NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 12 घर की याद provide clear, step-by-step answers to every exercise and in-text question from the chapter घर की याद of the NCERT textbook गंगा. Prepared by subject experts as per the latest NCERT (CBSE) syllabus for 2026-27, these NCERT Solutions for Class 9 Hindi help you understand each concept, write exam-ready answers, and check your own solutions. You can read them online below or download the free Class 9 Hindi Chapter 12 question-answer PDF.
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 12 घर की याद
- Class: Class 9
- Subject: Hindi
- Chapter: Chapter 12 – घर की याद
- Textbook: गंगा (NCERT)
- Study material: NCERT Solutions – questions with answers, free PDF
These solutions answer all the exercise questions of Chapter 12 घर की याद — including the in-text questions, short-answer and long-answer questions, and activities — with complete explanations so you can follow the method, not just the final answer. Read the full solutions below.
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Questions Covered in This Chapter
These NCERT Solutions answer all 78 questions of this chapter. The questions solved are:
- “आज पानी गिर रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, / रात-भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है,” — इन पंक्तियों का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “अब सबेरा हो गया है, कब सबेरा हो गया है, / ठीक से मैंने न जाना, बहुत सोकर सिर्फ माना— / क्योंकि बादल की अँधेरी, है अभी तक भी घनेरी, / अभी तक चुपचाप है सब, रातवाली छाप है सब,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर, / बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है, / घर कि मुझसे दूर है जो, घर खुशी का पूर है जो, / घर कि घर में चार भाई, मायके में बहिन आई, / बहिन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर!” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “आज का दिन दिन नहीं है, क्योंकि इसका छिन नहीं है, / एक छिन सौ बरस है रे, हाय कैसा तरस है रे, / घर कि घर में सब जुड़े हैं, सब कि इतने कब जुड़े हैं, / चार भाई चार बहिनें, भुजा भाई प्यार बहिनें,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “और माँ बिन-पढ़ी मेरी, दुख में वह गढ़ी मेरी, / माँ कि जिसकी गोद में सिर, रख लिया तो दुख नहीं फिर, / माँ कि जिसकी स्नेह-धारा का यहाँ तक भी पसारा, / उसे लिखना नहीं आता, जो कि उसका पत्र पाता।” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “और पानी गिर रहा है, घर चतुर्दिक् घिर रहा है, / पिताजी भोले बहादुर, वज्र-भुज नवनीत-सा उर, / पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा, / जो अभी भी दौड़ जाएँ, जो अभी भी खिलखिलाएँ,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “मौत के आगे न हिचकें, शेर के आगे न बिचकें, / बोल में बादल गरजता, काम में झंझा लरजता,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “आज गीता-पाठ करके, दंड दो सौ साठ करके, / खूब मुगदर हिला लेकर, मूठ उनकी मिला लेकर, / जब कि नीचे आए होंगे, नैन जल से छाए होंगे, / हाय, पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “चार भाई चार बहिनें, भुजा भाई प्यार बहिनें, / खेलते या खड़े होंगे, नजर उनको पड़े होंगे।” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा, / रो पड़े होंगे बराबर, पाँचवें का नाम लेकर,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “पाँचवाँ मैं हूँ अभागा, जिसे सोने पर सुहागा, / पिताजी कहते रहे हैं, प्यार में बहते रहे हैं, / आज उनके स्वर्ण बेटे, लगे होंगे उन्हें हेटे, / क्योंकि मैं उन पर सुहागा बँधा बैठा हूँ अभागा,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “और माँ ने कहा होगा, दुख कितना बहा होगा / आँख में किसलिए पानी, वहाँ अच्छा है भवानी,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “वह तुम्हारा मन समझकर, और अपनापन समझकर, / गया है सो ठीक ही है, यह तुम्हारी लीक ही है,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता, / इस तरह होओ न कच्चे, रो पड़ेंगे और बच्चे,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “पिताजी ने कहा होगा, हाय, कितना सहा होगा, / कहाँ, मैं रोता कहाँ हूँ, धीर मैं खोता, कहाँ हूँ,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “गिर रहा है आज पानी, याद आता है भवानी, / उसे थी बरसात प्यारी, रात दिन की झड़ी झारी,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह, / बड़े बाड़े में कि जाता, बीज लौकी का लगाता,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “तुझे बतलाता कि बेला ने फलानी फूल झेला, / तू कि उसके साथ जाती, आज इससे याद आती,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “मैं न रोऊँगा — कहा होगा, और फिर पानी बहा होगा, / दृश्य उसके बाद का रे, पाँचवें की याद का रे,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “भाई पागल, बहिन पागल, और अम्मा ठीक बादल, / और भौजी और सरला, सहज पानी सहज तरला, / शर्म से रो भी न पाएँ, खूब भीतर छटपटाएँ, / आज ऐसा कुछ हुआ होगा, आज सबका मन चुआ होगा।” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “अभी पानी थम गया है, मन निहायत नम गया है, / एक-से बादल जमे हैं, गगन-भर फैले रमे हैं,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “ढेर है उनका, न फाँकें, जो कि किरनें झुकें-झाँकें, / लग रहे हैं वे मुझे यों, माँ कि आँगन लीप दे ज्यों;” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “गगन-आँगन की लुनाई दिशा के मन में समाई / दश-दिशा चुपचाप है रे, स्वस्थ की लय छाप है रे” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “झाड़ आँखें बंद करके साँस सुस्थिर मंद करके, / हिले बिन चुपके खड़े हैं, क्षितिज पर जैसे जड़े हैं” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “एक पंछी बोलता है, घाव उर के खोलता है, / आदमी के उर बिचारे, किसलिए इतनी तृषा रे,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “तू जरा-सा दुख कितना, सह सकेगा क्या कि इतना, / और इस पर बस नहीं है, बस बिना कुछ रस नहीं है,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “हवा आई उड़ चला तू, लहर आई मुड़ चला तू, / लगा झटका टूट बैठा, गिरा नीचे फूट बैठा,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “तू कि प्रिय से दूर होकर बह चला रे पूर होकर, / दुख भर क्या पास तेरे, अश्रु सिंचित हास तेरे!” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “पिताजी का वेश मुझको, दे रहा है क्लेश मुझको, / देह एक पहाड़ जैसे, मन कि बड़ का झाड़ जैसे,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए, / एक हल्की चोट लग ले, दूध की नद्दी उमग ले,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “एक टहनी कम न हो ले, कम कहाँ कि ख़म न हो ले, / ध्यान कितना फिक्र कितनी, डाल जितनी जड़ें उतनी!” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “इस तरह का हाल उनका, इस तरह का ख्याल उनका, / हवा, उनको धीर देना, यह नहीं जी चीर देना,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन, / तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “मैं मजे में हूँ सही है, घर नहीं हूँ बस यही है, / किंतु यह बस बड़ा बस है, इसी बस से सब विरस है,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “किंतु उनसे यह न कहना, उन्हें देते धीर रहना, / उन्हें कहना लिख रहा हूँ, उन्हें कहना पढ़ रहा हूँ,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “काम करता हूँ कि कहना, नाम करता हूँ कि कहना, / चाहते हैं लोग, कहना, मत करो कुछ शोक, कहना,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “और कहना मस्त हूँ मैं, कातने में व्यस्त हूँ मैं, / वजन सत्तर सेर मेरा, और भोजन ढेर मेरा,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “कूदता हूँ, खेलता हूँ, दुख डटकर ठेलता हूँ, / और कहना मस्त हूँ मैं, यों न कहना अस्त हूँ मैं,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “हाय रे, ऐसा न कहना, है कि जो वैसा न कहना, / कह न देना जागता हूँ, आदमी से भागता हूँ,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “कह न देना मौन हूँ मैं, खुद न समझूँ कौन हूँ मैं, / देखना कुछ बक न देना, उन्हें कोई शक न देना,” — इनका सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन, / तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें।” — कविता के अंत में आई इन पंक्तियों का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं? 1. भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता कहाँ और क्यों लिखी? (क) विदेश से मित्र के लिए (ख) युद्धभूमि से जनता के लिए (ग) जेल से परिवार के लिए (घ) यात्रा से किसी संबंधी के लिए
- 2. लगातार बरसता पानी कवि के मन की किस भावना का परिचायक है? (क) उत्साह और आवेग (ख) भय और क्रोध (ग) साहस और उमंग (घ) चिंता और बेचैनी
- 3. कविता में माँ की कैसी छवि उभरती है? (क) कमजोर और निष्क्रिय (ख) स्नेहमयी और दृढ़ (ग) शिक्षित और अनुशासनप्रिय (घ) सरल और उदासीन
- 4. “वज्र-भुज नवनीत-सा उर” पंक्ति के माध्यम से पिता के व्यक्तित्व की कैसी छवि प्रस्तुत की गई है? (क) कर्मठ और सृजनशील (ख) साहसी और पराक्रमी (ग) दृढ़ और संवेदनशील (घ) प्रसन्नचित्त और सक्रिय
- 5. “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए” पंक्ति किस ओर संकेत करती है? (क) पिता की कठोरता (ख) पिता की भावुकता (ग) वर्षा की तीव्रता (घ) पिता की निर्बलता
- 6. “बहिन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर” पंक्ति में ‘परिताप’ शब्द से क्या संकेत मिलता है? (क) घर का समृद्ध होना (ख) घर की सजावट (ग) घर में दुख का वातावरण (घ) घर की शांति
- 7. “और कहना मस्त हूँ मैं” पंक्ति में कवि का ऐसा कहना किस बात की ओर संकेत करता है? (क) कवि अपने जीवन में बहुत खुश है। (ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है। (ग) घर के लोगों के प्रति उदासीन है। (घ) कवि प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत है।
- 8. इस कविता में किस बात को प्रमुखता से वर्णित किया गया है? (क) घर की शांति और सुरक्षा (ख) घर के सदस्यों के बीच का संबंध (ग) घर के निर्माण की प्रक्रिया (घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा
- नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए— 1. कविता में वर्णित पिता के व्यक्तित्व की उन विशेषताओं का वर्णन कीजिए जिनसे उनका बहुआयामी रूप सामने आता है।
- 2. “दुख डटकर ठेलता हूँ” यह कथन मनुष्य के संघर्षशील स्वभाव को उजागर करता है। कविता के आधार पर बताइए कि कठिन परिस्थितियों में कवि किस प्रकार धैर्य, साहस और त्याग का परिचय देता है?
- 3. कविता में बार-बार वर्षा का वर्णन कवि के भावों को किस प्रकार व्यक्त करता है?
- 4. कविता से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए और भाव स्पष्ट कीजिए जिनसे माँ की भावनात्मक मजबूती का परिचय मिलता है।
- 5. कविता का कौन-सा अंश आपको सबसे अधिक भावनात्मक और प्रभावी लगता है और क्यों?
- “गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर, / बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर” — उपर्युक्त पंक्तियों में रेखांकित शब्दों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। यहाँ शब्दों का चयन और संयोजन इस प्रकार किया गया है कि कविता में ध्वन्यात्मकता और नाद सौंदर्य की सृष्टि हुई है। … कविता में ऐसी अनेक विशेषताएँ हैं जो इसे जीवंत और प्रभावपूर्ण बनाती हैं। ऐसी कुछ विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है। कविता से ऐसी विशेषताओं वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए। — विशेषताएँ: स्मृति और दृश्य बिंब / लोकभाषा की सहजता / पंक्तियों का दोहराव / आलंकारिक प्रयोग / प्राकृतिक दृश्यों और भावों का संयोजन / संबोधनात्मकता
- ‘घर की याद’ कवि के भीतर उठते भावों की यात्रा है। कविता में प्रकृति के माध्यम से व्यक्त इस यात्रा के प्रमुख चरणों का वर्णन करें। (संकेत– पानी का गिरना, सबेरा होना)
- 1. कविता में चित्रित ‘घर’ एक भौतिक स्थान से बढ़कर भावनाओं और संबंधों के केंद्र के रूप में चित्रित हुआ है। वर्तमान में एकल परिवारों के बढ़ते चलन के संदर्भ में संयुक्त परिवार और एकल परिवार की तुलना कीजिए और कारण सहित लिखिए कि दोनों की कौन-कौन-सी बातें आपको पसंद हैं और कौन-कौन-सी नापसंद?
- 2. कविता में बार-बार पानी गिरने का वर्णन है। लगातार बारिश होती रहे तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में किस प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?
- 3. कविता में सावन के बादल का प्रयोग एक संचार माध्यम के रूप में किया गया है जिसके द्वारा कवि अपने परिवार तक संदेश भेज रहा है। कक्षा में संचार के नए-पुराने माध्यमों में अंतर बताते हुए चर्चा कीजिए और लिखिए।
- 4. भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कारावास में लिखी थी। अपने शिक्षक और पुस्तकालय की सहायता से ‘भारत का स्वतंत्रता संग्राम’ विषय पर लेख लिखिए।
- 1. कल्पना कीजिए कि कवि की माँ को पत्र लिखना आता है। कविता में वर्णित उनकी छवि और अनुमान के आधार पर लिखिए कि वे कवि के लिए पत्र में क्या-क्या लिखतीं?
- 2. कविता में माँ और पिताजी के बीच कवि के विषय में की जाने वाली बातचीत का वर्णन है। उनकी इस बातचीत को संवाद-लेखन के रूप में प्रस्तुत कीजिए।
- 3. इस कविता में कवि ने सावन के बादल को संदेशवाहक बनाया है। अगर आपको किसी प्राकृतिक उपादान के माध्यम से अपने घर, मित्र या किसी संबंधी व्यक्ति को कोई संदेश भेजना हो तो आप किसे चुनेंगे और क्यों?
- 1. “आज सबका मन चुआ होगा।” — उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द कवि की क्षेत्रीय/स्थानीय भाषा का शब्द है। कविता में स्थानीय भाषा के शब्दों का सहज प्रयोग हुआ है। कविता से कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। उनमें रेखांकित शब्दों का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए। • एक छिन सौ बरस है रे • तुझे बतलाता कि बेला / ने फलानी फूल झेला • और भौजी और सरला, सहज पानी सहज तरला • मन कि बड़ का झाड़ जैसे
- 2. नीचे दी गई कविता की पंक्तियों में आए शब्दों की व्याकरणिक पहचान लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है। — (क) “बहुत पानी गिर रहा है” • ‘पानी’ शब्द है — संज्ञा • ‘बहुत’ शब्द है — विशेषण • ‘गिर रहा है’ है — क्रिया
- (ख) “पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा” • ‘बुढ़ापा’ शब्द है — • ‘व्यापा’ शब्द है — • ‘जिनको’ शब्द है —
- (ग) “खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह” • ‘खुले’ शब्द है — • ‘वह’ शब्द है — • ‘बदन’ शब्द है — • ‘फिरता’ शब्द है —
- (घ) “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए” • ‘एक’ शब्द है — • ‘फूट जाए’ है — • ‘पत्ता’ शब्द है —
- (ङ) “हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन” • ‘सजीले’ शब्द है — • ‘मेरे’ शब्द है — • ‘सावन’ शब्द है —
- 1. कवि ने कविता में अपने परिवार का उल्लेख किया है। आप भी अपना एक परिवार-वृक्ष तैयार कीजिए और प्रत्येक सदस्य के व्यक्तित्व के बारे में कुछ पंक्तियाँ लिखिए।
- 2. कविता में प्रयुक्त ध्वनि आधारित शब्द (जैसे– झरा-झर, थर-थर, सर-सर) को पढ़कर एक छोटी-सी ऑडियो रिकॉर्डिंग या मौखिक पाठ तैयार कीजिए। बताइए कि ये शब्द कविता में कैसे वातावरण का निर्माण करते हैं?
- “घर कि घर में सब जुड़े हैं” — नीचे ‘घर’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है। … इनके अतिरिक्त यदि आप ‘घर’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
- • उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए। (वाक्य — “घर कि घर में सब जुड़े हैं”)
- • शिक्षक की सहायता से ऐसी किसी अन्य कविता अथवा कहानी के बारे में जानकारी एकत्रित कीजिए जिसमें घर, परिवार की याद जैसी भावनाएँ चित्रित हों। साथ ही पुस्तकालय अथवा इंटरनेट की सहायता से उस रचना को कक्षा में पढ़कर एक संक्षिप्त प्रस्तुति दीजिए।
- • ‘घर की याद’ कविता में कवि सावन के बादलों को दूत बनाकर अपने परिवार के पास संदेश ले जाने का आग्रह करता है। प्रकृति के उपादानों की कल्पना संदेशवाहक के रूप में करने के अनेक उदाहरण साहित्य में मिलते हैं। शिक्षक, पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता से ऐसी कुछ रचनाओं के बारे में पता लगाइए और बताइए कि इनमें प्रकृति के किन उपादानों को संदेशवाहक बनाया गया है?
- पाठ के अंत में ‘साथ-साथ पढ़ें’ के अंतर्गत रामनरेश त्रिपाठी की कविता ‘तब याद तुम्हारी आती है’ दी गई है। इस कविता का भाव-सौंदर्य और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- ‘घर की याद’ और ‘तब याद तुम्हारी आती है’ — दोनों कविताएँ ‘याद’ पर केंद्रित हैं। इन दोनों की तुलना कीजिए और बताइए कि दोनों में प्रकृति की भूमिका किस प्रकार अलग है।
Chapter at a Glance
- रचनाकार — भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म सन् 1913 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम) में हुआ था। साहित्य के साथ-साथ स्वाधीनता आंदोलन में जिन कवियों की सक्रिय भागीदारी थी, उनमें ये प्रमुख हैं। उनकी मुख्य रचनाएँ हैं — गीत-फ़रोश, खुशबू के शिलालेख, चकित है दुख, अँधेरी कविताएँ, बुनी हुई रस्सी, कवितांतर, शतदल, गांधी-पंचशती, त्रिकाल संध्या । कविता-संग्रह बुनी हुई रस्सी पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उन्होंने राष्ट्रभाषा प्रचार समिति में काम किया, सन् 1952–55 तक हैदराबाद से निकलने वाली साहित्यिक पत्रिका कल्पना का संपादन किया, सन् 1955–58 तक आकाशवाणी के हिंदी कार्यक्रमों से जुड़े रहे और संपूर्ण गांधी वाङ्मय का भी संपादन किया। सन् 1985 में उनका निधन हुआ।
- कविता कहाँ लिखी गई — पुस्तक स्वयं बताती है कि भवानीप्रसाद मिश्र ने सन् 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में सक्रिय भाग लिया, जिसके चलते ब्रिटिश सरकार ने उन्हें तीन वर्ष के कारावास का दंड दिया। इसी कारावास के दिनों में, जेल की कोठरी में बैठे-बैठे , उन्होंने ‘घर की याद’ लिखी। इसलिए यह कविता कल्पना से गढ़ा हुआ विरह-गीत नहीं, भोगे हुए क्षण का सीधा उतार है। कविता का ‘मैं’ स्वयं कवि है और ‘पाँचवाँ’ भी वही है — घर के आठ भाई-बहनों में पाँचवाँ, जो आज घर से दूर है।
- कथ्य — जेल में रात-भर पानी बरसता रहा है और उसी के साथ कवि का मन भी घिरता रहा है। सुबह हुई भी तो बादलों की अँधेरी के कारण पता नहीं चला। इसी बरसते पानी में कवि को घर तैरता हुआ दिखाई देने लगता है और उसकी स्मृति में परिजन एक-एक करके सम्मिलित होते चले जाते हैं — चार भाई, चार बहनें, माँ, पिताजी, भौजी, सरला। फिर कवि अनुमान करता है कि आज घर में क्या-क्या हुआ होगा : पिताजी गीता-पाठ और व्यायाम के बाद रो पड़े होंगे, माँ ने उन्हें ढाढ़स बँधाया होगा, भाई-बहन शर्म के मारे रो भी न पाए होंगे। अंत में कवि सावन के बादल को दूत बनाकर संदेश भेजता है — मेरे घरवालों से कहना कि मैं मज़े में हूँ, काम करता हूँ, कातता हूँ, खेलता हूँ; पर जेल के कष्ट भूलकर भी मत बताना, उन्हें कोई शक मत होने देना।
- काव्य-नायक और परिजन — कविता का सबसे उजला चित्र पिताजी का है — ‘भोले बहादुर’, जिनकी भुजाएँ वज्र -सी और हृदय नवनीत (ताज़ा मक्खन)-सा है; जिन्हें बुढ़ापा एक क्षण भी नहीं व्यापा; जो मौत के आगे नहीं हिचकते और शेर के आगे नहीं बिचकते; जो रोज़ गीता-पाठ करते हैं, दो सौ साठ दंड लगाते हैं, मुगदर हिलाते हैं — और फिर पाँचवें बेटे का नाम लेकर रो पड़ते हैं। माँ ‘बिन-पढ़ी’ है, ‘दुख में गढ़ी’ है; उसे लिखना नहीं आता, इसलिए उसका पत्र कभी नहीं आता — पर उसकी स्नेह-धारा जेल तक पसरी हुई है। और वही अनपढ़ माँ सबसे मजबूत वाक्य बोलती है — “पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता।”
- भाषा-शैली — यह भवानीप्रसाद मिश्र की अपनी पहचान वाली शैली है, जिसे उनके संग्रह के नाम पर ‘गीत-फ़रोश’ वाली बातचीत-शैली कहा जाता है — सहज खड़ी बोली , जिसमें कोई शास्त्रीय आडंबर नहीं, केवल बोलते हुए आदमी की आवाज़ है। बीच-बीच में कवि की क्षेत्रीय/स्थानीय बोली के शब्द बिना किसी झिझक के आ जाते हैं — छिन (क्षण), भौजी (भाभी), बड़ (बरगद), नद्दी (नदी), फलानी (अमुक), चुआ (टपका) — और उर्दू के रोज़मर्रा शब्द भी — निहायत, फिक्र, ख़याल, शक, मस्त, वजन । इसी घुली-मिली भाषा से कविता में घर-जैसा अपनापन आता है।
- शिल्प — पूरी कविता तुकांत युग्मों में चलती है — गिर/घिर, अँधेरी/घनेरी, बहादुर/उर, बुढ़ापा/व्यापा, अभागा/सुहागा, बेटे/हेटे — और हर पंक्ति की लंबाई लगभग बराबर है, इसलिए इसे गाया जा सकता है। पुस्तक ने स्वयं जिस अंश को ध्वन्यात्मकता और नाद सौंदर्य का उदाहरण बताया है, वह है — “गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर, बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर” । अलंकारों में अनुप्रास (‘बोल में बादल’), पुनरुक्ति प्रकाश (झरा-झर, थर-थर, सर-सर), उपमा (‘देह एक पहाड़ जैसे’, ‘मन कि बड़ का झाड़ जैसे’, ‘माँ कि आँगन लीप दे ज्यों’), रूपक (‘वज्र-भुज’), मानवीकरण (‘झाड़ आँखें बंद करके… हिले बिन चुपके खड़े हैं’), विरोधाभास (‘आज का दिन दिन नहीं है’) और अतिशयोक्ति (‘एक छिन सौ बरस है रे’) बार-बार मिलते हैं। ‘बस’ शब्द का “किंतु यह बस बड़ा बस है, इसी बस से सब विरस है” जैसा प्रयोग यमक-सा चमत्कार पैदा करता है।
- मूल संवेदना — कविता की ताकत अलंकार में नहीं, संयम में है। जेल में बंद आदमी अपने दुख का बखान नहीं करता — वह उसे छिपाने की कोशिश करता है, और यही कोशिश पाठक का गला भर देती है। ‘मैं मज़े में हूँ सही है, घर नहीं हूँ बस यही है’ — इतनी छोटी-सी बात में पूरा कारावास आ जाता है। कविता कहीं नारा नहीं लगाती, कहीं अंग्रेज़ों को गाली नहीं देती; वह केवल एक बेटे की याद है — और इसी कारण वह देश-प्रेम की सबसे मार्मिक कविताओं में गिनी जाती है। परिवार की स्मृति ही, पुस्तक के शब्दों में, इस कविता की केंद्रीय संवेदना है।
- साथ-साथ पढ़ें — ‘तब याद तुम्हारी आती है’ (रामनरेश त्रिपाठी) — पाठ के अंत में, पृष्ठ 206 पर, पूरक पठन के रूप में रामनरेश त्रिपाठी की छोटी-सी कविता दी गई है। इसमें कोई प्रश्न नहीं दिया गया; इसे केवल पढ़ने और साथ रखकर सोचने के लिए दिया गया है। इसकी दोनों अंतरों की टेक है — “हे जग के सिरजनहार प्रभो! तब याद तुम्हारी आती है।” सुबह चिड़ियों का गाना, कलियों का दरवाज़े खोलना, ठंडी हवा का मस्ती ढोकर लाना, रात में तारों की महफिल और चाँद का शान से उठना — प्रकृति के ये सुंदर क्षण कवि को सृष्टि के रचयिता की याद दिला देते हैं। दोनों कविताओं का ढाँचा एक है — प्रकृति का दृश्य → याद — पर भवानीप्रसाद मिश्र की याद घर और परिवार की है और रामनरेश त्रिपाठी की याद ईश्वर की; एक में प्रकृति दुख जगाती है, दूसरी में कृतज्ञता।
- अभ्यास क्या माँगता है — यह पाठ केवल अर्थ नहीं पूछता। मेरे उत्तर मेरे तर्क में आठ प्रश्नों में विकल्प चुनकर तर्क भी देना है; मेरी समझ मेरे विचार में पिता के बहुआयामी व्यक्तित्व, कवि के धैर्य-साहस-त्याग, वर्षा की भूमिका और माँ की भावनात्मक मजबूती पर पूरे उत्तर लिखने हैं; कविता का सौंदर्य में छह विशेषताओं के लिए कविता से पंक्तियाँ ढूँढ़नी हैं; कविता की संरचना में भावों की यात्रा के चरण बताने हैं; विषयों से संवाद में संयुक्त-एकल परिवार, बाढ़ की समस्याएँ, संचार के माध्यम और स्वतंत्रता संग्राम तक जाना है; सृजन में पत्र, संवाद-लेखन और कल्पना करनी है; और व्याकरण की बात में स्थानीय शब्दों के अर्थ तथा संज्ञा-सर्वनाम-विशेषण-क्रिया की पहचान का लंबा अभ्यास पूरा करना है।
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NCERT Solutions for Class 9 Hindi – All Chapters
There are more chapters to study besides घर की याद in Hindi. Here are the NCERT Solutions for all chapters of Class 9 Hindi.
- Chapter 1 दो बैलों की कथा
- Chapter 2 क्या लिखूँ?
- Chapter 3 संवादहीन
- Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं
- Chapter 5 आखिरी चट्टान तक
- Chapter 6 रीढ़ की हड्डी
- Chapter 7 मैं और मेरा देश
- Chapter 8 पद
- Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
- Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे!
- Chapter 11 झाँसी की रानी
- Chapter 12 घर की याद
NCERT Solutions for Class 9 – All Subjects
Just like Chapter 12 of Hindi, you can get the exercise questions with answers for every other subject of Class 9. Here are the NCERT Solutions for all subjects of Class 9.
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 12 – An Overview
The key highlights of this study material are as follows.
| Aspects | Details |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | Hindi |
| Chapter Number | Chapter 12 |
| Chapter Name | घर की याद |
| Book Name | गंगा |
| Book By | NCERT (National Council of Educational Research and Training) |
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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 12 घर की याद – FAQs
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