NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे! provide clear, step-by-step answers to every exercise and in-text question from the chapter भारति, जय, विजयकरे! of the NCERT textbook गंगा. Prepared by subject experts as per the latest NCERT (CBSE) syllabus for 2026-27, these NCERT Solutions for Class 9 Hindi help you understand each concept, write exam-ready answers, and check your own solutions. You can read them online below or download the free Class 9 Hindi Chapter 10 question-answer PDF.
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे!
- Class: Class 9
- Subject: Hindi
- Chapter: Chapter 10 – भारति, जय, विजयकरे!
- Textbook: गंगा (NCERT)
- Study material: NCERT Solutions – questions with answers, free PDF
These solutions answer all the exercise questions of Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे! — including the in-text questions, short-answer and long-answer questions, and activities — with complete explanations so you can follow the method, not just the final answer. Read the full solutions below.
NCERT Solutions Class 9 Hindi Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे! View Download































































NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 10 PDF Download
You can read the NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 10 online above, or download the complete question-answer PDF to study भारति, जय, विजयकरे! offline at any time.
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 10 PDF Download Link – Click Here to Download Solutions PDF
Questions Covered in This Chapter
These NCERT Solutions answer all 44 questions of this chapter. The questions solved are:
- “भारति, जय, विजयकरे! कनक-शस्य-कमलधरे!” — इन पंक्तियों का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “लंका पदतल शतदल,” — इस पंक्ति का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “गर्जितोर्मि सागर-जल / धोता शुचि चरण युगल” — इन पंक्तियों का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “स्तव कर बहु-अर्थ-भरे!” — इस पंक्ति का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “तरु-तृण-वन-लता वसन, / अंचल में खचित सुमन;” — इन पंक्तियों का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “गंगा ज्योतिर्जल-कण / धवल धार हार गले।” — इन पंक्तियों का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “मुकुट शुभ्र हिम-तुषार, / प्राण प्रणव ओंकार,” — इन पंक्तियों का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- “ध्वनित दिशाएँ उदार, / शतमुख-शतरव-मुखरे!” — इन पंक्तियों का सरल अर्थ, भाव और शिल्प स्पष्ट कीजिए।
- निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं? 1. “भारति, जय, विजयकरे” कविता में विशेष रूप से— (क) भारत की भौगोलिक संरचना की प्रशस्ति की गई है। (ख) भारत की सांस्कृतिक विविधता बताई गई है। (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है। (घ) भारत के खनिज पदार्थों के बारे में बताया गया है।
- 2. “कनक-शस्य-कमल धरे” पंक्ति का भावार्थ है— (क) भारत की धन-धान्य संपन्नता (ख) भारत की नदियों का सौंदर्य (ग) भारत के लोक-जीवन की सुंदरता (घ) भारत की सैन्य शक्ति और औद्योगिक विकास
- 3. समस्त विश्व में भारत के महत्व का उद्घोष करने वाली पंक्तियाँ हैं— (क) गंगा ज्योतिर्जल-कण/ धवल धार हार गले (ख) गर्जितोर्मि सागर-जल/ धोता शुचि चरण युगल (ग) भारति, जय, विजयकरे/ कनक-शस्य-कमलधरे! (घ) ध्वनित दिशाएँ उदार/ शतमुख-शतरव-मुखरे!
- 4. कविता की भाषा और शैली किस विशेषता से संपन्न है? (क) सरल, बोल-चाल की भाषा (ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त (ग) सरस और हास्य-व्यंग्यपूर्ण (घ) संवादात्मक और विश्लेषणात्मक
- 5. भारत के वस्त्रों में ‘तरु-तृण-वन-लता’ और गले में ‘गंगा-धारा’ को चित्रित कर कवि किस प्रकार की चेतना का संदेश देते हैं? (क) पर्यावरणीय और सांस्कृतिक (ख) राष्ट्रीयता और देशप्रेम (ग) ऐतिहासिक और भौगोलिक (घ) सामाजिक और राजनीतिक
- नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझते हुए इनका भाव स्पष्ट कीजिए— (क) “लंका पदतल शतदल, गर्जितोर्मि सागर-जल धोता शुचि चरण युगल!”
- (ख) “प्राण प्रणव ओंकार, ध्वनित दिशाएँ उदार, शतमुख-शतरव-मुखरे!”
- नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए— 1. कविता में कवि की किस भावना की अभिव्यक्ति मिलती है?
- 2. कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है? क्या आप मानते हैं कि प्रकृति का संरक्षण करना भी देशप्रेम का काम है? क्यों?
- 3. “कनक-शस्य-कमलधरे!” पंक्ति भारतभूमि की किन-किन विशेषताओं की ओर संकेत कर रही है?
- 4. “मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट बताया गया है, क्यों?
- नीचे दी गई पंक्तियों को पढ़िए — “भारति, जय, विजयकरे! कनक-शस्य-कमलधरे!” — इन पंक्तियों में कवि ने चित्रात्मक भाषा का प्रयोग करते हुए भारतभूमि का मनोरम चित्र प्रस्तुत किया है। इस कविता की कुछ अन्य विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है। कविता में से उन विशेषताओं वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए— प्रकृति का मानवीकरण / आलंकारिक प्रयोग / समस्त पद/सामासिक पद का प्रयोग / संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोग
- 1. स्वतंत्रता-पूर्व लिखी इस कविता में भारत को ज्ञान, कृषि और संस्कृति के प्रतीक/परिचायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान संदर्भ में यदि आपको भारत को एक नए रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिले तो आप भारत की किन विशेषताओं और विविधताओं को सम्मिलित करेंगे?
- 2. “शतमुख-शतरव-मुखरे!” पंक्ति में भारत के विविध पर्व, उत्सव और रीति-रिवाज किस प्रकार ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करते हैं?
- 3. भारत को सुदृढ़ करने में इसकी प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान-परंपरा के महत्व को बताते हुए संक्षिप्त लेख लिखिए।
- 4. कविता में गंगा को भारत के स्वच्छ और श्वेत हार एवं हिमालय को मुकुट के रूप में अभिव्यक्त किया गया है। वर्तमान संदर्भ में बताइए कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने हमारी नदियों और हिमालय को किस प्रकार प्रभावित किया है?
- आप अपने कक्षा-समूह में मिलकर भारत की सांस्कृतिक विविधता पर आधारित एक पावरपॉइंट प्रस्तुति/पोस्टर/चार्ट/कोलाज तैयार कीजिए और इसे अपनी कक्षा में दिखाइए। आप भारत के विभिन्न राज्यों पर केंद्रित पावरपॉइंट प्रस्तुति/पोस्टर/चार्ट/कोलाज भी बना सकते हैं।
- 1. मान लीजिए आपको भारत को एक मनुष्य के रूप में कल्पित करते हुए सुसज्जित करने का अवसर मिले तो आप अपने राज्य के किन सांस्कृतिक, पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, चिह्नों, पुष्पों आदि का प्रयोग कर उसकी साज-सज्जा करेंगे?
- 2. भारत पर आधारित एक डाक टिकट, पोस्टर या पुस्तक के लिए आवरण पृष्ठ बनाइए और बताइए कि आप उसमें किन-किन प्रतीकों को सम्मिलित करेंगे और क्यों?
- 3. नदी की यात्रा — गंगा नदी की अपने उद्गम से लेकर बंगाल की खाड़ी में विलीन होने तक की पूरी यात्रा के बीच में आने वाली प्राकृतिक, सांस्कृतिक, भाषिक आदि विशेषताओं का वर्णन करते हुए एक रोचक यात्रा-वृत्तांत लिखिए। (संकेत– पर्वतीय सौंदर्य से लेकर गंगासागर तक की संस्कृति इत्यादि)
- भारत की एक विशेषता उसकी बहुभाषिकता है। यदि आपको एक सचेत नागरिक के रूप में भारत से अपनी मातृभाषा में संवाद का अवसर मिले तो आप किन विषयों पर और क्या-क्या संवाद करना चाहेंगे? इन संवादों को अपनी मातृभाषा और हिंदी में लिखिए। (संकेत– समाज, पर्यावरण, संस्कृति आदि।)
- “स्तव कर बहु-अर्थ-भरे” — उपर्युक्त पंक्ति में भारत की प्रशंसा विविध अर्थों में की गई है। आप भी अपनी मातृभाषा में भारत की स्तुति के लिए एक कविता की रचना कीजिए और उसका भावार्थ हिंदी में भी लिखिए।
- कविता में से चुनकर कुछ सामासिक पद (शब्द) नीचे दिए गए हैं। उनके समास-विग्रह अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। — शतदल
- — ज्योतिर्जल
- — शतमुख
- — सागरजल
- कविता में आए अन्य सामासिक पदों को भी छाँटकर उनका समास-विग्रह और भेद लिखिए।
- (क) कविता में जहाँ-जहाँ अनुप्रास अलंकार आया है, उन पंक्तियों को खोजकर लिखिए।
- (ख) कविता की उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ रूपक अलंकार है। साथ ही यह भी बताइए कि कवि ने किस प्राकृतिक दृश्य या वस्तु को भारत का रूप मानकर चित्रित किया है?
- “तरु-तृण-वन-लता वसन/ अंचल में खचित सुमन” — वन, लता, पुष्प आदि भारत के अमूल्य प्राकृतिक संसाधन हैं। इनके संरक्षण के लिए सरकार द्वारा बनाए गए अधिनियमों के बारे में सूचना एकत्रित कीजिए और वन संरक्षण के लिए बनाए नियमों पर विचार कीजिए।
- “कनक-शस्य-कमलधरे” — कविता में आए ‘शस्य’ शब्द का अर्थ ‘उपज’ भी होता है। नीचे ‘उपज’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है। — इनके अतिरिक्त यदि आप ‘शस्य’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
- — उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
- सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की भाँति मैथिलीशरण गुप्त ने भी भारत का मनोरम और ओजस्वी गुणगान किया है। नीचे उनकी चर्चित कविता ‘जय जय भारतमाता’ का एक अंश दिया गया है — इसका अर्थ और भाव स्पष्ट कीजिए तथा बताइए कि यह ‘भारति, जय, विजयकरे!’ से किन बातों में मिलती है और किन बातों में अलग है।
- (इस कविता को पुस्तकालय से ढूँढ़कर पूरा पढ़िए।)
- देशप्रेम से संबंधित अन्य कविताएँ पुस्तकालय, इंटरनेट से खोजकर पढ़िए और किसी एक कविता का कक्षा में वाचन भी कीजिए।
- इस कविता की तरह ही संस्कृतनिष्ठ शब्दावली से युक्त निराला की एक अन्य कविता, ‘वर दे, वीणावादिनि वर दे!’ पुस्तकालय, इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
Chapter at a Glance
- रचनाकार — सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म सन् 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ। वे मूलतः गढ़ाकोला (उन्नाव), उत्तर प्रदेश के निवासी थे। उनकी औपचारिक शिक्षा नौवीं तक महिषादल में ही हुई और आगे का सारा ज्ञान उन्होंने स्वाध्याय से अर्जित किया — संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेज़ी तीनों भाषाएँ उन्होंने स्वयं पढ़कर सीखीं। यही स्वाध्याय इस कविता की संस्कृतनिष्ठ शब्दावली में साफ़ दिखाई देता है। उनका निधन सन् 1961 में हुआ।
- रचना-संसार — निराला की प्रमुख काव्य रचनाएँ हैं — अनामिका , परिमल , गीतिका , कुकुरमुत्ता और नए पत्ते । उपन्यास, कहानी, आलोचना और निबंध लेखन में भी उनकी ख्याति अविस्मरणीय है। निराला रचनावली के आठ खंडों में उनका संपूर्ण साहित्य प्रकाशित है। उनकी रचनाओं में दार्शनिकता, विद्रोह, क्रांति, प्रेम की तरलता और प्रकृति का विराट तथा उदात्त चित्र उपस्थित है। छायावादी रचनाकारों में सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग उन्होंने ही किया, और उपेक्षितों तथा पीड़ितों के प्रति उनकी कविताओं में गहरी सहानुभूति मिलती है।
- कथ्य — ‘भारति, जय, विजयकरे!’ निराला की देशप्रेम से ओत-प्रोत एक प्रेरणादायक रचना है। कविता के आरंभ में ही कवि ‘भारति, जय, विजयकरे!’ कहकर भारत को विजयश्री प्राप्त करने की कामना करता है। वह भारतभूमि को ‘कनक-शस्य-कमलधरे!’ कहकर संबोधित करता है, जो भारत की कृषि-परंपरा और श्रम के सौंदर्य को दर्शाता है। पूरी कविता एक ही लंबा संबोधन है — कवि भारत से कुछ माँगता नहीं, केवल उसका रूप गिनाता चला जाता है ।
- चित्र-योजना — कविता में भारत की भौगोलिक सुंदरता का ऐसा चित्र खींचा गया है मानो भारत कोई देवी हो, जिसके चरणों को समुद्र अपने जल से धोता है । नदी, वन, पुष्प, हिमालय, गंगा आदि प्राकृतिक शोभा को भारत के वस्त्राभूषण की तरह प्रस्तुत किया गया है — लंका चरणों के नीचे खिला कमल है, वन-वनस्पति वस्त्र हैं, फूल आँचल में जड़े हैं, गंगा गले का उजला हार है और हिमालय की बर्फ़ सिर का मुकुट। कवि भारत को एक चेतन सत्ता के रूप में देखता है, जिसकी दिशाओं में ‘ओंकार’ की गूँज हो रही है और जो अनेक तरह के स्वरों और विचारों से समृद्ध है।
- काव्य-नायिका — कविता की केंद्रीय उपस्थिति ‘ भारति ’ है। शब्द-संपदा के अनुसार ‘भारति/भारती’ का अर्थ है — सरस्वती, वाणी, वाणी की अधिष्ठात्री, भारतमाता । यही दोहरा अर्थ कविता का प्राण है: संबोधन एक साथ ज्ञान की देवी और मातृभूमि — दोनों तक जाता है। इसीलिए कविता में अन्न भी है और ओंकार भी, फ़सल भी है और वाणी भी। कवि स्वयं कहता है — ‘स्तव कर बहु-अर्थ-भरे!’ यानी यह स्तुति ही बहु-अर्थी है।
- भाषा-शैली — भाषा खड़ी बोली है, पर तत्सम-बहुल और अत्यंत संस्कृतनिष्ठ — शुचि, युगल, स्तव, तरु, तृण, वसन, खचित, सुमन, धवल, शुभ्र, प्रणव, ओंकार, मुखर। शैली की तीन पहचानें हैं — (1) संबोधन-शैली : ‘विजयकरे!’, ‘कमलधरे!’, ‘बहु-अर्थ-भरे!’, ‘मुखरे!’ — चारों संबोधन-पद हैं; (2) समास-बहुलता : ‘कनक-शस्य-कमलधरे’, ‘तरु-तृण-वन-लता वसन’, ‘शतमुख-शतरव-मुखरे’; (3) क्रिया की न्यूनता : पूरी कविता में ‘धोता’ के अतिरिक्त लगभग कोई क्रिया नहीं — कवि वाक्य नहीं बनाता, चित्र रखता चला जाता है । इसी से भाषा में ओज गुण उत्पन्न होता है।
- शिल्प और छंद — पाठ की भूमिका बताती है कि निराला ने छायावादियों में सबसे पहले मुक्त छंद अपनाया, पर यह कविता उनका दूसरा पक्ष दिखाती है — यह पूरी तरह तुकांत और गेय है। तुक-योजना देखने लायक है: हर छंद के पहले तीन चरण आपस में तुक मिलाते हैं (शतदल–सागर-जल–युगल; वसन–सुमन–कण; तुषार–ओंकार–उदार) और चौथा चरण हर बार आरंभिक ‘-रे’ की तुक पर लौट आता है (विजयकरे–कमलधरे–भरे–गले–मुखरे)। इससे कविता में आगे बढ़ने और लौट आने — दोनों की गति एक साथ बनी रहती है, ठीक जयघोष की तरह।
- अलंकार — कविता अनुप्रास से भरी हुई है — ‘ क नक … क मल’, ‘ ल ंका पदत ल शतद ल ’, ‘ श ुचि च रण’, ‘ ध वल ध ार’, ‘ प्रा ण प्र णव’, ‘ श तमुख- श तरव’। रूपक भी बार-बार आता है — हिमालय पर मुकुट का, गंगा-धारा पर हार का, वन-वनस्पति पर वस्त्र का और लंका पर चरण-तल के कमल का आरोप। पुस्तक स्वयं ‘शतमुख-शतरव-मुखरे!’ को अनुप्रास का और ‘मुकुट शुभ्र हिम-तुषार’ को रूपक का उदाहरण बताती है। साथ ही पूरी कविता में प्रकृति का मानवीकरण है — समुद्र चरण धोता है, दिशाएँ बोलती हैं।
- मूल संवेदना — यह कविता स्वतंत्रता-पूर्व लिखी गई है, इसलिए इसका देशप्रेम नारा नहीं, वंदना है। कवि भारत को शक्ति, अन्न, जल, वन, ज्ञान और ध्वनि — इन सबका एक जीवंत शरीर मानकर देखता है। इसका सीधा अर्थ यह निकलता है कि नदी, वन और हिमालय की रक्षा करना भी देश की ही रक्षा है — क्योंकि वे देश के ‘अंग’ हैं, संसाधन भर नहीं। पुस्तक का अभ्यास इसी सूत्र को आगे बढ़ाता है और प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन तथा वन-संरक्षण तक ले जाता है।
- अभ्यास क्या माँगता है — यह पाठ केवल अर्थ नहीं पूछता। मेरे उत्तर मेरे तर्क में विकल्प चुनकर तर्क भी देना है; अर्थ और भाव में दो अंशों की व्याख्या करनी है; कविता का सौंदर्य में पुस्तक की अधूरी तालिका कविता की पंक्तियाँ ढूँढ़कर भरनी है; विषयों से संवाद में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’, लेख-लेखन और पर्यावरण तक जाना है; सृजन में डाक टिकट, आवरण पृष्ठ और गंगा का यात्रा-वृत्तांत है; भाषा से संवाद में समास-विग्रह और अलंकार दोनों का अभ्यास है; भाषा संगम में ‘शस्य’ शब्द अठारह भारतीय भाषाओं में देखना है; और झरोखे से में मैथिलीशरण गुप्त की ‘जय जय भारतमाता’ से तुलना करनी है।
How to Download NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 10 PDF
Follow these simple steps to get the भारति, जय, विजयकरे! questions-and-answers PDF from गंगा.
- Search NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 10 aglasem and open this page.
- Read the exercise questions with answers for भारति, जय, विजयकरे! shown above.
- Click the Download PDF link to save the भारति, जय, विजयकरे! solutions to your device.
NCERT Solutions for Class 9 Hindi – All Chapters
There are more chapters to study besides भारति, जय, विजयकरे! in Hindi. Here are the NCERT Solutions for all chapters of Class 9 Hindi.
- Chapter 1 दो बैलों की कथा
- Chapter 2 क्या लिखूँ?
- Chapter 3 संवादहीन
- Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं
- Chapter 5 आखिरी चट्टान तक
- Chapter 6 रीढ़ की हड्डी
- Chapter 7 मैं और मेरा देश
- Chapter 8 पद
- Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
- Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे!
- Chapter 11 झाँसी की रानी
- Chapter 12 घर की याद
NCERT Solutions for Class 9 – All Subjects
Just like Chapter 10 of Hindi, you can get the exercise questions with answers for every other subject of Class 9. Here are the NCERT Solutions for all subjects of Class 9.
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 10 – An Overview
The key highlights of this study material are as follows.
| Aspects | Details |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | Hindi |
| Chapter Number | Chapter 10 |
| Chapter Name | भारति, जय, विजयकरे! |
| Book Name | गंगा |
| Book By | NCERT (National Council of Educational Research and Training) |
| Educational Resource Here | NCERT Solutions of Class 9 Hindi Chapter 10 for all exercises |
| More Questions Answers of This Subject | NCERT Solutions for Class 9 Hindi |
| Download Book Chapter | NCERT Book Class 9 Hindi |
| All Questions Answers For This Class | NCERT Solutions for Class 9 |
| Complete Solutions | NCERT Solutions |
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे! – FAQs
What are the NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे!?
They are the complete, step-by-step answers to all the exercise and in-text questions of Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे! from the NCERT Class 9 Hindi textbook गंगा, written by experts as per the latest NCERT syllabus.
How can I download the Class 9 Hindi Chapter 10 solutions PDF for free?
Open this page on aglasem, read the भारति, जय, विजयकरे! questions with answers, and click the “Download Solutions PDF” link. The Class 9 Hindi Chapter 10 NCERT Solutions PDF is completely free to download.
Are these NCERT Solutions as per the latest 2026-27 syllabus?
Yes. The NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 10 are based on the latest NCERT textbook गंगा and the current 2026-27 CBSE syllabus, so the questions and answers match what you study in class.
Where can I get NCERT Solutions for the other chapters of Class 9 Hindi?
You can find the answers to every chapter on the NCERT Solutions for Class 9 Hindi page, and solutions for every subject on the NCERT Solutions for Class 9 page.
How do NCERT Solutions help in exam preparation?
They show the correct method to solve each question, help you write answers the way they are expected in exams, let you check and correct your own work, and save revision time — which together improve your marks in Class 9 Hindi.
If you have any queries on NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे!, then please ask in the comments below.
