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NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 7 Jalate Chalo (PDF) – 2027

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 7 Jalate Chalo – step-by-step answers to every exercise and in-text question of the chapter, as per the latest NCERT syllabus for 2027. Read them online or download the free question-answer PDF.

मल्हार (कक्षा 6) का पाठ 7 जलाते चलो बाल साहित्य के प्रसिद्ध कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी (1916–1998) की प्रेरक कविता है, जिसमें ‘दीप’ भलाई और आशा का, और ‘तिमिर’ दुख-निराशा का प्रतीक है। यहाँ पृष्ठ 62 से 74 तक की हर गतिविधि का हल है। हर प्रश्न में पहले वह उत्तर है जो कॉपी में लिखना है; कारण, संकेत और अतिरिक्त जानकारी ‘विस्तार से समझिए’ में है।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 7 Jalate Chalo PDF

All the answers are on this page below. The PDF also explains every answer – why it is right and how to check it – so download it for revision.

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NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 7 Jalate Chalo – Questions and Answers

All questions of the chapter are answered below, in the order of the book – in-text questions, activities and the end-of-chapter exercises. Each answer is written the way you would write it in the exam.

मेरी समझ से — पृष्ठ 62पाठ से

पाठ से
प्र.1(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—
(1) निम्नलिखित में से कौन-सी बात इस कविता में मुख्य रूप से कही गई है?
• भलाई के कार्य करते रहना
• दीपावली के दीपक जलाना
• बल्ब आदि जलाकर अंधकार दूर करना
• तिमिर मिलने तक नाव चलाते रहना
उत्तर

भलाई के कार्य करते रहना ★

कारण: कविता ‘स्नेह भर-भर’ दिये जलाते चलने को कहती है — ‘स्नेह’ यानी तेल भी और प्रेम भी। अंत में भी यही बात है — “रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि, कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।” यह किसी त्योहार की नहीं, जीवन भर भलाई करते रहने की बात है।

प्र.2(2) “जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की, चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी”
यह वाक्य किससे कहा गया है?
• तूफ़ान से
• मनुष्यों से
• दीपकों से
• तिमिर से
उत्तर

मनुष्यों से ★

कारण: पंक्ति में ‘तुम्हीं ने’ है। दीप जलाना, अँधेरे की चुनौती स्वीकार करना और दीप की नाव बनाना — ये काम मनुष्य ही कर सकता है। तूफ़ान तो दीप बुझाता है, दीपक स्वयं जलाया जाता है और तिमिर को ही चुनौती दी गई है।

प्र.3(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

“पहले प्रश्न में मैंने ‘भलाई के कार्य करते रहना’ चुना, क्योंकि कविता ‘स्नेह भर-भर’ दिये जलाने को कहती है और कवि बिना स्नेह वाले विद्युत-दिये बुझाने को कहते हैं। दूसरे प्रश्न में ‘मनुष्यों से’ चुना, क्योंकि ‘तुम्हीं ने’ पहला दीप जलाया और दीप की नाव बनाई — ये काम मनुष्य ही करता है।”

मिलकर करें मिलान — पृष्ठ 62 और 63पाठ से

पाठ सेशब्द-मिलान
प्र.1कविता में से चुनकर कुछ शब्द यहाँ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
शब्दअर्थ या संदर्भ
1. अमावस1. पूर्णमासी, वह तिथि जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है।
2. पूर्णिमा2. विद्युत दिये अर्थात बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि उपकरण।
3. विद्युत-दिये3. समय, काल, युग संख्या में चार माने गए हैं — सत्ययुग (सतयुग), त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग।
4. युग4. अमावस्या, जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता।
उत्तर

1. अमावस → 4 (अमावस्या, जिस रात चंद्रमा दिखाई नहीं देता)
2. पूर्णिमा → 1 (पूर्णमासी, जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है)
3. विद्युत-दिये → 2 (बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि)
4. युग → 3 (समय, काल; सत्ययुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग)

पंक्तियों पर चर्चा — पृष्ठ 63पाठ से

पाठ सेभावार्थ
प्र.1कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—
“दिये और तूफ़ान की यह कहानी
चली आ रही और चलती रहेगी,
जली जो प्रथम बार लौ दीप की
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी॥
रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा॥”
उत्तर

अर्थ: दीपक और तूफ़ान का यह संघर्ष बहुत पुराना है और आगे भी चलता रहेगा। दीपक की जो लौ पहली बार जली थी, वह सोने-सी चमकती हुई आज भी जल रही है। यदि धरती पर एक भी दिया जलता रहा, तो रात का अंत होकर सवेरा अवश्य आएगा।

भाव: दीपक अच्छाई और आशा का, तूफ़ान बुराई और कठिनाइयों का प्रतीक है। एक भी भला व्यक्ति बचा रहे, तो अच्छाई कभी नहीं हारेगी।

सोच-विचार के लिए — पृष्ठ 64पाठ से

पाठ सेलेखन
प्र.1(क) कविता में अँधेरे या तिमिर के लिए किन वस्तुओं के उदाहरण दिए गए हैं?
उत्तर

कविता में अँधेरे (तिमिर) को इन वस्तुओं के रूप में दिखाया गया है —

  • अमावस की रात (निशा) — “घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।”
  • सरित (नदी) — “तिमिर की सरित पार करने तुम्हीं ने”
  • शिला (चट्टान) — “युगों से तुम्हीं ने तिमिर की शिला पर”
प्र.2(ख) यह कविता आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है। इसमें क्या आशा की गई है? यह आशा क्यों की गई है?
उत्तर

क्या आशा की गई है: कि अँधेरा (दुख, बुराई, निराशा) हमेशा नहीं रहेगा — “कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा”, “कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा”, “कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।”

क्यों की गई है: क्योंकि मनुष्य युगों से दीप जलाकर अँधेरे को चुनौती देता आया है; बुझने वाले दीप भी अपनी ज्योति दे जाते हैं; और धरती पर एक भी दिया बचा रहे, तो सवेरा अवश्य आएगा।

प्र.3(ग) कविता में किसे जलाने और किसे बुझाने की बात कही गई है?
उत्तर

जलाने की बात: ‘स्नेह’ (तेल और प्रेम) से भरे दियों को — “जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर।”

बुझाने की बात: बिना स्नेह जल रहे ‘विद्युत-दियों’ (बिजली के दीपकों) को — “बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो, बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।” यानी प्रेम के बिना किया गया काम सही रास्ता नहीं दिखा सकता।

कविता की रचना — पृष्ठ 64पाठ से

पाठ सेसमूह-कार्य
प्र.1“जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर
कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा।”
इन पंक्तियों को अपने शिक्षक के साथ मिलकर लय सहित गाने या बोलने का प्रयास कीजिए। आप हाथों से ताल भी दे सकते हैं। दोनों पंक्तियों को गाने या बोलने में समान समय लगा या अलग-अलग? आपने अवश्य ही अनुभव किया होगा कि इन पंक्तियों को बोलने या गाने में लगभग एक-समान समय लगता है। केवल इन दो पंक्तियों को ही नहीं, इस कविता की प्रत्येक पंक्ति को गाने में या बोलने में लगभग समान समय ही लगता है। इस विशेषता के कारण यह कविता और अधिक प्रभावशाली हो गई है।
आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको और भी अनेक विशेष बातें दिखाई देंगी।
(क) इस कविता को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस कविता की पंक्तियों को 2–4, 2–4 के क्रम में बाँटा गया है आदि।
उत्तर

कविता की विशेषताएँ —

  1. पंक्तियाँ 2–4, 2–4 के क्रम में बँटी हैं — दो पंक्तियों का खंड, फिर चार का।
  2. हर पंक्ति को बोलने-गाने में लगभग समान समय लगता है।
  3. दो-पंक्ति वाले खंडों के अंत में एक-सी तुक — मिटेगा, सकेगा, मिलेगा।
  4. ‘कभी तो’ तीन बार दोहराया गया है।
  5. ‘सी’ से तुलना — पूर्णिमा-सी, निशा-सी, स्वर्ण-सी।
  6. दीप, तिमिर, निशा, सवेरा जैसे प्रतीक।
  7. कवि ‘तुम’ कहकर सीधे प्रेरणा देते हैं — ‘जलाते चलो’, ‘बहाते चलो’।
प्र.2(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर

नमूना उत्तर (प्रस्तुति): “हमारे समूह ने देखा कि इस कविता की पंक्तियाँ 2–4, 2–4 के क्रम में बँटी हैं। दो-पंक्ति वाले खंड ‘मिटेगा, सकेगा, मिलेगा’ जैसी एक-सी तुक पर समाप्त होते हैं। ‘कभी तो’ तीन बार आता है और कवि ‘तुम’ कहकर सीधे हमसे बात करते हैं। अब हमारे दो साथी पहली दो पंक्तियाँ ताली के साथ गाकर सुनाएँगे।”

मिलान — पृष्ठ 64 और 65पाठ से

पाठ सेभाव-मिलान
प्र.1स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को रेखा खींचकर जोड़िए—
स्तंभ 1स्तंभ 2
1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।1. विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा।
2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर।2. विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है?
3. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।3. विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा।
4. बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।4. दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए।
उत्तर

1 → 3, 2 → 4, 3 → 2, 4 → 1

1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा — विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा।
2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर — दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए।
3. मगर विश्व पर आज क्यों… अमावस निशा-सी — विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है?
4. बिना स्नेह विद्युत-दिये… — विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा।

अनुमान या कल्पना से — पृष्ठ 65पाठ से

पाठ सेकल्पना
प्र.1अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) “दिये और तूफ़ान की यह कहानी
चली आ रही और चलती रहेगी”
दीपक और तूफ़ान की यह कौन-सी कहानी हो सकती है जो सदा से चली आ रही है?
उत्तर

यह अच्छाई और बुराई के संघर्ष की कहानी है। जब से मनुष्य ने पहला दीप जलाया, तभी से हवा-तूफ़ान उसे बुझाते आए हैं और मनुष्य उसे फिर-फिर जलाता आया है। दीपक यानी भलाई, आशा और ज्ञान; तूफ़ान यानी बुराई, निराशा और कठिनाइयाँ। यह संघर्ष हर युग में चलता रहा है और आगे भी चलता रहेगा।

प्र.2(ख) “जली जो प्रथम बार लौ दीप की
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी”
दीपक की यह सोने जैसी लौ क्या हो सकती है जो अनगिनत सालों से जल रही है?
उत्तर

यह सोने जैसी लौ मनुष्य के मन में जली भलाई, साहस और आशा की लौ हो सकती है। मिट्टी के अनगिनत दीये बुझ गए, पर यह भावना कभी नहीं बुझी — एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचती रही। ज्ञान का प्रकाश और यह विश्वास कि अंत में अच्छाई जीतती है — यही वह लौ है।

शब्दों के रूप — पृष्ठ 65 और 66पाठ से

पाठ सेशब्दों की बात
प्र.1“कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी” — ‘अमावस’ का अर्थ है ‘अमावस्या’। इन दोनों शब्दों का अर्थ तो समान है लेकिन इनके लिखने-बोलने में थोड़ा-सा अंतर है। ऐसे ही कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इनसे मिलते-जुलते दूसरे शब्द कविता से खोजकर लिखिए। ऐसे ही कुछ अन्य शब्द आपस में चर्चा करके खोजिए और लिखिए—
1. दिया ______    4. ______
2. उजेला ______    5. ______
3. अनगिन ______    6. ______
उत्तर

1. दिया — दीप (दिये)
2. उजेला — उजाला
3. अनगिन — अनगिनत
4. अमावस — अमावस्या
5. सरित — सरिता
6. धरा — धरती

कुछ अन्य जोड़े: स्नेह–नेह, ज्योति–जोत, पूर्णिमा–पूनम, निशा–निशि, स्वर्ण–सुवर्ण।

अर्थ की बात — पृष्ठ 66पाठ से

पाठ सेशब्द-चयन
प्र.1(क) “जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर”
इस पंक्ति में ‘चलो’ के स्थान पर ‘रहो’ शब्द रखकर पढ़िए। इस शब्द के बदलने से पंक्ति के अर्थ में क्या अंतर आ रहा है? अपने समूह में चर्चा कीजिए।
उत्तर

उत्तर: ‘जलाते चलो’ में दीप जलाने के साथ आगे बढ़ते जाने का भाव है — चलते-चलते हर जगह दीप जलाते जाओ। ‘जलाते रहो’ में केवल लगातार करते रहने का भाव है, आगे बढ़ने का नहीं; जैसे कोई एक ही जगह रुककर दीप जलाता रहे। पूरी कविता एक यात्रा है (नदी, नाव, किनारा, “बहाते चलो”), इसलिए ‘चलो’ ही अधिक उपयुक्त है।

प्र.2(ख) कविता में प्रत्येक शब्द का अपना विशेष महत्व होता है। यदि ये शब्द बदल दिए जाएँ तो कविता का अर्थ भी बदल सकता है और उसकी सुंदरता में भी अंतर आ सकता है।
नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। पंक्तियों के सामने लगभग समान अर्थों वाले कुछ शब्द दिए गए हैं। आप उनमें से वह शब्द चुनिए, जो उस पंक्ति में सबसे उपयुक्त रहेगा—
1. बहाते चलो ______ तुम वह निरंतर (नैया, नाव, नौका)
    कभी तो तिमिर का ______ मिलेगा॥ (तट, तीर, किनारा)
2. रहेगा ______ पर दिया एक भी यदि (धरा, धरती, भूमि)
    कभी तो निशा को ______ मिलेगा॥ (प्रातः, सुबह, सवेरा)
3. जला दीप पहला तुम्हीं ने ______ की (अंधकार, तिमिर, अँधेरे)
    चुनौती ______ बार स्वीकार की थी। (प्रथम, अव्वल, पहली)
उत्तर

सबसे उपयुक्त शब्द वही हैं जो कवि ने चुने —

1. बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर
   कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा॥

2. रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
   कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा॥

3. जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की
   चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी।

कारण: इन्हीं शब्दों से पंक्ति की लय ठीक बैठती है और ये कविता के बाकी शब्दों से मेल खाते हैं।

प्रतीक — पृष्ठ 66, 67 और 68पाठ से

पाठ सेशब्द-जाल
प्र.1(क) “कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा”
निशा का अर्थ है— रात।
सवेरा का अर्थ है— सुबह।
आपने अनुभव किया होगा कि कविता में इन दोनों शब्दों का प्रयोग ‘रात’ और ‘सुबह’ के लिए नहीं किया गया है। अपने समूह में चर्चा करके पता लगाइए कि ‘निशा’ और ‘सवेरा’ का इस कविता में क्या-क्या अर्थ हो सकता है। (संकेत— निशा से जुड़ा है ‘अँधेरा’ और सवेरे से जुड़ा है ‘उजाला’)
उत्तर

उत्तर: कविता में ‘निशा’ दुख, निराशा, अज्ञान, बुराई और बुरे समय का प्रतीक है; ‘सवेरा’ सुख, आशा, ज्ञान, अच्छाई और अच्छे दिनों का प्रतीक है। “कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा” का अर्थ है — दुनिया का बुरा समय भी एक दिन बीतेगा और अच्छे दिन आएँगे।

प्र.2(ख) कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में मिलकर इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें उपयुक्त स्थान पर लिखिए।
दियेअँधेराअमावसपूर्णिमादिवसतिमिरनावकिनारा
शिलाज्योतिउजेलातूफ़ानलौस्वर्णजलनाबुझना
सवेरानिशा
पुस्तक (पृष्ठ 67) के दो शब्द-जाल — ‘सवेरा’ और ‘निशा’, हर एक में आठ खाली बादल।
उत्तर

सवेरा — दिये, पूर्णिमा, दिवस, ज्योति, उजेला, लौ, स्वर्ण, जलना

निशा — अँधेरा, अमावस, तिमिर, तूफ़ान, बुझना, शिला, नाव, किनारा

कारण: जो प्रकाश देते हैं, वे ‘सवेरा’ से जुड़े हैं; जो प्रकाश छीनते हैं या कविता में ‘तिमिर’ के साथ आए हैं (तिमिर की शिला, तिमिर की सरित की नाव, तिमिर का किनारा), वे ‘निशा’ से।

प्र.3(ग) अपने समूह में मिलकर ‘निशा’ और ‘सवेरा’ के लिए कुछ और शब्द सोचिए और लिखिए। (संकेत— नीचे दिए गए चित्र देखिए और इन पर विचार कीजिए।)
पुस्तक (पृष्ठ 68) के चार चित्र-जोड़े — हर पंक्ति में एक ही दृश्य दो अलग-अलग हालतों में: पहाड़ की चोटी, पहाड़ी क़िला, गुलाब और समुद्र के ऊपर का चाँद।
उत्तर

‘निशा’ के लिए: अंधकार, तम, रात्रि, रैन, निराशा, दुख, विपत्ति, असफलता, सूनापन।

‘सवेरा’ के लिए: भोर, प्रभात, प्रातःकाल, उजाला, प्रकाश, आशा, सुख, सफलता, उन्नति, हरियाली।

चित्रों से: चोटी पर पहुँचा पर्वतारोही = सफलता; धूप में चमकता क़िला = उजाला; फूलों से लदी झाड़ी = खुशहाली; बादलों में छिपा चाँद = बाधा, निराशा।

पंक्ति से पंक्ति — पृष्ठ 68 और 69पाठ से

पाठ सेवाक्य-रचना
प्र.1कविता की पंक्ति “जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की
चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी” को वाक्य के रूप में इस प्रकार लिख सकते हैं— “तुम्हीं ने पहला दीप जला तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी।” अब नीचे दी गई पंक्तियों को इसी प्रकार वाक्यों के रूप में लिखिए—
1. बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर।
उत्तर

तुम वह नाव निरंतर बहाते चलो।

प्र.22. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर।
उत्तर

तुम स्नेह भर-भरकर ये दिये जलाते चलो।

(कविता में कर्ता ‘तुम’ छिपा है; वाक्य में उसे लिख देते हैं।)

प्र.33. बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।
उत्तर

इन्हें बुझाओ, क्योंकि इस प्रकार पथ नहीं मिल सकेगा।

अथवा पूरे संदर्भ के साथ: “जो विद्युत-दिये बिना स्नेह के जल रहे हैं, उन्हें बुझाओ, क्योंकि ऐसे पथ नहीं मिल सकेगा।” (‘यों’ = इस प्रकार)

प्र.44. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।
उत्तर

मगर आज विश्व पर दिवस में ही अमावस निशा-सी क्यों घिरी आ रही है?

(‘क्यों’ के कारण यह प्रश्नवाचक वाक्य है, इसलिए अंत में ‘?’ लगेगा।)

सा/सी/से का प्रयोग — पृष्ठ 69पाठ से

पाठ सेव्याकरण
प्र.1“घिरी आ रही है अमावस निशा-सी
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी”
इन पंक्तियों में ‘सी’ शब्द समानता दिखाने के लिए प्रयोग किया गया है। ‘सा/सी/से’ का प्रयोग जब समानता दिखाने के लिए किया जाता है तो इनसे पहले योजक चिह्न (-) का प्रयोग किया जाता है। अब आप भी विभिन्न शब्दों के साथ ‘सा/सी/से’ का प्रयोग करते हुए अपनी कल्पना से पाँच वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

नमूना उत्तर (पाँच वाक्य):

  1. परीक्षा का परिणाम सुनते ही उसका चेहरा फूल-सा खिल उठा।
  2. माँ के हाथ की रोटी गरम-गरम, रुई-सी मुलायम थी।
  3. वह लड़का हिरन-सा तेज़ दौड़ता है, कोई उसे पकड़ नहीं पाता।
  4. बारिश के बाद खेत हरी चादर-से दिखाई देने लगे।
  5. गुरुजी की वाणी में गंगा-सी निर्मलता थी।

(‘सा/सी/से’ उसी शब्द के लिंग-वचन के अनुसार बदलते हैं जिसकी तुलना हो रही है, और उनसे पहले योजक चिह्न (-) लगता है।)

आपकी बात — पृष्ठ 69 और 70पाठ से आगे

पाठ से आगेअपनी बात
प्र.1(क) “रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा”
यदि हर व्यक्ति अपना कर्तव्य समझ ले और दूसरों की भलाई के लिए कार्य करे तो पूरी दुनिया सुंदर बन जाएगी। आप भी दूसरों के लिए प्रतिदिन बहुत-से अच्छे कार्य करते होंगे। अपने उन कार्यों के बारे में बताइए।
उत्तर

“मैं रोज़ कुछ छोटे-छोटे अच्छे काम करता हूँ। सुबह छत पर पक्षियों के लिए पानी भर देता हूँ। विद्यालय में जिस साथी की कॉपी अधूरी रह जाती है, उसे अपनी कॉपी दिखा देता हूँ। शाम को दादी को अख़बार पढ़कर सुनाता हूँ और छोटी बहन को पहाड़े याद कराता हूँ। ये मेरे छोटे-छोटे ‘दिये’ हैं — कविता कहती है कि एक दिया भी बचा रहे, तो सवेरा अवश्य आएगा।”

प्र.2(ख) इस कविता में निराश न होने, चुनौतियों का सामना करने और सबके सुख के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया है। यदि आपको अपने किसी मित्र को निराश न होने के लिए प्रेरित करना हो तो आप क्या करेंगे? क्या कहेंगे? अपने समूह में बताइए।
उत्तर

क्या करेंगे: पहले मित्र की पूरी बात ध्यान से सुनूँगा, उसे अकेला नहीं छोड़ूँगा, उसकी कोई अच्छाई याद दिलाऊँगा और मुश्किल काम का पहला छोटा क़दम उसके साथ मिलकर करूँगा।

क्या कहेंगे (नमूना): “एक बार हारने से कोई हमेशा के लिए नहीं हार जाता। तुम पहले भी मुश्किल काम कर चुके हो। चलो, कल से हम साथ मिलकर अभ्यास करेंगे।”

प्र.3(ग) क्या आपको कभी किसी ने कोई कार्य करने के लिए प्रेरित किया है? कब? कैसे? उस घटना के बारे में बताइए।
उत्तर

“पिछले वर्ष वार्षिक उत्सव में मेरा नाम भाषण के लिए लिखा गया, पर मुझे मंच से डर लगता था और मैं नाम कटवाना चाहता था। तब हमारी हिंदी शिक्षिका ने मुझे डाँटा नहीं, बल्कि कहा कि जो कक्षा में कविता सुना सकता है, वह मंच पर भी बोल सकता है। उन्होंने रोज़ दस मिनट मुझसे अभ्यास कराया। उत्सव के दिन मैंने पूरा भाषण दिया और सबने तालियाँ बजाईं।”

अमावस्या और पूर्णिमा — पृष्ठ 70 और 71पाठ से आगे

पाठ से आगेजानकारी
प्र.1(क) “भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह
कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी”
आप अमावस्या और पूर्णिमा के बारे में पहले ही पढ़ चुके हैं। क्या आप जानते हैं कि अमावस्या और पूर्णिमा के होने का क्या कारण है?
उत्तर

उत्तर: चंद्रमा का अपना प्रकाश नहीं होता, वह सूर्य के प्रकाश से चमकता है। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है, इसलिए हमें उसका प्रकाशित भाग रोज़ अलग-अलग दिखता है।

अमावस्या — जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच होता है, उसका प्रकाशित भाग हमसे दूसरी ओर रहता है, इसलिए चाँद दिखाई नहीं देता।
पूर्णिमा — जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच होती है, पूरा प्रकाशित भाग हमारी ओर होता है, इसलिए चाँद पूरा गोल दिखता है।

प्र.2(ख) अब नीचे दिए गए चित्र में अमावस्या, पूर्णिमा, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को पहचानिए और ये नाम उपयुक्त स्थानों पर लिखिए—
(यदि पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।)
पुस्तक (पृष्ठ 71) में छपा चित्र — चार पंक्तियों में सात-सात करके चंद्रमा के अट्ठाईस चित्र।
उत्तर

चित्र में नाम इस प्रकार लिखिए —

चित्र में स्थानवहाँ चाँद कैसा दिखता हैवहाँ क्या लिखिए
सबसे पहला चित्र (पहली पंक्ति, बाएँ कोने में)पूरी तरह काला — चाँद दिखता ही नहींअमावस्या
पहली और दूसरी पंक्ति के चित्र (जहाँ उजाला दाईं ओर से बढ़ रहा है)पतली-सी रेखा से बढ़ते-बढ़ते आधा और फिर लगभग पूराशुक्ल पक्ष
तीसरी पंक्ति के शुरू के (पूरे गोल) चित्रचाँद पूरा गोल और सबसे चमकीलापूर्णिमा
तीसरी पंक्ति के अंत से चौथी पंक्ति तक (जहाँ उजाला बाईं ओर रह जाता है)पूरे से घटकर आधा, फिर पतली रेखाकृष्ण पक्ष
सबसे अंतिम चित्र (चौथी पंक्ति, दाएँ कोने में)फिर से लगभग पूरा कालाअमावस्या

पहचान: उजला भाग दाईं ओर से बढ़ रहा हो तो शुक्ल पक्ष; घटते हुए बाईं ओर बचा हो तो कृष्ण पक्ष।

तिथिपत्र — पृष्ठ 72 और 73पाठ से आगे

पाठ से आगेतालिका
प्र.1नीचे तिथिपत्र के एक महीने का पृष्ठ दिया गया है। इसे ध्यान से देखिए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
जनवरी 2023
11-30 पौष 1-11 माघ, शक 1944
रविवार1
दशमी (शुक्ल)
8
द्वितीया (कृष्ण)
15
अष्टमी (कृष्ण)
22
प्रतिपदा (शुक्ल)
29
अष्टमी (शुक्ल)
सोमवार2
एकादशी (शुक्ल)
9
द्वितीया (कृष्ण)
16
नवमी (कृष्ण)
23
द्वितीया (शुक्ल)
30
नवमी (शुक्ल)
मंगलवार3
द्वादशी (शुक्ल)
10
तृतीया (कृष्ण)
17
दशमी (कृष्ण)
24
तृतीया (शुक्ल)
31
दशमी (शुक्ल)
बुधवार4
त्रयोदशी (शुक्ल)
11
चतुर्थी (कृष्ण)
18
एकादशी (कृष्ण)
25
चतुर्थी (शुक्ल)
गुरुवार5
चतुर्दशी (शुक्ल)
12
पंचमी (कृष्ण)
19
द्वादशी (कृष्ण)
26
वसंत पंचमी (शुक्ल)
शुक्रवार6
पूर्णिमा
13
षष्ठी (कृष्ण)
20
त्रयोदशी (कृष्ण)
27
षष्ठी (शुक्ल)
शनिवार7
प्रतिपदा (कृष्ण)
14
सप्तमी (कृष्ण)
21
अमावस्या
28
सप्तमी (शुक्ल)
(क) दिए गए महीने में कुल कितने दिन हैं?
उत्तर

31 दिन — महीना 1 जनवरी (रविवार) से 31 जनवरी (मंगलवार) तक है।

प्र.2(ख) पूर्णिमा और अमावस्या किस दिनाँक और वार को पड़ रही है?
उत्तर

पूर्णिमा — 6 जनवरी 2023, शुक्रवार
अमावस्या — 21 जनवरी 2023, शनिवार

प्र.3(ग) कृष्ण पक्ष की सप्तमी और शुक्ल पक्ष की सप्तमी में कितने दिनों का अंतर है?
उत्तर
कृष्ण पक्ष की सप्तमी = 14 जनवरी, शनिवार
शुक्ल पक्ष की सप्तमी = 28 जनवरी, शनिवार
अंतर = 28 − 14 = 14 दिन

उत्तर — 14 दिनों का अंतर है।

प्र.4(घ) इस महीने में कृष्ण पक्ष में कुल कितने दिन हैं?
उत्तर
कृष्ण पक्ष का पहला दिन = 7 जनवरी (प्रतिपदा, कृष्ण)
कृष्ण पक्ष का अंतिम दिन = 21 जनवरी (अमावस्या)
कुल दिन = 21 − 7 + 1 = 15 दिन

उत्तर — इस महीने कृष्ण पक्ष में कुल 15 दिन हैं (7 जनवरी से 21 जनवरी तक)।

प्र.5(ङ) ‘वसंत पंचमी’ की तिथि बताइए।
उत्तर

वसंत पंचमी — 26 जनवरी 2023, गुरुवार। तिथि: शुक्ल पक्ष की पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी)।

आज की पहेली — पृष्ठ 73 और 74पाठ से आगे

पाठ से आगेपहेली
प्र.1“समय साक्षी है कि जलते हुए दीप
अनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाए।”
‘पवन’ शब्द का अर्थ है हवा। नीचे एक अक्षर-जाल दिया गया है। इसमें ‘पवन’ के लिए उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग नाम या शब्द छिपे हैं। आपको उन्हें खोजकर उन पर घेरा बनाना है, जैसा एक हमने पहले से बना दिया है। देखते हैं, आप कितने सही नाम या शब्द खोज पाते हैं।
बादलईबपअनिलयावकसमीरनहवायुबमारुतसड़
उत्तर

‘पवन’ के नाम: हवा (पहले से घेरा हुआ), पवन, अनिल, समीर, वायु, मारुत, बयार और वात।

बादलईबपअनिलयावकसमीरनहवायुबमारुतसड़
आड़े: हवा, अनिल, समीर, वायु, मारुत · खड़े: पवन, बयार, वात

खोजबीन के लिए — पृष्ठ 74पाठ से आगे

पाठ से आगेपरियोजना
प्र.1कविता संबंधित कुछ रचनाएँ दी गई हैं, इन्हें पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।
• हम सब सुमन एक उपवन के
• बढ़े चलो
• रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 1
• रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 2
उत्तर

यह खोजबीन की गतिविधि है। पृष्ठ 60 पर दिए क्यू.आर. कोड को शिक्षक या घर के बड़ों की सहायता से स्कैन कीजिए और चारों रचनाएँ पढ़िए-देखिए — ‘हम सब सुमन एक उपवन के’ (इसी पाठ के कवि का गीत), ‘बढ़े चलो’ (आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा) और ‘रोज़ बदलता कैसे चाँद’ भाग 1 व 2 (चंद्रमा की कलाएँ)। फिर अपनी पसंद की एक पंक्ति और चाँद के बारे में सीखी एक नई बात लेखन-पुस्तिका में लिखिए।

Chapter 7 of 13 – Hindi

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