NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 3 संवादहीन provide clear, step-by-step answers to every exercise and in-text question from the chapter संवादहीन of the NCERT textbook गंगा. Prepared by subject experts as per the latest NCERT (CBSE) syllabus for 2026-27, these NCERT Solutions for Class 9 Hindi help you understand each concept, write exam-ready answers, and check your own solutions. You can read them online below or download the free Class 9 Hindi Chapter 3 question-answer PDF.
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 3 संवादहीन
- Class: Class 9
- Subject: Hindi
- Chapter: Chapter 3 – संवादहीन
- Textbook: गंगा (NCERT)
- Study material: NCERT Solutions – questions with answers, free PDF
These solutions answer all the exercise questions of Chapter 3 संवादहीन — including the in-text questions, short-answer and long-answer questions, and activities — with complete explanations so you can follow the method, not just the final answer. Read the full solutions below.
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Questions Covered in This Chapter
These NCERT Solutions answer all 55 questions of this chapter. The questions solved are:
- कहानी में ताई और मिट्ठू का संबंध किस भाव को दर्शाता है? (क) परोपकार और त्याग (ख) ममता और स्नेह (ग) करुणा और क्रोध (घ) जिज्ञासा और सहायता
- जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है? (क) अनुशासन और परंपरा (ख) उदासीनता और असावधानी (ग) आत्मगौरव और विद्रोह (घ) करुणा और नैतिकता
- मिट्ठू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है? (क) भोजन की खोज (ख) प्रेम की आकांक्षा (ग) स्वतंत्रता की चाह (घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति
- ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था? (क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव (ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता (घ) मिट्ठू के प्रति प्रेम और संवाद
- कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है? (क) मजबूरी (ख) कर्मपरायणता (ग) अकेलापन (घ) संवादधर्मिता
- “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” ताई इस वाक्य में किस ‘नैया’ की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?
- “धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।” इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
- “ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।” क्यों?
- “अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?
- “जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
- कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है— ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
- “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?
- उत्तर: ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया। प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था? प्रश्न ख : ताई को मिट्ठू किसने भेंट में दिया था? — इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?
- उत्तर: ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था। प्रश्न क : ताई के लौटने के बाद मिट्ठू कहाँ चला गया था? प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई? — इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?
- उत्तर: गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा। प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे? प्रश्न ख : गाँववाले मिट्ठू के उड़ने से खुश क्यों थे? — इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?
- उत्तर: कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है। प्रश्न क : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों उपयुक्त नहीं है? प्रश्न ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है? — इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?
- “कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?
- “आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।” क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।
- “गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके…” ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।
- “ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।” क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।
- “मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।” क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।
- ‘संवादहीन’ कहानी में अनेक विशेष बिंदु हैं जो इसे प्रभावपूर्ण बनाते हैं। नीचे कहानी के कुछ विशेष बिंदु और उनके उदाहरण दिए गए हैं (चित्रात्मकता/दृश्य बिंब, संवादात्मकता, पुनरुक्ति, अतिशयोक्ति, लोकधर्मी भाषा, प्रश्नोत्तर शैली)। आप भी कहानी से इसी प्रकार के एक-एक उदाहरण खोजकर लिखिए।
- किसी कहानी का अंत अनेक प्रकार से हो सकता है जैसे— 1. सुखांत 2. दुखांत 3. मुक्त अंत 4. अप्रत्याशित अंत 5. यथार्थवादी अंत 6. प्रेरणात्मक अंत 7. व्यंग्यात्मक अंत। आपके अनुसार ‘संवादहीन’ कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
- आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?
- “अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी।” कहानी में रेखांकित पात्र का नाम नहीं दिया गया है। इसे कहीं ‘मास्टराइन’, तो कहीं ‘जगन मास्टर की घरवाली’ कहा गया है। आपके अनुसार कहानी में ऐसा क्यों किया गया होगा?
- “गाँव के कई लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे” — ‘कुंभ-स्नान’ एक सुप्रसिद्ध आयोजन है जिसमें करोड़ों लोग भाग लेते हैं। पता लगाइए— • इसका आयोजन क्यों किया जाता है? • पिछली बार इसका आयोजन कब और कहाँ हुआ था? • अगला आयोजन कब और कहाँ होगा?
- मान लीजिए कि ताई आपके मोहल्ले में रहती हैं। वे कुंभ-स्नान के लिए कैसे गई होंगी? उनकी यात्रा का वर्णन लिखिए। (संकेत— कहाँ से कहाँ तक की यात्रा, टिकट, यात्रा के साधन, संगी-साथी, खान-पान, ठहरना आदि।)
- आपके गाँव या नगर में कौन-सा मेला, उत्सव या पर्व मनाया जाता है? वहाँ का दृश्य, भीड़, श्रद्धा और वातावरण का वर्णन कीजिए। मेले में कैसी आवाज़ें, रंग, गंध, खान-पान, दृश्य और भाव होंगे? (संकेत— उनका वर्णन पाँच ज्ञानेंद्रियों — देखने, सुनने, सूँघने, छूने और स्वाद महसूस करने के आधार पर कीजिए।)
- “बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए।” अपना घर छोड़कर नए स्थान पर बस जाना आसान नहीं होता है। ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा? गाँव छोड़ते समय क्या-क्या सोचा होगा? अपना घर छोड़ने के लिए स्वयं को कैसे तैयार किया होगा?
- “वहाँ बैठे एवजी मिट्ठू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की” — ताई सोच रही थीं कि मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ कहेगा, लेकिन एवजी मिट्ठू चुप था। कल्पना कीजिए कि एक दिन असली मिट्ठू वापस आ गया। मिट्ठू ने नए तोते को देखकर क्या कहा होगा? आगे की कहानी लिखिए। (संकेत— प्रारंभ कीजिए— “एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके…”)
- “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” आज घर जाकर अपने किसी बड़े या बुजुर्ग से बात कीजिए। उनसे पूछिए— “आप जब मेरी आयु के थे, तब समय कैसे बिताया करते थे; क्या-क्या बातें या काम करते थे? आदि”। उनके कहे हुए अनुभव अपनी पुस्तिका में लिखिए।
- “मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए! वो गए!!” मान लीजिए कि जगन मास्टर ने मिट्ठू की खोज के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। अपनी कल्पना से वह विज्ञापन बनाइए। (संकेत— आप समाचार पत्रों में प्रकाशित खोया-पाया या तलाश संबंधी विज्ञापन देख सकते हैं।)
- ‘मिट्ठू’ शब्द का अर्थ होता है— मधुरभाषी, मीठा बोलनेवाला या तोता। यह शब्द इतना अधिक प्रचलित है कि इसका प्रयोग एक मुहावरे में भी किया जाता है— ‘अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना’ जिसका अर्थ है ‘अपनी प्रशंसा आप करना’ या ‘अपने मुँह से अपनी बड़ाई करना’। आप कुछ ऐसे मुहावरों की सूची बनाइए जिनमें किसी अन्य जीव-जंतु का उल्लेख किया गया हो, जैसे नीचे लिखे इस वाक्य में है— “अकेले मिट्ठू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।”
- “जगन मास्टर का ध्यान अचानक ‘गीता-रहस्य’ से हटकर मिट्ठू के पंखों की ‘फड़फड़ाहट’ पर गया।” पक्षी के उड़ने पर पंखों के हिलने-डुलने से उत्पन्न ध्वनि ‘फड़फड़ाहट’ कहलाती है। ध्वनियों का आभास कराने वाले कुछ और शब्द लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।
- “अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जातीं।” — वे शब्द जो जोड़े में लिखे जाते हैं, उन्हें शब्द-युग्म कहा जाता है। शब्द-युग्म मुख्यतः निम्न प्रकार के होते हैं— पुनरुक्त (बार-बार), सजातीय (उठना-बैठना), समानार्थक (दिन-प्रतिदिन), विपरीतार्थक (दिन-रात)। इन प्रकारों को पाठ से उदाहरण देकर समझाइए।
- पाठ में से चुनकर कुछ शब्द-युग्म नीचे दिए गए हैं। उनका अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए— वक्त-बेवक्त, नियम-सिद्धांत, शादी-ब्याह, तीज-त्योहार।
- उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए— ऐसा शब्द जो ‘तंग’ का विपरीतार्थक है।
- उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए— ऐसा वाक्यांश जो एक मुहावरा है।
- उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए— ऐसा शब्द जो एक क्रिया है।
- उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए— ऐसा शब्द जो एक संज्ञा है।
- उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए— ऐसा शब्द जो एक सर्वनाम है।
- उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए— ऐसा शब्द जो एक विशेषण है।
- उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए— ऐसा शब्द जो एक कारक है।
- उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए— ऐसा शब्द जो एक कर्ता है।
- अर्थ के आधार पर वाक्यों के कई भेद होते हैं जैसे— विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, आज्ञावाचक (विधिवाचक), इच्छावाचक, संदेहवाचक और संकेतवाचक। (पुस्तक की तालिका देखिए।) अब आप भी अपनी पुस्तक में से प्रत्येक प्रकार का एक-एक वाक्य चुनकर लिखिए।
- कहानी के रंग — समूहों को अलग-अलग भावनाएँ (दुख, स्नेह, आजादी) दीजिए और इसे मूक अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
- पंखों की योजना — छोटे समूहों में सोचें कि अगर आपको मिट्ठू की तरह उड़ने का मौका मिले तो आप कहाँ जाते और क्यों?
- “पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही” — यह वाक्य बताता है कि ताई ने भोजन संबंधी अपनी आवश्यकताओं पर कभी ध्यान नहीं दिया अथवा उन्हें महत्वपूर्ण नहीं माना। हमारे परिवेश में ऐसी बहुत-सी महिलाएँ हैं जो परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देती हैं और अपनी आवश्यकताओं की अनदेखी करती हैं। • अपने घर की महिलाओं की भोजन संबंधी रुचियों के विषय में जानिए और समझिए कि उनकी पसंद का भोजन माह में कब-कब बनता है।
- अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ या प्रश्न बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों— तोता, ताई, कुंभ, पिंजरा, कमरा, गंगा।
- “वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।” नीचे ‘तोता’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है — तोता (हिंदी); शुकः (संस्कृत); तोता (पंजाबी); तोता (उर्दू); तोतुं (कश्मीरी); तोतो (सिंधी); पोपट (मराठी); पोपट, सूडो (गुजराती); पोपट (कोंकणी); सुगा (नेपाली); तोता (बांग्ला); भाटौ (असमिया); तेनवा (मणिपुरी); शुआ, शुक (ओड़िआ); चिलुक (तेलुगु); किळि (तमिल); शुकम्, तत्त (मलयालम); गिळि (कन्नड़)। इनके अतिरिक्त यदि आप ‘तोता’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
- उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
- खोजबीन कीजिए — शेखर जोशी
- खोजबीन कीजिए — तोता
- खोजबीन कीजिए — तोते को गीत सिखाना
- खोजबीन कीजिए — तोते की कहानी
Chapter at a Glance
- रचनाकार — शेखर जोशी का जन्म सन् 1932 में अल्मोड़ा, उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उनका पहला कहानी संग्रह कोसी का घटवार सन् 1958 में प्रकाशित हुआ। साथ के लोग, दाज्यू, हलवाहा, नौरंगी बीमार है, आदमी का डर, डांगरी वाले, मेरा पहाड़ (कहानी संग्रह), एक पेड़ की याद (शब्दचित्र-संग्रह), स्मृति में रहें वे (संस्मरण), न रोको उन्हें शुभ्रा (कविता संग्रह) और मेरा ओलिया गाँव (आत्मवृत्त) उनकी अन्य प्रमुख रचनाएँ हैं। उनकी कहानियों का समग्र शेखर जोशी कथा समग्र नाम से छपा है। उन्हें ‘महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार’, ‘साहित्य भूषण सम्मान’, ‘अखिल भारतीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान’ और ‘श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य पुरस्कार’ मिले। सन् 2022 में उनका निधन हुआ।
- कथावस्तु — गाँव के बीच खड़े ‘बड़े घर’ में अब केवल दो प्राणी बचे हैं — ताई और उनका तोता मिट्ठू । कभी उस घर में पूत-परिवार, बहू-बेटियाँ, नौकर-चाकर और गाय-ढोर थे; फिर “बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए”, बेटियाँ अपनी गृहस्थी में रम गईं और “धीरे-धीरे सब पराए हाथों में चला गया।” गनपत कहीं से एक पहाड़ी तोता ले आया और ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी ।
- कथा का मोड़ — कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जाते समय ताई मिट्ठू को जगन मास्टर की घरवाली के पास छोड़ जाती हैं। जगन मास्टर ‘दूसरे मिजाज के आदमी’ हैं — स्वतंत्र विचारों वाले आदर्शवादी, जिन्हें पिंजरे में बंद पक्षी देखकर बेचैनी होती है। वे रोज कमरा बंद करके पिंजरे का दरवाजा खोलते हैं, और चौथे-पाँचवें दिन मिट्ठू खुले रोशनदान से उड़ जाता है। गनपत की सलाह पर हूबहू वैसा ही दूसरा तोता ले आया जाता है, पर लौटी हुई ताई के सामने वह ‘एवजी मिट्ठू’ चुप बैठा रहता है — “वह केवल इधर-उधर ताकता रहा।”
- पात्र — ताई वैभवशाली अतीत और सूने वर्तमान के बीच झूलती वृद्धा हैं; तेज स्वभाव की, पर भीतर से गहरे लगाव वाली। मिट्ठू केवल तोता नहीं, ताई के लिए संवाद का माध्यम, बेटे जैसा साथी और ममता का केंद्र है। जगन मास्टर आदर्श और व्यवहार के द्वंद्व के प्रतीक हैं — उनका उद्देश्य पवित्र है, पर परिणाम विनाशक। मास्टराइन और गनपत गौण पर निर्णायक पात्र हैं।
- भाषा-शैली — कहानी की भाषा लोकधर्मी है — “दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं”, “किसके भरोसे कारबार संभलता”, “भाँय-भाँय”, “मान-मनौवल”। शेखर जोशी संवादों, पुनरुक्ति (“कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!”), दृश्य बिंबों और नपे-तुले व्यंग्य से काम लेते हैं। सबसे तीखा वाक्य व्यंजना का है — “अकेले मिट्ठू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।”
- मूल संवेदना — शीर्षक ‘संवादहीन’ ही कहानी की कुंजी है। जिस घर में कभी दर्जनों लोगों की आवाजें थीं, वहाँ अब एक पक्षी की रटी हुई पंक्तियाँ ही ‘संवाद’ हैं; और अंत में वह भी छिन जाता है। पलायन के बाद गाँव में छूट गए बुजुर्गों का अकेलापन, मनुष्य और पक्षी के बीच बना भावनात्मक पुल, तथा आदर्श और यथार्थ का द्वंद्व — ये तीन धागे मिलकर कहानी बुनते हैं।
- शिल्प की खूबी — कहानी का अंत मुक्त और यथार्थवादी है। लेखक न ताई का विलाप लिखता है, न मिट्ठू को लौटाता है — केवल एक पंक्ति छोड़ जाता है: “उनके सूनेपन का साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा।” ‘न जाने’ और ‘होगा’ की संदेह-भरी क्रिया पाठक को कहानी पूरी करने के लिए छोड़ देती है।
- अभ्यास क्या माँगता है — इस पाठ का अभ्यास पाँच बहुविकल्पी प्रश्नों से शुरू होता है जिनमें विकल्प के साथ तर्क भी माँगा गया है; फिर पाठ-आधारित व्याख्या, प्रश्न-निर्माण, अनुभव-आधारित लेखन, कहानी के शिल्प-बिंदुओं की तालिका, कहानी के अंत की श्रेणी, समाज से जुड़े प्रश्न, सृजनात्मक लेखन (आगे की कहानी, विज्ञापन), और व्याकरण — मुहावरे, ध्वन्यात्मक शब्द, शब्द-युग्म, अर्थ के आधार पर वाक्य-भेद तथा भाषा संगम।
How to Download NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 3 PDF
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NCERT Solutions for Class 9 Hindi – All Chapters
There are more chapters to study besides संवादहीन in Hindi. Here are the NCERT Solutions for all chapters of Class 9 Hindi.
- Chapter 1 दो बैलों की कथा
- Chapter 2 क्या लिखूँ?
- Chapter 3 संवादहीन
- Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं
- Chapter 5 आखिरी चट्टान तक
- Chapter 6 रीढ़ की हड्डी
- Chapter 7 मैं और मेरा देश
- Chapter 8 पद
- Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
- Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे!
- Chapter 11 झाँसी की रानी
- Chapter 12 घर की याद
NCERT Solutions for Class 9 – All Subjects
Just like Chapter 3 of Hindi, you can get the exercise questions with answers for every other subject of Class 9. Here are the NCERT Solutions for all subjects of Class 9.
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 3 – An Overview
The key highlights of this study material are as follows.
| Aspects | Details |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | Hindi |
| Chapter Number | Chapter 3 |
| Chapter Name | संवादहीन |
| Book Name | गंगा |
| Book By | NCERT (National Council of Educational Research and Training) |
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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 3 संवादहीन – FAQs
What are the NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 3 संवादहीन?
They are the complete, step-by-step answers to all the exercise and in-text questions of Chapter 3 संवादहीन from the NCERT Class 9 Hindi textbook गंगा, written by experts as per the latest NCERT syllabus.
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