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NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 9 Maiya Main Nahin Makhan Khayo (PDF) – 2027

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 9 Maiya Main Nahin Makhan Khayo – step-by-step answers to every exercise and in-text question of the chapter, as per the latest NCERT syllabus for 2027. Read them online or download the free question-answer PDF.

पाठ 9 मैया मैं नहिं माखन खायो महाकवि सूरदास का ब्रजभाषा में लिखा एक पद है। इसमें बाल-कृष्ण अपनी माँ यशोदा के सामने सफ़ाई देते हैं कि माखन उन्होंने नहीं खाया। नीचे पृष्ठ 96 से 104 तक के सभी प्रश्नों के उत्तर पुस्तक के शीर्षकों के क्रम में दिए गए हैं — हर कार्ड में पहले वह उत्तर है जो कॉपी में लिखना है, और उसके नीचे ‘विस्तार से समझिए’ में कारण और अतिरिक्त बातें।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 9 Maiya Main Nahin Makhan Khayo PDF

All the answers are on this page below. The PDF also explains every answer – why it is right and how to check it – so download it for revision.

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NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 9 Maiya Main Nahin Makhan Khayo – Questions and Answers

All questions of the chapter are answered below, in the order of the book – in-text questions, activities and the end-of-chapter exercises. Each answer is written the way you would write it in the exam.

मेरी समझ से — पृष्ठ 96पाठ से

पाठ से
प्र.1(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—
(1) मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? इसके लिए श्रीकृष्ण ने क्या तर्क दिया?
  • मुझे तुम पराया समझती हो।
  • मेरी माता, तुम बहुत भोली हो।
  • मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए।
  • मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?
उत्तर

सही उत्तर: मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं? ★

कारण — कृष्ण कहते हैं, “मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।” यानी मेरी बाँहें छोटी हैं, ऊँचे टँगे छींके तक मेरा हाथ पहुँच ही नहीं सकता, तो माखन कैसे खाता?

प्र.2(2) श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे?
  • गाय चरा रहे थे।
  • माखन खा रहे थे।
  • मधुबन में भटक रहे थे।
  • मित्रों के संग खेल रहे थे।
उत्तर

सही उत्तर: गाय चरा रहे थे। ★

कारण — कृष्ण बताते हैं, “भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥” यानी सुबह से साँझ तक वे गायों के साथ वन में थे।

प्र.3(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

(1) मैंने ‘मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?’ चुना, क्योंकि प्रश्न ‘कैसे’ पूछ रहा है और कृष्ण यही तर्क देते हैं — “मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।” बाक़ी विकल्प तर्क नहीं, शिकायत या रूठना हैं।

(2) मैंने ‘गाय चरा रहे थे’ चुना, क्योंकि कृष्ण कहते हैं कि भोर होते ही उन्हें गायों के पीछे मधुबन भेज दिया गया और वे साँझ को घर लौटे।

मिलकर करें मिलान — पृष्ठ 96 और 97पाठ से

पाठ सेशब्द-मिलान
प्र.1पाठ में से चुनकर यहाँ कुछ शब्द दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
शब्दअर्थ या संदर्भ
1. जसोदा1. समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर होता है। एक दिवस में आठ पहर होते हैं)।
2. पहर2. एक वट वृक्ष (मान्यता है कि श्रीकृष्ण जब गाय चराया करते थे, तब वे इसी वृक्ष के ऊपर चढ़कर वंशी की ध्वनि से गायों को पुकारकर उन्हें एकत्रित करते।)
3. लकुटि कमरिया3. गोल पात्र के आकार का रस्सियों का बुना हुआ जाल जो छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता है ताकि उसमें रखी हुई खाने-पीने की चीज़ों (जैसे— दूध, दही आदि) को कुत्ते, बिल्ली आदि न पा सकें।
4. बंसीवट4. यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था।
5. मधुबन5. जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ।
6. छीको6. गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी।
7. माता7. मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन।
8. ग्वाल-बाल8. लाठी और छोटा कंबल, कमली (मान्यता है कि श्रीकृष्ण लकुटि-कमरिया लेकर गाय चराने जाया करते थे)।
उत्तर

सही मिलान: 1→4, 2→1, 3→8, 4→2, 5→7, 6→3, 7→5, 8→6

शब्दमिलेगाअर्थ या संदर्भ
1. जसोदा→ 4यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था।
2. पहर→ 1समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर; एक दिवस में आठ पहर)।
3. लकुटि कमरिया→ 8लाठी और छोटा कंबल, कमली।
4. बंसीवट→ 2एक वट वृक्ष, जिस पर चढ़कर कृष्ण वंशी बजाकर गायों को बुलाते थे।
5. मधुबन→ 7मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन।
6. छीको→ 3रस्सियों का बुना हुआ गोल जाल, जो छत से लटकाया जाता है।
7. माता→ 5जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ।
8. ग्वाल-बाल→ 6गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी।

पंक्तियों पर चर्चा — पृष्ठ 97पाठ से

पाठ सेभावार्थ
प्र.1(क) “भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो”
उत्तर

शब्दार्थ — भोर = सुबह; भयो = हुई; गैयन के पाछे = गायों के पीछे; मोहि = मुझे; पठायो = भेज दिया।

अर्थ — कृष्ण माँ से कहते हैं, “सुबह होते ही तुमने मुझे गायों के पीछे-पीछे मधुबन भेज दिया था।” यानी वे दिन भर घर पर थे ही नहीं, तो माखन खाने का अवसर उन्हें कहाँ मिला?

प्र.2(ख) “सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो”
उत्तर

शब्दार्थ — बिहँसि = मुसकाकर, हँसकर; जसोदा = यशोदा; लै = लेकर; उर = छाती; कंठ = गला।

अर्थ — सूरदास कहते हैं कि कृष्ण की भोली, रूठी हुई सफ़ाई सुनकर माँ यशोदा हँस पड़ीं और उन्होंने कृष्ण को छाती और गले से लगा लिया। माँ का गुस्सा प्यार में बदल गया।

सोच-विचार के लिए — पृष्ठ 98पाठ से

पाठ सेलेखन
प्र.1(क) पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है?
उत्तर

उत्तर: श्रीकृष्ण ने अपने बारे में बताया कि —

  1. उन्होंने माखन नहीं खाया।
  2. भोर होते ही उन्हें गायों के पीछे मधुबन भेज दिया गया था।
  3. वे चार पहर बंसीवट पर भटकते रहे और साँझ होने पर घर लौटे।
  4. वे छोटे बालक हैं, उनकी बाँहें छोटी हैं, इसलिए ऊँचे छींके तक नहीं पहुँच सकते।
  5. ग्वाल-बाल उनसे बैर रखते हैं; उन्होंने ज़बरदस्ती उनके मुँह पर माखन लपेट दिया।
प्र.2(ख) यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया?
उत्तर

उत्तर: कृष्ण की भोली-भाली सफ़ाई और रूठकर लाठी-कंबल लौटाने की बात सुनकर यशोदा का गुस्सा उतर गया। नन्हे बेटे की चतुराई पर उन्हें हँसी आ गई, और “जानि परायो जायो” (मुझे पराया समझ लिया) सुनकर उनका मन भर आया। वह पराया नहीं, उनका अपना प्यारा बेटा है — यही जताने के लिए उन्होंने हँसकर उसे गले से लगा लिया।

कविता की रचना — पृष्ठ 98पाठ से

पाठ सेकाव्य-शिल्प
प्र.1(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस पद की अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम भी दिया है आदि।
उत्तर

पद की विशेषताएँ —

  1. हर पंक्ति के अंत में तुक है — खायो, पठायो, आयो, पायो।
  2. अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम ‘सूरदास’ दिया है।
  3. भाषा ब्रजभाषा है — पाछे, भोरी, कछु, नहिं, मोहि।
  4. पूरा पद कृष्ण की माँ से बातचीत जैसा है।
  5. बालक कृष्ण चतुराई से तर्क देते हैं।
  6. अंत माँ के प्यार से होता है — यशोदा हँसकर गले लगा लेती हैं।
  7. ‘भोर भयो’, ‘बालक बहियन’ जैसी ध्वनियों से लय बनती है; पद गाया जा सकता है।
प्र.2(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर

नमूना उत्तर (कक्षा में प्रस्तुति): “हमारे समूह ने पद में ये विशेषताएँ पाईं — (1) हर पंक्ति के अंत में तुक है: खायो, पठायो, आयो, पायो; (2) अंतिम पंक्ति में कवि का नाम ‘सूरदास’ है; (3) भाषा ब्रजभाषा है — ‘पाछे’, ‘भोरी’; (4) पूरा पद कृष्ण की माँ से बातचीत जैसा है; (5) अंत में माँ का गले लगाना पद को प्यार से भर देता है। धन्यवाद!”

अनुमान या कल्पना से — पृष्ठ 98पाठ से

पाठ सेकल्पना
प्र.1(क) श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे?
उत्तर

उत्तर: ग्वाल-बालों ने शिकायत कर दी थी कि कृष्ण ने माखन चुराकर खाया, और माँ यशोदा ने उनकी बात मान ली — “तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।” कृष्ण डाँट से बचना चाहते थे और माँ का विश्वास फिर से जीतना चाहते थे। इसीलिए वे तर्क दे रहे होंगे — मैं दिन भर वन में था, मेरे हाथ छोटे हैं, और ग्वाल-बाल मुझसे बैर रखते हैं।

प्र.2(ख) जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा?
उत्तर

“यशोदा के गले लगते ही कृष्ण का रूठना ख़त्म हो गया और उन्होंने फिर से लाठी-कंबल थाम लिया। माँ ने आँचल से उनका माखन लगा मुँह पोंछा और फिर हँस पड़ीं। उन्होंने प्यार से कटोरी भर माखन-मिश्री खिलाई और कहा, ‘चोरी मत किया कर, माँग लिया कर।’ ग्वाल-बाल यह देखकर चुपचाप खिसक गए।”

शब्दों के रूप — पृष्ठ 98 और 99पाठ से

पाठ सेशब्दों की बात
प्र.1(क) “भोर भयो गैयन के पाछे” — इस पंक्ति में ‘पाछे’ शब्द आया है। इसके लिए ‘पीछे’ शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए। — परे, छोटो, बिधि, भोरी, कछु, लै, नहिं
उत्तर

उत्तर:

पद का शब्द (ब्रजभाषा)हम ऐसे बोलते-लिखते हैं
परेपड़े
छोटोछोटा
बिधिविधि (तरीक़ा, ढंग)
भोरीभोली
कछुकुछ
लैले (लेकर)
नहिंनहीं
प्र.2(ख) पद में से कुछ शब्द चुनकर नीचे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और स्तंभ 2 में उनके अर्थ दिए गए हैं। शब्दों का उनके सही अर्थों से मिलान कीजिए—
स्तंभ 1स्तंभ 2
1. उपजि1. मुसकाई, हँसी
2. जानि2. उपजना, उत्पन्न होना
3. जायो3. जानकर, समझकर
4. जिय4. विश्वास किया, सच माना
5. पठायो5. बाँह, हाथ, भुजा
6. पतियायो6. प्रकार, भाँति, रीति
7. बहियन7. मन, जी
8. बिधि8. जन्मा
9. बिहँसि9. मला, लगाया, पोता
10. भटक्यो10. इधर-उधर घूमा या भटका
11. लपटायो11. भेज दिया
उत्तर

सही मिलान: 1→2, 2→3, 3→8, 4→7, 5→11, 6→4, 7→5, 8→6, 9→1, 10→10, 11→9

स्तंभ 1मिलेगास्तंभ 2
1. उपजि→ 2उपजना, उत्पन्न होना
2. जानि→ 3जानकर, समझकर
3. जायो→ 8जन्मा
4. जिय→ 7मन, जी
5. पठायो→ 11भेज दिया
6. पतियायो→ 4विश्वास किया, सच माना
7. बहियन→ 5बाँह, हाथ, भुजा
8. बिधि→ 6प्रकार, भाँति, रीति
9. बिहँसि→ 1मुसकाई, हँसी
10. भटक्यो→ 10इधर-उधर घूमा या भटका
11. लपटायो→ 9मला, लगाया, पोता

वर्ण-परिवर्तन — पृष्ठ 100पाठ से

पाठ सेशब्दों की बात
प्र.1“तू माता मन की अति भोरी” — ‘भोरी’ का अर्थ है ‘भोली’। यहाँ ‘ल’ और ‘र’ वर्ण परस्पर बदल गए हैं। आपने ध्यान दिया होगा कि इस पद में कुछ और शब्दों में भी ‘ल’ या ‘ड़’ और ‘र’ में वर्ण-परिवर्तन हुआ है। ऐसे शब्द चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

उत्तर: ‘भोरी’ के अलावा पद में ऐसे शब्द हैं — परे (पड़े; ‘ड़’ की जगह ‘र’) और कमरिया (कमली/कमलिया; ‘ल’ की जगह ‘र’)।

पद का शब्दआज का रूपकौन-सा वर्ण बदलापद की पंक्ति
भोरीभोलील → र“तू माता मन की अति भोरी”
परेपड़ेड़ → र“साँझ परे घर आयो” तथा “ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं”
कमरियाकमली (छोटा कंबल)ल → र“ये ले अपनी लकुटि कमरिया”

पंक्ति से पंक्ति — पृष्ठ 100पाठ से

पाठ सेभावार्थ
प्र.1नीचे स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गयी हैं और स्तंभ 2 में उनके भावार्थ दिए गए हैं। रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए।
स्तंभ 1स्तंभ 2
1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।1. मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?
2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो।2. तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया।
3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।3. माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो।
4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो।4. सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया।
5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।5. चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया।
6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो।6. ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया।
उत्तर

सही मिलान: 1→4, 2→5, 3→1, 4→6, 5→3, 6→2

स्तंभ 1 — पद की पंक्तिमिलेगास्तंभ 2 — भावार्थ
1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।→ 4सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया।
2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो।→ 5चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया।
3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।→ 1मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?
4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो।→ 6ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया।
5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।→ 3माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो।
6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो।→ 2तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया।

आपकी बात — पृष्ठ 101पाठ से आगे

पाठ से आगेअपनी बात
प्र.1“मैया मैं नहिं माखन खायो” — यहाँ श्रीकृष्ण अपनी माँ के सामने सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। कभी-कभी हमें दूसरों के सामने सिद्ध करना पड़ जाता है कि यह कार्य हमने नहीं किया। क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? कब? किसके सामने? आपने अपनी बात सिद्ध करने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? उस घटना के बारे में बताइए।
उत्तर

“हाँ, पिछले वर्ष हमारी कक्षा की खिड़की का काँच टूट गया और दो साथियों ने कहा कि गेंद मैंने मारी थी। मुझे कक्षा-शिक्षिका के सामने सिद्ध करना पड़ा कि काँच मैंने नहीं तोड़ा। मैंने दो तर्क दिए — पहला, उस समय मैं पुस्तकालय में किताब जमा करा रहा था, जो रजिस्टर में लिखा था; दूसरा, उस दिन मेरे पास गेंद-बल्ला था ही नहीं। शिक्षिका ने रजिस्टर देखा और मेरी बात मान ली।”

घर की वस्तुएँ — पृष्ठ 101 और 102पाठ से आगे

पाठ से आगेचित्र-पहचान
प्र.1“मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।” — ‘छीका’ घर की एक ऐसी वस्तु है जिसे सैकड़ों-वर्ष से भारत में उपयोग में लाया जा रहा है। नीचे कुछ और घरेलू वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। इन्हें आपके घर में क्या कहते हैं? चित्रों के नीचे लिखिए। यदि किसी चित्र को पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
Figure
पृष्ठ 101–102 के पंद्रह चित्र — हर चित्र के नीचे बनी रेखा पर उसका नाम लिखिए।
उत्तर

उत्तर: चित्रों के प्रचलित नाम (पहले आठ पृष्ठ 101 पर, बाक़ी सात पृष्ठ 102 पर) — आपके घर में जो नाम बोला जाता है, वही लिखिए।

क्रमचित्र में क्या हैप्रचलित नाम
1पीतल का चौड़े मुँह वाला घड़ाघड़ा / गगरी (पीतल की)
2लोहे की भारी, कोयले वाली इस्तरीइस्तरी (कोयले वाली)
3लकड़ी की नीची चौकोर चौकीचौकी / पटरा
4हाथ से चलने वाली मशीनसिलाई मशीन
5बुनी हुई लकड़ी की चारपाईचारपाई / खाट
6ढक्कन वाला चीनी-मिट्टी का बर्तनमर्तबान / बरनी
7बाँस या सरकंडे का बुना चौड़ा पात्रसूप
8पत्थर की सिल और उस पर लोढ़ासिल-बट्टा
9दो गोल पाटों वाला पत्थर, ऊपर मूठचक्की
10रंगीन हाथ का पंखाहाथ-पंखा
11लकड़ी का लंबा डंडा, नीचे पंखुड़ियों जैसा सिरामथानी
12छेदों वाली गोल धातु की छलनीछलनी
13रंगीन, ढक्कन वाली बुनी टोकरीढक्कन वाली टोकरी / डलिया
14छोटा गहरा पात्र और मोटा डंडाखरल / इमामदस्ता
15दो खंभों से बँधी मथानी और नीचे मटकीबिलोना (रस्सी वाली मथानी)
प्र.2आप जानते ही हैं कि श्रीकृष्ण को मक्खन बहुत पसंद था। दूध से दही, मक्खन बनाया जाता है और मक्खन से घी बनाया जाता है। नीचे दूध से घी बनाने की प्रक्रिया संबंधी कुछ चित्र दिए गए हैं। अपने परिवार के सदस्यों, शिक्षकों या इंटरनेट आदि की सहायता से दूध से घी बनाने की प्रक्रिया लिखिए।
Figure
पृष्ठ 102 — दूध से घी बनने तक के नौ चित्र, तीरों के क्रम में।
उत्तर

दूध से घी बनाने की प्रक्रिया —

  1. गाय का ताज़ा दूध दुहा जाता है।
  2. दूध को उबालकर गुनगुना होने तक ठंडा करते हैं।
  3. उसमें थोड़ा दही (जामन) मिलाकर रात भर रखते हैं — दही जम जाता है।
  4. दही को मथानी से मथते हैं — ऊपर मक्खन आ जाता है, नीचे छाछ बचती है।
  5. मक्खन निकालकर दूसरे बर्तन में डालते हैं और धीमी आँच पर गरम करते हैं।
  6. ऊपर का साफ़ सुनहरा तरल छानकर बरनी में भर लेते हैं — यही घी है।

समय का माप — पृष्ठ 103पाठ से आगे

पाठ से आगेगणना
प्र.1(क) ‘पहर’ और ‘साँझ’ शब्दों का प्रयोग समय बताने के लिए किया जाता है। समय बताने के लिए और कौन-कौन से शब्दों का प्रयोग किया जाता है? अपने समूह में मिलकर सूची बनाइए और कक्षा में साझा कीजिए। (संकेत— कल, ऋतु, वर्ष, अब, पखवाड़ा, दशक, वेला, अवधि आदि)
उत्तर

उत्तर (समय बताने वाले कुछ शब्द): कल, आज, परसों, अब, तब, क्षण, पल, घड़ी, मिनट, घंटा, पहर, दिन, सप्ताह, पखवाड़ा, महीना, ऋतु, वर्ष, दशक, शताब्दी, युग, भोर, सुबह, दोपहर, साँझ, शाम, रात, वेला, अवधि, काल, मुहूर्त।

प्र.2(ख) श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे?
उत्तर

बारह घंटे।

पद की पंक्ति है — “चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥” और पुस्तक ने पृष्ठ 97 पर ‘पहर’ का अर्थ भी दे दिया है — तीन घंटे का एक पहर।

1 पहर = 3 घंटे
4 पहर = 4 × 3 घंटे
= 12 घंटे
प्र.3(ग) मान लीजिए वे शाम को छह बजे गाय चराकर लौटे। वे सुबह कितने बजे गाय चराने के लिए घर से निकले होंगे?
उत्तर

सुबह छह बजे।

घर लौटने का समय = शाम 6 बजे
गाय चराने में लगा समय = 4 पहर = 12 घंटे
निकलने का समय = शाम 6 बजे − 12 घंटे
= सुबह 6 बजे
प्र.4(घ) ‘दोपहर’ का अर्थ है ‘दो पहर’ का समय। जब दूसरे पहर की समाप्ति होती है और तीसरे पहर का प्रारंभ होता है। यह लगभग 12 बजे का समय होता है, जब सूर्य सिर पर आ जाता है। बताइए दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग कितने बजे होगा?
उत्तर

लगभग सुबह 6 बजे।

पुस्तक ने ख़ुद बता दिया है कि दो पहर पूरे होने पर 12 बजते हैं। तो उलटी गिनती कीजिए —

दो पहर = 2 × 3 घंटे = 6 घंटे
पहले पहर का प्रारंभ = 12 बजे − 6 घंटे
= सुबह 6 बजे

हम सब विशेष हैं — पृष्ठ 103 और 104पाठ से आगे

पाठ से आगेअपनी बात
प्र.1(क) महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे। उनकी विशेष क्षमता थी उनकी कल्पना शक्ति और कविता रचने की कुशलता।
हम सभी में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हमें सबसे विशेष और सबसे भिन्न बनाता है। नीचे दिए गए व्यक्तियों की विशेष क्षमताएँ क्या हैं, विचार कीजिए और लिखिए—
आपकी ____________
आपके किसी परिजन की ____________
आपके शिक्षक की ____________
आपके मित्र की ____________
उत्तर

(अपने अनुभव से लिखिए) —

  • आपकी — मैं जो एक बार सुन लेती हूँ, वह मुझे याद रह जाता है।
  • आपके किसी परिजन की — मेरी दादी को बहुत से लोकगीत और कहावतें ज़बानी याद हैं।
  • आपके शिक्षक की — हमारे गणित के शिक्षक कठिन सवाल को रोज़ की चीज़ों से जोड़कर आसान बना देते हैं।
  • आपके मित्र की — मेरा मित्र बहुत सुंदर चित्र बनाता है और उदास साथियों को हँसा देता है।
प्र.2(ख) एक विशेष क्षमता ऐसी भी है जो हम सबके पास होती है। वह क्षमता है सबकी सहायता करना, सबके भले के लिए सोचना। तो बताइए, इस क्षमता का उपयोग करके आप इनकी सहायता कैसे करेंगे—
  • एक सहपाठी पढ़ना जानता है और उसे एक पाठ समझ में नहीं आ रहा है।
  • एक सहपाठी को पढ़ना अच्छा लगता है और वह देख नहीं सकता।
  • एक सहपाठी बहुत जल्दी-जल्दी बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है।
  • एक सहपाठी बहुत अटक-अटक कर बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है।
  • एक सहपाठी को चलने में कठिनाई है और वह सबके साथ दौड़ना चाहता है।
  • एक सहपाठी प्रतिदिन विद्यालय आता है और उसे सुनने में कठिनाई है।
उत्तर

उत्तर:

  1. साथ बैठकर पाठ छोटे हिस्सों में पढ़ूँगा और कठिन शब्द समझाऊँगा।
  2. पाठ पढ़कर सुनाऊँगा या रिकॉर्ड करके दूँगा; ब्रेल-पुस्तक दिलाने में मदद करूँगा।
  3. हर वाक्य के बाद रुककर साँस लेने और धीरे बोलने का अभ्यास कराऊँगा।
  4. धैर्य से सुनूँगा, बीच में टोकूँगा नहीं, और भाषण से पहले उसके साथ अभ्यास करूँगा।
  5. खेल के नियम ऐसे बनाएँगे कि वह भी साथ खेल सके — जैसे जोड़ी वाली दौड़।
  6. उसके सामने खड़े होकर साफ़ और धीरे बोलूँगा, ज़रूरी बातें लिखकर दूँगा।

आज की पहेली — पृष्ठ 104पाठ से आगे

पाठ से आगेपहेली
प्र.1दूध से मक्खन ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ बनाया जाता है। नीचे दूध से बनने वाली कुछ वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। दी गई शब्द-पहेली में उनके नाम के पहले अक्षर दे दिए गए हैं। नाम पूरे कीजिए—
Figure
पृष्ठ 104 की शब्द-पहेली — ऊपर ग्यारह चित्र, नीचे खाने; गहरे रंग के खाने भरने नहीं हैं।
उत्तर

भरी हुई पहेली (मोटे अक्षर पुस्तक में दिए थे) —

खोदमक्खनल
याहीलापछास्सी
मिठाईनीछ
घीशरबत
आइसक्रीम

बाएँ से दाएँ: मक्खन, मिठाई, घी, शरबत, आइसक्रीम।
ऊपर से नीचे: खोया, दही, मलाई, पनीर, छाछ, लस्सी।

खोजबीन के लिए — पृष्ठ 104पाठ से आगे

पाठ से आगेपरियोजना
प्र.1सूरदास द्वारा रचित कुछ अन्य रचनाएँ खोजें व पढ़ें।
उत्तर

उत्तर: सूरदास की सबसे प्रसिद्ध रचना सूरसागर है; सूर-सारावली और साहित्य-लहरी भी उनकी रचनाएँ मानी जाती हैं। पढ़ने के लिए उनके कुछ प्रसिद्ध पद —

  • मैया, मोहि दाऊ बहुत खिझायो
  • मैया, कबहिं बढ़ैगी चोटी
  • सोभित कर नवनीत लिए
  • खेलन में को काको गुसैयाँ

Chapter 9 of 13 – Hindi

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NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 9 Maiya Main Nahin Makhan Khayo – Overview

ClassClass 6
SubjectHindi
Chapter9 – Maiya Main Nahin Makhan Khayo
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