उत्तर

अर्थ: बाबा भारती ने अपना घोड़ा बड़े गर्व (घमंड) से दिखाया, क्योंकि वह उनकी सबसे प्रिय चीज़ था। खड़्गसिंह ने उसे आश्चर्य से देखा, क्योंकि उसने सैकड़ों घोड़े देखे थे, “परंतु ऐसा बाँका घोड़ा उसकी आँखों से कभी न गुजरा था।” एक ही घोड़े को देखकर दोनों के मन के भाव अलग थे — बाबा के मन में गर्व था और खड़्गसिंह के मन में आश्चर्य, जो आगे लालच में बदल गया।

प्र.3“वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर अपना अधिकार समझता था।”
उत्तर

अर्थ: खड़्गसिंह डाकू था। उसकी सोच यह थी कि जो चीज़ उसे अच्छी लग जाए, वह उसी की है — चाहे वह किसी और की हो। उसे पाने के लिए वह न अनुमति माँगता था, न सही-ग़लत सोचता था। इसी सोच के कारण सुलतान को देखते ही उसने धमकी दी — “बाबाजी, मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा।”

प्र.4“बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है और कहा, यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है।”
उत्तर

अर्थ: घोड़ा छिन जाने पर बाबा भारती ने खड़्गसिंह को ऐसी असहाय, लाचार आँखों से देखा, जैसे कसाई के सामने खड़ा बकरा देखता है — जिसके हाथ में कुछ नहीं बचा। फिर भी उन्होंने घोड़ा वापस नहीं माँगा, बल्कि कह दिया, “यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है।” यानी बाहर से वे बेबस थे, पर भीतर से इतने बड़े मन के थे कि अपनी सबसे प्रिय चीज़ भी छोड़ दी।

प्र.5“उनके पाँव अस्तबल की ओर मुड़े। परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई।”
उत्तर

अर्थ: अगले दिन तड़के बाबा भारती स्नान करके रोज़ की आदत से, जैसे सपने में चल रहे हों, अस्तबल की ओर चल पड़े। फाटक पर पहुँचकर उन्हें याद आया कि अब वहाँ सुलतान है ही नहीं — यही उनकी ‘भूल’ थी। इससे पता चलता है कि घोड़े को खोने का दुख कितना गहरा था।

सोच-विचार के लिए — पृष्ठ 40पाठ से

पाठ से
प्र.1कहानी को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित पंक्ति के विषय में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
“दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।”
(क) किस-किस के आँसुओं का मेल हो गया था?
उत्तर

बाबा भारती और डाकू खड़्गसिंह के आँसुओं का मेल हुआ था।

खड़्गसिंह रात में सुलतान को अस्तबल में बाँधकर और फाटक बंद करके बाहर खड़ा होकर रोया था। अगले दिन तड़के बाबा भारती घोड़े से लिपटकर रोने के बाद बाहर निकले, तो उनके आँसू “उसी भूमि पर ठीक उसी जगह” गिरे। इस तरह दोनों के आँसू एक ही मिट्टी में मिल गए।

प्र.2(ख) दोनों के आँसुओं में क्या अंतर था?
उत्तर

खड़्गसिंह के आँसू पश्चाताप के थे — उसे पछतावा था कि उसने ऐसे ऊँचे विचारों वाले साधु का घोड़ा धोखे से छीना।

बाबा भारती के आँसू प्रसन्नता के थे — उनका प्रिय सुलतान लौट आया था और उन्हें भरोसा हो गया था कि “अब कोई गरीबों की सहायता से मुँह न मोड़ेगा।”

दिनचर्या — पृष्ठ 41पाठ से

पाठ सेलेखन
प्र.1(क) कहानी पढ़कर आप बाबा भारती के जीवन के विषय में बहुत कुछ जान चुके हैं। अब आप कहानी के आधार पर बाबा भारती की दिनचर्या लिखिए। वे सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक क्या-क्या करते होंगे, लिखिए। इस काम में आप थोड़ा-बहुत अपनी कल्पना का सहारा भी ले सकते हैं।
उत्तर

बाबा भारती रात के चौथे पहर में उठकर कुटिया से बाहर निकलते और ठंडे जल से स्नान करते। फिर अस्तबल जाकर अपने हाथ से सुलतान का खरहरा करते और उसे दाना खिलाते। इसके बाद मंदिर में भगवान का भजन करते। दोपहर में सादा भोजन करते। भजन से जो समय बचता, वह घोड़े की सेवा में लगाते। संध्या को सुलतान पर सवार होकर आठ-दस मील का चक्कर लगाते। रात को भजन करके सो जाते।

प्र.2(ख) अब आप अपनी दिनचर्या भी लिखिए।
उत्तर

मैं सुबह छह बजे उठता/उठती हूँ। मुँह-हाथ धोकर आधा घंटा पढ़ता हूँ, फिर नहा-धोकर नाश्ता करता हूँ और साढ़े सात बजे विद्यालय जाता हूँ। दोपहर दो बजे लौटकर भोजन और थोड़ा आराम करता हूँ। शाम को गमलों में पानी देता हूँ और दोस्तों के साथ खेलता हूँ। फिर गृहकार्य पूरा करता हूँ। रात आठ बजे परिवार के साथ भोजन करता हूँ और साढ़े नौ बजे सो जाता हूँ।

कहानी की रचना — पृष्ठ 41पाठ से

पाठ सेविधा
प्र.1(क) इस कहानी की कौन-कौन सी बातें आपको पसंद आईं? आपस में चर्चा कीजिए।
उत्तर

मुझे इस कहानी की ये बातें पसंद आईं —

  • बाबा भारती घोड़ा वापस नहीं माँगते, केवल यह माँगते हैं कि घटना किसी को न बताई जाए, ताकि लोग गरीबों पर विश्वास करना न छोड़ें।
  • डाकू खड़्गसिंह का हृदय बदल जाता है और वह चुपचाप घोड़ा लौटा जाता है।
  • अंत में दोनों के आँसू एक ही मिट्टी पर मिल जाते हैं।
  • “घोड़ा हवा से बातें करने लगा” जैसे मुहावरे दृश्य को आँखों के सामने ला देते हैं।
प्र.2(ख) कोई भी कहानी पाठक को तभी पसंद आती है जब उसे अच्छी तरह लिखा गया हो। लेखक कहानी को अच्छी तरह लिखने के लिए अनेक बातों का ध्यान रखते हैं, जैसे— शब्द, वाक्य, संवाद आदि। इस कहानी में आए संवादों के विषय में अपने विचार लिखें।
उत्तर

उत्तर: इस कहानी के संवाद छोटे, सरल और स्वाभाविक हैं, जैसे — “कहो, इधर कैसे आ गए?” छोटे संवादों से कहानी तेज़ी से आगे बढ़ती है और पात्रों का स्वभाव अपने आप दिख जाता है — बाबा भारती का घोड़े पर गर्व और खड़्गसिंह का लालच। कुछ संवाद कहानी को मोड़ देते हैं, जैसे — “मेरी प्रार्थना केवल यह है कि इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना।” संवादों में आदर और बोलचाल की सहज भाषा है।

मुहावरे कहानी से — पृष्ठ 41पाठ से

पाठ सेमुहावरे
प्र.1(क) कहानी से चुनकर कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं— लट्टू होना, हृदय पर साँप लोटना, फूले न समाना, मुँह मोड़ लेना, मुख खिल जाना, न्योछावर कर देना। कहानी में इन्हें खोजकर इनका प्रयोग समझिए।
उत्तर
मुहावराअर्थकहानी में प्रयोग
लट्टू होनामोहित हो जाना“वे उसकी चाल पर लट्टू थे।” (पृष्ठ 33)
हृदय पर साँप लोटनाईर्ष्या से जलना, बेचैन हो उठना“उसकी चाल को देखकर खड़्गसिंह के हृदय पर साँप लोट गया।” (पृष्ठ 34)
फूले न समानाबहुत प्रसन्न होना“… और मन में फूले न समाते थे।” (पृष्ठ 35)
मुँह मोड़ लेनाध्यान हटा लेना, नाता तोड़ लेना“उन्होंने सुलतान की ओर से इस तरह मुँह मोड़ लिया…” (पृष्ठ 37); “अब कोई गरीबों की सहायता से मुँह न मोड़ेगा।” (पृष्ठ 38)
मुख खिल जानाचेहरा प्रसन्नता से चमक उठना“इसे देखकर उनका मुख फूल की नाईं खिल जाता था।” (पृष्ठ 37)
न्योछावर कर देनाकिसी पर सब कुछ वार देनाभाव: “भगवत भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।” (पृष्ठ 33)
प्र.2(ख) अब इनका प्रयोग करते हुए अपने मन से नए वाक्य बनाइए।
उत्तर

नमूना वाक्य:

  1. लट्टू होना — मेले में रंग-बिरंगी पतंगें देखकर छोटा भाई उन पर लट्टू हो गया।
  2. हृदय पर साँप लोटना — पड़ोसी की नई साइकिल देखकर उसके हृदय पर साँप लोटने लगा।
  3. फूले न समाना — बेटी के चयन का समाचार सुनकर पिताजी फूले न समाए।
  4. मुँह मोड़ लेना — कठिनाई के समय जो मित्र मुँह मोड़ ले, वह सच्चा मित्र नहीं।
  5. मुख खिल जाना — बहुत दिनों बाद मामाजी को द्वार पर देखकर माँ का मुख खिल गया।
  6. न्योछावर कर देना — वीर सैनिकों ने देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

कैसे-कैसे पात्र — पृष्ठ 41–42पाठ से

पाठ सेशब्द-चित्र
प्र.1इस कहानी में तीन मुख्य पात्र हैं— बाबा भारती, डाकू खड़्गसिंह और सुलतान घोड़ा। इनके गुणों को बताने वाले शब्दों से दिए गए शब्द-चित्रों को पूरा कीजिए—
दयालुबाबाभारतीबाहुबलीडाकूखड़्गसिंहसुंदरसुलतानघोड़ा
पुस्तक (पृष्ठ 42) के तीन शब्द-चित्र — हर सूरज में एक पात्र का नाम और उसके चारों ओर छह बादल; हर सूरज का एक बादल पहले से भरा है, बाकी खाली हैं।
उत्तर

बाबा भारती: दयालु (दिया है), त्यागी, धार्मिक, उदार, परोपकारी, स्नेही

डाकू खड़्गसिंह: बाहुबली (दिया है), निडर, लालची, छली, निर्दयी, पश्चातापी (अंत में)

सुलतान घोड़ा: सुंदर (दिया है), बलवान, बाँका, तेज़ दौड़ने वाला, स्वामिभक्त, प्रसिद्ध

गुण बताने वाले ये सब शब्द विशेषण हैं (पृष्ठ 43)।

सुलतान की कहानी — पृष्ठ 43पाठ से आगे

पाठ से आगेसृजन
प्र.1मान लीजिए, यह कहानी सुलतान सुना रहा है। तब कहानी कैसे आगे बढ़ती? स्वयं को सुलतान के स्थान पर रखकर कहानी बनाइए।
(संकेत— आप कहानी को इस प्रकार बढ़ा सकते हैं — मेरा नाम सुलतान है। मैं एक घोड़ा हूँ….. )
उत्तर

मेरा नाम सुलतान है। मैं एक घोड़ा हूँ। मेरे स्वामी बाबा भारती मुझे बहुत प्यार करते हैं। एक दिन डाकू खड़्गसिंह मुझे देखकर धमकी दे गया। महीनों बाद वह अपाहिज बनकर रास्ते में मिला। बाबा ने दया करके उसे मेरी पीठ पर बिठाया और वह मुझे भगा ले गया। पर बाबा की बात सुनकर उसका मन बदल गया और उसी रात वह मुझे अस्तबल में बाँध गया। सुबह बाबा की आहट सुनकर मैं हिनहिनाया और वे मुझसे लिपटकर रो पड़े।

मन के भाव — पृष्ठ 43पाठ से आगे

पाठ से आगेभाव
प्र.1(क) कहानी में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। बताइए, कहानी में कौन, कब, ऐसा अनुभव कर रहा था—
• चकित
• अधीर
• डर
• प्रसन्नता
• करुणा
• निराशा
उत्तर
भावकौनकब
चकितखड़्गसिंहसुलतान को पहली बार देखकर; और जब बाबा भारती ने घोड़ा न माँगकर केवल घटना छिपाने की प्रार्थना की (बाबा भारती भी चकित हुए, जब अपाहिज घोड़ा दौड़ा ले गया)
अधीरखड़्गसिंह; बाबा भारतीखड़्गसिंह सुलतान को देखने और उसकी चाल देखने के लिए; बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा सुनने के लिए
डरबाबा भारतीखड़्गसिंह की धमकी के बाद — रात-रात भर अस्तबल की रखवाली की
प्रसन्नताबाबा भारतीघोड़े को देखकर, संध्या की सवारी में, और सुलतान के लौट आने पर
करुणाबाबा भारतीअपाहिज (खड़्गसिंह) की करुणा-भरी पुकार सुनकर उन्हें दया आई और घोड़ा रोक लिया
निराशाबाबा भारतीघोड़ा छिन जाने पर, और अगली सुबह अस्तबल के फाटक पर
प्र.2(ख) आप उपर्युक्त भावों को कब-कब अनुभव करते हैं? लिखिए।
(संकेत— जैसे गली में किसी कुत्ते को देखकर डर या प्रसन्नता या करुणा आदि का अनुभव करना)
उत्तर
  • चकित — सूक्ष्मदर्शी से पानी की बूँद में नन्हे जीव देखकर मैं चकित रह गया।
  • अधीर — परीक्षा-परिणाम वाले दिन मैं अधीर हो जाता हूँ।
  • डर — गली का बड़ा कुत्ता भौंकते हुए मेरी ओर दौड़ा, तो मुझे डर लगा।
  • प्रसन्नता — शिक्षिका ने सबके सामने मेरे चित्र की प्रशंसा की, तो मैं प्रसन्न हुआ।
  • करुणा — बरसात में भीगते, काँपते पिल्ले को देखकर मन करुणा से भर गया।
  • निराशा — पूरी तैयारी के बाद भी दौड़ में पीछे रह गया, तो निराशा हुई।

झरोखे से — पृष्ठ 44पाठ से आगे

पाठ से आगेकविता
प्र.1आप जानते ही हैं कि लेखक सुदर्शन ने अनेक कविताएँ भी लिखी हैं। आइए, उनकी लिखी एक कविता पढ़ते हैं—

वह चली हवा
वह चली हवा,
वह चली हवा।
ना तू देखे
ना मैं देखूँ

पर पत्तों ने तो देख लिया
वरना वे खुशी मनाते क्यों?
वह चली हवा,
वह चली हवा।
— सुदर्शन

साझी समझ — आपको इस कविता में क्या अच्छा लगा? आपस में चर्चा कीजिए और अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

मुझे इस कविता में सबसे अच्छी बात यह लगी कि हवा दिखाई नहीं देती, फिर भी कवि कहता है कि पत्तों ने उसे देख लिया — वरना वे खुशी क्यों मनाते! पत्तों के हिलने को उनका खुशी मनाना बताया गया है; यह कल्पना बहुत सुंदर है। ‘वह चली हवा’ पंक्ति बार-बार आती है, जिससे लगता है जैसे हवा के झोंके आ-जा रहे हों। कविता छोटी और सरल है, पर बड़ी बात कहती है।

खोजबीन के लिए — पृष्ठ 44पाठ से आगे

पाठ से आगेपरियोजना
प्र.1सुदर्शन की कुछ अन्य रचनाएँ पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड या इंटरनेट या पुस्तकालय की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।
उत्तर

उत्तर (परियोजना): पाठ के पहले पृष्ठ (पृष्ठ 33) पर छपे क्यू.आर. कोड को किसी बड़े की सहायता से स्कैन कीजिए, या पुस्तकालय और इंटरनेट पर सुदर्शन की रचनाएँ खोजिए। पढ़ने के लिए कुछ कहानियाँ — अठन्नी का चोर, साइकिल की सवारी, कवि की स्त्री। हर रचना पढ़कर उसका नाम, मुख्य पात्र, कहानी एक वाक्य में और उससे मिली सीख अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।

Chapter 4 of 13 – Hindi

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