NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 7 मैं और मेरा देश provide clear, step-by-step answers to every exercise and in-text question from the chapter मैं और मेरा देश of the NCERT textbook गंगा. Prepared by subject experts as per the latest NCERT (CBSE) syllabus for 2026-27, these NCERT Solutions for Class 9 Hindi help you understand each concept, write exam-ready answers, and check your own solutions. You can read them online below or download the free Class 9 Hindi Chapter 7 question-answer PDF.
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 7 मैं और मेरा देश
- Class: Class 9
- Subject: Hindi
- Chapter: Chapter 7 – मैं और मेरा देश
- Textbook: गंगा (NCERT)
- Study material: NCERT Solutions – questions with answers, free PDF
These solutions answer all the exercise questions of Chapter 7 मैं और मेरा देश — including the in-text questions, short-answer and long-answer questions, and activities — with complete explanations so you can follow the method, not just the final answer. Read the full solutions below.
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Questions Covered in This Chapter
These NCERT Solutions answer all 51 questions of this chapter. The questions solved are:
- निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं? 1. “एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई”, इस पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘दरार’ किस ओर संकेत करता है? (क) पूर्णता के भाव की तुष्टि (ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार (घ) सुख-सुविधाओं का अभाव
- 2. निबंध में कहा गया है कि “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।” लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है? (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का (ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का (ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का (घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का
- 3. “अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए”, इस वाक्य में पराधीनता के दिनों को दीन कहा गया है क्योंकि पराधीन भारत में— (क) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था। (ग) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी। (घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।
- 4. निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि— (क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें। (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो। (ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो। (घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।
- 5. “पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है”, इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘गाँठ’ किन दो बातों को साथ बाँधती है? (क) देश और नागरिक (ख) देश और संविधान (ग) देश और विदेश (घ) व्यवसाय और आजीविका
- 6. प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है? (क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था (ख) पारिवारिक संबंधों का महत्व (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्सबंध (घ) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा
- नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए— 1. स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?
- 2. जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए।
- 3. “बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।” स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
- 1. “देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है”, अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
- 2. “मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था।” (क) प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं और आप दूसरों को किस तरह का सहयोग देते हैं? अपने अनुभव लिखिए।
- (ख) उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द ‘बहुतों’ में कौन-कौन सम्मिलित होंगे, अनुमान के आधार पर लिखिए।
- (ग) रचनाकार को स्वयं के लिए दूसरे लोगों से किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी और वह दूसरों को किस प्रकार का सहयोग देता होगा, अनुमान के आधार पर लिखिए।
- 3. “सुना नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।” (क) उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित अंश “युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता” के आधार पर लिखिए कि देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति हम सभी के क्या-क्या दायित्व हैं? अपने उत्तर को विस्तार देने के लिए अपने घर या पास-पड़ोस के बड़ों और अध्यापक से चर्चा करके लिखिए।
- (ख) अपने पास-पड़ोस में विचरने वाले पशु-पक्षियों की जीवनचर्या का अवलोकन कीजिए और अपने अवलोकन के आधार पर लिखिए कि आप उनके संघर्षों को किस रूप में देखते हैं? (संकेत— आप अपनी पाठ्यपुस्तक में दी गई कहानी ‘दो बैलों की कथा’ के मुख्य पात्रों के अनुभवों को भी आधार बना सकते हैं।)
- (ग) इस निबंध में जीवन को युद्ध क्यों कहा गया है? आप अपने घर के बड़ों से इस विषय पर चर्चा करके उनके और अपने विचार लिखिए।
- (घ) देश की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा सैनिक करते हैं। इसी तरह हमारे आस-पास हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक लोग कार्यरत हैं। ये कौन-कौन लोग हैं और उनके लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?
- 4. “अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।” (क) उपर्युक्त पंक्ति के आधार पर लिखिए कि पास-पड़ोस के लोगों में किस तरह के पारस्परिक संबंध रहे होंगे?
- (ख) वर्तमान समय में ऐसे संबंधों में किस तरह के परिवर्तन आए हैं और इनके क्या कारण हो सकते हैं? लिखिए।
- 5. “क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?” अपने घर/विद्यालय के आस-पास, सार्वजनिक संसाधनों और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों की स्वच्छता एवं सौंदर्य को बनाए रखने के लिए आप और आपके सहपाठी, संबंधी क्या-क्या करते हैं?
- 6. “मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे।” देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें और क्या नहीं करें? अपने-अपने समूह में इसकी चर्चा कीजिए और चर्चा से उभरे बिंदुओं को प्रातःकालीन सभा में पढ़कर सुनाइए।
- “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है” — निबंध के उपर्युक्त संदर्भ से आपके लिए दो प्रश्न बनाए गए हैं— (क) रचनाकार को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है?
- (ख) आपको किस तरह के प्रश्नों को बूझना रोचक लगता है?
- अब इस निबंध के आलोक में नीचे दी गई सामग्री को पढ़कर तीन प्रश्न बनाइए और लिखिए। — “यह सोचना एकदम निराधार है कि केवल संपन्न व्यक्ति ही देश की प्रगति और विकास में योगदान दे सकते हैं। देश की सुरक्षा का विषय हो अथवा ऐश्वर्य व संपन्नता का, सभी नागरिकों का अपनी ही तरह से योगदान होता है। हम सब नागरिक अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। हम यदि कुछ भी गलत करते हैं तो उससे अपनी छवि ही धूमिल नहीं होती अपितु अपने देश की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।”
- 1. ‘निबंध’ का शाब्दिक अर्थ है— ‘बाँधना’ (नि+बंध)। अर्थात भली-भाँति बँधा या गठा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करते हैं। एक विधा के रूप में निबंध की कुछ विशेषताओं को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है— (विषय-केंद्रीयता, वैयक्तिकता, विचार प्रधानता एवं भावनात्मकता, सजीवता/चित्रात्मकता, तार्किकता, प्रेरणात्मकता, संक्षिप्तता और स्पष्टता, साहित्यिक सौंदर्य)। उपर्युक्त बिंदुओं से संबंधित संदर्भ ‘मैं और मेरा देश’ निबंध से खोजकर लिखिए।
- 2. “क्या कोई भूकंप आया था, जिससे दीवार में दरार पड़ गई? बड़े महत्व का प्रश्न है… तो उत्तर यह है आपके प्रश्न का…” निबंध के उपर्युक्त अंश को ध्यान से देखिए। इसकी पहली पंक्ति में एक प्रश्न है और बाद के अंश में उसका उत्तर दिया गया है। आपने ध्यान दिया होगा कि यह पूरा निबंध इसी तरह की प्रश्नोत्तर शैली में लिखा गया है। यह प्रश्नोत्तर या संवादात्मक शैली इस निबंध की संरचना को विशेष बनाती है। इसी तरह की और भी अन्य विशेषताएँ इस निबंध में से छाँटकर लिखिए।
- 3. नीचे कुछ विषय दिए गए हैं, आप इनमें से किन विषयों पर निबंध लिखना चाहेंगे, कारण सहित लिखिए— • मेरा भारत मेरा गौरव • चाँद के साथ गपशप • जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि • गागर में सागर • यथा नाम तथा गुण • दूध का दूध और पानी का पानी
- “क्या कोई ऐसी कसौटी भी बनाई जा सकती है, जिससे देश के नागरिकों को आधार बनाकर देश की उच्चता और हीनता को हम तोल सकें?” रचनाकार के अनुसार इस प्रश्न का उत्तर है— निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया। 1. जब कोई चुनाव प्रक्रिया आपके क्षेत्र में शुरू होती है तो किस तरह की गतिविधियाँ होती हैं?
- 2. “जब भी कोई चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दें”, आपके विचार से एक अच्छे उम्मीदवार में क्या-क्या गुण होने चाहिए?
- 3. चुनाव से जुड़ा अपना कोई अनुभव लिखिए। (संकेत— विद्यालय में कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव)
- 4. यदि आप किसी सभा, क्लब आदि के चुनाव में उम्मीदवार हों तो आपके क्या-क्या मुद्दे होंगे?
- इस निबंध में किसी भी स्वतंत्र देश में नागरिक के अधिकार और उसके कर्तव्य की बात की गई है। आपकी पाठ्यपुस्तक के प्रारंभिक पृष्ठ पर भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकार और कर्तव्य दिए गए हैं। उसे पढ़कर अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए।
- आप अपने विद्यालय एवं सार्वजनिक पुस्तकालय में जाते हैं। हो सकता है, आपको कभी कोई पुस्तक फटी हुई मिली हो या उसमें से कुछ पृष्ठ गायब हों अथवा उसमें पेन से निशान लगे हों— • ऐसा होने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
- • ऐसा न हो, इसके लिए क्या किया जा सकता है?
- • आप पुस्तकालय में किन नियमों का पालन करते हैं, उन नियमों का पालन करना क्यों अनिवार्य है? इस पर अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।
- आपके विद्यालय में रोचक पुस्तकों का भंडार है परंतु आपके ‘दृष्टिबाधित’ सहपाठी स्वयं पढ़कर इनका आनंद नहीं उठा पाते हैं। प्रधानाध्यापक को ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने के संदर्भ में पत्र लिखिए।
- “अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीप जलाए…” देश के विकास में सभी का सहयोग होता है जो सीमा पर तैनात हैं और जो देश के भीतर हैं, जैसे– अध्यापक, किसान, श्रमिक, कलाकार, वैज्ञानिक, अभियंता आदि। इन सभी के अमूल्य योगदान के लिए कृतज्ञता ज्ञापन तैयार करके लिखिए।
- “ठीक मनुष्य को अपना मत दें।” उपर्युक्त पंक्ति में चुनाव में योग्य उम्मीदवार को चुनने का संदेश दिया गया है। आप भी चुनाव में योग्य उम्मीदवार को चुनने के लिए एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए।
- “क्या आप कभी केला खाकर छिलका रास्ते में फेंकते हैं…” निबंध के इस अंश को पुनः पढ़िए। इस प्रकार के और कौन-कौन से आचरण हो सकते हैं जिनसे देश के सौंदर्य को आघात लगता है? इस विषय पर अपने अभिभावकों, सहपाठियों और शिक्षकों के साथ चर्चा कीजिए। (संकेत— ऐतिहासिक या सार्वजनिक स्थानों पर अपना नाम आदि लिखना।)
- ‘दरार’, ‘गाँठ’ और ‘पानी’ शब्दों के प्रयोग को देखिए — ये संदर्भ के अनुसार भिन्न-भिन्न अर्थ देते हैं। अब अपनी पाठ्यपुस्तक में से ऐसे अन्य शब्द छाँटकर लिखिए जो संदर्भ के अनुसार भिन्न-भिन्न अर्थ देते हों।
- “अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।” / “इस तरह एक मनुष्य से भरा-पूरा नगर बनकर मैं खड़ा हुआ था।” — पहले वाक्य में ‘ममता-दुलार’ और दूसरे वाक्य में ‘भरा-पूरा’ शब्द मिलता-जुलता भाव दे रहे हैं। ये शब्द-युग्म हैं। … आप इस निबंध में से मिलते-जुलते अर्थ वाले और पुनरुक्त (एक ही शब्द को फिर से कहना) शब्द-युग्म छाँटकर लिखिए।
- “मैं सोचा करता था कि मेरी मनुष्यता में अब कोई अपूर्णता नहीं रही।” उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित शब्द ‘अपूर्णता’ में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों का ही प्रयोग चिह्नित किया गया है। इस प्रयोग को समझकर नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग और प्रत्यय शब्द पहचानकर लिखिए— अलौकिक, निरक्षरता, सम्मानित, अनावश्यक, अपमानित, अभिमानी
- ‘देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है।’ इस विषय पर परिचर्चा का आयोजन कीजिए और परिचर्चा में उभरकर आए बिंदुओं की रिपोर्ट तैयार कीजिए। रिपोर्ट को पावर प्वांइट प्रस्तुतीकरण या चार्ट के माध्यम से कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
- “मैं अपने देश का नागरिक हूँ” — नीचे ‘देश’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है। … • इनके अतिरिक्त यदि आप ‘देश’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
- • उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए। (वाक्य — “मैं अपने देश का नागरिक हूँ”)
- इस निबंध में स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय का उल्लेख किया गया है। इसमें नागरिक के कर्तव्य एवं अधिकारों की बात की गई है। अब आप लाला लाजपत राय के नीचे दिए गए कुछ विचारों को पढ़िए। — ‘आत्मनिर्भरता’: “प्रगति का तात्पर्य है स्वतंत्रता की ओर प्रस्थान। तुम्हारे पूर्वजों ने तुम्हें यही सिखाया है कि जैसे ही तुममें पर-निर्भरता पनपती है, स्वतंत्रता पलायन कर जाती है। यदि पर-निर्भरता को पूर्णरूपेण नहीं त्याग सकते तो एक सीमा तक कम तो कर ही सकते हो। आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की आदत डालो, किसी को नाराज करने या परेशान करने के इरादे से नहीं, वरन पुरुषार्थ की भावना से ऐसा करो।” — यूरोप से भारत वापसी पर स्वागत के अवसर पर (बंबई, 20 फरवरी 1920)
- ‘अधिकारों की रक्षा’: “हर एक का नैतिक कर्तव्य है कि तन-मन-धन से अपने जन्मसिद्ध अधिकारों की रक्षा करे। मेरी राय में जो ऐसा नहीं करता, अपने नैतिक कर्तव्य से हट जाता है। जितनी जल्दी हम अपनी इस नैतिक जिम्मेदारी को समझ लेंगे, हम स्वराज्य को प्राप्त करने में समर्थ हो सकेंगे।” — जेल जाते समय देशवासियों के नाम संदेश (7 जनवरी 1922)
- निबंध में स्वामी रामतीर्थ के अनुभव का उल्लेख किया गया है। आप अपने पुस्तकालय या इंटरनेट से उनके विषय में सामग्री खोजकर पढ़िए और सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
- [पुस्तक में इस रचना पर कोई प्रश्न नहीं दिया गया है — यह अतिरिक्त पठन के लिए है।] ‘साथ-साथ पढ़ें’ के अंतर्गत दी गई रचना ‘निर्मल जीत सिंह सेखों’ का सार अपने शब्दों में लिखिए।
- ‘साथ-साथ पढ़ें’ की यह रचना ‘मैं और मेरा देश’ निबंध के किन-किन विचारों को जीवन में उतरता हुआ दिखाती है? स्पष्ट कीजिए।
- ‘प्रशस्ति पत्र’ किसे कहते हैं? फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह सेखों के प्रशस्ति पत्र की भाषा और शैली की विशेषताएँ बताइए। साथ ही अपने विद्यालय के किसी व्यक्ति के लिए एक प्रशस्ति पत्र तैयार कीजिए।
Chapter at a Glance
- रचनाकार — हिंदी के प्रसिद्ध निबंधकार कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जन्म सन् 1906 ई. में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ था। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र पत्रकारिता था; उन्होंने नया जीवन और विकास पत्रों का संपादन किया। प्रारंभ से ही स्वतंत्रता संग्राम एवं सामाजिक कार्यों में भाग लेने के कारण उन्हें अनेक बार जेल-यात्रा भी करनी पड़ी। अपनी उत्कृष्ट साहित्यिक रचनाओं के लिए उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया। सन् 1995 में उनका निधन हुआ।
- उनके संस्मरणात्मक निबंध-संग्रह — दीप जले शंख बजे , जिंदगी मुसकराई , बाजे पायलिया के घुँघरू , जिंदगी लहलहाई , क्षण बोले कण मुसकाए , कारवाँ आगे बढ़े , माटी हो गई सोना , महके आँगन चहके द्वार और आकाश के तारे धरती के फूल — गहन मानवतावादी दृष्टिकोण और जीवन-दर्शन के परिचायक हैं। पत्रकार होने के कारण उनकी भाषा में सीधी बात कहने का साहस है और निबंधकार होने के कारण उसमें आत्मीयता तथा चित्रात्मकता है।
- कथ्य — निबंध पहले पुरुष (‘मैं’) में आरंभ होता है। लेखक बताता है कि वह अपने घर में जनमा-पला, पड़ोस का ममता-दुलार पाकर बड़ा हुआ और नगर के विशाल समाज से जुड़कर “एक मनुष्य से भरा-पूरा नगर बनकर” खड़ा हुआ। वह मानता था कि उसकी मनुष्यता अब पूर्ण है — “मेरा घर, मेरा पड़ोस, मेरा नगर और मैं।” फिर “आनंद की इस दीवार में एक दरार पड़ गई” — और उसे लगा कि इतना सब पाकर भी उसकी स्थिति हीन है, क्योंकि कोई भी, कहीं भी उसका अपमान कर सकता है और वह अपील तक नहीं कर सकता।
- यह ‘दरार’ किसी भूकंप से नहीं, मानस के भूकंप से पड़ी। वह भूकंप था लाला लाजपत राय (पंजाब-केसरी) का एक वाक्य — “मैं अमेरिका गया, इंग्लैंड गया, फ्रांस गया और संसार के दूसरे देशों में भी घूमा, पर जहाँ भी मैं गया, भारतवर्ष की गुलामी की लज्जा का कलंक मेरे माथे पर लगा रहा।” इससे लेखक ने यह निष्कर्ष निकाला कि यदि किसी के पास संसार ही नहीं, स्वर्ग के भी सारे साधन हों, पर उसका देश गुलाम या किसी भी रूप में हीन हो, तो वे साधन उसे गौरव नहीं दे सकते।
- दो घटनाएँ — लेखक ‘अकेला चना क्या भाड़ फोड़े’ कहावत को ‘सौ फीसदी झूठ’ बताते हुए दो युवकों की घटनाएँ सुनाता है। पहली — स्वामी रामतीर्थ जापान में रेल-यात्रा के दौरान फल न मिलने पर कह बैठे कि “जापान में शायद अच्छे फल नहीं मिलते!” एक जापानी युवक ने यह सुनकर दूर से ताजे फलों की टोकरी लाकर भेंट की और दाम लेने से इनकार करते हुए मूल्य के रूप में केवल इतना माँगा कि स्वामी जी अपने देश जाकर किसी से यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। दूसरी — एक दूसरे देश का विद्यार्थी जापान में सरकारी पुस्तकालय की पुस्तक से दुर्लभ चित्र निकाल ले गया; पकड़े जाने पर उसे देश से निकाल दिया गया और पुस्तकालय के बाहर बोर्ड पर लिख दिया गया कि उस देश का कोई निवासी इस पुस्तकालय में प्रवेश नहीं कर सकता। एक युवक ने अपने देश का सिर ऊँचा किया, दूसरे ने देश के मस्तक पर कलंक का टीका लगा दिया।
- भावना का महत्व — लेखक का सूत्र है — “महत्व किसी कार्य की विशालता में नहीं है, उस कार्य के करने की भावना में है।” इसे सिद्ध करने के लिए वह दो और प्रसंग देता है — तुर्की के राष्ट्रपति कमालपाशा ने तीस मील पैदल चलकर आए बूढ़े किसान की मिट्टी की हँडिया में लाया पाव-भर शहद स्वीकार किया, उसे चखकर तीसरी उँगली बूढ़े के मुँह में दे दी और उसे शाही कार में गाँव भिजवाया; और भारत में एक किसान रंगीन सुतलियों से बुनी खाट कंधे पर रखकर पंडित नेहरू को भेंट करने पहुँचा, जिसे उन्होंने स्वीकार कर बदले में अपना दस्तखती फोटो दिया।
- कसौटी — शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध। लेखक कहता है कि देश को सबसे पहले दो चीजों की जरूरत है। जो व्यक्ति रेलों, मुसाफिरखानों, क्लबों और चौपालों पर अपने देश को दूसरे देशों से हीन सिद्ध करता रहता है, वह देश के शक्ति-बोध को चोट पहुँचाता है — ठीक वैसे ही जैसे सारथी शल्य ने कर्ण की अजेयता में बार-बार अर्जुन का उल्लेख कर “संदेह की तरेड़” डाल दी थी। और जो केले का छिलका रास्ते में फेंकता है, घर का कूड़ा बाहर डालता है, ज़ीनों-कोनों में पीक थूकता है, मेलों-रेलों में ठेलमठेल करता है, वह देश के सौंदर्य-बोध तथा संस्कृति पर आघात करता है।
- निष्कर्ष — चुनाव ही कसौटी। देश की उच्चता-हीनता तोलने की कसौटी है चुनाव । जिस देश के नागरिक जानते हैं कि मत किसे देना है और किसे नहीं, वह देश उच्च है; जहाँ नागरिक उत्तेजक नारों या व्यक्तियों के गलत प्रभाव में मत देते हैं, वह हीन है। इसलिए नागरिक का कर्तव्य है कि वह ठीक मनुष्य को मत दे, और उसका अधिकार है कि उसका मत लिए बिना संसार का सर्वश्रेष्ठ महापुरुष भी किसी कुरसी पर न बैठ सके। यही निबंध की मूल संवेदना है — “मैं और मेरा देश दो अलग चीजें तो हैं ही नहीं।”
- भाषा-शैली — पूरा निबंध प्रश्नोत्तर/संवादात्मक शैली में लिखा गया है — पाठक प्रश्न पूछता है, लेखक उत्तर देता है। ‘अजी’, ‘लो’, ‘क्यों जी’, ‘वाह, खूब सवाल पूछा है आपने’ जैसे संबोधन बातचीत का-सा अपनापन पैदा करते हैं। भाषा में प्रतीक (आनंद की दीवार, दरार, मानसिक भूकंप, गाँठ, गौरव के दीपक), मुहावरे-लोकोक्तियाँ (अकेला चना क्या भाड़ फोड़े, ईंट का जवाब पत्थर से, पानी उतरना, सौ लालों का एक लाल), दृष्टांत और सूत्रात्मक वाक्य साथ-साथ चलते हैं। यही निबंध की विधागत विशेषता भी है और अभ्यास का एक बड़ा प्रश्न भी।
- अभ्यास क्या माँगता है — ‘मेरे उत्तर मेरे तर्क’ में केवल विकल्प नहीं, विकल्प के पक्ष में तर्क भी माँगा गया है। ‘मेरे अनुभव मेरे विचार’ पूरी तरह आपके अपने अनुभव, अवलोकन और घर-पड़ोस की चर्चा पर टिका है। ‘विधा से संवाद’ निबंध की आठ विशेषताओं के संदर्भ पाठ में से खोजने को कहता है। ‘सृजन’ में पत्र, कृतज्ञता ज्ञापन और विज्ञापन लिखना है, और ‘भाषा से संवाद’ में संदर्भ के अनुसार बदलते अर्थ, शब्द-युग्म तथा उपसर्ग-प्रत्यय की तालिका भरनी है। अंत में साथ-साथ पढ़ें के अंतर्गत परमवीर चक्र विजेता फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह सेखों की गाथा दी गई है — उस पर पुस्तक में कोई प्रश्न नहीं है, पर वह इसी निबंध की बात को जीवन से जोड़कर दिखाती है।
How to Download NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 7 PDF
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NCERT Solutions for Class 9 Hindi – All Chapters
There are more chapters to study besides मैं और मेरा देश in Hindi. Here are the NCERT Solutions for all chapters of Class 9 Hindi.
- Chapter 1 दो बैलों की कथा
- Chapter 2 क्या लिखूँ?
- Chapter 3 संवादहीन
- Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं
- Chapter 5 आखिरी चट्टान तक
- Chapter 6 रीढ़ की हड्डी
- Chapter 7 मैं और मेरा देश
- Chapter 8 पद
- Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
- Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे!
- Chapter 11 झाँसी की रानी
- Chapter 12 घर की याद
NCERT Solutions for Class 9 – All Subjects
Just like Chapter 7 of Hindi, you can get the exercise questions with answers for every other subject of Class 9. Here are the NCERT Solutions for all subjects of Class 9.
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 7 – An Overview
The key highlights of this study material are as follows.
| Aspects | Details |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | Hindi |
| Chapter Number | Chapter 7 |
| Chapter Name | मैं और मेरा देश |
| Book Name | गंगा |
| Book By | NCERT (National Council of Educational Research and Training) |
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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 7 मैं और मेरा देश – FAQs
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