NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 2 क्या लिखूँ? provide clear, step-by-step answers to every exercise and in-text question from the chapter क्या लिखूँ? of the NCERT textbook गंगा. Prepared by subject experts as per the latest NCERT (CBSE) syllabus for 2026-27, these NCERT Solutions for Class 9 Hindi help you understand each concept, write exam-ready answers, and check your own solutions. You can read them online below or download the free Class 9 Hindi Chapter 2 question-answer PDF.
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 2 क्या लिखूँ?
- Class: Class 9
- Subject: Hindi
- Chapter: Chapter 2 – क्या लिखूँ?
- Textbook: गंगा (NCERT)
- Study material: NCERT Solutions – questions with answers, free PDF
These solutions answer all the exercise questions of Chapter 2 क्या लिखूँ? — including the in-text questions, short-answer and long-answer questions, and activities — with complete explanations so you can follow the method, not just the final answer. Read the full solutions below.
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Questions Covered in This Chapter
These NCERT Solutions answer all 34 questions of this chapter. The questions solved are:
- निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं? 1. “हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है? (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना (ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना (ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना (घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
- 2. “उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है… उसका उल्लास रहता है।” मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है? (क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना (ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना (ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
- 3. “तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल… वृद्धों के लिए अतीत सुखद…” यह तुलना किस पर आधारित है? (क) तर्क और भावना (ख) ज्ञान और शिक्षा (ग) परिश्रम और उपलब्धि (घ) अभिलाषा और अनुभव
- 4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है? (क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए (ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए (घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में
- 5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है? (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है। (ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं। (ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं। (घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।
- नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए— 1. निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
- 2. लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
- 3. नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?
- 4. निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
- 5. मानटेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
- शैली का अर्थ अभिव्यक्ति का ढंग होता है। निबंधकार विभिन्न प्रकार से विषय को प्रस्तुत करता है। इस पाठ में निबंध लेखन की प्रक्रियाओं के विषय में चर्चा की गई है। दिए गए आरेख को देखिए और इसके आधार पर एक निबंध लिखिए।
- अगर आपको निबंध लेखन का कोई और ढंग बेहतर लगता है तो उसे ऐसे ही आरेख से दर्शाइए और बताइए कि आपको वह ढंग क्यों बेहतर लगता है?
- पाठ में से चुनकर कुछ ऐसे और वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का अपने शब्दों में भाव-विस्तार कीजिए— “जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”
- “मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”
- “आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”
- “निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”
- इस निबंध में लेखक को दो विषयों (‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ और ‘समाज-सुधार’) पर निबंध लिखने थे। पिछली कक्षाओं में आपने भी बहुत से विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखे हैं। आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?
- निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।
- निबंध में उल्लिखित महान व्यक्तियों ने अपने द्वारा किए गए कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखाई। हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, विशेष आवश्यकता समूह (दिव्यांगजन) आदि के लिए कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
- आपको ‘समाज-सुधार’ करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।
- भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।
- ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ एक लोकोक्ति है। लोक में प्रचलित लोकप्रिय वाक्य या वाक्यांश को लोकोक्ति कहते हैं, जो किसी विशेष अर्थ या सीख को व्यक्त करता है। लोकोक्ति भाषा को समृद्ध करती है तथा विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में सहायता करती है। यह लोगों के अनुभव, विश्वास और मूल्यों को दर्शाती है। आपने यह लोकोक्ति भी सुनी होगी— ‘आम के आम गुठलियों के दाम’। अब आप इस लोकोक्ति और ‘जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास’ विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।
- “जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।” आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज़ का अनुभव भिन्न है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।
- निबंध में ऐसे अनेक सामासिक शब्द आए हैं। उन शब्दों को ढूँढ़कर उनका समास विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए। आपकी समझ के लिए एक उदाहरण तालिका में दिया गया है। (उदाहरण — सामासिक पद : निबंधशास्त्र, समास विग्रह : निबंध का शास्त्र, समास का नाम : तत्पुरुष समास) पाठ से अन्य उदाहरण चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
- निबंध से उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द ढूँढ़कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
- नीचे दिए गए वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए— • निबंध लिखना बड़ी ______ (कठिन…) की बात है। • वर्तमान से दोनों को ______ (…संतोष) होता है। • वाक्यों में कुछ ______ (…स्पष्ट…) भी चाहिए, क्योंकि यह ______ (…स्पष्ट…) या ______ (…बोध…) गांभीर्य ला देती है।
- नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाकर लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है। — मधुर, सुधार, सुंदर, गति, समाज। उदाहरण— मधुर → मधुरता, मधुरमय, सुमधुर
- इस पाठ में अनेक ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिनके अर्थ परस्पर मिलते-जुलते हैं। उदाहरण के लिए, विचार-मनन-चिंतन या सुहावने-मधुर-मनमोहक। पाठ में से ऐसे शब्द ढूँढ़िए तथा वाक्य प्रयोग के द्वारा उनके अर्थ स्पष्ट कीजिए।
- “खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला। आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा॥” पाठ में अमीर खुसरो की यह प्रसिद्ध अनमेली आई है। अनमेली एक प्रकार की हास्य-व्यंग्यपूर्ण काव्य शैली है जिसमें असंगत वाक्यों एवं विपरीत स्थितियों को जोड़कर मनोरंजन किया जाता है। अमीर खुसरो आम लोगों के मन को बहलाने व हँसाने के उद्देश्य से ऐसे प्रयोग किया करते थे। आप उनके द्वारा रचित अन्य अनमेलियों, मुकरियों व पहेलियों का शिक्षक की सहायता से ढूँढ़कर संकलन कीजिए।
- कक्षा में ‘युवा और वृद्ध— दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर’ पर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए। वाद-विवाद के नियमों के लिए आप कक्षा 7 और 8 की पाठ्यपुस्तक मल्हार के कुछ पाठों का अभ्यास देखकर अपनी प्रतियोगिता के नियम निर्धारित कर सकते हैं।
- “निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।” नीचे ‘निबंध’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है। — निबंध (हिंदी); निबंधः (संस्कृत); निबंध (पंजाबी); मजमून (उर्दू); मजमून (कश्मीरी); मज्मूनु, निबंधु (सिन्धी); निबंध (मराठी); निबंध (गुजराती); निबंध (कोंकणी); निबंध (नेपाली); निबंध, प्रबंध (बांग्ला); निबंध-रचना (असमिया); निबंध, वाड़्डू (मणिपुरी); प्रबंध, रचना (ओड़िआ); व्यासमु (तेलुगु); कट्टुरै (तमिल); उपन्यासम् (मलयालम); लेख, प्रबंध (कन्नड़)। — इनके अतिरिक्त यदि आप ‘निबंध’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
- उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए। (वाक्य — “निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।”)
- पाठ में आदर्श निबंध लेखन के विषय में विस्तार से बताया गया है। अब आप सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का लेख ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ पढ़िए—
- पाठ में आए साहित्यकारों बाणभट्ट, श्रीहर्ष, अमीर खुसरो, सेनापति, महात्मा गांधी, ए.जी. गार्डिनर, शेक्सपीयर, मानटेन के विषय में पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
Chapter at a Glance
- रचनाकार परिचय — पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म सन् 1894 में खैरागढ़, राजनंदगाँव, छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्यप्रदेश) में हुआ था और निधन सन् 1971 में। हिंदी साहित्य में उनकी ख्याति कुशल आलोचक, कवि, निबंधकार और हास्य-व्यंग्यकार के रूप में है, पर स्मरण वे विशेष रूप से अपने निबंधों के लिए किए जाते हैं। पंच-पात्र , पद्म-वन , प्रबंध पारिजात और कुछ बिखरे पन्ने उनके निबंध-संग्रह हैं; अश्रुदल और शतदल काव्य; झलमला और त्रिवेणी कहानी-संग्रह; विश्व साहित्य , हिंदी कहानी साहित्य , हिंदी साहित्य विमर्श तथा हिंदी उपन्यास साहित्य आलोचना-ग्रंथ हैं। उन्होंने सरस्वती और छाया पत्रिकाओं का संपादन भी किया।
- विधा — यह पाठ एक निबंध है, और वह भी आत्मपरक (व्यक्तिव्यंजक) निबंध — जिसमें लेखक स्वयं पाठक से बात करता हुआ चलता है, अपनी उलझन, अपनी हार और अपनी चतुराई, सब हँसते-हँसते सामने रख देता है। यही आत्मपरक शैली इस निबंध को जीवंत, आत्मीय और प्रभावशाली बनाती है।
- कथ्य — लेखक को दो घंटों में दो निबंध लिखने हैं। नमिता का आदेश है — ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ पर लिखिए; अमिता का आग्रह है — ‘समाज-सुधार’ पर लिखिए। दोनों विषय परीक्षा में आ चुके हैं, इसलिए आदर्श निबंध लिखकर उन्हें ‘निबंध-रचना का रहस्य’ भी समझाना है। यही ‘क्या लिखूँ?’ की छटपटाहट पूरे निबंध का ढाँचा बन जाती है।
- निबंध-शास्त्र की कसौटियाँ — लेखक पहले आचार्यों की सम्मति देखता है और एक-एक कसौटी पर स्वयं को खरा उतरने में असमर्थ पाता है — निबंध छोटा हो; उसके दो प्रधान अंग हैं सामग्री और शैली ; पहले रूपरेखा बनाइए; भाषा में प्रवाह हो, वाक्य छोटे-छोटे पर एक-दूसरे से बँधे हों; अलंकार, मुहावरे और लोकोक्तियाँ भी हों। हर कसौटी पर वह हल्की-सी चुटकी लेता है — “मैं तो हूँ मास्टर”, इसलिए वाक्य आधे पृष्ठ में समाप्त होने चाहिए, जैसे बाणभट्ट ने कादंबरी में लिखे; और भाषा में दुर्बोधता भी चाहिए, क्योंकि वही गांभीर्य लाती है — जैसे श्रीहर्ष और सेनापति ने जान-बूझकर की।
- मानटेन की पद्धति — अंग्रेजी निबंधकारों की दूसरी परंपरा का जन्मदाता मानटेन (मॉन्तेन) को माना जाता है। उन्होंने जो देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को लिख दिया। ऐसे निबंध मन की स्वच्छंद रचनाएँ होते हैं — उनमें न कवि की उदात्त कल्पना होती है, न आख्यायिका-लेखक की सूक्ष्म दृष्टि, न विज्ञों की तर्कपूर्ण विवेचना; उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति और सच्चे भावों की सच्ची अभिव्यक्ति होती है। लेखक यही रास्ता चुन लेता है।
- अमीर खुसरो की युक्ति — दो विषयों की समस्या का हल लेखक को अमीर खुसरो की कहानी से मिलता है। कुएँ पर चार स्त्रियों ने क्रमशः खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल पर कविता माँगी और खुसरो ने एक ही पद्य में चारों को तृप्त कर दिया — “खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला। आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा॥” लेखक भी दोनों विषयों को एक ही निबंध में मिला देता है — और यहीं से निबंध का दूसरा, सुंदर आधा भाग शुरू होता है।
- मूल संवेदना — ढोल दूर से सुहावना इसलिए लगता है कि उसकी कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती ; दूर बैठा व्यक्ति उसी ध्वनि में विवाहोत्सव, लज्जाशील नव-वधू और उसके प्रेम-उल्लास-संकोच-आशंका-विषाद का चित्र देख लेता है। इसी से लेखक जीवन का बड़ा सत्य निकालता है — “दूर रहने से हमें यथार्थता की कठोरता का अनुभव नहीं होता।” इसीलिए तरुण को भविष्य उज्ज्वल दिखता है और वृद्ध को अतीत सुखद; तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत-गौरव के संरक्षक ; दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं और इसीलिए वर्तमान सदा सुधारों का काल बना रहता है।
- समाज-सुधार का पक्ष — मनुष्य-जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल नहीं हुआ जब सुधारों की आवश्यकता न रही हो। बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक, राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी पर सुधारकों की गणना समाप्त नहीं होती — “सुधारकों का दल नगर-नगर और गाँव-गाँव में होता है।” न दोषों का अंत है और न सुधारों का ; जो कभी सुधार थे, वही आज दोष हो गए हैं — इसी से जीवन प्रगतिशील माना गया है। इस तरह दोनों विषय एक ही सूत्र में बँध जाते हैं।
- भाषा-शैली — बोलचाल जैसी सहज खड़ी बोली, आत्मकथात्मक ‘मैं’, बीच-बीच में प्रश्न पूछकर पाठक को साथ लेना, और सबसे बढ़कर सौम्य व्यंग्य — यही इस निबंध का शिल्प है। लेखक निबंध-शास्त्र का विरोध नहीं करता, बस उसे व्यवहार में उतारने की कठिनाई दिखाकर मुस्कुरा देता है। साहित्यिक-सांस्कृतिक संदर्भों (बाणभट्ट, श्रीहर्ष, सेनापति, खुसरो, शेक्सपीयर, गार्डिनर, मानटेन) का प्रयोग बोझ नहीं बनता, बात को खोलता है।
- अभ्यास क्या माँगता है — इस पाठ का अभ्यास केवल कथ्य नहीं पूछता। मेरे उत्तर मेरे तर्क में विकल्प के साथ तर्क भी देना है; विधा से संवाद में निबंध-लेखन की प्रक्रिया का आरेख पढ़कर स्वयं निबंध लिखना है और चार वाक्यों का भाव-विस्तार करना है; भाषा से संवाद में समास के छह भेद, उपसर्ग-प्रत्यय और पर्यायवाची शब्द-समूह साधने हैं; सृजन में लोकोक्ति-आधारित लेख और डायरी लिखनी है; और झरोखे से में अज्ञेय का ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ पढ़कर उसी प्रश्न को दूसरी दिशा से देखना है।
How to Download NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 2 PDF
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NCERT Solutions for Class 9 Hindi – All Chapters
There are more chapters to study besides क्या लिखूँ? in Hindi. Here are the NCERT Solutions for all chapters of Class 9 Hindi.
- Chapter 1 दो बैलों की कथा
- Chapter 2 क्या लिखूँ?
- Chapter 3 संवादहीन
- Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं
- Chapter 5 आखिरी चट्टान तक
- Chapter 6 रीढ़ की हड्डी
- Chapter 7 मैं और मेरा देश
- Chapter 8 पद
- Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
- Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे!
- Chapter 11 झाँसी की रानी
- Chapter 12 घर की याद
NCERT Solutions for Class 9 – All Subjects
Just like Chapter 2 of Hindi, you can get the exercise questions with answers for every other subject of Class 9. Here are the NCERT Solutions for all subjects of Class 9.
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 2 – An Overview
The key highlights of this study material are as follows.
| Aspects | Details |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | Hindi |
| Chapter Number | Chapter 2 |
| Chapter Name | क्या लिखूँ? |
| Book Name | गंगा |
| Book By | NCERT (National Council of Educational Research and Training) |
| Educational Resource Here | NCERT Solutions of Class 9 Hindi Chapter 2 for all exercises |
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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 2 क्या लिखूँ? – FAQs
What are the NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 2 क्या लिखूँ??
They are the complete, step-by-step answers to all the exercise and in-text questions of Chapter 2 क्या लिखूँ? from the NCERT Class 9 Hindi textbook गंगा, written by experts as per the latest NCERT syllabus.
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Are these NCERT Solutions as per the latest 2026-27 syllabus?
Yes. The NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 2 are based on the latest NCERT textbook गंगा and the current 2026-27 CBSE syllabus, so the questions and answers match what you study in class.
Where can I get NCERT Solutions for the other chapters of Class 9 Hindi?
You can find the answers to every chapter on the NCERT Solutions for Class 9 Hindi page, and solutions for every subject on the NCERT Solutions for Class 9 page.
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