NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 9 Maiya Main Nahin Makhan Khayo – step-by-step answers to every exercise and in-text question of the chapter, as per the latest NCERT syllabus for 2027. Read them online or download the free question-answer PDF.
पाठ 9 मैया मैं नहिं माखन खायो महाकवि सूरदास का ब्रजभाषा में लिखा एक पद है। इसमें बाल-कृष्ण अपनी माँ यशोदा के सामने सफ़ाई देते हैं कि माखन उन्होंने नहीं खाया। नीचे पृष्ठ 96 से 104 तक के सभी प्रश्नों के उत्तर पुस्तक के शीर्षकों के क्रम में दिए गए हैं — हर कार्ड में पहले वह उत्तर है जो कॉपी में लिखना है, और उसके नीचे ‘विस्तार से समझिए’ में कारण और अतिरिक्त बातें।
NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 9 Maiya Main Nahin Makhan Khayo PDF
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|---|---|---|
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NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 9 Maiya Main Nahin Makhan Khayo – Questions and Answers
All questions of the chapter are answered below, in the order of the book – in-text questions, activities and the end-of-chapter exercises. Each answer is written the way you would write it in the exam.
मेरी समझ से — पृष्ठ 96पाठ से
(1) मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? इसके लिए श्रीकृष्ण ने क्या तर्क दिया?
- मुझे तुम पराया समझती हो।
- मेरी माता, तुम बहुत भोली हो।
- मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए।
- मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?
सही उत्तर: मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं? ★
कारण — कृष्ण कहते हैं, “मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।” यानी मेरी बाँहें छोटी हैं, ऊँचे टँगे छींके तक मेरा हाथ पहुँच ही नहीं सकता, तो माखन कैसे खाता?
- गाय चरा रहे थे।
- माखन खा रहे थे।
- मधुबन में भटक रहे थे।
- मित्रों के संग खेल रहे थे।
सही उत्तर: गाय चरा रहे थे। ★
कारण — कृष्ण बताते हैं, “भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥” यानी सुबह से साँझ तक वे गायों के साथ वन में थे।
(1) मैंने ‘मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?’ चुना, क्योंकि प्रश्न ‘कैसे’ पूछ रहा है और कृष्ण यही तर्क देते हैं — “मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।” बाक़ी विकल्प तर्क नहीं, शिकायत या रूठना हैं।
(2) मैंने ‘गाय चरा रहे थे’ चुना, क्योंकि कृष्ण कहते हैं कि भोर होते ही उन्हें गायों के पीछे मधुबन भेज दिया गया और वे साँझ को घर लौटे।
मिलकर करें मिलान — पृष्ठ 96 और 97पाठ से
| शब्द | अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| 1. जसोदा | 1. समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर होता है। एक दिवस में आठ पहर होते हैं)। |
| 2. पहर | 2. एक वट वृक्ष (मान्यता है कि श्रीकृष्ण जब गाय चराया करते थे, तब वे इसी वृक्ष के ऊपर चढ़कर वंशी की ध्वनि से गायों को पुकारकर उन्हें एकत्रित करते।) |
| 3. लकुटि कमरिया | 3. गोल पात्र के आकार का रस्सियों का बुना हुआ जाल जो छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता है ताकि उसमें रखी हुई खाने-पीने की चीज़ों (जैसे— दूध, दही आदि) को कुत्ते, बिल्ली आदि न पा सकें। |
| 4. बंसीवट | 4. यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था। |
| 5. मधुबन | 5. जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ। |
| 6. छीको | 6. गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी। |
| 7. माता | 7. मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन। |
| 8. ग्वाल-बाल | 8. लाठी और छोटा कंबल, कमली (मान्यता है कि श्रीकृष्ण लकुटि-कमरिया लेकर गाय चराने जाया करते थे)। |
सही मिलान: 1→4, 2→1, 3→8, 4→2, 5→7, 6→3, 7→5, 8→6
| शब्द | मिलेगा | अर्थ या संदर्भ |
|---|---|---|
| 1. जसोदा | → 4 | यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था। |
| 2. पहर | → 1 | समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर; एक दिवस में आठ पहर)। |
| 3. लकुटि कमरिया | → 8 | लाठी और छोटा कंबल, कमली। |
| 4. बंसीवट | → 2 | एक वट वृक्ष, जिस पर चढ़कर कृष्ण वंशी बजाकर गायों को बुलाते थे। |
| 5. मधुबन | → 7 | मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन। |
| 6. छीको | → 3 | रस्सियों का बुना हुआ गोल जाल, जो छत से लटकाया जाता है। |
| 7. माता | → 5 | जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ। |
| 8. ग्वाल-बाल | → 6 | गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी। |
पंक्तियों पर चर्चा — पृष्ठ 97पाठ से
शब्दार्थ — भोर = सुबह; भयो = हुई; गैयन के पाछे = गायों के पीछे; मोहि = मुझे; पठायो = भेज दिया।
अर्थ — कृष्ण माँ से कहते हैं, “सुबह होते ही तुमने मुझे गायों के पीछे-पीछे मधुबन भेज दिया था।” यानी वे दिन भर घर पर थे ही नहीं, तो माखन खाने का अवसर उन्हें कहाँ मिला?
शब्दार्थ — बिहँसि = मुसकाकर, हँसकर; जसोदा = यशोदा; लै = लेकर; उर = छाती; कंठ = गला।
अर्थ — सूरदास कहते हैं कि कृष्ण की भोली, रूठी हुई सफ़ाई सुनकर माँ यशोदा हँस पड़ीं और उन्होंने कृष्ण को छाती और गले से लगा लिया। माँ का गुस्सा प्यार में बदल गया।
सोच-विचार के लिए — पृष्ठ 98पाठ से
उत्तर: श्रीकृष्ण ने अपने बारे में बताया कि —
- उन्होंने माखन नहीं खाया।
- भोर होते ही उन्हें गायों के पीछे मधुबन भेज दिया गया था।
- वे चार पहर बंसीवट पर भटकते रहे और साँझ होने पर घर लौटे।
- वे छोटे बालक हैं, उनकी बाँहें छोटी हैं, इसलिए ऊँचे छींके तक नहीं पहुँच सकते।
- ग्वाल-बाल उनसे बैर रखते हैं; उन्होंने ज़बरदस्ती उनके मुँह पर माखन लपेट दिया।
उत्तर: कृष्ण की भोली-भाली सफ़ाई और रूठकर लाठी-कंबल लौटाने की बात सुनकर यशोदा का गुस्सा उतर गया। नन्हे बेटे की चतुराई पर उन्हें हँसी आ गई, और “जानि परायो जायो” (मुझे पराया समझ लिया) सुनकर उनका मन भर आया। वह पराया नहीं, उनका अपना प्यारा बेटा है — यही जताने के लिए उन्होंने हँसकर उसे गले से लगा लिया।
कविता की रचना — पृष्ठ 98पाठ से
पद की विशेषताएँ —
- हर पंक्ति के अंत में तुक है — खायो, पठायो, आयो, पायो।
- अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम ‘सूरदास’ दिया है।
- भाषा ब्रजभाषा है — पाछे, भोरी, कछु, नहिं, मोहि।
- पूरा पद कृष्ण की माँ से बातचीत जैसा है।
- बालक कृष्ण चतुराई से तर्क देते हैं।
- अंत माँ के प्यार से होता है — यशोदा हँसकर गले लगा लेती हैं।
- ‘भोर भयो’, ‘बालक बहियन’ जैसी ध्वनियों से लय बनती है; पद गाया जा सकता है।
नमूना उत्तर (कक्षा में प्रस्तुति): “हमारे समूह ने पद में ये विशेषताएँ पाईं — (1) हर पंक्ति के अंत में तुक है: खायो, पठायो, आयो, पायो; (2) अंतिम पंक्ति में कवि का नाम ‘सूरदास’ है; (3) भाषा ब्रजभाषा है — ‘पाछे’, ‘भोरी’; (4) पूरा पद कृष्ण की माँ से बातचीत जैसा है; (5) अंत में माँ का गले लगाना पद को प्यार से भर देता है। धन्यवाद!”
अनुमान या कल्पना से — पृष्ठ 98पाठ से
उत्तर: ग्वाल-बालों ने शिकायत कर दी थी कि कृष्ण ने माखन चुराकर खाया, और माँ यशोदा ने उनकी बात मान ली — “तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।” कृष्ण डाँट से बचना चाहते थे और माँ का विश्वास फिर से जीतना चाहते थे। इसीलिए वे तर्क दे रहे होंगे — मैं दिन भर वन में था, मेरे हाथ छोटे हैं, और ग्वाल-बाल मुझसे बैर रखते हैं।
“यशोदा के गले लगते ही कृष्ण का रूठना ख़त्म हो गया और उन्होंने फिर से लाठी-कंबल थाम लिया। माँ ने आँचल से उनका माखन लगा मुँह पोंछा और फिर हँस पड़ीं। उन्होंने प्यार से कटोरी भर माखन-मिश्री खिलाई और कहा, ‘चोरी मत किया कर, माँग लिया कर।’ ग्वाल-बाल यह देखकर चुपचाप खिसक गए।”
शब्दों के रूप — पृष्ठ 98 और 99पाठ से
उत्तर:
| पद का शब्द (ब्रजभाषा) | हम ऐसे बोलते-लिखते हैं |
|---|---|
| परे | पड़े |
| छोटो | छोटा |
| बिधि | विधि (तरीक़ा, ढंग) |
| भोरी | भोली |
| कछु | कुछ |
| लै | ले (लेकर) |
| नहिं | नहीं |
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. उपजि | 1. मुसकाई, हँसी |
| 2. जानि | 2. उपजना, उत्पन्न होना |
| 3. जायो | 3. जानकर, समझकर |
| 4. जिय | 4. विश्वास किया, सच माना |
| 5. पठायो | 5. बाँह, हाथ, भुजा |
| 6. पतियायो | 6. प्रकार, भाँति, रीति |
| 7. बहियन | 7. मन, जी |
| 8. बिधि | 8. जन्मा |
| 9. बिहँसि | 9. मला, लगाया, पोता |
| 10. भटक्यो | 10. इधर-उधर घूमा या भटका |
| 11. लपटायो | 11. भेज दिया |
सही मिलान: 1→2, 2→3, 3→8, 4→7, 5→11, 6→4, 7→5, 8→6, 9→1, 10→10, 11→9
| स्तंभ 1 | मिलेगा | स्तंभ 2 |
|---|---|---|
| 1. उपजि | → 2 | उपजना, उत्पन्न होना |
| 2. जानि | → 3 | जानकर, समझकर |
| 3. जायो | → 8 | जन्मा |
| 4. जिय | → 7 | मन, जी |
| 5. पठायो | → 11 | भेज दिया |
| 6. पतियायो | → 4 | विश्वास किया, सच माना |
| 7. बहियन | → 5 | बाँह, हाथ, भुजा |
| 8. बिधि | → 6 | प्रकार, भाँति, रीति |
| 9. बिहँसि | → 1 | मुसकाई, हँसी |
| 10. भटक्यो | → 10 | इधर-उधर घूमा या भटका |
| 11. लपटायो | → 9 | मला, लगाया, पोता |
वर्ण-परिवर्तन — पृष्ठ 100पाठ से
उत्तर: ‘भोरी’ के अलावा पद में ऐसे शब्द हैं — परे (पड़े; ‘ड़’ की जगह ‘र’) और कमरिया (कमली/कमलिया; ‘ल’ की जगह ‘र’)।
| पद का शब्द | आज का रूप | कौन-सा वर्ण बदला | पद की पंक्ति |
|---|---|---|---|
| भोरी | भोली | ल → र | “तू माता मन की अति भोरी” |
| परे | पड़े | ड़ → र | “साँझ परे घर आयो” तथा “ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं” |
| कमरिया | कमली (छोटा कंबल) | ल → र | “ये ले अपनी लकुटि कमरिया” |
पंक्ति से पंक्ति — पृष्ठ 100पाठ से
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। | 1. मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ? |
| 2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो। | 2. तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया। |
| 3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो। | 3. माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो। |
| 4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो। | 4. सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया। |
| 5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो। | 5. चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया। |
| 6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो। | 6. ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया। |
सही मिलान: 1→4, 2→5, 3→1, 4→6, 5→3, 6→2
| स्तंभ 1 — पद की पंक्ति | मिलेगा | स्तंभ 2 — भावार्थ |
|---|---|---|
| 1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। | → 4 | सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया। |
| 2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो। | → 5 | चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया। |
| 3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो। | → 1 | मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ? |
| 4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो। | → 6 | ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया। |
| 5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो। | → 3 | माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो। |
| 6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो। | → 2 | तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया। |
आपकी बात — पृष्ठ 101पाठ से आगे
“हाँ, पिछले वर्ष हमारी कक्षा की खिड़की का काँच टूट गया और दो साथियों ने कहा कि गेंद मैंने मारी थी। मुझे कक्षा-शिक्षिका के सामने सिद्ध करना पड़ा कि काँच मैंने नहीं तोड़ा। मैंने दो तर्क दिए — पहला, उस समय मैं पुस्तकालय में किताब जमा करा रहा था, जो रजिस्टर में लिखा था; दूसरा, उस दिन मेरे पास गेंद-बल्ला था ही नहीं। शिक्षिका ने रजिस्टर देखा और मेरी बात मान ली।”
घर की वस्तुएँ — पृष्ठ 101 और 102पाठ से आगे
उत्तर: चित्रों के प्रचलित नाम (पहले आठ पृष्ठ 101 पर, बाक़ी सात पृष्ठ 102 पर) — आपके घर में जो नाम बोला जाता है, वही लिखिए।
| क्रम | चित्र में क्या है | प्रचलित नाम |
|---|---|---|
| 1 | पीतल का चौड़े मुँह वाला घड़ा | घड़ा / गगरी (पीतल की) |
| 2 | लोहे की भारी, कोयले वाली इस्तरी | इस्तरी (कोयले वाली) |
| 3 | लकड़ी की नीची चौकोर चौकी | चौकी / पटरा |
| 4 | हाथ से चलने वाली मशीन | सिलाई मशीन |
| 5 | बुनी हुई लकड़ी की चारपाई | चारपाई / खाट |
| 6 | ढक्कन वाला चीनी-मिट्टी का बर्तन | मर्तबान / बरनी |
| 7 | बाँस या सरकंडे का बुना चौड़ा पात्र | सूप |
| 8 | पत्थर की सिल और उस पर लोढ़ा | सिल-बट्टा |
| 9 | दो गोल पाटों वाला पत्थर, ऊपर मूठ | चक्की |
| 10 | रंगीन हाथ का पंखा | हाथ-पंखा |
| 11 | लकड़ी का लंबा डंडा, नीचे पंखुड़ियों जैसा सिरा | मथानी |
| 12 | छेदों वाली गोल धातु की छलनी | छलनी |
| 13 | रंगीन, ढक्कन वाली बुनी टोकरी | ढक्कन वाली टोकरी / डलिया |
| 14 | छोटा गहरा पात्र और मोटा डंडा | खरल / इमामदस्ता |
| 15 | दो खंभों से बँधी मथानी और नीचे मटकी | बिलोना (रस्सी वाली मथानी) |
दूध से घी बनाने की प्रक्रिया —
- गाय का ताज़ा दूध दुहा जाता है।
- दूध को उबालकर गुनगुना होने तक ठंडा करते हैं।
- उसमें थोड़ा दही (जामन) मिलाकर रात भर रखते हैं — दही जम जाता है।
- दही को मथानी से मथते हैं — ऊपर मक्खन आ जाता है, नीचे छाछ बचती है।
- मक्खन निकालकर दूसरे बर्तन में डालते हैं और धीमी आँच पर गरम करते हैं।
- ऊपर का साफ़ सुनहरा तरल छानकर बरनी में भर लेते हैं — यही घी है।
समय का माप — पृष्ठ 103पाठ से आगे
उत्तर (समय बताने वाले कुछ शब्द): कल, आज, परसों, अब, तब, क्षण, पल, घड़ी, मिनट, घंटा, पहर, दिन, सप्ताह, पखवाड़ा, महीना, ऋतु, वर्ष, दशक, शताब्दी, युग, भोर, सुबह, दोपहर, साँझ, शाम, रात, वेला, अवधि, काल, मुहूर्त।
बारह घंटे।
पद की पंक्ति है — “चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥” और पुस्तक ने पृष्ठ 97 पर ‘पहर’ का अर्थ भी दे दिया है — तीन घंटे का एक पहर।
4 पहर = 4 × 3 घंटे
= 12 घंटे
सुबह छह बजे।
गाय चराने में लगा समय = 4 पहर = 12 घंटे
निकलने का समय = शाम 6 बजे − 12 घंटे
= सुबह 6 बजे
लगभग सुबह 6 बजे।
पुस्तक ने ख़ुद बता दिया है कि दो पहर पूरे होने पर 12 बजते हैं। तो उलटी गिनती कीजिए —
पहले पहर का प्रारंभ = 12 बजे − 6 घंटे
= सुबह 6 बजे
हम सब विशेष हैं — पृष्ठ 103 और 104पाठ से आगे
हम सभी में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हमें सबसे विशेष और सबसे भिन्न बनाता है। नीचे दिए गए व्यक्तियों की विशेष क्षमताएँ क्या हैं, विचार कीजिए और लिखिए—
आपकी ____________
आपके किसी परिजन की ____________
आपके शिक्षक की ____________
आपके मित्र की ____________
(अपने अनुभव से लिखिए) —
- आपकी — मैं जो एक बार सुन लेती हूँ, वह मुझे याद रह जाता है।
- आपके किसी परिजन की — मेरी दादी को बहुत से लोकगीत और कहावतें ज़बानी याद हैं।
- आपके शिक्षक की — हमारे गणित के शिक्षक कठिन सवाल को रोज़ की चीज़ों से जोड़कर आसान बना देते हैं।
- आपके मित्र की — मेरा मित्र बहुत सुंदर चित्र बनाता है और उदास साथियों को हँसा देता है।
- एक सहपाठी पढ़ना जानता है और उसे एक पाठ समझ में नहीं आ रहा है।
- एक सहपाठी को पढ़ना अच्छा लगता है और वह देख नहीं सकता।
- एक सहपाठी बहुत जल्दी-जल्दी बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है।
- एक सहपाठी बहुत अटक-अटक कर बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है।
- एक सहपाठी को चलने में कठिनाई है और वह सबके साथ दौड़ना चाहता है।
- एक सहपाठी प्रतिदिन विद्यालय आता है और उसे सुनने में कठिनाई है।
उत्तर:
- साथ बैठकर पाठ छोटे हिस्सों में पढ़ूँगा और कठिन शब्द समझाऊँगा।
- पाठ पढ़कर सुनाऊँगा या रिकॉर्ड करके दूँगा; ब्रेल-पुस्तक दिलाने में मदद करूँगा।
- हर वाक्य के बाद रुककर साँस लेने और धीरे बोलने का अभ्यास कराऊँगा।
- धैर्य से सुनूँगा, बीच में टोकूँगा नहीं, और भाषण से पहले उसके साथ अभ्यास करूँगा।
- खेल के नियम ऐसे बनाएँगे कि वह भी साथ खेल सके — जैसे जोड़ी वाली दौड़।
- उसके सामने खड़े होकर साफ़ और धीरे बोलूँगा, ज़रूरी बातें लिखकर दूँगा।
आज की पहेली — पृष्ठ 104पाठ से आगे
भरी हुई पहेली (मोटे अक्षर पुस्तक में दिए थे) —
| खो | द | म | क्ख | न | ल |
| या | ही | ला | प | छा | स्सी |
| मि | ठा | ई | नी | छ | |
| घी | श | र | ब | त | |
| आ | इ | स | क्री | म |
बाएँ से दाएँ: मक्खन, मिठाई, घी, शरबत, आइसक्रीम।
ऊपर से नीचे: खोया, दही, मलाई, पनीर, छाछ, लस्सी।
खोजबीन के लिए — पृष्ठ 104पाठ से आगे
उत्तर: सूरदास की सबसे प्रसिद्ध रचना सूरसागर है; सूर-सारावली और साहित्य-लहरी भी उनकी रचनाएँ मानी जाती हैं। पढ़ने के लिए उनके कुछ प्रसिद्ध पद —
- मैया, मोहि दाऊ बहुत खिझायो
- मैया, कबहिं बढ़ैगी चोटी
- सोभित कर नवनीत लिए
- खेलन में को काको गुसैयाँ
Chapter 9 of 13 – Hindi
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NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 9 Maiya Main Nahin Makhan Khayo – Overview
| Class | Class 6 |
| Subject | Hindi |
| Chapter | 9 – Maiya Main Nahin Makhan Khayo |
| Session | 2027 |
| Format | Full answers on this page + PDF |
NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 9 – FAQs
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