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Home » Extras » NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 पद (PDF) – 2026-27

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 पद (PDF) – 2026-27

by
September 10, 2026
in 9th Class

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 पद provide clear, step-by-step answers to every exercise and in-text question from the chapter पद of the NCERT textbook गंगा. Prepared by subject experts as per the latest NCERT (CBSE) syllabus for 2026-27, these NCERT Solutions for Class 9 Hindi help you understand each concept, write exam-ready answers, and check your own solutions. You can read them online below or download the free Class 9 Hindi Chapter 8 question-answer PDF.

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 पद

  • Class: Class 9
  • Subject: Hindi
  • Chapter: Chapter 8 – पद
  • Textbook: गंगा (NCERT)
  • Study material: NCERT Solutions – questions with answers, free PDF

These solutions answer all the exercise questions of Chapter 8 पद — including the in-text questions, short-answer and long-answer questions, and activities — with complete explanations so you can follow the method, not just the final answer. Read the full solutions below.

NCERT Solutions Class 9 Hindi Chapter 8 पद View Download

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 PDF Download

You can read the NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 online above, or download the complete question-answer PDF to study पद offline at any time.


NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 PDF Download Link – Click Here to Download Solutions PDF


Questions Covered in This Chapter

These NCERT Solutions answer all 36 questions of this chapter. The questions solved are:

  1. “अब कैसे छूटै राम रट लागी।” — इस पंक्ति का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  2. “प्रभु जी तुम चंदन हम पानी, जाकी अंग-अंग बास समानी।” — इस पंक्ति का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  3. “प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।” — इस पंक्ति का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  4. “प्रभु जी तुम दीपक, हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती।” — इस पंक्ति का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  5. “प्रभु जी तुम मोती, हम धागा, जैसे सोने मिलत सुहागा।” — इस पंक्ति का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  6. “प्रभु जी तुम स्वामी, हम दासा, ऐसी भगति करै रैदासा।” — इस पंक्ति का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  7. “जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ, तुम सौ तोरि कवन सौं जोरौ।” — इस पंक्ति का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  8. “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल एक भरोसां।” — इस पंक्ति का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  9. “जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा, तुम सा देव ओर नहिं दूजा।” — इस पंक्ति का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  10. “मैं अपनो मन हरि से जोरौ, हरि सो जोरि सबन सो तोरों।” — इस पंक्ति का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  11. “सबही पहर तुम्हारी आसा, मन क्रम वचन कहै रैदासा।” — इस पंक्ति का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
  12. निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं? 1. “अब कैसे छूटै राम रट लागी” पंक्ति का भाव है? (क) नाम उच्चारण की कठिनाई (ख) नाम रटकर याद करना (ग) आराध्य का नाम जपना (घ) मित्रों का नाम रटना
  13. 2. “प्रभु जी तुम चंदन हम पानी” पंक्ति में आराध्य और भक्त का संबंध किस रूप में व्यक्त हुआ है? (क) एकाकार और समरूप (ख) तरल और तीव्र सुगंध (ग) आश्रय और आश्रित (घ) द्रव और ठोस
  14. 3. “तुम दीपक, हम बाती” से रैदास का क्या भाव है? (क) दीपक और बाती का कोई मेल नहीं होता है। (ख) दीपक बिना बाती भी जल सकता है। (ग) भक्त आराध्य से अधिक महत्वपूर्ण है। (घ) भक्त का आराध्य से मेल जीवन को आलोकित करता है।
  15. 4. “जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ” पंक्ति में रैदास का क्या आशय है? (क) परोपकारी भक्ति भाव (ख) आराध्य से अटूट संबंध (ग) सांसारिक मोह (घ) कर्मकांड पर बल
  16. 5. “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा” पंक्ति से आप क्या समझते हैं? (क) तीर्थ और व्रत आवश्यक नहीं हैं। (ख) तीर्थ और व्रत सब आवश्यक हैं। (ग) तीर्थ जाने से मुक्ति निश्चित है। (घ) आराध्य के चरणों में सच्चा आश्रय है।
  17. 6. सर्वव्यापक ईश्वर की अवधारणा किस पंक्ति में व्यक्त होती है? (क) “जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा” (ख) “जाकी जोति बरै दिन राती” (ग) “तुम दीपक, हम बाती” (घ) “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा”
  18. नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझाते हुए भाव स्पष्ट कीजिए। (क) “प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।”
  19. (ख) “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल एक भरोसां।”
  20. नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए— 1. “जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ” पंक्ति में रैदास की अपने आराध्य में अटूट निष्ठा का भाव है। इससे आप क्या समझते हैं? विस्तार से लिखिए।
  21. 2. रैदास ने तीर्थ और व्रत के स्थान पर किस साधन को भक्ति का प्रमुख आधार माना है? आपके विचार से भक्ति के क्या आधार हो सकते हैं?
  22. 3. दोनों पदों में भक्त और आराध्य के संबंध को किन-किन प्रतीकों/उपमाओं से व्यक्त किया गया है? लिखिए।
  23. “प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।” — उपर्युक्त पंक्ति के रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए। इसमें अनुप्रास अलंकार का प्रयोग किया गया है। जिस रचना में व्यंजन वर्णों की आवृत्ति एक से अधिक बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। — इस अलंकार को समझाइए और पदों में से अनुप्रास के और उदाहरण छाँटिए।
  24. “प्रभु जी तुम मोती, हम धागा, जैसे सोने मिलत सुहागा।” — उपर्युक्त रेखांकित अंश में उपमा अलंकार है। किसी प्रसिद्ध वस्तु की समानता के आधार पर जब किसी वस्तु या व्यक्ति के रूप, गुण, धर्म का वर्णन किया जाता है तो वहाँ उपमा अलंकार होता है। — इस अलंकार को समझाइए और पदों में से उपमा के और उदाहरण छाँटिए।
  25. “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल एक भरोसां।” — उपर्युक्त रेखांकित अंश में रूपक अलंकार है। रूपक अलंकार वहाँ होता है जहाँ रूप और गुण की अत्यधिक समानता के कारण उपमेय में उपमान का आरोप कर अभेद स्थापित किया जाए। — इस अलंकार को समझाइए और पदों में से रूपक के और उदाहरण छाँटिए।
  26. अब आप अपनी पाठ्यपुस्तक में सम्मिलित कविताओं में अनुप्रास, उपमा और रूपक अलंकार वाली अन्य पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए।
  27. नीचे दी गई सूची को ध्यान से देखिए। इस सूची में रैदास के दोनों पदों से कुछ विशेषताएँ चुनकर दी गई हैं। पदों में से चुनकर इन विशेषताओं को दर्शाती पंक्तियाँ लिखिए। उदाहरण के लिए पहली विशेषता के सामने पंक्ति दी गई है। — विशेषताएँ: अनन्य भक्ति भाव / सरल और लोकधर्मी भाषा / उपमा और तुलना / लयात्मकता और गेयता/ध्वन्यात्मकता / दृढ़ निष्ठा और आस्था
  28. 1. तीर्थ और व्रत के स्थान पर रैदास ने आराध्य की भक्ति को प्रधान माना है। भक्तिकाल के कवि रैदास की तरह कबीर भी निराकार आराध्य की भक्ति पर बल देते हैं। तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक परिस्थितियों के आधार पर बताइए कि इसके क्या कारण हो सकते हैं? (संकेत– आप अपने सामाजिक विज्ञान के शिक्षक की सहायता भी ले सकते हैं।)
  29. 2. “सोने मिलत सुहागा” — ‘सुहागा’ एक प्राकृतिक खनिज है जिसके प्रयोग से सोने की अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं और उसकी चमक बढ़ जाती है। ‘सुहागा’ का रासायनिक नाम और उसकी विशेषताएँ अपने विज्ञान के शिक्षक से चर्चा करके लिखिए।
  30. 1. पठित पदों में से संज्ञा और सर्वनाम के तीन-तीन उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
  31. 2. रैदास के इन दोनों पदों में बहुत से ऐसे शब्द प्रयुक्त हुए हैं जिनके स्थान पर अन्य शब्दों का प्रयोग होता है। नीचे सूची में दिए गए शब्दों को देखिए। आप या आपके आस-पास के लोग इन शब्दों के लिए किन अन्य शब्दों का प्रयोग करते हैं? लिखिए। — मोरा, चकोरा, बाती, राती, सोने, तीरथ, बरत
  32. 1. कक्षा में समूह बनाकर इन दोनों पदों को गाकर/पाठ करके प्रस्तुत कीजिए।
  33. 2. कल्पना कीजिए कि पद में आई उपमाओं के आधार पर भक्त और आराध्य आपस में बात कर रहे हैं। इस दृश्य को आधार बनाकर संवाद-लेखन कीजिए।
  34. 3. “जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ” पंक्ति को आधार बनाकर अटूट मित्रता पर एक लघुकथा तैयार कीजिए।
  35. आपने रैदास के पद पढ़े। अब आप रैदास की तरह ही महाराष्ट्र के संत कवि नामदेव के दिए गए दो पद पढ़िए। … अब अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि रैदास तथा नामदेव के पदों में क्या-क्या अंतर है और क्या-क्या समानताएँ हैं?
  36. रैदास के जीवन और पदों के विषय में पुस्तकालय और इंटरनेट से खोजकर पढ़िए। कुछ लिंक नीचे दिए गए हैं।

Chapter at a Glance

  • रचनाकार — रैदास नाम से विख्यात संत रविदास का जन्म काशी (वाराणसी) में हुआ। पुस्तक के अनुसार उनका जीवन-काल 15वीं शताब्दी (सन् 1388–1518) माना जाता है। वे संत कवियों में गिने जाते हैं। उन्होंने बाह्य आडंबरों का खंडन कर मन की शुद्धता और आंतरिक भक्ति को ही सच्चा धर्म माना है। उनकी रचनाएँ रैदास बानी में संकलित हैं और उनकी अनेक भक्ति-रचनाएँ आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में भी शामिल हैं।
  • भाषा — रैदास ने अपनी काव्य-रचनाओं में सरल, व्यावहारिक ब्रजभाषा का प्रयोग किया है, जिसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और उर्दू-फ़ारसी के शब्दों का भी मिश्रण है। संत कवियों की ऐसी मिली-जुली भाषा को सधुक्कड़ी कहा जाता है। यही कारण है कि पदों में ‘जाकी’, ‘बरै’, ‘राती’, ‘तोरौ’, ‘जोरौ’, ‘कवन’, ‘अंदेसा’, ‘भरोसां’ जैसे रूप एक साथ मिलते हैं। उनकी रचनाएँ आज भी समानता, प्रेम और भाईचारे का संदेश देती हैं।
  • पहला पद — कथ्य — पद की टेक है “अब कैसे छूटै राम रट लागी।” इसके बाद पाँच पंक्तियों में भक्त और आराध्य के रिश्ते के पाँच चित्र आते हैं — चंदन–पानी , घन (बादल)–मोर , दीपक–बाती , मोती–धागा और स्वामी–दास । पुस्तक की भूमिका इसे इस तरह कहती है कि जैसे इन जोड़ों का संबंध अटूट होता है, वैसे ही भक्त से उसके आराध्य अलग नहीं हो सकते। इस पद में अनन्य भक्ति और आराध्य के प्रति समर्पण का भाव प्रकट होता है।
  • दूसरा पद — कथ्य — इसमें भी आराध्य से भक्त का अटूट नाता व्यक्त हुआ है, पर स्वर बदल जाता है — यहाँ भक्त घोषणा करता है। “जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ” कहकर वह भक्ति को एकतरफ़ा और बिना शर्त बना देता है। वह तीर्थ और व्रत छोड़ सकता है, पर प्रभु-चरणों की भक्ति नहीं। ‘जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा’ में सर्वव्यापक ईश्वर की अवधारणा है और ‘मन क्रम वचन’ में मन, कर्म और वचन की एकता । यह पद निष्ठा, विश्वास और अडिग भक्ति को व्यंजित करता है।
  • काव्य-नायक — दोनों पदों का ‘मैं’ कोई विद्वान या पुरोहित नहीं, एक साधारण भक्त है जो अपने आराध्य से दास्य भाव से बात करता है — “प्रभु जी तुम स्वामी, हम दासा”। वह मंदिर, तीर्थ या शास्त्र के सहारे नहीं, केवल भरोसे के सहारे खड़ा है — “तुम्हरे चरन कमल एक भरोसां”। यही रैदास की भक्ति का लोकतांत्रिक स्वर है, जो जाति और कर्मकांड की दीवारें गिरा देता है।
  • शिल्प — दोनों रचनाएँ पद हैं — यानी गाई जाने वाली रचनाएँ। पहली पंक्ति टेक (ध्रुवपद) है, जो गायन में बार-बार लौटती है। हर पंक्ति दो चरणों में बँटी है और चरणांत में तुक मिलती है — पानी–समानी, मोरा–चकोरा, बाती–राती, धागा–सुहागा, दासा–रैदासा । पद के अंत में कवि अपना नाम रखता है, जिसे छाप या भणिता कहते हैं — ‘कहै रैदासा’।
  • अलंकार — यही पाठ पाठ्यपुस्तक में अनुप्रास, उपमा और रूपक की परिभाषा देता है। पुस्तक के अपने उदाहरण हैं — अनुप्रास: “चितवत चंद चकोरा” , उपमा: “सोने मिलत सुहागा” , रूपक: “चरन कमल” । ‘तुम चंदन हम पानी’, ‘तुम दीपक, हम बाती’, ‘तुम मोती, हम धागा’ जैसे प्रयोग भी रूपक हैं, क्योंकि इनमें ‘जैसे/सा’ जैसा कोई वाचक शब्द नहीं, सीधा आरोप है।
  • मूल संवेदना — भक्ति कोई बाहरी क्रिया नहीं, संबंध है — और वह संबंध ऐसा है जिसे तोड़ा नहीं जा सकता। रैदास इस बात को दर्शन की भाषा में नहीं, घर-आँगन की चीज़ों की भाषा में कहते हैं — चंदन, पानी, दीया, बाती, मोती, धागा, सोना, सुहागा। इसीलिए ये पद पाँच सौ साल बाद भी उतने ही सहज लगते हैं। साथ ही ये पद उस समाज से भी सवाल करते हैं जो तीर्थ और व्रत को भक्ति की शर्त बना देता था।
  • अभ्यास क्या माँगता है — यह पाठ केवल अर्थ नहीं पूछता। मेरे उत्तर मेरे तर्क में विकल्प चुनकर तर्क भी देना है; अर्थ और भाव में पंक्तियों की व्याख्या करनी है; कविता का सौंदर्य में अलंकार पहचानने हैं और पाठ्यपुस्तक की अन्य कविताओं से भी उदाहरण खोजने हैं; कविता की कुछ अन्य विशेषताएँ की अधूरी तालिका भरनी है; विषयों से संवाद में भक्तिकाल की सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों तक जाना है और ‘सुहागा’ पर विज्ञान के शिक्षक से चर्चा करनी है; सृजन में गायन, संवाद-लेखन और लघुकथा है; और झरोखे से में संत नामदेव के दो पदों से तुलना करनी है।

How to Download NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 PDF

Follow these simple steps to get the पद questions-and-answers PDF from गंगा.

  1. Search NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 aglasem and open this page.
  2. Read the exercise questions with answers for पद shown above.
  3. Click the Download PDF link to save the पद solutions to your device.

NCERT Solutions for Class 9 Hindi – All Chapters

There are more chapters to study besides पद in Hindi. Here are the NCERT Solutions for all chapters of Class 9 Hindi.

  • Chapter 1 दो बैलों की कथा
  • Chapter 2 क्या लिखूँ?
  • Chapter 3 संवादहीन
  • Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं
  • Chapter 5 आखिरी चट्टान तक
  • Chapter 6 रीढ़ की हड्डी
  • Chapter 7 मैं और मेरा देश
  • Chapter 8 पद
  • Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
  • Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे!
  • Chapter 11 झाँसी की रानी
  • Chapter 12 घर की याद

NCERT Solutions for Class 9 – All Subjects

Just like Chapter 8 of Hindi, you can get the exercise questions with answers for every other subject of Class 9. Here are the NCERT Solutions for all subjects of Class 9.

  • English
  • Hindi
  • Maths
  • Sanskrit
  • Science
  • Social Science

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 – An Overview

The key highlights of this study material are as follows.

AspectsDetails
ClassClass 9
SubjectHindi
Chapter NumberChapter 8
Chapter Nameपद
Book Nameगंगा
Book ByNCERT (National Council of Educational Research and Training)
Educational Resource HereNCERT Solutions of Class 9 Hindi Chapter 8 for all exercises
More Questions Answers of This SubjectNCERT Solutions for Class 9 Hindi
Download Book ChapterNCERT Book Class 9 Hindi
All Questions Answers For This ClassNCERT Solutions for Class 9
Complete SolutionsNCERT Solutions

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 पद – FAQs

What are the NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 पद?

They are the complete, step-by-step answers to all the exercise and in-text questions of Chapter 8 पद from the NCERT Class 9 Hindi textbook गंगा, written by experts as per the latest NCERT syllabus.

How can I download the Class 9 Hindi Chapter 8 solutions PDF for free?

Open this page on aglasem, read the पद questions with answers, and click the “Download Solutions PDF” link. The Class 9 Hindi Chapter 8 NCERT Solutions PDF is completely free to download.

Are these NCERT Solutions as per the latest 2026-27 syllabus?

Yes. The NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 are based on the latest NCERT textbook गंगा and the current 2026-27 CBSE syllabus, so the questions and answers match what you study in class.

Where can I get NCERT Solutions for the other chapters of Class 9 Hindi?

You can find the answers to every chapter on the NCERT Solutions for Class 9 Hindi page, and solutions for every subject on the NCERT Solutions for Class 9 page.

How do NCERT Solutions help in exam preparation?

They show the correct method to solve each question, help you write answers the way they are expected in exams, let you check and correct your own work, and save revision time — which together improve your marks in Class 9 Hindi.

If you have any queries on NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 पद, then please ask in the comments below.

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