NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 7 Jalate Chalo – step-by-step answers to every exercise and in-text question of the chapter, as per the latest NCERT syllabus for 2027. Read them online or download the free question-answer PDF.
मल्हार (कक्षा 6) का पाठ 7 जलाते चलो बाल साहित्य के प्रसिद्ध कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी (1916–1998) की प्रेरक कविता है, जिसमें ‘दीप’ भलाई और आशा का, और ‘तिमिर’ दुख-निराशा का प्रतीक है। यहाँ पृष्ठ 62 से 74 तक की हर गतिविधि का हल है। हर प्रश्न में पहले वह उत्तर है जो कॉपी में लिखना है; कारण, संकेत और अतिरिक्त जानकारी ‘विस्तार से समझिए’ में है।
NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 7 Jalate Chalo PDF
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|---|---|---|
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NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 7 Jalate Chalo – Questions and Answers
All questions of the chapter are answered below, in the order of the book – in-text questions, activities and the end-of-chapter exercises. Each answer is written the way you would write it in the exam.
मेरी समझ से — पृष्ठ 62पाठ से
(1) निम्नलिखित में से कौन-सी बात इस कविता में मुख्य रूप से कही गई है?
• भलाई के कार्य करते रहना
• दीपावली के दीपक जलाना
• बल्ब आदि जलाकर अंधकार दूर करना
• तिमिर मिलने तक नाव चलाते रहना
भलाई के कार्य करते रहना ★
कारण: कविता ‘स्नेह भर-भर’ दिये जलाते चलने को कहती है — ‘स्नेह’ यानी तेल भी और प्रेम भी। अंत में भी यही बात है — “रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि, कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।” यह किसी त्योहार की नहीं, जीवन भर भलाई करते रहने की बात है।
यह वाक्य किससे कहा गया है?
• तूफ़ान से
• मनुष्यों से
• दीपकों से
• तिमिर से
मनुष्यों से ★
कारण: पंक्ति में ‘तुम्हीं ने’ है। दीप जलाना, अँधेरे की चुनौती स्वीकार करना और दीप की नाव बनाना — ये काम मनुष्य ही कर सकता है। तूफ़ान तो दीप बुझाता है, दीपक स्वयं जलाया जाता है और तिमिर को ही चुनौती दी गई है।
“पहले प्रश्न में मैंने ‘भलाई के कार्य करते रहना’ चुना, क्योंकि कविता ‘स्नेह भर-भर’ दिये जलाने को कहती है और कवि बिना स्नेह वाले विद्युत-दिये बुझाने को कहते हैं। दूसरे प्रश्न में ‘मनुष्यों से’ चुना, क्योंकि ‘तुम्हीं ने’ पहला दीप जलाया और दीप की नाव बनाई — ये काम मनुष्य ही करता है।”
मिलकर करें मिलान — पृष्ठ 62 और 63पाठ से
| शब्द | अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| 1. अमावस | 1. पूर्णमासी, वह तिथि जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है। |
| 2. पूर्णिमा | 2. विद्युत दिये अर्थात बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि उपकरण। |
| 3. विद्युत-दिये | 3. समय, काल, युग संख्या में चार माने गए हैं — सत्ययुग (सतयुग), त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग। |
| 4. युग | 4. अमावस्या, जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता। |
1. अमावस → 4 (अमावस्या, जिस रात चंद्रमा दिखाई नहीं देता)
2. पूर्णिमा → 1 (पूर्णमासी, जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है)
3. विद्युत-दिये → 2 (बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि)
4. युग → 3 (समय, काल; सत्ययुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग)
पंक्तियों पर चर्चा — पृष्ठ 63पाठ से
“दिये और तूफ़ान की यह कहानी
चली आ रही और चलती रहेगी,
जली जो प्रथम बार लौ दीप की
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी॥
रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा॥”
अर्थ: दीपक और तूफ़ान का यह संघर्ष बहुत पुराना है और आगे भी चलता रहेगा। दीपक की जो लौ पहली बार जली थी, वह सोने-सी चमकती हुई आज भी जल रही है। यदि धरती पर एक भी दिया जलता रहा, तो रात का अंत होकर सवेरा अवश्य आएगा।
भाव: दीपक अच्छाई और आशा का, तूफ़ान बुराई और कठिनाइयों का प्रतीक है। एक भी भला व्यक्ति बचा रहे, तो अच्छाई कभी नहीं हारेगी।
सोच-विचार के लिए — पृष्ठ 64पाठ से
कविता में अँधेरे (तिमिर) को इन वस्तुओं के रूप में दिखाया गया है —
- अमावस की रात (निशा) — “घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।”
- सरित (नदी) — “तिमिर की सरित पार करने तुम्हीं ने”
- शिला (चट्टान) — “युगों से तुम्हीं ने तिमिर की शिला पर”
क्या आशा की गई है: कि अँधेरा (दुख, बुराई, निराशा) हमेशा नहीं रहेगा — “कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा”, “कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा”, “कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।”
क्यों की गई है: क्योंकि मनुष्य युगों से दीप जलाकर अँधेरे को चुनौती देता आया है; बुझने वाले दीप भी अपनी ज्योति दे जाते हैं; और धरती पर एक भी दिया बचा रहे, तो सवेरा अवश्य आएगा।
जलाने की बात: ‘स्नेह’ (तेल और प्रेम) से भरे दियों को — “जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर।”
बुझाने की बात: बिना स्नेह जल रहे ‘विद्युत-दियों’ (बिजली के दीपकों) को — “बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो, बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।” यानी प्रेम के बिना किया गया काम सही रास्ता नहीं दिखा सकता।
कविता की रचना — पृष्ठ 64पाठ से
कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा।”
इन पंक्तियों को अपने शिक्षक के साथ मिलकर लय सहित गाने या बोलने का प्रयास कीजिए। आप हाथों से ताल भी दे सकते हैं। दोनों पंक्तियों को गाने या बोलने में समान समय लगा या अलग-अलग? आपने अवश्य ही अनुभव किया होगा कि इन पंक्तियों को बोलने या गाने में लगभग एक-समान समय लगता है। केवल इन दो पंक्तियों को ही नहीं, इस कविता की प्रत्येक पंक्ति को गाने में या बोलने में लगभग समान समय ही लगता है। इस विशेषता के कारण यह कविता और अधिक प्रभावशाली हो गई है।
आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको और भी अनेक विशेष बातें दिखाई देंगी।
(क) इस कविता को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस कविता की पंक्तियों को 2–4, 2–4 के क्रम में बाँटा गया है आदि।
कविता की विशेषताएँ —
- पंक्तियाँ 2–4, 2–4 के क्रम में बँटी हैं — दो पंक्तियों का खंड, फिर चार का।
- हर पंक्ति को बोलने-गाने में लगभग समान समय लगता है।
- दो-पंक्ति वाले खंडों के अंत में एक-सी तुक — मिटेगा, सकेगा, मिलेगा।
- ‘कभी तो’ तीन बार दोहराया गया है।
- ‘सी’ से तुलना — पूर्णिमा-सी, निशा-सी, स्वर्ण-सी।
- दीप, तिमिर, निशा, सवेरा जैसे प्रतीक।
- कवि ‘तुम’ कहकर सीधे प्रेरणा देते हैं — ‘जलाते चलो’, ‘बहाते चलो’।
नमूना उत्तर (प्रस्तुति): “हमारे समूह ने देखा कि इस कविता की पंक्तियाँ 2–4, 2–4 के क्रम में बँटी हैं। दो-पंक्ति वाले खंड ‘मिटेगा, सकेगा, मिलेगा’ जैसी एक-सी तुक पर समाप्त होते हैं। ‘कभी तो’ तीन बार आता है और कवि ‘तुम’ कहकर सीधे हमसे बात करते हैं। अब हमारे दो साथी पहली दो पंक्तियाँ ताली के साथ गाकर सुनाएँगे।”
मिलान — पृष्ठ 64 और 65पाठ से
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा। | 1. विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा। |
| 2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर। | 2. विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है? |
| 3. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी। | 3. विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा। |
| 4. बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा। | 4. दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए। |
1 → 3, 2 → 4, 3 → 2, 4 → 1
1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा — विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा।
2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर — दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए।
3. मगर विश्व पर आज क्यों… अमावस निशा-सी — विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है?
4. बिना स्नेह विद्युत-दिये… — विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा।
अनुमान या कल्पना से — पृष्ठ 65पाठ से
(क) “दिये और तूफ़ान की यह कहानी
चली आ रही और चलती रहेगी”
दीपक और तूफ़ान की यह कौन-सी कहानी हो सकती है जो सदा से चली आ रही है?
यह अच्छाई और बुराई के संघर्ष की कहानी है। जब से मनुष्य ने पहला दीप जलाया, तभी से हवा-तूफ़ान उसे बुझाते आए हैं और मनुष्य उसे फिर-फिर जलाता आया है। दीपक यानी भलाई, आशा और ज्ञान; तूफ़ान यानी बुराई, निराशा और कठिनाइयाँ। यह संघर्ष हर युग में चलता रहा है और आगे भी चलता रहेगा।
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी”
दीपक की यह सोने जैसी लौ क्या हो सकती है जो अनगिनत सालों से जल रही है?
यह सोने जैसी लौ मनुष्य के मन में जली भलाई, साहस और आशा की लौ हो सकती है। मिट्टी के अनगिनत दीये बुझ गए, पर यह भावना कभी नहीं बुझी — एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचती रही। ज्ञान का प्रकाश और यह विश्वास कि अंत में अच्छाई जीतती है — यही वह लौ है।
शब्दों के रूप — पृष्ठ 65 और 66पाठ से
1. दिया ______ 4. ______
2. उजेला ______ 5. ______
3. अनगिन ______ 6. ______
1. दिया — दीप (दिये)
2. उजेला — उजाला
3. अनगिन — अनगिनत
4. अमावस — अमावस्या
5. सरित — सरिता
6. धरा — धरती
कुछ अन्य जोड़े: स्नेह–नेह, ज्योति–जोत, पूर्णिमा–पूनम, निशा–निशि, स्वर्ण–सुवर्ण।
अर्थ की बात — पृष्ठ 66पाठ से
इस पंक्ति में ‘चलो’ के स्थान पर ‘रहो’ शब्द रखकर पढ़िए। इस शब्द के बदलने से पंक्ति के अर्थ में क्या अंतर आ रहा है? अपने समूह में चर्चा कीजिए।
उत्तर: ‘जलाते चलो’ में दीप जलाने के साथ आगे बढ़ते जाने का भाव है — चलते-चलते हर जगह दीप जलाते जाओ। ‘जलाते रहो’ में केवल लगातार करते रहने का भाव है, आगे बढ़ने का नहीं; जैसे कोई एक ही जगह रुककर दीप जलाता रहे। पूरी कविता एक यात्रा है (नदी, नाव, किनारा, “बहाते चलो”), इसलिए ‘चलो’ ही अधिक उपयुक्त है।
नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। पंक्तियों के सामने लगभग समान अर्थों वाले कुछ शब्द दिए गए हैं। आप उनमें से वह शब्द चुनिए, जो उस पंक्ति में सबसे उपयुक्त रहेगा—
1. बहाते चलो ______ तुम वह निरंतर (नैया, नाव, नौका)
कभी तो तिमिर का ______ मिलेगा॥ (तट, तीर, किनारा)
2. रहेगा ______ पर दिया एक भी यदि (धरा, धरती, भूमि)
कभी तो निशा को ______ मिलेगा॥ (प्रातः, सुबह, सवेरा)
3. जला दीप पहला तुम्हीं ने ______ की (अंधकार, तिमिर, अँधेरे)
चुनौती ______ बार स्वीकार की थी। (प्रथम, अव्वल, पहली)
सबसे उपयुक्त शब्द वही हैं जो कवि ने चुने —
कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा॥
2. रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा॥
3. जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की
चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी।
कारण: इन्हीं शब्दों से पंक्ति की लय ठीक बैठती है और ये कविता के बाकी शब्दों से मेल खाते हैं।
प्रतीक — पृष्ठ 66, 67 और 68पाठ से
निशा का अर्थ है— रात।
सवेरा का अर्थ है— सुबह।
आपने अनुभव किया होगा कि कविता में इन दोनों शब्दों का प्रयोग ‘रात’ और ‘सुबह’ के लिए नहीं किया गया है। अपने समूह में चर्चा करके पता लगाइए कि ‘निशा’ और ‘सवेरा’ का इस कविता में क्या-क्या अर्थ हो सकता है। (संकेत— निशा से जुड़ा है ‘अँधेरा’ और सवेरे से जुड़ा है ‘उजाला’)
उत्तर: कविता में ‘निशा’ दुख, निराशा, अज्ञान, बुराई और बुरे समय का प्रतीक है; ‘सवेरा’ सुख, आशा, ज्ञान, अच्छाई और अच्छे दिनों का प्रतीक है। “कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा” का अर्थ है — दुनिया का बुरा समय भी एक दिन बीतेगा और अच्छे दिन आएँगे।
| दिये | अँधेरा | अमावस | पूर्णिमा | दिवस | तिमिर | नाव | किनारा |
| शिला | ज्योति | उजेला | तूफ़ान | लौ | स्वर्ण | जलना | बुझना |
सवेरा — दिये, पूर्णिमा, दिवस, ज्योति, उजेला, लौ, स्वर्ण, जलना
निशा — अँधेरा, अमावस, तिमिर, तूफ़ान, बुझना, शिला, नाव, किनारा
कारण: जो प्रकाश देते हैं, वे ‘सवेरा’ से जुड़े हैं; जो प्रकाश छीनते हैं या कविता में ‘तिमिर’ के साथ आए हैं (तिमिर की शिला, तिमिर की सरित की नाव, तिमिर का किनारा), वे ‘निशा’ से।
‘निशा’ के लिए: अंधकार, तम, रात्रि, रैन, निराशा, दुख, विपत्ति, असफलता, सूनापन।
‘सवेरा’ के लिए: भोर, प्रभात, प्रातःकाल, उजाला, प्रकाश, आशा, सुख, सफलता, उन्नति, हरियाली।
चित्रों से: चोटी पर पहुँचा पर्वतारोही = सफलता; धूप में चमकता क़िला = उजाला; फूलों से लदी झाड़ी = खुशहाली; बादलों में छिपा चाँद = बाधा, निराशा।
पंक्ति से पंक्ति — पृष्ठ 68 और 69पाठ से
चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी” को वाक्य के रूप में इस प्रकार लिख सकते हैं— “तुम्हीं ने पहला दीप जला तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी।” अब नीचे दी गई पंक्तियों को इसी प्रकार वाक्यों के रूप में लिखिए—
1. बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर।
तुम वह नाव निरंतर बहाते चलो।
तुम स्नेह भर-भरकर ये दिये जलाते चलो।
(कविता में कर्ता ‘तुम’ छिपा है; वाक्य में उसे लिख देते हैं।)
इन्हें बुझाओ, क्योंकि इस प्रकार पथ नहीं मिल सकेगा।
अथवा पूरे संदर्भ के साथ: “जो विद्युत-दिये बिना स्नेह के जल रहे हैं, उन्हें बुझाओ, क्योंकि ऐसे पथ नहीं मिल सकेगा।” (‘यों’ = इस प्रकार)
मगर आज विश्व पर दिवस में ही अमावस निशा-सी क्यों घिरी आ रही है?
(‘क्यों’ के कारण यह प्रश्नवाचक वाक्य है, इसलिए अंत में ‘?’ लगेगा।)
सा/सी/से का प्रयोग — पृष्ठ 69पाठ से
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी”
इन पंक्तियों में ‘सी’ शब्द समानता दिखाने के लिए प्रयोग किया गया है। ‘सा/सी/से’ का प्रयोग जब समानता दिखाने के लिए किया जाता है तो इनसे पहले योजक चिह्न (-) का प्रयोग किया जाता है। अब आप भी विभिन्न शब्दों के साथ ‘सा/सी/से’ का प्रयोग करते हुए अपनी कल्पना से पाँच वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
नमूना उत्तर (पाँच वाक्य):
- परीक्षा का परिणाम सुनते ही उसका चेहरा फूल-सा खिल उठा।
- माँ के हाथ की रोटी गरम-गरम, रुई-सी मुलायम थी।
- वह लड़का हिरन-सा तेज़ दौड़ता है, कोई उसे पकड़ नहीं पाता।
- बारिश के बाद खेत हरी चादर-से दिखाई देने लगे।
- गुरुजी की वाणी में गंगा-सी निर्मलता थी।
(‘सा/सी/से’ उसी शब्द के लिंग-वचन के अनुसार बदलते हैं जिसकी तुलना हो रही है, और उनसे पहले योजक चिह्न (-) लगता है।)
आपकी बात — पृष्ठ 69 और 70पाठ से आगे
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा”
यदि हर व्यक्ति अपना कर्तव्य समझ ले और दूसरों की भलाई के लिए कार्य करे तो पूरी दुनिया सुंदर बन जाएगी। आप भी दूसरों के लिए प्रतिदिन बहुत-से अच्छे कार्य करते होंगे। अपने उन कार्यों के बारे में बताइए।
“मैं रोज़ कुछ छोटे-छोटे अच्छे काम करता हूँ। सुबह छत पर पक्षियों के लिए पानी भर देता हूँ। विद्यालय में जिस साथी की कॉपी अधूरी रह जाती है, उसे अपनी कॉपी दिखा देता हूँ। शाम को दादी को अख़बार पढ़कर सुनाता हूँ और छोटी बहन को पहाड़े याद कराता हूँ। ये मेरे छोटे-छोटे ‘दिये’ हैं — कविता कहती है कि एक दिया भी बचा रहे, तो सवेरा अवश्य आएगा।”
क्या करेंगे: पहले मित्र की पूरी बात ध्यान से सुनूँगा, उसे अकेला नहीं छोड़ूँगा, उसकी कोई अच्छाई याद दिलाऊँगा और मुश्किल काम का पहला छोटा क़दम उसके साथ मिलकर करूँगा।
क्या कहेंगे (नमूना): “एक बार हारने से कोई हमेशा के लिए नहीं हार जाता। तुम पहले भी मुश्किल काम कर चुके हो। चलो, कल से हम साथ मिलकर अभ्यास करेंगे।”
“पिछले वर्ष वार्षिक उत्सव में मेरा नाम भाषण के लिए लिखा गया, पर मुझे मंच से डर लगता था और मैं नाम कटवाना चाहता था। तब हमारी हिंदी शिक्षिका ने मुझे डाँटा नहीं, बल्कि कहा कि जो कक्षा में कविता सुना सकता है, वह मंच पर भी बोल सकता है। उन्होंने रोज़ दस मिनट मुझसे अभ्यास कराया। उत्सव के दिन मैंने पूरा भाषण दिया और सबने तालियाँ बजाईं।”
अमावस्या और पूर्णिमा — पृष्ठ 70 और 71पाठ से आगे
कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी”
आप अमावस्या और पूर्णिमा के बारे में पहले ही पढ़ चुके हैं। क्या आप जानते हैं कि अमावस्या और पूर्णिमा के होने का क्या कारण है?
उत्तर: चंद्रमा का अपना प्रकाश नहीं होता, वह सूर्य के प्रकाश से चमकता है। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है, इसलिए हमें उसका प्रकाशित भाग रोज़ अलग-अलग दिखता है।
अमावस्या — जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच होता है, उसका प्रकाशित भाग हमसे दूसरी ओर रहता है, इसलिए चाँद दिखाई नहीं देता।
पूर्णिमा — जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच होती है, पूरा प्रकाशित भाग हमारी ओर होता है, इसलिए चाँद पूरा गोल दिखता है।
(यदि पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।)
चित्र में नाम इस प्रकार लिखिए —
| चित्र में स्थान | वहाँ चाँद कैसा दिखता है | वहाँ क्या लिखिए |
|---|---|---|
| सबसे पहला चित्र (पहली पंक्ति, बाएँ कोने में) | पूरी तरह काला — चाँद दिखता ही नहीं | अमावस्या |
| पहली और दूसरी पंक्ति के चित्र (जहाँ उजाला दाईं ओर से बढ़ रहा है) | पतली-सी रेखा से बढ़ते-बढ़ते आधा और फिर लगभग पूरा | शुक्ल पक्ष |
| तीसरी पंक्ति के शुरू के (पूरे गोल) चित्र | चाँद पूरा गोल और सबसे चमकीला | पूर्णिमा |
| तीसरी पंक्ति के अंत से चौथी पंक्ति तक (जहाँ उजाला बाईं ओर रह जाता है) | पूरे से घटकर आधा, फिर पतली रेखा | कृष्ण पक्ष |
| सबसे अंतिम चित्र (चौथी पंक्ति, दाएँ कोने में) | फिर से लगभग पूरा काला | अमावस्या |
पहचान: उजला भाग दाईं ओर से बढ़ रहा हो तो शुक्ल पक्ष; घटते हुए बाईं ओर बचा हो तो कृष्ण पक्ष।
तिथिपत्र — पृष्ठ 72 और 73पाठ से आगे
| जनवरी 2023 11-30 पौष 1-11 माघ, शक 1944 | |||||
|---|---|---|---|---|---|
| रविवार | 1 दशमी (शुक्ल) | 8 द्वितीया (कृष्ण) | 15 अष्टमी (कृष्ण) | 22 प्रतिपदा (शुक्ल) | 29 अष्टमी (शुक्ल) |
| सोमवार | 2 एकादशी (शुक्ल) | 9 द्वितीया (कृष्ण) | 16 नवमी (कृष्ण) | 23 द्वितीया (शुक्ल) | 30 नवमी (शुक्ल) |
| मंगलवार | 3 द्वादशी (शुक्ल) | 10 तृतीया (कृष्ण) | 17 दशमी (कृष्ण) | 24 तृतीया (शुक्ल) | 31 दशमी (शुक्ल) |
| बुधवार | 4 त्रयोदशी (शुक्ल) | 11 चतुर्थी (कृष्ण) | 18 एकादशी (कृष्ण) | 25 चतुर्थी (शुक्ल) | |
| गुरुवार | 5 चतुर्दशी (शुक्ल) | 12 पंचमी (कृष्ण) | 19 द्वादशी (कृष्ण) | 26 वसंत पंचमी (शुक्ल) | |
| शुक्रवार | 6 पूर्णिमा | 13 षष्ठी (कृष्ण) | 20 त्रयोदशी (कृष्ण) | 27 षष्ठी (शुक्ल) | |
| शनिवार | 7 प्रतिपदा (कृष्ण) | 14 सप्तमी (कृष्ण) | 21 अमावस्या | 28 सप्तमी (शुक्ल) | |
31 दिन — महीना 1 जनवरी (रविवार) से 31 जनवरी (मंगलवार) तक है।
पूर्णिमा — 6 जनवरी 2023, शुक्रवार
अमावस्या — 21 जनवरी 2023, शनिवार
शुक्ल पक्ष की सप्तमी = 28 जनवरी, शनिवार
अंतर = 28 − 14 = 14 दिन
उत्तर — 14 दिनों का अंतर है।
कृष्ण पक्ष का अंतिम दिन = 21 जनवरी (अमावस्या)
कुल दिन = 21 − 7 + 1 = 15 दिन
उत्तर — इस महीने कृष्ण पक्ष में कुल 15 दिन हैं (7 जनवरी से 21 जनवरी तक)।
वसंत पंचमी — 26 जनवरी 2023, गुरुवार। तिथि: शुक्ल पक्ष की पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी)।
आज की पहेली — पृष्ठ 73 और 74पाठ से आगे
अनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाए।”
‘पवन’ शब्द का अर्थ है हवा। नीचे एक अक्षर-जाल दिया गया है। इसमें ‘पवन’ के लिए उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग नाम या शब्द छिपे हैं। आपको उन्हें खोजकर उन पर घेरा बनाना है, जैसा एक हमने पहले से बना दिया है। देखते हैं, आप कितने सही नाम या शब्द खोज पाते हैं।
‘पवन’ के नाम: हवा (पहले से घेरा हुआ), पवन, अनिल, समीर, वायु, मारुत, बयार और वात।
खोजबीन के लिए — पृष्ठ 74पाठ से आगे
• हम सब सुमन एक उपवन के
• बढ़े चलो
• रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 1
• रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 2
यह खोजबीन की गतिविधि है। पृष्ठ 60 पर दिए क्यू.आर. कोड को शिक्षक या घर के बड़ों की सहायता से स्कैन कीजिए और चारों रचनाएँ पढ़िए-देखिए — ‘हम सब सुमन एक उपवन के’ (इसी पाठ के कवि का गीत), ‘बढ़े चलो’ (आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा) और ‘रोज़ बदलता कैसे चाँद’ भाग 1 व 2 (चंद्रमा की कलाएँ)। फिर अपनी पसंद की एक पंक्ति और चाँद के बारे में सीखी एक नई बात लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
Chapter 7 of 13 – Hindi
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NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 7 Jalate Chalo – Overview
| Class | Class 6 |
| Subject | Hindi |
| Chapter | 7 – Jalate Chalo |
| Session | 2027 |
| Format | Full answers on this page + PDF |
NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 7 – FAQs
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