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Home » Extras » NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (PDF) – 2026-27

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (PDF) – 2026-27

by
September 10, 2026
in 9th Class

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद provide clear, step-by-step answers to every exercise and in-text question from the chapter राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद of the NCERT textbook गंगा. Prepared by subject experts as per the latest NCERT (CBSE) syllabus for 2026-27, these NCERT Solutions for Class 9 Hindi help you understand each concept, write exam-ready answers, and check your own solutions. You can read them online below or download the free Class 9 Hindi Chapter 9 question-answer PDF.

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

  • Class: Class 9
  • Subject: Hindi
  • Chapter: Chapter 9 – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
  • Textbook: गंगा (NCERT)
  • Study material: NCERT Solutions – questions with answers, free PDF

These solutions answer all the exercise questions of Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद — including the in-text questions, short-answer and long-answer questions, and activities — with complete explanations so you can follow the method, not just the final answer. Read the full solutions below.

NCERT Solutions Class 9 Hindi Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद View Download

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You can read the NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 9 online above, or download the complete question-answer PDF to study राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद offline at any time.


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Questions Covered in This Chapter

These NCERT Solutions answer all 60 questions of this chapter. The questions solved are:

  1. “देखत भृगुपति बेषु कराला। उठे सकल भय बिकल भुआला॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  2. “पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  3. “जेहि सुभायँ चितवहिं हितु जानी। सो जानइ जनु आइ खुटानी॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  4. “जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  5. “आसिष दीन्हि सखीं हरषानीं। निज समाज लै गईं सयानीं॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  6. “बिस्वामित्रु मिले पुनि आई। पद सरोज मेले दोउ भाई॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  7. “रामु लखनु दसरथ के ढोटा। दीन्हि असीस देखि भल जोटा॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  8. “रामहि चितइ रहे थकि लोचन। रूप अपार मार मद मोचन॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  9. “बहुरि बिलोकि बिदेह सन कहहु काह अति भीर। पूछत जानि अजान जिमि ब्यापेउ कोपु सरीर॥” — इस दोहे का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  10. “समाचार कहि जनक सुनाए। जेहि कारन महीप सब आए॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  11. “सुनत बचन फिरि अनत निहारे। देखे चापखंड महि डारे॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  12. “अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  13. “बेगि देखाउ मूढ़ न त आजू। उलटउँ महि जहँ लहि तव राजू॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  14. “अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  15. “सुर मुनि नाग नगर नर नारी। सोचहिं सकल त्रास उर भारी॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  16. “मन पछिताति सीय महतारी। बिधि अब सँवरी बात बिगारी॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  17. “भृगुपति कर सुभाउ सुनि सीता। अरध निमेष कलप सम बीता॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  18. “सभय बिलोके लोग सब जानि जानकी भीरु। हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु॥” — इस दोहे का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  19. “नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  20. “आयसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  21. “सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरि करनी करि करिअ लराई॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  22. “सुनहु राम जेहिं सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  23. “सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  24. “सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  25. “बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  26. “एहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू॥” — इस चौपाई का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  27. “रे नृप बालक काल बस बोलत तोहि न सँभार। धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार॥” — इस दोहे का पदच्छेद, सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  28. निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं? 1. “पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा॥” यह पंक्ति सभा में उपस्थित लोगों की किस मनःस्थिति को दर्शाती है? (क) आदर और सम्मान (ख) भक्ति और श्रद्धा (ग) भय और शिष्टाचार (घ) प्रेम और सहिष्णुता
  29. 2. “जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा” पंक्ति से राजा जनक के व्यवहार की कौन-सी विशेषता उद्घाटित होती है? (क) संवेदनशीलता (ख) शिष्टता (ग) सहनशीलता (घ) उदासीनता
  30. 3. “अति रिस बोले बचन कठोरा।” जनक के प्रति परशुराम के कठोर वचन बोलने का मूल कारण था— (क) उचित आदर-सत्कार न मिलना (ख) जनक द्वारा समाचार छिपाना (ग) शिव-धनुष का खंडित होना (घ) अन्य राजाओं की सभा में उपस्थिति
  31. 4. राम का कथन “होइहि केउ एक दास तुम्हारा” उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है? (क) कूटनीति और चतुराई (ख) विनम्रता और मर्यादा (ग) त्याग और समर्पण (घ) दृढ़ता और आत्मविश्वास
  32. 5. “सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने॥” लक्ष्मण के मुसकराने और उपहास भरे वचनों का क्या कारण था? (क) वे सभा में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करना चाहते थे। (ख) उन्हें राम के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित करना था। (ग) वे परशुराम की शक्ति से अनभिज्ञ थे। (घ) वे परशुराम को चुनौती देना चाहते थे।
  33. 1. “अरध निमेष कलप सम बीता” पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताइए कि कविता में यह किसके संदर्भ में कहा गया है और क्यों?
  34. 2. “सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा॥” पंक्ति के आधार पर बताइए कि परशुराम द्वारा दी गई इस चेतावनी का सभा में उपस्थित राज-समाज पर क्या प्रभाव पड़ा होगा? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
  35. 3. तुलसीदास ने राम और लक्ष्मण के माध्यम से एक ही परिस्थिति के प्रति दो अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दिखाई हैं। आपकी दृष्टि में परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए राम का ‘विनय’ का मार्ग उचित है या लक्ष्मण के ‘तर्क’ का? अपने उत्तर का उचित कारण और तर्क भी प्रस्तुत कीजिए।
  36. 4. ‘हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु॥’ श्री राम के हृदय में न हर्ष था, न विषाद। यह उनके व्यक्तित्व के किन गुणों को दर्शाता है? उनका भावनात्मक संतुलन इस पूरे पाठ में उन्हें अन्य पात्रों से अलग कैसे स्थापित करता है?
  37. 1. कल्पना कीजिए कि आप जनक की सभा में उपस्थित एक राजा हैं। परशुराम जी के आगमन से लेकर उनके गमन तक की कथा अपने शब्दों में लिखिए।
  38. 2. “अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं॥” जनक द्वारा डर से चुप रहने पर अन्य राजा मन में प्रसन्न क्यों हुए होंगे? (संकेत– सोचिए, यह मनुष्य के व्यवहार की किस सच्चाई को उजागर करता है?)
  39. नीचे कविता के संवादों की कुछ विशेषताएँ दी गई हैं। उन विशेषताओं को दर्शाने वाली पंक्तियों के उदाहरण कविता से ढूँढ़कर लिखिए। — संवादों की विशेषता: राम की विनम्रता / परशुराम का रौद्र रूप / लक्ष्मण का प्रत्युत्तर / पौराणिक संदर्भ / नाटकीयता
  40. आपने पढ़ा कि राजा जनक की सभा में उपस्थित विभिन्न पात्रों की मनःस्थिति अलग-अलग है। नीचे दिए गए भावों/मनःस्थिति को दर्शाने वाली पंक्तियों को कविता से चिह्नित कीजिए और बताइए कि यह भाव किस पात्र से संबंधित है और उसकी इस मनःस्थिति का कारण क्या है? — चिंता, क्रोध, व्यग्रता, भय, संयम/विनम्रता, ईर्ष्या/कुटिलता
  41. “अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं।” — परशुराम के पूछने पर जनक का मौन भयजनित है या विवेकपूर्ण निर्णय? संवाद की स्थिति के आधार पर विश्लेषण कीजिए। (सहायता के लिए पुस्तक ने ‘विश्लेषण कैसे करें’ के पाँच सूत्र दिए हैं।)
  42. “रे नृप बालक काल बस बोलत तोहि न सँभार। धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार॥” (क) यदि आप इन पंक्तियों को मंच पर बोलते, तो आपके चेहरे पर कौन-सा भाव होता?
  43. (ख) आपने अनुभव किया होगा कि इस कविता में परिस्थितिवश प्रत्येक पात्र एक अलग भाव का प्रतिनिधि बन जाता है। निम्नलिखित पात्रों को आप कौन-कौन से भावों द्वारा प्रदर्शित करेंगे— परशुराम, राजा जनक, लक्ष्मण, राम, सभा में उपस्थित अन्य राजा
  44. 1. सभा में परशुराम के प्रति राम के व्यवहार से उनकी विनम्रता, मर्यादा, धीर और उदात्त चरित्र के संबंध में पता चलता है जो किसी भी कुशल शासक के लिए आवश्यक है। आपको किन-किन परिस्थितियों में इन विशेषताओं का परिचय देना पड़ता है? चर्चा कीजिए और लिखिए।
  45. 2. कविता में वर्णित प्रसंग सीता-स्वयंवर की सभा का है। प्राचीन भारतीय समाज में वर-चयन के लिए स्वयंवर की प्रथा प्रचलित थी। इसके अनेक उदाहरण मिलते हैं। ऐसी किसी एक पौराणिक-ऐतिहासिक आदि घटना/प्रसंग का वर्णन कीजिए जिससे स्वयंवर विधि द्वारा विवाह की जानकारी मिलती है।
  46. 1. परशुराम के क्रोध को देखकर सीता और उनकी माता सुनयना दोनों चिंतित हैं और सीता के लिए एक-एक पल युग के समान भारी और लंबा प्रतीत हो रहा है। उनकी मनःस्थिति का अनुमान लगाते हुए उस क्षण दोनों के बीच चल रहा मौन संवाद लिखिए।
  47. 2. सभा में हो रहे संवाद को दूर बैठी सीता, राजा जनक और अन्य लोग भी सुन रहे थे। अपनी कल्पना और अनुमान के आधार पर लिखिए कि उस समय सीता के मन में किस तरह के भाव उत्पन्न हो रहे होंगे? सीता के दृष्टिकोण से पूरी घटना का विश्लेषण कीजिए। (संकेत– लक्ष्मण के प्रत्युत्तर पर चिंता, गर्व, हँसी, भय, शंका इत्यादि)
  48. 3. कविता में सभा में उपस्थित राजाओं ने अपनी वीरता, पराक्रम आदि का उल्लेख करते हुए अपना परिचय दिया है। यदि आपको अपना परिचय देना हो तो आप अपना परिचय किस प्रकार देना उचित समझेंगे? अपना परिचय देते हुए कुछ वाक्य लिखिए जिससे आपके व्यक्तित्व की महत्वपूर्ण बातों का पता चलता हो।
  49. नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए— “देखत भृगुपति बेषु कराला।” / “बोले परसुधरहि अपमाने॥” / “सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू” — यहाँ परशुराम को विभिन्न नामों से संबोधित किया गया है, जैसे- भृगुपति, परसुधर और भृगुकुलकेतू। इन नामों का अर्थ स्पष्ट कीजिए और बताइए कि कवि ने एक ही पात्र के लिए अलग-अलग नाम क्यों रखे हैं।
  50. आप इस कविता में अनेक विशेषताएँ देख सकते हैं, जैसे- दोहा-चौपाई का क्रम से होना, बिना वक्ता का नाम बताए उनका कथन कह देना, मुहावरों का उपयोग करना आदि। नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और उनके एक-एक उदाहरण दिए गए हैं। एक-एक उदाहरण आप लिखिए। — अनुप्रास अलंकार (एक ही वर्ण की बार-बार आवृत्ति) : अरि करनी करि करिअ लराई / अतिशयोक्ति अलंकार (बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना) : अरध निमेष कलप सम बीता / रूपक अलंकार (रूप का आरोपण करना) : पद सरोज मेले दोउ भाई
  51. यह कविता अवधी भाषा में लिखी गई है जो कि हिंदी भाषा का ही एक स्वरूप है और उत्तर प्रदेश के अनेक स्थानों पर बोली जाती है। कविता में ऐसे बहुत से शब्द आए हैं, जो अवधी भाषा के हैं। ऐसे शब्दों को पहचान कर उनके खड़ी बोली हिंदी रूप लिखिए। साथ ही आपकी भाषा में इनके लिए कौन-से शब्द प्रयुक्त होते हैं, उन्हें भी लिखिए। उदाहरण— कोही : क्रोधी / वेषु : वेष
  52. नीचे कोष्ठक में कविता से कुछ शब्द चुनकर दिए गए हैं। उन शब्दों से संबंधित लोकोक्ति और उनका अर्थ लिखकर स्वतंत्र वाक्यों में प्रयोग कीजिए। — मन, राम, राजा, बात, सिरु (सिर)
  53. अब आप नीचे दी गई चौपाई को गद्य-रूप में लिखिए— “अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं॥ सुर मुनि नाग नगर नर नारी। सोचहिं सकल त्रास उर भारी॥”
  54. 1. यह कविता संवाद का सुंदर उदाहरण है। तालिका में दिए गए कथनों को पढ़कर बताइए कि कौन-सा कथन किसका हो सकता है। अपनी समझ से सही (✓) का चिह्न लगाइए— (कथन: शिव के धनुष को तोड़ने वाला आपका कोई दास ही हो सकता है। / विधाता ने बनी-बनाई बात बिगाड़ दी। / सेवक वह होता है जो सेवा का काम करे। / इस कारण ये सब राजा आए हैं। / बचपन में हमने ऐसी बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ डाली हैं। / क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं कहते? / कहो जनक, किस कारण यह भीड़ है? / इसी धनुष पर इतनी ममता क्यों!) — पात्र: राम, लक्ष्मण, परशुराम, जनक, सीता की माता (सुनयना)
  55. 2. रामचरितमानस के इस प्रसंग का मंचन लोकनाट्य, रामलीला और कठपुतली कला में बड़ी जीवंतता से किया जा सकता है। कलात्मक तकनीकों (ध्वनि, भाव, संगीत, वेशभूषा) का उपयोग करते हुए कविता को एक दृश्य नाटक के रूप में प्रस्तुत कीजिए।
  56. 3. ‘कठिन परिस्थितियों में भी सत्य कहने का साहस करना आवश्यक है।’ इस विषय पर कक्षा में एक परिचर्चा अथवा वाद-विवाद गतिविधि के माध्यम से अपने विचार साझा कीजिए।
  57. पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अब अपने समूह में मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों— समाचार, धनुष, मन, नाग, नगर
  58. “अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा॥” — नीचे ‘धनुष’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है। इनके अतिरिक्त यदि आप धनुष शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
  59. उपर्युक्त वाक्य (“अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा॥”) को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
  60. बालकांड का यह अंश और गोस्वामी तुलसीदास जी की अन्य रचनाएँ इंटरनेट की सहायता से सुनिए और देखिए— तुलसीदास– राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद / दोहे– कबीर, रहीम, तुलसी / गोस्वामी तुलसीदास / कवि तुलसीदास और उनकी कविता

Chapter at a Glance

  • रचनाकार — गोस्वामी तुलसीदास का जन्म आज के उत्तर प्रदेश में हुआ था। पुस्तक के अनुसार उनका जीवन-काल 16वीं–17वीं शताब्दी (सन् 1532–1623) के मध्य माना गया है। रामचरितमानस उनका प्रसिद्ध महाकाव्य है, जो उनकी अनन्य रामभक्ति और सृजनात्मक कौशल का मनोरम उदाहरण है। उनकी अन्य प्रमुख रचनाएँ हैं — कवितावली, गीतावली, दोहावली, कृष्णगीतावली, विनयपत्रिका और हनुमान बाहुक । उनकी रचनाओं में राम मानवीय मर्यादाओं और आदर्शों के प्रतीक हैं, जिनके माध्यम से उन्होंने नीति, स्नेह, शील, विनय और त्याग जैसे मूल्यों को प्रतिष्ठित किया। मानव-प्रकृति, लोकजीवन और जीवन-जगत संबंधी गहरी अंतर्दृष्टि उनके काव्य की पहचान है। काशी में उनका देहावसान हुआ।
  • भाषा — तुलसीदास संस्कृत के श्रेष्ठ ज्ञाता थे और अवधी तथा ब्रज दोनों भाषाओं पर उनका समान अधिकार था। उन्होंने रामचरितमानस की रचना अवधी में की और विनयपत्रिका तथा कवितावली की रचना ब्रजभाषा में। इसलिए यह पाठ पूरी तरह अवधी में है — ‘बेषु’, ‘कराला’, ‘भुआला’, ‘चितवहिं’, ‘बहोरि’, ‘ढोटा’, ‘जोटा’, ‘बेगि’, ‘उलटउँ’, ‘जैहहिं’, ‘लरिकाईं’, ‘गोसाईं’ जैसे रूप उसी की देन हैं। पुस्तक स्वयं कहती है कि अवधी हिंदी भाषा का ही एक स्वरूप है और उत्तर प्रदेश के अनेक स्थानों पर बोली जाती है।
  • प्रसंग — यह अंश रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया है। सीता-स्वयंवर में श्रीराम द्वारा शिव-धनुष भंग का समाचार जब मुनि परशुराम को मिलता है, तो वे आक्रोशित होकर सभा में आते हैं। शिव-धनुष को खंडित देखकर वे तीव्र रोष प्रकट करते हैं और सभा में उपस्थित सभी राजाओं पर क्रोधित होते हैं। यहाँ तुलसीदास ने परशुराम के रोषपूर्ण और तेजस्वी रूप का वर्णन किया है। सभा में उपस्थित राजाओं का भय, विश्वामित्र और जनक की उपस्थिति, जनक द्वारा स्वयंवर का समाचार सुनाना और विश्वामित्र द्वारा राम-लक्ष्मण का परिचय — इन्हीं कड़ियों से होकर कथा आगे बढ़ती है।
  • कथ्य — पाठ में 24 चौपाइयाँ और 3 दोहे हैं और घटना-क्रम इस प्रकार है — परशुराम का भयानक वेष देखकर राजाओं का काँप उठना और नाम ले-लेकर दंडवत् करना; जनक और सीता का प्रणाम; विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण को परशुराम के चरणों में प्रणाम कराना; परशुराम का राम के रूप पर ठिठक जाना; फिर टूटा धनुष देखते ही क्रोध का फूट पड़ना — “ कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा ”; जनक का भयवश मौन; सभा में त्रास; सीता और सुनयना की चिंता; राम का शांत, विनम्र उत्तर — “ होइहि केउ एक दास तुम्हारा ”; परशुराम की चेतावनी कि तोड़ने वाला अलग हो जाए, नहीं तो सब राजा मारे जाएँगे; और अंत में लक्ष्मण का मुसकराकर व्यंग्य करना — “ बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं ”, जिस पर परशुराम और भड़क उठते हैं।
  • तीन चरित्र, तीन स्वर — पूरी कविता को तीन आवाज़ों से पहचाना जा सकता है। परशुराम का स्वर रौद्र है — आदेश, धमकी और अपमानसूचक संबोधन (‘जड़’, ‘मूढ़’, ‘रे नृप बालक’)। राम का स्वर विनय और मर्यादा का है — वे अपना नाम तक नहीं लेते, स्वयं को ‘दास’ कहते हैं और आज्ञा माँगते हैं। लक्ष्मण का स्वर व्यंग्य और निर्भीकता का है — वे मुसकराते हैं, शिव-धनुष को ‘धनुही’ बताकर उसकी महिमा घटा देते हैं और ‘गोसाईं’ जैसे आदर-शब्द को उपहास का औज़ार बना देते हैं। इन्हीं तीन स्वरों की टकराहट से कविता में नाटकीयता पैदा होती है।
  • रस-योजना — पाठ में तीन रस साथ-साथ चलते हैं। परशुराम के वचनों में रौद्र रस है (“अति रिस बोले बचन कठोरा”, “उलटउँ महि जहँ लहि तव राजू”)। सभा, नगर और सीता की मनःस्थिति में भयानक रस है (“सोचहिं सकल त्रास उर भारी”)। और लक्ष्मण के प्रत्युत्तर में हास्य-व्यंग्य है (“कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं”)। तुलसी की कुशलता यह है कि वे रौद्र के ठीक बीच में व्यंग्य रख देते हैं — इससे तनाव टूटता भी है और बढ़ता भी है। बीच में राम का शांत स्वर तीसरे धरातल की तरह खड़ा रहता है।
  • शिल्प — रचना चौपाई और दोहे के नियमित क्रम में चलती है — आठ चौपाइयों के बाद एक दोहा। चौपाई के हर चरण में 16 मात्राएँ होती हैं और दोहे में 13 + 11 । पुस्तक ने स्वयं तीन अलंकार और उनके उदाहरण दिए हैं — अनुप्रास (“अरि करनी करि करिअ लराई”), अतिशयोक्ति (“अरध निमेष कलप सम बीता”) और रूपक (“पद सरोज मेले दोउ भाई”)। इनके अतिरिक्त पाठ में उपमा (“सहसबाहु सम सो रिपु मोरा”), उत्प्रेक्षा (“सो जानइ जनु आइ खुटानी”), पुनरुक्ति प्रकाश (“कहि कहि”) और जगह-जगह वक्रोक्ति/व्यंग्य मिलते हैं। एक और विशेषता पुस्तक ने गिनाई है — बिना वक्ता का नाम बताए उसका कथन कह देना ।
  • मूल संवेदना — यह प्रसंग केवल एक झगड़े का वर्णन नहीं है। यह दिखाता है कि शक्ति के सामने कैसे खड़ा हुआ जाए । तीन रास्ते सामने रखे गए हैं — जनक का मौन , लक्ष्मण का तर्क और चुनौती , और राम का विनय । तुलसी किसी को गलत नहीं कहते, पर वे राम को उस बिंदु पर रखते हैं जहाँ “हृदयँ न हरषु बिषादु कछु” — न हर्ष, न विषाद। यही धीरोदात्त नायक का लक्षण है और यही किसी भी कुशल शासक की पहली योग्यता है। साथ ही ‘कुटिल भूप हरषे मन माहीं’ जैसी एक पंक्ति मनुष्य-स्वभाव की उस सच्चाई को उघाड़ देती है कि दूसरे की मुसीबत में लोग भीतर-भीतर प्रसन्न भी होते हैं।
  • अभ्यास क्या माँगता है — यह पाठ केवल अर्थ नहीं पूछता। मेरे उत्तर मेरे तर्क में विकल्प चुनकर तर्क भी देना है; मेरी समझ मेरे विचार में विनय बनाम तर्क पर अपना पक्ष रखना है; मेरी कल्पना मेरे अनुमान में सभा के एक राजा बनकर कथा लिखनी है; कविता का सौंदर्य और भाव-पहचान की अधूरी तालिकाएँ भरनी हैं; विश्लेषण कैसे करें के पाँच सूत्रों से जनक के मौन का विश्लेषण करना है; सृजन में मौन संवाद, सीता का दृष्टिकोण और आत्म-परिचय लिखना है; भाषा से संवाद में अलंकार, अवधी-खड़ी बोली, लोकोक्तियाँ, गद्य-रूप, कथन-मिलान, पहेलियाँ और भाषा संगम हैं; और खोजबीन में तुलसी को सुनना-देखना है।

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi – All Chapters

There are more chapters to study besides राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद in Hindi. Here are the NCERT Solutions for all chapters of Class 9 Hindi.

  • Chapter 1 दो बैलों की कथा
  • Chapter 2 क्या लिखूँ?
  • Chapter 3 संवादहीन
  • Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं
  • Chapter 5 आखिरी चट्टान तक
  • Chapter 6 रीढ़ की हड्डी
  • Chapter 7 मैं और मेरा देश
  • Chapter 8 पद
  • Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
  • Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे!
  • Chapter 11 झाँसी की रानी
  • Chapter 12 घर की याद

NCERT Solutions for Class 9 – All Subjects

Just like Chapter 9 of Hindi, you can get the exercise questions with answers for every other subject of Class 9. Here are the NCERT Solutions for all subjects of Class 9.

  • English
  • Hindi
  • Maths
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  • Science
  • Social Science

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 9 – An Overview

The key highlights of this study material are as follows.

AspectsDetails
ClassClass 9
SubjectHindi
Chapter NumberChapter 9
Chapter Nameराम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
Book Nameगंगा
Book ByNCERT (National Council of Educational Research and Training)
Educational Resource HereNCERT Solutions of Class 9 Hindi Chapter 9 for all exercises
More Questions Answers of This SubjectNCERT Solutions for Class 9 Hindi
Download Book ChapterNCERT Book Class 9 Hindi
All Questions Answers For This ClassNCERT Solutions for Class 9
Complete SolutionsNCERT Solutions

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद – FAQs

What are the NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद?

They are the complete, step-by-step answers to all the exercise and in-text questions of Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद from the NCERT Class 9 Hindi textbook गंगा, written by experts as per the latest NCERT syllabus.

How can I download the Class 9 Hindi Chapter 9 solutions PDF for free?

Open this page on aglasem, read the राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद questions with answers, and click the “Download Solutions PDF” link. The Class 9 Hindi Chapter 9 NCERT Solutions PDF is completely free to download.

Are these NCERT Solutions as per the latest 2026-27 syllabus?

Yes. The NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 9 are based on the latest NCERT textbook गंगा and the current 2026-27 CBSE syllabus, so the questions and answers match what you study in class.

Where can I get NCERT Solutions for the other chapters of Class 9 Hindi?

You can find the answers to every chapter on the NCERT Solutions for Class 9 Hindi page, and solutions for every subject on the NCERT Solutions for Class 9 page.

How do NCERT Solutions help in exam preparation?

They show the correct method to solve each question, help you write answers the way they are expected in exams, let you check and correct your own work, and save revision time — which together improve your marks in Class 9 Hindi.

If you have any queries on NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद, then please ask in the comments below.

NCERT Solutions
NCERT Solutions for Class 9
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Tags: Class 9thHindiNCERT Hindi SolutionsNCERT SolutionsNCERT Solutions Class 9
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